मुंबई फ्लेमिंगो अभयारण्य बफर जोन में सड़क निर्माण: 680 मैनग्रोव होंगे प्रभावित

मुंबई फ्लेमिंगो अभयारण्य बफर जोन में सड़क निर्माण: 680 मैनग्रोव होंगे प्रभावित

मुंबई फ्लेमिंगो अभयारण्य बफर जोन में सड़क निर्माण: 680 मैनग्रोव होंगे प्रभावित

ठाणे तटीय मार्ग-2: पर्यावरण बनाम विकासपर्यावरणीय प्रभावविकासात्मक लाभमैंग्रोव क्षति680 स्थायी रूप से नष्ट3,754 मैंग्रोव प्रभावित (1,053 क्षतिग्तटीय सुरक्षातूफानी लहरों से सुरक्षा कमजोरठाणे शहर को बायपास करने वाला मार्गअंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धतारामसर स्थल (ठाणे खाड़ी फ्लेमिंगो अभयारCRZ नियमों का अनुपालनआर्थिक प्रभावमत्स्य-पालन एवं तटीय आजीविका प्रभावितवाहन परिचालन लागत एवं यात्रा-विलंब घटेनियामक प्रक्रियाMCZMA द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृतिMMRDA द्वारा वैकल्पिक मार्ग खोजने का प
ठाणे तटीय मार्ग-2: पर्यावरण बनाम विकास

✎ मैंग्रोव, CRZ और ESZ: तटीय परियोजनाओं की स्वीकृति में पर्यावरणीय शर्तें अनिवार्य हैं, और रामसर स्थल व अभयारण्य के बफर क्षेत्र में पर्यावरणीय न्यूनीकरण उपायों के साथ ही परियोजना आगे बढ़ती है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी (तटीय विनियमन, आर्द्रभूमि संरक्षण, मैंग्रोव)  |  GS Paper III — अवसंरचना (शहरी परिवहन और सड़क परियोजनाएँ)  |  GS Paper II — शासन (सांविधिक प्राधिकरणों की भूमिका, केंद्र-राज्य समन्वय, परियोजना अनुमोदन प्रक्रिया)
  • Prelims: ठाणे खाड़ी फ्लेमिंगो अभयारण्य (Thane Creek Flamingo Sanctuary) और रामसर स्थल, रामसर सम्मेलन (Ramsar Convention), तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone – CRZ) अधिसूचना, पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Zone – ESZ), मैंग्रोव वनस्पति और उनकी पारिस्थितिक भूमिका, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, ग्रेटर फ्लेमिंगो (Greater Flamingo) और लेसर फ्लेमिंगो (Lesser Flamingo) का अंतर
  • Essay: विकास और पारिस्थितिकी: तटीय अवसंरचना परियोजनाओं में संतुलन की चुनौती, शहरी परिवहन की आवश्यकता और संवेदनशील आर्द्रभूमि का संरक्षण: क्या विकल्प सीमित हैं?

त्वरित पुनरावृत्ति: मैंग्रोव, CRZ और ESZ: तटीय परियोजनाओं की स्वीकृति में पर्यावरणीय शर्तें अनिवार्य हैं, और रामसर स्थल व अभयारण्य के बफर क्षेत्र में पर्यावरणीय न्यूनीकरण उपायों के साथ ही परियोजना आगे बढ़ती है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (Maharashtra Coastal Zone Management Authority – MCZMA) ने ठाणे तटीय मार्ग-2 (Thane Coastal Road-2 – TCR-2) परियोजना को उसके मूल संरेखण (alignment) पर आगे बढ़ने की मंजूरी दे दी है। अगस्त में प्राधिकरण ने महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (Mumbai Metropolitan Region Development Authority – MMRDA) से ऐसा वैकल्पिक संरेखण खोजने को कहा था जिससे मैंग्रोव और ठाणे खाड़ी फ्लेमिंगो अभयारण्य के पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र को कम नुकसान हो। MMRDA ने बताया कि कोई व्यवहार्य विकल्प उपलब्ध नहीं है। 24 सितंबर को प्राधिकरण की 202वीं बैठक में परियोजना को तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों के अनुपालन की शर्त पर मंजूरी दी गई। इस मार्ग में 3,754 मैंग्रोव प्रभावित होंगे, जिनमें से 680 स्थायी रूप से समाप्त होंगे। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और शहरी परिवहन आवश्यकता के बीच नीतिगत संतुलन का उदाहरण है।

