19 Oct अर्मेनिया में जैव विविधता संरक्षण पर क्या हुआ? जानिए मुख्य बिंदु
✎ कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (2022) का लक्ष्य 2030 तक 30 बाय 30 के माध्यम से भूमि और समुद्र के 30 प्रतिशत संरक्षण तथा प्रति वर्ष 200 अरब डॉलर के वित्त को सुनिश्चित करना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण (जैव विविधता संरक्षण, संरक्षित क्षेत्र, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ) | GS Paper II — अंतरराष्ट्रीय संबंध (बहुपक्षीय पर्यावरण समझौते, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका) | GS Paper III — अर्थव्यवस्था (पर्यावरणीय वित्त, हानिकारक सब्सिडी में कमी, जैव विविधता वित्त)
- Prelims: जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (CBD), कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (KMGBF), 30 बाय 30 लक्ष्य (30×30), कैली फंड (Cali Fund) और डिजिटल अनुक्रम सूचना (DSI), नागोया प्रोटोकॉल (Nagoya Protocol) और लाभ-साझेदारी, कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल (Cartagena Protocol on Biosafety), IUCN रेड लिस्ट और संकटग्रस्त प्रजातियों का वर्गीकरण, वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और वैश्विक जैव विविधता ढांचा निधि (GBFF)
- Essay: जैव विविधता संरक्षण: प्रतिबद्धताओं से जमीनी परिणामों तक की यात्रा, पर्यावरणीय न्याय और विकासशील देशों के लिए जैव विविधता वित्त
त्वरित पुनरावृत्ति: कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (2022) का लक्ष्य 2030 तक 30 बाय 30 के माध्यम से भूमि और समुद्र के 30 प्रतिशत संरक्षण तथा प्रति वर्ष 200 अरब डॉलर के वित्त को सुनिश्चित करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (UN Biodiversity Conference) का 17वाँ पक्षकार सम्मेलन (COP17) अक्टूबर 2026 में आर्मेनिया की राजधानी यरेवन में आयोजित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ष 2022 में अपनाए गए कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे की अब तक की प्रगति का मूल्यांकन करना है। कन्वेंशन की कार्यकारी सचिव एस्ट्रिड शोमाकर (Astrid Schomaker) ने कहा कि जैव विविधता की हानि से अरबों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है और अगले दो सप्ताह की वार्ता में निर्णायक प्रगति आवश्यक है। इस सम्मेलन में पहली बार वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रगति की समीक्षा होगी, जिसमें देश अपनी राष्ट्रीय रिपोर्ट और संशोधित राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीतियाँ व कार्य योजनाएँ प्रस्तुत करेंगे। वित्त, क्रियान्वयन के अंतर और कैली फंड के संचालन जैसे मुद्दे भी प्रमुख एजेंडा में हैं।
पृष्ठभूमि
- जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (CBD) वर्ष 1992 में रियो डी जेनेरो में हुए पृथ्वी शिखर सम्मेलन में अपनाया गया था और यह वर्ष 1993 से प्रभावी हुआ। इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं: जैव विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत उपयोग, तथा आनुवंशिक संसाधनों से उत्पन्न लाभों का न्यायसंगत और समान बँटवारा।
- वर्ष 2010 के नागोया प्रोटोकॉल ने आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing) के नियम स्पष्ट किए। भारत इसका पक्षकार है और यहाँ जैव विविधता अधिनियम, 2002 इसी उद्देश्य से लागू है।
- वर्ष 2010 के आइची लक्ष्य (Aichi Targets) 2020 में समाप्त हो गए। उनके स्थान पर दिसंबर 2022 में मॉन्ट्रियल में COP15 के दूसरे चरण में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा अपनाया गया, जिसमें 23 लक्ष्य और 4 व्यापक लक्ष्य (Goals) शामिल हैं।
- वर्ष 2010 के बाद जैव विविधता की वैश्विक स्थिति में गिरावट जारी रही। इसी कारण हानि के प्रमुख कारकों, जैसे भूमि और समुद्र उपयोग में बदलाव, अति-दोहन, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और आक्रामक विदेशी प्रजातियों पर नियंत्रण पर बल दिया गया है।
- कैली फंड की स्थापना CBD के अंतर्गत डिजिटल अनुक्रम सूचना के उपयोग से लाभ-साझेदारी के लिए की गई है। इसमें आनुवंशिक आँकड़ों का उपयोग करने वाली कंपनियों से स्वैच्छिक योगदान की व्यवस्था है।
- भारत में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority) जैव संसाधनों तक पहुँच और लाभ-साझेदारी से संबंधित नियमन करता है, जबकि राज्य जैव विविधता बोर्ड और जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ स्थानीय स्तर पर कार्य करती हैं।
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा क्या है?
