आरबीआई ने 16 अक्टूबर से बैंकों के लिए दैनिक नकदी आरक्षित अनुपात बढ़ाया: जानिए पूरा विवरण

आरबीआई ने 16 अक्टूबर से बैंकों के लिए दैनिक नकदी आरक्षित अनुपात बढ़ाया: जानिए पूरा विवरण

आरबीआई ने 16 अक्टूबर से बैंकों के लिए दैनिक नकदी आरक्षित अनुपात बढ़ाया: जानिए पूरा विवरण

CRR वृद्धि प्रक्रियातरलता अधिशेष3.88 लाख करोड़RBI समीक्षामुद्रास्फीतिCRR वृद्धि90% से 99%
CRR वृद्धि प्रक्रिया

✎ नकद आरक्षित अनुपात (CRR) वह न्यूनतम राशि है जो बैंकों को अपनी कुल जमा का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद के रूप में अनिवार्य रूप से रखना होता है, जिसका उपयोग RBI अर्थव्यवस्था में तरलता और मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए…

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
  • Prelims: नकद आरक्षित अनुपात (CRR), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), मौद्रिक नीति, तरलता समायोजन सुविधा (LAF), खुले बाज़ार परिचालन (OMO), बैंक दर, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर
  • Essay: भारतीय अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति की भूमिका और चुनौतियाँ, वित्तीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि के बीच संतुलन

त्वरित पुनरावृत्ति: नकद आरक्षित अनुपात (CRR) वह न्यूनतम राशि है जो बैंकों को अपनी कुल जमा का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद के रूप में अनिवार्य रूप से रखना होता है, जिसका उपयोग RBI अर्थव्यवस्था में तरलता और मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए करता है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 16 अक्टूबर, 2026 से बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (CRR) की दैनिक रखरखाव आवश्यकता को 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय बैंकिंग प्रणाली में वर्तमान तरलता (Liquidity) की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य प्रणाली में अतिरिक्त तरलता को कम करना है, जो 8 अक्टूबर तक लगभग 3.88 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष पर थी।

पृष्ठभूमि

  • CRR वह न्यूनतम प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और सावधि देनदारियों (Net Demand and Time Liabilities – NDTL) का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद के रूप में रखना होता है।
  • RBI मौद्रिक नीति के एक उपकरण के रूप में CRR का उपयोग करता है ताकि अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति और तरलता को नियंत्रित किया जा सके।
  • जब अर्थव्यवस्था में तरलता अधिक होती है, तो RBI CRR बढ़ाता है ताकि बैंकों के पास उधार देने के लिए कम धन हो, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • इसके विपरीत, जब अर्थव्यवस्था में तरलता कम होती है, तो RBI CRR घटाता है ताकि बैंकों के पास उधार देने के लिए अधिक धन हो, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
  • हाल ही में, FCNR(B) जमाओं और महीने के अंत में सरकारी व्यय के कारण बैंकिंग प्रणाली में तरलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।
  • RBI पिछले दो महीनों से प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने के लिए परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (Variable Rate Reverse Repo – VRRR) नीलामी और खुले बाज़ार परिचालन (Open Market Operations – OMO) के माध्यम से बांड खरीद जैसे विभिन्न कदम उठा रहा है।

नकद आरक्षित अनुपात (CRR) क्या है?