पृष्ठभूमि

  • ठाणे खाड़ी फ्लेमिंगो अभयारण्य एक अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल है। यह आर्द्रभूमि मुंबई और ठाणे क्षेत्र में प्रवासी फ्लेमिंगो के लिए महत्वपूर्ण प्रजनन और आवास स्थल है।
  • TCR-2 लगभग 7.129 किलोमीटर लंबी नई सड़क (greenfield road) है, जो मुलुंड पूर्व के आनंद नगर से ठाणे के बालकुम तक ठाणे खाड़ी के किनारे जाएगी। यह ठाणे तटीय मार्ग-1 का विस्तार है और प्रस्तावित कोपरी-पाटनी पुल तथा ईस्टर्न एक्सप्रेसवे विस्तार से जुड़ेगी।
  • MMRDA का तर्क है कि सड़क का मार्ग ठाणे विकास योजना में पहले से तय है और ठाणे नगर निगम ने अंतिम रूप देने से पहले सुझाव व आपत्तियाँ आमंत्रित की थीं। प्राधिकरण के अनुसार ठाणे शहर को बायपास करने वाले क्षेत्रीय और बाहरी यातायात के लिए यह मार्ग आवश्यक है।
  • मंजूर परियोजना के अनुसार 680 मैंग्रोव (लगभग 1.7 हेक्टेयर में) स्थायी रूप से जाएँगे, क्योंकि वहाँ उन्नत सड़क के खंभे (piers) बनेंगे। 1,053 मैंग्रोव निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त होंगे और बाद में पुनर्स्थापित किए जाने हैं, जबकि 2,021 मैंग्रोव निर्माण संरेखण के भीतर होंगे पर अपेक्षाकृत अछूते रहने का अनुमान है।
  • MCZMA ने परियोजना को CRZ नियमों के अनुपालन की शर्त पर मंजूरी दी है। यह प्रक्रिया बताती है कि तटीय परियोजनाओं में पर्यावरणीय स्वीकृति के साथ राज्य स्तरीय विनियामक प्राधिकरण की सक्रिय निगरानी भी आवश्यक होती है।

तटीय विनियमन, मैंग्रोव और पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र क्या हैं?

  • तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी होती है। इसका उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में निर्माण और गतिविधियों को नियंत्रित करना तथा संवेदनशील पारिस्थितिकी की रक्षा करना है।
  • मैंग्रोव लवणीय और ज्वारीय जल में पनपने वाली वनस्पति है। यह तटरेखा को कटाव और तूफानी लहरों से बचाती है, मत्स्य प्रजनन को सहारा देती है तथा कार्बन अवशोषण में सहायक है।
  • रामसर सम्मेलन (1971) अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों के संरक्षण से संबंधित है। भारत इसका सदस्य है और रामसर स्थलों की सूची में समय-समय पर वृद्धि होती रही है।
  • पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) संरक्षित क्षेत्रों के आसपास का वह बफर क्षेत्र है जहाँ गतिविधियों पर अतिरिक्त नियंत्रण रखा जाता है, ताकि मुख्य क्षेत्र पर दबाव कम हो।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत अभयारण्य घोषित क्षेत्र संरक्षित होते हैं, जबकि उसके आसपास की ESZ का दायरा और नियम राज्य सरकार की अधिसूचना तथा न्यायिक निर्देशों से भी प्रभावित होते हैं।
  • परियोजना-स्वीकृति में पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (Environmental Impact Assessment – EIA) और CRZ अनुपालन की शर्तें सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। शमन उपाय (mitigation), जैसे मैंग्रोव का पुनर्रोपण, इसी प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
  • सांविधिक प्राधिकरण (जैसे MMRDA और MCZMA) अपने-अपने अधिनियम के अंतर्गत कार्य करते हैं। MMRDA महानगर क्षेत्र की विकास योजनाएँ बनाता है, जबकि तटीय क्षेत्र के नियमन की जिम्मेदारी राज्य तटीय प्राधिकरण के पास होती है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
थाणे कोस्टल रोड-2 (Thane Coastal Road-2, TCR-2) लगभग 7.129 किमी लंबी ग्रीनफील्ड सड़क, जो आनंद नगर (मुलुंड पूर्व) से बालकुम (थाणे) तक थाणे क्रीक के किनारे जाती है। यह थाणे कोस्टल रोड-1 का विस्तार है और प्रस्तावित कोपरी-पाटणी पुल तथा ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे विस्तार से जुड़ेगी।
थाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य (Thane Creek Flamingo Sanctuary) वन्यजीव संरक्षण के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र, जिसका बफर क्षेत्र पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone, ESZ) कहलाता है। यह रामसर स्थल (Ramsar Site) के रूप में अंतरराष्ट्रीय महत्व का आर्द्रभूमि क्षेत्र है।
मैंग्रोव वनस्पति की क्षति कुल 3,754 मैंग्रोव प्रभावित होंगे। इनमें से 680 पेड़ (लगभग 1.7 हेक्टेयर में) स्थायी रूप से समाप्त होंगे, क्योंकि उनकी जगह पर एलिवेटेड सड़क के पिलर बनेंगे।
पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (Maharashtra Coastal Zone Management Authority, MCZMA) ने प्रस्ताव को अगस्त में वापस भेजकर वैकल्पिक संरेखण माँगा था। 24 सितंबर को 202वीं बैठक में मूल संरेखण के साथ परियोजना को तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों के अनुपालन की शर्त पर स्वीकृति मिली।
कार्य का औचित्य MMRDA के अनुसार मार्ग थाणे विकास योजना में पहले से तय है, क्षेत्रीय और बाहरी यातायात को थाणे शहर को बायपास करने का मार्ग देगा, और दुर्घटनाओं, वायु व शोर प्रदूषण तथा वाहन परिचालन लागत को कम करेगा।

