07 Oct आरबीआई के रुख बदलने के पीछे क्या है मूल कारण? जानिए अर्थव्यवस्था पर असर

✎ मौद्रिक नीति समिति का प्राथमिक लक्ष्य संवृद्धि को बनाए रखते हुए मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। | GS Paper III — सरकारी बजट।
- Prelims: मौद्रिक नीति समिति (MPC), रेपो दर (Repo Rate), मुद्रास्फीति (Inflation), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), राजकोषीय स्थिरता (Fiscal Stability), आपूर्ति आघात (Supply Shocks)
- Essay: मूल्य स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि के बीच संतुलन, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक चुनौतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: मौद्रिक नीति समिति का प्राथमिक लक्ष्य संवृद्धि को बनाए रखते हुए मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी अक्टूबर समीक्षा में नीतिगत दरों में वृद्धि की है। यह निर्णय मुख्य रूप से बढ़ती मुद्रास्फीति के जोखिमों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच मूल्य स्थिरता (Price Stability) सुनिश्चित करने की आवश्यकता को दर्शाता है। यह कदम घरेलू आर्थिक संवृद्धि और मुद्रास्फीति की गतिशीलता के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रमों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
पृष्ठभूमि
- इस वर्ष अप्रत्याशित झटकों और अनिश्चितताओं का एक असामान्य संयोजन देखा गया है, जिसमें पश्चिम एशिया में संघर्ष और टैरिफ-संबंधी अशांति शामिल है।
- इन चुनौतियों के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था उल्लेखनीय रूप से लचीली बनी हुई है, और संवृद्धि मजबूत बनी हुई है, जबकि मुख्य मुद्रास्फीति (Core Inflation) अपेक्षाकृत नियंत्रित रही है।
- हालांकि, अगस्त की MPC समीक्षा के बाद से मुद्रास्फीति के लिए ऊपरी जोखिम (Upside Risks) अधिक स्पष्ट हो गए हैं, जिससे नीतिगत पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस हुई।
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण, घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव डाल रही है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों चैनलों से मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है।
- खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) भी चिंता का एक प्रमुख स्रोत है, क्योंकि 2026 का मानसून लंबी अवधि के औसत से 13 प्रतिशत कम वर्षा के साथ समाप्त हुआ है, जिससे खरीफ और रबी दोनों फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- वैश्विक स्तर पर, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) में तेज वृद्धि हुई है, जो लगातार मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्थिरता (Fiscal Sustainability) पर बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है।
मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) क्या है?
- MPC भारतीय रिज़र्व बैंक की एक महत्वपूर्ण समिति है जो भारत में मौद्रिक नीति निर्धारित करती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य संवृद्धि के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है।
- समिति में छह सदस्य होते हैं: तीन RBI से और तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त।
- RBI गवर्नर MPC के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
- MPC उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) आधारित मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत (+/- 2 प्रतिशत) के लक्ष्य के भीतर रखने का प्रयास करती है।
- यह रेपो दर (Repo Rate), रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate), सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility – MSF) दर और बैंक दर (Bank Rate) जैसे नीतिगत साधनों का उपयोग करती है।
- प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम चार बार MPC की बैठक होती है, और प्रत्येक बैठक के बाद इसके निर्णय सार्वजनिक किए जाते हैं।
- MPC के निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं, और टाई होने की स्थिति में RBI गवर्नर के पास निर्णायक मत होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| RBI की नीतिगत दर में वृद्धि | मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने और मूल्य स्थिरता बनाए रखने का प्रयास। |
| वैश्विक घटनाएँ (पश्चिम एशिया संघर्ष) | कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभाव। |
| घरेलू आर्थिक लचीलापन | वैश्विक झटकों के बावजूद भारत की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) का मजबूत रहना। |
| खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि | मानसून की अनियमितता और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव। |