  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित एक मौद्रिक नीति उपकरण है।
  • यह वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अपनी शुद्ध मांग और सावधि देनदारियों (NDTL) का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद के रूप में रखने के लिए अनिवार्य है।
  • बैंक इस आरक्षित राशि पर RBI से कोई ब्याज अर्जित नहीं करते हैं।
  • CRR का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में तरलता को नियंत्रित करना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है।
  • जब CRR बढ़ाया जाता है, तो बैंकों के पास उधार देने के लिए कम धन उपलब्ध होता है, जिससे ऋण की लागत बढ़ सकती है और मुद्रास्फीति पर अंकुश लग सकता है।
  • जब CRR घटाया जाता है, तो बैंकों के पास अधिक धन उपलब्ध होता है, जिससे ऋण सस्ता हो सकता है और आर्थिक संवृद्धि को प्रोत्साहन मिल सकता है।
  • RBI CRR के माध्यम से अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति को सीधे प्रभावित करता है, जिससे यह मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण घटक बन जाता है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
दैनिक CRR रखरखाव में वृद्धि बैंकों को अब पखवाड़े के दौरान दैनिक आधार पर आवश्यक CRR का 99% बनाए रखना होगा, जो पहले 90% था। यह बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने में मदद करेगा।
प्रभावी तिथि यह परिवर्तन 16 अक्टूबर, 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े से प्रभावी होगा।
तरलता प्रबंधन यह कदम RBI द्वारा बैंकिंग प्रणाली में मौजूदा तरलता स्थिति की समीक्षा के बाद उठाया गया है, जो 8 अक्टूबर को लगभग 3.88 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष पर थी।
मौद्रिक नीति का उपकरण CRR (नकद आरक्षित अनुपात) मौद्रिक नीति का एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग RBI मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था में धन आपूर्ति को विनियमित करने के लिए करता है।
अतिरिक्त तरलता के कारण FCNR(B) जमाओं के भारी संग्रहण और महीने के अंत में सरकारी व्यय (वेतन और पेंशन सहित) के कारण बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता आई थी।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • मुद्रास्फीति नियंत्रण: बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को कम करके, RBI मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने का प्रयास करता है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में स्थिरता बनी रहे।
  • वित्तीय स्थिरता: अत्यधिक तरलता वित्तीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकती है। CRR में वृद्धि इस जोखिम को कम करने में मदद करती है, जिससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित होती है।
  • ब्याज दरों पर प्रभाव: तरलता में कमी से बैंकों के लिए धन की लागत बढ़ सकती है, जिससे अंततः ऋण दरों में वृद्धि हो सकती है। यह अर्थव्यवस्था में ऋण वृद्धि को धीमा कर सकता है।

मौद्रिक नीति का महत्व

  • RBI की स्वायत्तता: यह कदम मौद्रिक नीति के संचालन में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की स्वायत्तता और विवेक को दर्शाता है, जो आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
  • लचीलापन: दैनिक CRR रखरखाव में वृद्धि RBI के तरलता प्रबंधन उपकरणों के लचीलेपन को दर्शाती है, जिससे वह बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार त्वरित समायोजन कर सकता है।
  • बाजार संकेत: यह कदम बाजार को एक स्पष्ट संकेत देता है कि RBI तरलता को कम करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे निवेशकों और व्यवसायों के विश्वास में वृद्धि हो सकती है।

बैंकिंग क्षेत्र पर प्रभाव

  • ऋण उपलब्धता: बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम धन उपलब्ध होगा, जिससे ऋण की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है और ऋण वृद्धि धीमी हो सकती है।
  • लाभप्रदता पर प्रभाव: बैंकों को CRR पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए CRR में वृद्धि से उनकी लाभप्रदता पर मामूली नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि उन्हें अधिक निष्क्रिय धन बनाए रखना होगा।
  • जोखिम प्रबंधन: यह कदम बैंकों को अपने तरलता जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जिससे वे अप्रत्याशित तरलता झटकों का सामना करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।

चुनौतियाँ

1. आर्थिक संवृद्धि पर प्रभाव

  • तरलता में कमी से ऋण की उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे निवेश और उपभोग प्रभावित हो सकता है और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) धीमी हो सकती है।
  • उच्च ब्याज दरें व्यवसायों के लिए उधार लेना महंगा बना सकती हैं, जिससे पूंजीगत व्यय और विस्तार योजनाओं में कमी आ सकती है।