महत्व

पर्यावरणीय (Environmental)

  • मैंग्रोव तटीय क्षेत्र को तूफानी लहरों और कटाव से बचाते हैं, इसलिए उनकी हानि से तटीय सुरक्षा कमजोर होती है।
  • रामसर स्थल होने के कारण यह क्षेत्र आर्द्रभूमि संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता से जुड़ा है, जिसका पालन भारत रामसर सम्मेलन के अंतर्गत करता है।
  • फ्लेमिंगो जैसे प्रवासी पक्षियों का आवास बने रहना जैव-विविधता संरक्षण का मापदंड है।

आर्थिक (Economic)

  • दावे के अनुसार सड़क से वाहन परिचालन लागत, यात्रा-विलंब और माल-परिवहन की हानि घटेगी, जिससे आर्थिक संवृद्धि के लिए परिवहन दक्षता बढ़ सकती है।
  • मैंग्रोव से होने वाली मत्स्य-पालन और तटीय आजीविका की सेवाएँ भी आर्थिक मूल्य रखती हैं, जिन्हें परियोजना लागत-लाभ विश्लेषण में शामिल करना आवश्यक है।

शासन एवं प्रशासनिक (Governance)

  • यह मामला दिखाता है कि पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) और तटीय क्षेत्र नियमन की प्रक्रिया में नियामक प्राधिकरण किस प्रकार विकल्प खोजने की माँग कर सकता है।
  • थाणे विकास योजना और शहरी नियोजन के बीच तालमेल तथा जन-सुनवाई की भूमिका इस परियोजना में भी केंद्र में है।

शहरी एवं परिवहन (Urban and Transport)

  • मुंबई महानगर क्षेत्र में बढ़ते क्षेत्रीय यातायात को शहर के बाहर से मोड़ने हेतु बाइपास मार्गों की आवश्यकता बनी रहती है।
  • कोपरी-पाटणी पुल और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे विस्तार के साथ जुड़ाव से यह कॉरिडोर नेटवर्क के रूप में कार्य करेगी।

चुनौतियाँ

1. मैंग्रोव की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हानि

  • 680 मैंग्रोव स्थायी रूप से समाप्त होंगे और 1,053 निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त होकर बाद में पुनर्स्थापित किए जाएँगे। पुनर्स्थापन की सफलता अनिश्चित रहती है।
  • मैंग्रोव की पुनर्स्थापना में वर्षों लगते हैं, इसलिए क्षति की भरपाई तत्काल नहीं हो सकती।
  • निर्माण-कार्य से होने वाला मलबा, ध्वनि और कंपन आसपास के आवास को भी प्रभावित कर सकते हैं।

2. ESZ में निर्माण की सीमा

  • अभयारण्य का बफर क्षेत्र पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र होता है, जहाँ निर्माण पर अतिरिक्त नियंत्रण लागू होते हैं।
  • MMRDA का तर्क है कि पुल मुख्य क्षेत्र (core area) से काफी दूर है, परंतु बफर क्षेत्र में निर्माण का संचयी प्रभाव (cumulative impact) भी आकलन में आना चाहिए।
  • संरक्षित क्षेत्र के आसपास के विकास और वन्यजीव आवास के बीच संतुलन बनाना कठिन होता है।