- यह जैव विविधता संरक्षण के लिए वर्ष 2030 तक के लिए अपनाई गई वैश्विक रूपरेखा है, जिसे दिसंबर 2022 में COP15 में स्वीकार किया गया। इसमें 23 कार्यवाही-उन्मुख लक्ष्य और 4 दीर्घकालिक लक्ष्य शामिल हैं।
- प्रमुख लक्ष्य 3 है, जिसे ’30 बाय 30′ कहा जाता है। इसके अंतर्गत वर्ष 2030 तक भूमि और समुद्री क्षेत्र के 30 प्रतिशत भाग के संरक्षण का लक्ष्य रखा गया है।
- लक्ष्य 2 के अंतर्गत क्षरित पारिस्थितिकी तंत्रों के 30 प्रतिशत भाग की पुनर्स्थापना का लक्ष्य है।
- लक्ष्य 18 के अंतर्गत जैव विविधता के लिए हानिकारक प्रोत्साहनों और सब्सिडी को वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष 500 अरब डॉलर तक कम करने का लक्ष्य है।
- लक्ष्य 19 के अंतर्गत सभी स्रोतों से वर्ष 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 200 अरब डॉलर जुटाने और इसमें कम से कम 30 अरब डॉलर अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता वित्त देने का प्रावधान है।
- इस ढांचे के क्रियान्वयन की निगरानी और समीक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रगति का मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय रिपोर्टें आधार बनती हैं।
- वैश्विक जैव विविधता ढांचा निधि (GBFF) वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) के अंतर्गत इस ढांचे के वित्तपोषण का एक प्रमुख माध्यम है।
- IUCN रेड लिस्ट प्रजातियों के संकट की स्थिति का वैज्ञानिक वर्गीकरण करती है। उदाहरण के लिए, युगांडा के बविंडी राष्ट्रीय उद्यान में पर्वतीय गोरिल्ला की संख्या बढ़कर 400 से अधिक हो गई है, और वर्ष 2018 में इसकी स्थिति गंभीर संकटग्रस्त (Critically Endangered) से संकटग्रस्त (Endangered) की गई।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework) | वर्ष 2022 में अपनाया गया यह वैश्विक समझौता है, जिसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता की हानि को रोकना और उसे उलटने की दिशा में ठोस प्रगति करना है। इसे जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UN Convention on Biological Diversity – CBD) के अंतर्गत अपनाया गया। |
| 30 बाय 30 लक्ष्य (30 by 30 Target) | 2030 तक भूमि और समुद्री क्षेत्र के कम से कम 30 प्रतिशत भाग के संरक्षण का लक्ष्य। यह सतत विकास लक्ष्यों की समय-सीमा 2030 से जुड़ा है, इसलिए इसे संरक्षण और विकास दोनों की नीति के बीच संतुलन की कसौटी माना जाता है। |
| पक्षकार सम्मेलन, COP17 (Conference of Parties) | यरेवन (आर्मेनिया) में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य ढांचे की प्रगति का मूल्यांकन करना है। यह CBD के निर्णय-निर्माण का सर्वोच्च मंच है, जहाँ पक्षकार देश नीतिगत निर्णय लेते हैं। |
| वैश्विक समीक्षा (Global Review) | ढांचे के अंतर्गत पहली बार सामूहिक प्रगति की वैश्विक समीक्षा होगी। देश अपनी राष्ट्रीय रिपोर्ट और संशोधित राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति एवं कार्य योजनाएँ प्रस्तुत करेंगे। |
| वित्तीय लक्ष्य | 2030 तक सभी स्रोतों से कम से कम 200 अरब अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष जुटाने का लक्ष्य है, जिसमें कम से कम 30 अरब अमेरिकी डॉलर अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता वित्त होगा। |
| कैली फंड (Cali Fund) | CBD के अंतर्गत स्थापित वैश्विक वित्तीय तंत्र है, जिसके माध्यम से डिजिटल अनुक्रम सूचना (Digital Sequence Information – DSI) के उपयोग से होने वाले लाभ में साझेदारी की व्यवस्था की जाती है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- जैव विविधता की हानि पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को सीधे प्रभावित करती है। भूमि उपयोग में बदलाव, प्रजातियों के अनुचित दोहन, प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियों और जलवायु परिवर्तन को इसके मुख्य चालक माना गया है।
- बवुइंडी इम्पेनेट्रेबल राष्ट्रीय उद्यान (युगांडा) में पर्वतीय गोरिल्ला की संख्या 400 से अधिक होना संरक्षण प्रयासों की सफलता का उदाहरण है, जो दर्शाता है कि लक्षित संरक्षण से लुप्तप्राय प्रजातियों की स्थिति सुधर सकती है।
आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