2. बैंकिंग क्षेत्र की लाभप्रदता

  • CRR पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए बैंकों को अधिक धन निष्क्रिय रखना होगा, जिससे उनकी शुद्ध ब्याज आय और समग्र लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।
  • बैंकों को अपनी तरलता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अधिक सावधानी से योजना बनानी होगी, जिससे परिचालन लागत बढ़ सकती है।

3. मुद्रास्फीति नियंत्रण बनाम संवृद्धि

  • RBI को मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाना होगा। अत्यधिक कठोर मौद्रिक नीति संवृद्धि को बाधित कर सकती है।
  • यह सुनिश्चित करना कि तरलता प्रबंधन उपाय अर्थव्यवस्था को अनावश्यक रूप से धीमा न करें, एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

4. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ

  • वैश्विक आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था में तरलता और मुद्रास्फीति के दबाव को प्रभावित कर सकते हैं।
  • RBI को इन बाहरी कारकों को ध्यान में रखते हुए अपनी मौद्रिक नीति को समायोजित करना होगा।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
आर्थिक संवृद्धि पर दबाव तरलता में कमी से ऋण की उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे निवेश और उपभोग प्रभावित होगा।
बैंकों की लाभप्रदता CRR पर कोई ब्याज न मिलने के कारण बैंकों की शुद्ध ब्याज आय और समग्र लाभप्रदता प्रभावित हो सकती है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र छोटे व्यवसायों के लिए ऋण तक पहुंच कठिन हो सकती है, जिससे उनके विकास और विस्तार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
बाजार की प्रतिक्रिया बाजार की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित हो सकती है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ सकती है।
मुद्रास्फीति का दबाव यदि तरलता प्रबंधन के बावजूद मुद्रास्फीति उच्च बनी रहती है, तो RBI को और अधिक कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं।

आगे की राह

  • RBI को तरलता प्रबंधन उपायों के प्रभाव की बारीकी से निगरानी करनी चाहिए और आवश्यकतानुसार समायोजन करना चाहिए ताकि आर्थिक संवृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
  • सरकार को राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) के माध्यम से आर्थिक संवृद्धि को समर्थन देना चाहिए, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे और उत्पादक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर।
  • बैंकों को अपने आंतरिक तरलता प्रबंधन ढांचे को मजबूत करना चाहिए ताकि वे CRR आवश्यकताओं में बदलाव के अनुकूल हो सकें और अपनी लाभप्रदता बनाए रख सकें।
  • RBI को बाजार सहभागियों के साथ प्रभावी ढंग से संवाद करना चाहिए ताकि नीतिगत परिवर्तनों के पीछे के तर्क को स्पष्ट किया जा सके और बाजार में अनावश्यक घबराहट को रोका जा सके।
  • दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, RBI को बैंकिंग प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसमें गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (Non-Performing Assets – NPAs) का समाधान और पूंजी पर्याप्तता को मजबूत करना शामिल है।
  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु लक्षित उपाय किए जाने चाहिए, ताकि वे तरलता संकुचन से अत्यधिक प्रभावित न हों।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

तरलता प्रबंधन · नकद आरक्षित अनुपात (CRR) · मौद्रिक नीति · भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) · अधिशेष तरलता · मुद्रास्फीति नियंत्रण · बैंक प्रणाली · खुले बाज़ार परिचालन (OMO) · परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) · राजकोषीय नीति

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में बैंकिंग का विषय’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ द्वारा व्यय करने की शक्ति’}