3. विकल्प-विश्लेषण की चुनौती

  • MCZMA ने कम क्षति वाला संरेखण खोजने को कहा था, पर MMRDA ने कहा कि ऐसा कोई विकल्प नहीं है। इससे विकल्प-विश्लेषण (Alternative Analysis) की गुणवत्ता पर प्रश्न उठता है।
  • निर्णय-प्रक्रिया में स्वतंत्र विशेषज्ञ मूल्यांकन की आवश्यकता बनी रहती है।

4. तटीय विनियमन और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की अनुपालन-व्यवस्था

  • परियोजना को CRZ नियमों के अनुपालन की शर्त पर स्वीकृति मिली है। शर्तों का वास्तविक पालन निगरानी पर निर्भर है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और जन-सुनवाई की प्रभावशीलता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं।

5. विकास बनाम पर्यावरण का संतुलन

  • क्षेत्रीय यातायात-भीड़, दुर्घटनाएँ और प्रदूषण कम करने की आवश्यकता वास्तविक है, और इसे पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करना होता है।
  • सतत विकास (Sustainable Development) का सिद्धांत दोनों लक्ष्यों को साथ लेकर चलने की अपेक्षा रखता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
मैंग्रोव हानि 680 मैंग्रोव स्थायी रूप से समाप्त और 1,053 निर्माण-काल में क्षतिग्रस्त होंगे।
ESZ में निर्माण 12 हेक्टेयर ESZ क्षेत्र प्रभावित होगा, जिससे संरक्षित क्षेत्र के बफर की कार्यात्मकता पर असर पड़ सकता है।
वैकल्पिक संरेखण का अभाव MCZMA के आग्रह के बावजूद MMRDA ने कम क्षति वाला विकल्प न होने की बात कही।
पुनर्स्थापन की विश्वसनीयता क्षतिग्रस्त मैंग्रोव की पुनर्स्थापना की सफलता और दीर्घकालिक निगरानी का स्पष्ट ढाँचा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
CRZ अनुपालन की निगरानी स्वीकृति की शर्तों के पालन हेतु स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता रहेगी।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • मिष्टी (MISHTI: Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes) — पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहल, जो मैंग्रोव वृक्षारोपण और तटीय आजीविका को जोड़ती है; इस मामले में मैंग्रोव हानि की भरपाई से सीधा संबंध है।

आगे की राह

  • ऐसे मामलों में वैकल्पिक संरेखण के विश्लेषण को तकनीकी रूप से दस्तावेज़ीकृत करना और उसे सार्वजनिक करना आवश्यक है, ताकि निर्णय का आधार स्पष्ट हो।
  • प्रभावित 680 मैंग्रोव के बदले क्षतिपूरक वृक्षारोपण की योजना, स्थान और जीवित रहने की दर (survival rate) की समयबद्ध निगरानी की जाए।
  • 1,053 क्षतिग्रस्त मैंग्रोव की पुनर्स्थापना के लिए स्वतंत्र वैज्ञानिक संस्था द्वारा नियमित मूल्यांकन की व्यवस्था हो।
  • निर्माण-काल में ध्वनि, कंपन और मलबे को नियंत्रित करने हेतु कड़े पर्यावरणीय प्रबंधन योजना (EMP) का पालन सुनिश्चित हो।
  • CRZ और ESZ से संबंधित स्वीकृति-शर्तों की नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग हो।
  • क्षेत्रीय यातायात प्रबंधन के लिए सार्वजनिक परिवहन, रेल-आधारित विकल्प और मांग-प्रबंधन उपायों को साथ-साथ विकसित किया जाए, ताकि सड़क पर निर्भरता घटे।
  • थाणे विकास योजना तैयार करते समय पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्रों का मानचित्रण प्रारंभिक चरण में ही किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone) · तटीय विनियमन क्षेत्र (Coastal Regulation Zone, CRZ) · मैंग्रोव वन (Mangrove Forests) · रामसर स्थल (Ramsar Site) · सतत विकास (Sustainable Development) · सावधानी का सिद्धांत (Precautionary Principle) · प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) · पर्यावरण प्रभाव आकलन (Environment Impact Assessment) · नीला कार्बन (Blue Carbon) · सार्वजनिक न्यास सिद्धांत (Public Trust Doctrine) · अनुच्छेद 21 और पर्यावरण संरक्षण · तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (Coastal Zone Management Authority)