- जैव विविधता पर निर्भर आजीविका वाले लाखों लोगों की आय और खाद्य सुरक्षा इससे जुड़ी है। इसलिए इसे विकास का आधार माना जाता है, केवल संरक्षण का विषय नहीं।
- स्वदेशी लोगों, स्थानीय समुदायों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को निर्णय-प्रक्रिया में शामिल करने पर बल दिया गया है, ताकि पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय प्रबंधन का लाभ नीतियों तक पहुँचे।
कूटनीतिक एवं शासन-संबंधी महत्व
- यह बहुपक्षीय पर्यावरण शासन की परीक्षा है, क्योंकि ढांचे की सफलता इस पर निर्भर है कि राष्ट्रीय योजनाएँ अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप बनें और वित्त उपलब्ध हो।
- वर्ष 2022 में 196 देशों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन की जवाबदेही साझा है, इसलिए निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग की व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है।
चुनौतियाँ
1. कार्यान्वयन अंतर (Implementation Gap)
- राष्ट्रीय लक्ष्यों और योजनाओं को जमीनी स्तर पर मापनीय परिणामों में बदलना सबसे बड़ी चुनौती है।
- प्रतिबद्धता और कार्यान्वयन के बीच का अंतर तभी घटेगा जब नीति, प्रशासनिक क्षमता और निगरानी तंत्र एक साथ मजबूत हों।
यूपीएससी लिंक: जैव विविधता संरक्षण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौते और भारत की प्रतिबद्धताएँ (GS-2, GS-3 पर्यावरण)
2. वित्तीय संसाधनों की कमी
- 2030 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष का लक्ष्य विकासशील देशों के लिए बड़ा वित्तीय बोझ है, विशेषकर जब अन्य विकास आवश्यकताएँ भी प्रतिस्पर्धा में हों।
- अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता वित्त का न्यूनतम 30 अरब अमेरिकी डॉलर का हिस्सा सुनिश्चित करना एक अलग चुनौती है, क्योंकि दाता देशों की प्रतिबद्धताएँ अक्सर उतार-चढ़ाव वाली होती हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएँ और पर्यावरणीय वित्त (GS-2 अंतरराष्ट्रीय संबंध, GS-3 अर्थव्यवस्था)
3. आनुवंशिक संसाधनों से लाभ-साझेदारी
- डिजिटल अनुक्रम सूचना के उपयोग से होने वाले लाभ का न्यायसंगत बँटवारा अब भी विवादित विषय है, क्योंकि इसका उपयोग अक्सर सीमाओं के पार होता है।
- कैली फंड के माध्यम से योगदान की व्यवस्था को प्रभावी और पारदर्शी बनाना, तथा उसे स्रोत देशों और स्थानीय समुदायों तक पहुँचाना, चुनौतीपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: नागोया प्रोटोकॉल और लाभ-साझेदारी की व्यवस्था (GS-2 अंतरराष्ट्रीय समझौते, GS-3 जैव प्रौद्योगिकी)
4. प्रमुख चालकों पर नियंत्रण
- भूमि और समुद्री उपयोग में परिवर्तन, प्रदूषण तथा आक्रामक प्रजातियों पर नियंत्रण अलग-अलग विभागों और स्तरों के समन्वय पर निर्भर है।
- जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता की नीतियों में तालमेल न होने से दोहरे लक्ष्य अक्सर टकराते हैं, जैसे विकास परियोजनाओं के लिए भूमि परिवर्तन।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का समन्वय (GS-3 पर्यावरण, GS-2 शासन)
5. स्थानीय समुदायों की भागीदारी और अधिकार
- स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों की भूमिका को निर्णय-प्रक्रिया में वास्तविक स्थान देना, केवल औपचारिक परामर्श से आगे जाना, एक प्रशासनिक चुनौती है।
- वन और भूमि अधिकारों की स्पष्टता के बिना संरक्षण लक्ष्य पूरे करना कठिन होता है, क्योंकि स्थानीय लोगों का सहयोग इसकी आधारशिला है।
यूपीएससी लिंक: जनजातीय अधिकार और वन संरक्षण का संबंध (GS-2 सामाजिक न्याय, GS-3 पर्यावरण)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| कार्यान्वयन अंतर | राष्ट्रीय योजनाओं के लक्ष्य जमीनी परिणामों में नहीं बदल पाते, जिससे 2030 के लक्ष्य पूरे होने की संभावना घटती है। |
| वित्तीय कमी | 200 अरब अमेरिकी डॉलर प्रतिवर्ष और 30 अरब अमेरिकी डॉलर अंतरराष्ट्रीय वित्त का लक्ष्य विकासशील देशों की क्षमता से बड़ा हो सकता है। |
| आनुवंशिक संसाधनों का लाभ-बँटवारा | डिजिटल अनुक्रम सूचना के उपयोग से होने वाले लाभ का न्यायसंगत वितरण और कैली फंड का प्रभावी संचालन अब भी अनिश्चित है। |
| संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार | 30 प्रतिशत भूमि और समुद्री क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए भूमि-उपयोग के विरोधी हितों में संतुलन बनाना कठिन है। |