| अल नीनो (El Niño) की स्थिति | कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव और खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ाने की क्षमता। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- मुद्रास्फीति पर नियंत्रण भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, विशेषकर कमजोर वर्गों के लिए।
- उच्च ब्याज दरें निवेश और उपभोग को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे आर्थिक संवृद्धि की गति धीमी हो सकती है।
- वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भारत के आयात बिल और राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर सीधा प्रभाव डालती हैं।
सामाजिक महत्व
- खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें आम आदमी की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को कम करती हैं और जीवन-यापन की लागत बढ़ाती हैं।
- मुद्रास्फीति गरीबों और निश्चित आय वर्ग के लोगों को असमान रूप से प्रभावित करती है, जिससे आय असमानता बढ़ सकती है।
नीतिगत महत्व
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee – MPC) का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जबकि संवृद्धि को ध्यान में रखना भी आवश्यक है।
- सरकार और RBI के बीच समन्वय, विशेषकर आपूर्ति-पक्ष के झटकों से निपटने के लिए, मुद्रास्फीति प्रबंधन में महत्वपूर्ण है।
चुनौतियाँ
1. वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतें
- पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर बनाए हुए हैं।
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें घरेलू ईंधन की कीमतों को बढ़ाती हैं, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मुद्रास्फीति बढ़ती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
2. खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव
- अनियमित मानसून, वर्षा का असमान वितरण और अल नीनो की स्थिति कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रही है।
- कमजोर खरीफ और रबी उत्पादन से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ेंगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: कृषि
3. आपूर्ति-पक्ष के झटके
- लगातार आपूर्ति-पक्ष के झटके, जैसे कि वैश्विक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और मौसमी व्यवधान, मुद्रास्फीति को बढ़ा रहे हैं।
- इन झटकों का प्रबंधन मौद्रिक नीति के दायरे से बाहर होता है और इसके लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
4. राजकोषीय स्थिरता पर दबाव
- उच्च वैश्विक बांड प्रतिफल और बढ़ती ब्याज दरें सरकार के ऋण की लागत को बढ़ा सकती हैं।
- राजकोषीय स्थिरता बनाए रखना और साथ ही संवृद्धि को समर्थन देना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कच्चे तेल की कीमतें | भू-राजनीतिक तनाव के कारण $88-93 प्रति बैरल तक बढ़ने का अनुमान, जिससे घरेलू ईंधन कीमतें बढ़ेंगी। |
| मानसून की अनियमितता | दीर्घकालिक औसत से 13 प्रतिशत कम वर्षा, 42 प्रतिशत से अधिक जिलों में कमी, जिससे खरीफ और रबी उत्पादन प्रभावित होगा। |
| अल नीनो की स्थिति | तीव्र होती अल नीनो की स्थिति कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, विशेषकर कपास, अरहर और बाजरा जैसी फसलों पर। |
| वैश्विक बांड प्रतिफल | उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में बांड प्रतिफल में तेज वृद्धि, भारत पर भी दबाव डाल रही है, जिससे पूंजी बहिर्वाह का जोखिम है। |
| कोर मुद्रास्फीति | हालांकि अभी तक नियंत्रित है, लेकिन आपूर्ति-पक्ष के झटके और मजबूत मांग के कारण इसके बढ़ने का जोखिम है। |
आगे की राह
- आपूर्ति-पक्ष के झटकों को कम करने के लिए कृषि उत्पादकता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित करना।
- कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना।
- खाद्य बफर स्टॉक का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करना और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए समय पर हस्तक्षेप करना।
- राजकोषीय विवेक बनाए रखना और सरकारी खर्च को प्राथमिकता देना ताकि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखा जा सके।
- मौद्रिक नीति को वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप लचीला बनाए रखना, ताकि मूल्य स्थिरता और संवृद्धि के बीच संतुलन बना रहे।
- किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने के लिए फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मौद्रिक नीति समिति (MPC) · मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण · रेपो दर · मूल्य स्थिरता · आपूर्ति-पक्ष के झटके · राजकोषीय स्थिरता · वैश्विक आर्थिक विकास · खाद्य मुद्रास्फीति · कच्चे तेल की कीमतें · अल नीनो · भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता · आरबीआई की भूमिका