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 21 — स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार (न्यायिक व्याख्या)
  • अनुच्छेद 48A — पर्यावरण संरक्षण का राज्य का दायित्व
  • अनुच्छेद 51A(g) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य

अवधारणा प्रवाह

मुंबई-थाणे क्षेत्र में क्षेत्रीय यातायात और भीड़ बढ़ने से बाईपास सड़क की माँग उठती है।  →  थाणे क्रीक के किनारे TCR-2 का प्रस्ताव आता है, जो थाणे विकास योजना में पहले से तय था।  →  परियोजना मार्ग फ्लेमिंगो अभयारण्य के ESZ (बफर) से होकर गुजरता है और 3,754 मैंग्रोव प्रभावित होते हैं।  →  MCZMA वैकल्पिक संरेखण माँगता है, पर MMRDA विकल्प न होने का तर्क देता है।  →  24 सितंबर को 202वीं बैठक में मूल संरेखण पर CRZ नियमों के अनुपालन की शर्त के साथ स्वीकृति मिलती है।  →  स्वीकृति के बाद 680 मैंग्रोव की स्थायी हानि और 1,053 की अस्थायी क्षति के लिए क्षतिपूर्ति व पुनर्स्थापन की निगरानी प्रमुख चुनौती बन जाती है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों के आसपास पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone) अधिसूचित किए जा सकते हैं।
2. रामसर अभिसमय (Ramsar Convention) आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग से संबंधित एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो वर्ष 1971 में ईरान के रामसर नगर में अपनाई गई थी।
3. मैंग्रोव वन केवल पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में पाए जाते हैं।
4. तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) से संबंधित अधिसूचनाएँ वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत जारी की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. सभी

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत अधिसूचित किए जाते हैं। कथन 2 सही है: रामसर अभिसमय 1971 में अपनाया गया और भारत इसका पक्षकार है। कथन 3 गलत है, क्योंकि मैंग्रोव भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों, अंडमान-निकोबार और गुजरात सहित कई तटीय राज्यों में पाए जाते हैं। कथन 4 गलत है, क्योंकि CRZ अधिसूचनाएँ पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी होती हैं।

Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
अभिकथन (A): मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों को तूफानी लहरों और तटीय क्षरण से कुछ सीमा तक बचाते हैं।
कारण (R): मैंग्रोव की जड़ें तलछट को रोकती हैं और लहरों की ऊर्जा को कम करती हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:

  1. A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, परंतु R गलत है।
  4. A गलत है, परंतु R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है। — मैंग्रोव की सघन जड़ें तलछट को बाँधती हैं और तटीय लहरों की ऊर्जा को कम करती हैं, इसलिए वे तटीय सुरक्षा का प्राकृतिक कवच बनते हैं। अतः A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

Q3. निम्नलिखित सूचियों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I
1. रामसर अभिसमय
2. तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना
3. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972

सूची-II
A. पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी अधिसूचना
B. आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग हेतु अंतरराष्ट्रीय संधि
C. अभयारण्य की घोषणा से संबंधित विधिक प्रावधान

सही सुमेलन चुनिए:

  1. 1-A, 2-B, 3-C
  2. 1-C, 2-A, 3-B
  3. 1-B, 2-A, 3-C
  4. 1-B, 2-C, 3-A

उत्तर: 1-B, 2-A, 3-C — रामसर अभिसमय (1) आर्द्रभूमि संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय संधि है, अतः 1-B। CRZ अधिसूचना (2) पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी होती है, अतः 2-A। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (3) में अभयारण्य की घोषणा का प्रावधान है, अतः 3-C।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मुंबई महानगर क्षेत्र की एक 7 किलोमीटर से अधिक लंबी तटीय सड़क परियोजना का ठाणे खाड़ी फ्लेमिंगो अभयारण्य के पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र से होकर गुजरना, अवसंरचना-विकास और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन की कठिन चुनौती को सामने लाता है। पर्यावरण-विधि और सतत विकास के सिद्धांतों के आलोक में इस संतुलन का समीक्षात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि किसी परियोजना से अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक क्षति हो और व्यवहार्य विकल्पी संरेखण उपलब्ध न हों, तो सक्षम प्राधिकरण को किन सिद्धांतों और प्रक्रियागत उपायों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल उत्तर-संरचना: (1) भूमिका: ठाणे तटीय सड़क-2 (TCR-2) का लगभग 7.129 किमी लंबा नया मार्ग, आनंद नगर (मुलुंड पूर्व) से बालकुम (ठाणे) तक; महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (MCZMA) द्वारा अगस्त में वैकल्पिक संरेखण माँगना और MMRDA द्वारा विकल्प न होने का तर्क देना; 24 सितंबर को 202वीं बैठक में CRZ नियमों के अनुपालन की शर्त के साथ मंजूरी। (2) तथ्यात्मक आँकड़े: 3,754 मैंग्रोव प्रभावित; 12 हेक्टेयर पारिस्थितिक-संवेदी क्षेत्र में; 680 मैंग्रोव (1.7 हेक्टेयर) पाये के निर्माण से स्थायी रूप से नष्ट; 1,053 निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त और बाद में पुनर्स्थापित; 2,021 संरेखण में होकर भी अपेक्षाकृत अछूते। (3) संवैधानिक एवं विधिक ढाँचा: अनुच्छेद 21 (स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, सुभाष कुमार बनाम बिहार राज्य, 1991; MC Mehta मामले); अनुच्छेद 48A (राज्य का दायित्व) और अनुच्छेद 51A(छ) (मौलिक कर्तव्य); पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; CRZ अधिसूचना 2019 और राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (अभयारण्य का प्रावधान); आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017; पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006; महाराष्ट्र महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1974। (4) सिद्धांत: सतत विकास (ब्रंटलैंड रिपोर्ट, 1987 ‘Our Common Future’); सावधानी का सिद्धांत (वेल्लोर सिटीजन्स वेलफेयर फोरम, 1996); प्रदूषणकर्ता भुगतान (Indian Council for Enviro-Legal Action, 1996); सार्वजनिक न्यास सिद्धांत (M.C. Mehta बनाम कमल नाथ, 1997); मैंग्रोव का नीला कार्बन और तटीय सुरक्षा में भूमिका। (5) विकास पक्ष का तर्क: मार्ग निर्धारित विकास योजना में; क्षेत्रीय और बाहरी यातायात को शहर से बाहर निकालना; दुर्घटना, वायु व ध्वनि प्रदूषण और परिवहन-लागत में कमी; नागरिक सुझाव व आपत्तियों की प्रक्रिया। (6) संरक्षण पक्ष का तर्क: अपरिवर्तनीय क्षति, पाये-स्थल का चयन, मैंग्रोव का पुनर्रोपण सीमित सफलता, पक्षी-आवास (फ्लेमिंगो) पर दीर्घकालिक प्रभाव; पुनर्स्थापन की विश्वसनीयता का प्रश्न। (7) संतुलन के उपाय: विकल्पी अभिकल्प (सुरंग, पाया-स्थल का पुनर्निर्धारण, न्यूनतम पदचिह्न); मास ट्रांजिट का समानांतर विकल्प; प्रतिकारी मैंग्रोव-वृक्षारोपण और निगरानी; स्वतंत्र पर्यावरणीय ऑडिट; CRZ शर्तों का सतत अनुपालन। (8) निष्कर्ष: सावधानी और सतत विकास के सिद्धांतों के आधार पर विकल्पों की गहन जाँच, सार्वजनिक परामर्श की पारदर्शिता और अपरिवर्तनीय क्षति पर कठोर मानक; संतुलित निष्कर्ष।

स्रोत: The Indian Express

Maharashtra PCS (MPSC) — राज्य PCS अभ्यास

Prelims: मुंबईतील फ्लेमिंगो अभयारण्याच्या बफर क्षेत्रातून रस्त्याच्या मार्गासाठी किती मॅन्ग्रोव्ह वृक्षांची कत्तल करण्यात येणार आहे?

  1. 680
  2. 600
  3. 750
  4. 550

उत्तर: 680 — मुंबईतील फ्लेमिंगो अभयारण्याच्या बफर क्षेत्रातून रस्त्याच्या मार्गासाठी 680 मॅन्ग्रोव्ह वृक्षांची कत्तल करण्याचा निर्णय महाराष्ट्र राज्य वन विभागाने घेतला आहे.

Mains: महाराष्ट्रातील फ्लेमिंगो अभयारण्यांच्या संवर्धनासाठी आणि मॅन्ग्रोव्ह वनस्पतींच्या संरक्षणासाठी राज्य सरकारने कोणत्या उपाययोजना कराव्यात? त्याचे पर्यावरणीय आणि सामाजिक परिणामांचे विश्लेषण करा.


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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