| प्रमुख चालकों का नियंत्रण | प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियाँ और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव एक साथ बढ़ रहे हैं, जिससे अलग-अलग उपाय अपर्याप्त सिद्ध हो सकते हैं। |
| स्थानीय समुदायों की भागीदारी | स्वदेशी लोगों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी औपचारिक रह जाने से नीतियों का सामाजिक आधार कमजोर पड़ता है। |
आगे की राह
- राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजनाओं को कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ढांचे के लक्ष्यों से स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लक्ष्यों में तालमेल बना रहे।
- मापनीय संकेतकों और नियमित निगरानी तंत्र के माध्यम से प्रगति का आकलन किया जाए, और परिणामों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित हो।
- वित्तीय संसाधनों को सार्वजनिक, निजी और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के मिश्रण से जुटाया जाए, तथा जैव विविधता को विकास नीतियों के मुख्य निवेश में शामिल किया जाए।
- संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार में स्थानीय समुदायों के अधिकारों और आजीविका की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
- डिजिटल अनुक्रम सूचना से जुड़े लाभ-साझेदारी तंत्र को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि स्रोत देशों और समुदायों को उचित लाभ मिल सके।
- भूमि, जल और समुद्री उपयोग की योजना बनाते समय जैव विविधता, जलवायु और विकास के लक्ष्यों का समेकित मूल्यांकन किया जाए।
- निजी क्षेत्र और वित्तीय संस्थाओं की भूमिका बढ़ाने के लिए जैव विविधता से जुड़े जोखिम और प्रकटीकरण के मानक स्पष्ट किए जाएँ।
- शिक्षा और जन-जागरूकता के माध्यम से युवाओं और नागरिकों को संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जैव विविधता संरक्षण · कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क · 30×30 लक्ष्य · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · जैव विविधता हानि के चालक · स्वदेशी समुदाय · अंतर्राष्ट्रीय सहयोग · राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति · वित्तपोषण तंत्र · COP17
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण, वनों और वन्यजीवों के संरक्षण का राज्य का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(छ): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार का मौलिक कर्तव्य
- अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों को लागू करने की संसद की शक्ति
अवधारणा प्रवाह
जैव विविधता की हानि के मुख्य चालक (भूमि उपयोग परिवर्तन, अनुचित दोहन, प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियाँ, जलवायु परिवर्तन) सक्रिय होते हैं। → कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (2022) 30 बाय 30 लक्ष्य और वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करता है, जिसे 196 देशों ने स्वीकार किया। → राष्ट्रीय रिपोर्ट और संशोधित राष्ट्रीय रणनीतियाँ तैयार की जाती हैं, जिनके आधार पर पक्षकार सम्मेलन (COP17) में पहली वैश्विक समीक्षा होती है। → समीक्षा में कार्यान्वयन अंतर, वित्तीय कमी और कैली फंड जैसे लाभ-साझेदारी तंत्र की स्थिति का मूल्यांकन होता है। → निष्कर्षों के आधार पर वित्त, निगरानी और जवाबदेही के उपायों को सुदृढ़ किया जाता है, ताकि 2030 तक जैव विविधता संरक्षण के लक्ष्य प्राप्त हो सकें।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसे 2022 में अपनाया गया था।
2. इसका एक प्रमुख लक्ष्य ’30×30′ है, जिसका अर्थ है 2030 तक 30 प्रतिशत भूमि और समुद्र का संरक्षण करना।
3. यह संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ संरेखित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क को 2022 में अपनाया गया था। कथन 2 भी सही है क्योंकि ’30×30′ लक्ष्य 2030 तक 30 प्रतिशत भूमि और समुद्र के संरक्षण का प्रावधान करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि यह फ्रेमवर्क संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ संरेखित है, जिनकी समय-सीमा भी 2030 है।
Q2. जैव विविधता हानि के प्रमुख चालकों में निम्नलिखित में से कौन-कौन शामिल हैं?