अवधारणा प्रवाह
पश्चिम एशिया संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव → कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि → घरेलू ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि → उत्पादन लागत में वृद्धि और खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव → RBI द्वारा नीतिगत दर में वृद्धि और मौद्रिक नीति का सख्त होना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का प्राथमिक उद्देश्य आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देना है।
2. MPC में छह सदस्य होते हैं, जिनमें से तीन RBI से और तीन केंद्र सरकार द्वारा नामित होते हैं।
3. रेपो दर में वृद्धि से अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति कम होने की संभावना होती है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। MPC का प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जबकि संवृद्धि को ध्यान में रखना एक द्वितीयक उद्देश्य है। कथन 2 सही है। MPC में छह सदस्य होते हैं – RBI गवर्नर (पदेन अध्यक्ष), डिप्टी गवर्नर (मौद्रिक नीति के प्रभारी), एक अधिकारी (RBI बोर्ड द्वारा नामित), और केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन सदस्य। कथन 3 सही है। रेपो दर में वृद्धि से बैंकों के लिए RBI से उधार लेना महंगा हो जाता है, जिससे वे आगे ऋण महंगा करते हैं, जिससे मुद्रा आपूर्ति कम होती है।
Q2. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के भारत में मुद्रास्फीति पर क्या प्रभाव हो सकते हैं?
1. परिवहन लागत में वृद्धि।
2. विनिर्माण लागत में कमी।
3. घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि।
4. खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 1, 3 और 4
- केवल 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 3 और 4 — कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन लागत बढ़ती है (कथन 1 सही), जिससे वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं। यह विनिर्माण लागत को बढ़ाती है, न कि कम करती है (कथन 2 गलत)। इससे घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं (कथन 3 सही)। उच्च ईंधन लागत से कृषि उत्पादों के परिवहन और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है (कथन 4 सही)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) मूल्य स्थिरता बनाए रखने में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है? वर्तमान वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के संदर्भ में इसकी हालिया नीतिगत कार्रवाइयों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मौद्रिक नीति समिति (MPC) का संक्षिप्त परिचय, इसकी स्थापना (RBI अधिनियम, 1934 में संशोधन द्वारा) और प्राथमिक उद्देश्य (मूल्य स्थिरता बनाए रखना) का उल्लेख।
2. **MPC की भूमिका:**
* मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (वर्तमान में 4% +/- 2%)।
* नीतिगत दरों (रेपो, रिवर्स रेपो, MSF) का निर्धारण।
* मुद्रा आपूर्ति और ऋण उपलब्धता को विनियमित करना।
* मुद्रास्फीति प्रत्याशाओं (inflation expectations) को प्रबंधित करना।
3. **वर्तमान वैश्विक और घरेलू चुनौतियाँ:**
* **वैश्विक:** पश्चिम एशिया संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान।
* **घरेलू:** खाद्य मुद्रास्फीति (मानसून की कमी, अल नीनो प्रभाव), आपूर्ति-पक्ष के झटके, मजबूत मांग के दबाव।
4. **हालिया नीतिगत कार्रवाइयों का आलोचनात्मक परीक्षण:**
* **रेपो दर में वृद्धि/नीतिगत रुख में बदलाव:** मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए दर वृद्धि का औचित्य।
* **मूल्य स्थिरता पर जोर:** RBI का यह मानना कि मजबूत संवृद्धि के साथ आपूर्ति-जनित मूल्य दबावों से मुद्रास्फीति व्यापक हो सकती है।
* **सकारात्मक प्रभाव:** मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, रुपये के मूल्य में स्थिरता, विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करना।
* **संभावित नकारात्मक प्रभाव/आलोचना:** संवृद्धि पर संभावित प्रभाव, ऋण महंगा होना, निवेश में कमी।
* **संतुलनकारी कार्य:** संवृद्धि और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन साधने का प्रयास।
5. **निष्कर्ष:** MPC की भूमिका का महत्व, भविष्य की चुनौतियाँ और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसके निहितार्थों पर संतुलित दृष्टिकोण।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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