अवधारणा प्रवाह

बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता (लगभग 3.88 लाख करोड़ रुपये) का संचय।  →  RBI द्वारा तरलता की स्थिति की समीक्षा और मुद्रास्फीति नियंत्रण की आवश्यकता।  →  दैनिक CRR रखरखाव की आवश्यकता को 90% से बढ़ाकर 99% करने का निर्णय।  →  बैंकों को अधिक धन RBI के पास CRR के रूप में रखना होगा।  →  बैंकिंग प्रणाली से तरलता का अवशोषण।  →  अर्थव्यवस्था में कुल धन आपूर्ति में कमी और मुद्रास्फीति के दबाव में संभावित कमी।  →  ब्याज दरों पर संभावित प्रभाव और आर्थिक संवृद्धि पर इसका परिणाम।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नकद आरक्षित अनुपात (CRR) वह राशि है जो वाणिज्यिक बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास आरक्षित निधि के रूप में रखनी होती है।
2. CRR में वृद्धि से बैंकों के पास ऋण देने के लिए उपलब्ध धन में कमी आती है।
3. RBI तरलता को नियंत्रित करने के लिए केवल CRR का उपयोग करता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। CRR वह राशि है जो बैंकों को RBI के पास रखनी होती है, और इसकी वृद्धि से बैंकों की ऋण देने की क्षमता कम होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि RBI तरलता को नियंत्रित करने के लिए खुले बाज़ार परिचालन (OMO) और परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) जैसी अन्य मौद्रिक नीति उपकरणों का भी उपयोग करता है।

Q2. अभिकथन (A): भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता (surplus liquidity) को कम करने के लिए दैनिक CRR रखरखाव की आवश्यकता को 90% से बढ़ाकर 99% कर दिया है।
कारण (R): बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता FCNR(B) जमाओं और माह के अंत में सरकारी व्यय जैसे कारकों के कारण बढ़ी है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि RBI ने तरलता को कम करने के लिए दैनिक CRR आवश्यकता बढ़ाई है। कारण (R) भी सही है क्योंकि FCNR(B) जमा और सरकारी व्यय जैसे कारकों से तरलता बढ़ी है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है क्योंकि बढ़ी हुई तरलता को कम करने के लिए ही RBI ने यह कदम उठाया है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंकिंग प्रणाली में तरलता प्रबंधन के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न उपकरणों की चर्चा कीजिए। हाल ही में CRR रखरखाव की आवश्यकता में वृद्धि के संदर्भ में, इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** तरलता प्रबंधन का महत्व और RBI की भूमिका का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **RBI के तरलता प्रबंधन उपकरण:**
* **मात्रात्मक उपकरण:**
* नकद आरक्षित अनुपात (CRR): परिभाषा, कार्यप्रणाली।
* सांविधिक तरलता अनुपात (SLR): परिभाषा, कार्यप्रणाली।
* रेपो दर और रिवर्स रेपो दर: परिभाषा, कार्यप्रणाली।
* खुले बाज़ार परिचालन (OMO): सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री।
* परिवर्तनीय दर रिवर्स रेपो (VRRR) और परिवर्तनीय दर रेपो (VRR): हाल के उपयोग का संदर्भ।
* **गुणात्मक उपकरण:** चयनात्मक ऋण नियंत्रण, नैतिक अनुनय आदि का संक्षिप्त उल्लेख।
3. **CRR रखरखाव में वृद्धि का विश्लेषण:**
* **कारण:** बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष तरलता (लगभग 3.88 लाख करोड़ रुपये) का उल्लेख, FCNR(B) जमा और सरकारी व्यय जैसे कारकों का जिक्र।
* **उद्देश्य:** मुद्रास्फीति पर नियंत्रण, वित्तीय स्थिरता बनाए रखना।
* **संभावित प्रभाव:**
* **बैंकों पर:** ऋण देने योग्य धन में कमी, ऋण वृद्धि पर प्रभाव।
* **अर्थव्यवस्था पर:** निवेश और उपभोग पर संभावित प्रभाव, समग्र आर्थिक संवृद्धि पर असर।
* **मुद्रास्फीति पर:** तरलता कम होने से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण में मदद।
* **ब्याज दरों पर:** अल्पकालिक ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना।
4. **निष्कर्ष:** RBI के इस कदम का समग्र मूल्यांकन, तरलता प्रबंधन और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: orissapost.com


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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