1. भूमि और समुद्र के उपयोग में परिवर्तन
2. प्रजातियों का अस्थिर शोषण
3. जलवायु परिवर्तन
4. प्रदूषण
5. आक्रामक प्रजातियाँ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2, 3, 4 और 5
- केवल 1, 3, 4 और 5
- 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: 1, 2, 3, 4 और 5 — जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UN Convention on Biodiversity) के लक्ष्यों में जैव विविधता हानि के मुख्य चालकों से निपटना शामिल है, जिनमें भूमि और समुद्र के उपयोग में परिवर्तन, प्रजातियों का अस्थिर शोषण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और आक्रामक प्रजातियाँ शामिल हैं। अतः सभी पाँचों कारक सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ जैव विविधता के संरक्षण में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क के महत्व का परीक्षण कीजिए। साथ ही, इसके प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: एक आदर्श उत्तर में निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
1. **परिचय:** जैव विविधता के महत्व और वर्तमान में इसके समक्ष मौजूद खतरों का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क का महत्व:**
* **ऐतिहासिक संदर्भ:** 2022 में अपनाए जाने का उल्लेख।
* **प्रमुख लक्ष्य:** ’30×30′ लक्ष्य (2030 तक 30% भूमि और समुद्र का संरक्षण) का विस्तार।
* **अन्य लक्ष्य:** जैव विविधता हानि के चालकों (भूमि उपयोग परिवर्तन, अस्थिर शोषण, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, आक्रामक प्रजातियाँ) से निपटना।
* **SDGs से संबंध:** सतत विकास लक्ष्यों के साथ संरेखण।
* **वैश्विक प्रतिबद्धता:** 196 देशों की प्रतिबद्धता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का आधार।
3. **प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ:**
* **कार्यान्वयन अंतराल (Implementation Gap):** राष्ट्रीय लक्ष्यों को मापने योग्य परिणामों में बदलने में कठिनाई।
* **वित्तपोषण:** 2030 तक सभी स्रोतों से प्रति वर्ष कम से कम 200 बिलियन डॉलर, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता वित्त में कम से कम 30 बिलियन डॉलर की आवश्यकता को पूरा करना। कैली फंड जैसे तंत्रों को प्रभावी बनाना।
* **रिपोर्टिंग और जवाबदेही:** राष्ट्रीय रिपोर्टों और अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीतियों एवं कार्य योजनाओं के माध्यम से प्रगति की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
* **हितधारकों की भागीदारी:** स्वदेशी समुदायों, स्थानीय समुदायों, महिलाओं, युवाओं, शहरों, व्यवसायों और वित्तीय संस्थानों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करना।
* **राजनीतिक इच्छाशक्ति और समन्वय:** सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के बीच समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता।
4. **निष्कर्ष:** इन चुनौतियों का समाधान करने और जैव विविधता संरक्षण के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल।
स्रोत: news.un.org
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best geography optional coaching
- Best geography optional coaching
- Best geography optional teacher
- Best geography optional teacher
- Nationwide Digital Life Certificate Campaign 5 for Pensioners: Key Details - October 30, 2026
- भारत-ब्रुनेई संयुक्त आर्थिक आयोग: व्यापार सहयोग बढ़ाने पर जोर - October 30, 2026
- IDBI Bank Strategic Disinvestment: Process & Flexibility Explained for UPSC - October 30, 2026

No Comments