15 Oct सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व 1 नवंबर से पर्यटकों के लिए फिर खुलेगा, जानें नियम
✎ सिमिलीपाल बाघ संरक्षित क्षेत्र परियोजना बाघ (1973) के अंतर्गत आता है, जहाँ बाघ संरक्षित क्षेत्र की घोषणा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V के अनुसार होती है और प्रबंधन दिशानिर्देश राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तय करता…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी (बाघ संरक्षण, संरक्षित क्षेत्र, वन्यजीव कानून) | GS Paper III — सतत विकास और पारिस्थितिकी-पर्यटन (Ecotourism)
- Prelims: परियोजना बाघ (Project Tiger), वर्ष 1973, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority — NTCA), वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V — बाघ संरक्षित क्षेत्र की घोषणा, कोर क्षेत्र (Core Area) और बफर क्षेत्र (Buffer Area) का अंतर, मेलानिस्टिक बाघ (Melanistic Tiger) — सिमिलीपाल की विशिष्टता, यूनेस्को का मानव और जीवमंडल कार्यक्रम (MAB) तथा जैवमंडल रिजर्व, सिमिलीपाल से निकलने वाली नदियाँ — बूढ़ाबलंगा और सालंदी, चौसिंघा या चार सींग वाला मृग (Four-horned Antelope)
- Essay: संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन: क्या पारिस्थितिकी-पर्यटन सतत विकास का प्रभावी माध्यम हो सकता है?, वन्यजीव संरक्षित क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका के अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: सिमिलीपाल बाघ संरक्षित क्षेत्र परियोजना बाघ (1973) के अंतर्गत आता है, जहाँ बाघ संरक्षित क्षेत्र की घोषणा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V के अनुसार होती है और प्रबंधन दिशानिर्देश राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण तय करता है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलीपाल बाघ संरक्षित क्षेत्र (Similipal Tiger Reserve) को 29 जून से मानसून के कारण पर्यटकों के लिए बंद रखा गया था। अब क्षेत्र के फील्ड डायरेक्टर द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इसे 1 नवंबर से पर्यटकों के लिए पुनः खोला जाएगा। अधिसूचना में प्रतिदिन अधिकतम 60 वाहनों को अनुमति देने, न्यूनतम 180 मिलीमीटर भू-निकासी (Ground Clearance) वाले वाहनों के प्रयोग, गाइड की अनिवार्यता, प्रवेश और निकास के समय, ऑनलाइन परमिट तथा पहचान-पत्र और लिखित वचनबंध की शर्तें निर्धारित की गई हैं। खुली जीप सफारी और लॉज में ठहरने की बुकिंग के लिए पारिस्थितिकी-पर्यटन की वेबसाइट का उपयोग करने का प्रावधान भी किया गया है। यह निर्णय संरक्षित क्षेत्र के प्रबंधन में पर्यटन-नियमन के व्यावहारिक स्वरूप को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- सिमिलीपाल लगभग 2,750 वर्ग किलोमीटर में फैला है और इसमें पौधों की विविधता के साथ 96 प्रकार की ऑर्किड प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ स्तनधारियों की 42, पक्षियों की 242 और सरीसृपों की 30 श्रेणियाँ दर्ज हैं।
- भारत में बाघ संरक्षण की प्रमुख पहल परियोजना बाघ (Project Tiger) है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1973 में हुई थी। सिमिलीपाल को इसी ढाँचे के अंतर्गत बाघ संरक्षित क्षेत्र के रूप में संरक्षित किया गया।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में वर्ष 2006 के संशोधन द्वारा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का वैधानिक गठन किया गया और बाघ संरक्षित क्षेत्रों की घोषणा के प्रावधान जोड़े गए।
- सिमिलीपाल को यूनेस्को के मानव और जीवमंडल कार्यक्रम के अंतर्गत जैवमंडल रिजर्व के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिससे इसका महत्व वैश्विक स्तर पर भी स्थापित होता है।
- मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन और आवागमन, सड़कों की स्थिति तथा सुरक्षा कारणों से कई संरक्षित क्षेत्र अस्थायी रूप से पर्यटकों के लिए बंद रहते हैं।
बाघ संरक्षित क्षेत्र (Tiger Reserve) क्या है?
- बाघ संरक्षित क्षेत्र वह विशेष संरक्षित वन क्षेत्र है जिसे बाघों के आवास और उनकी संख्या के संरक्षण के लिए घोषित किया जाता है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38V के अंतर्गत राज्य सरकार राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की संस्तुति पर बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित करती है।
- इसे दो भागों में बाँटा जाता है: कोर क्षेत्र, जहाँ मानवीय गतिविधियाँ सीमित रहती हैं, और बफर क्षेत्र, जहाँ सीमित और नियंत्रित उपयोग की अनुमति होती है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एक वैधानिक निकाय है, जो बाघ संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश और मानक तय करता है।
- पारिस्थितिकी-पर्यटन (Ecotourism) का उद्देश्य पर्यटन से होने वाली आय को संरक्षण और स्थानीय आजीविका से जोड़ना है, ताकि आवास पर दबाव कम हो।
- जैवमंडल रिजर्व (Biosphere Reserve) मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का मॉडल है, जिसमें संरक्षण, विकास और शोध के क्षेत्र अलग-अलग होते हैं।
- सिमिलीपाल की मेलानिस्टिक बाघ जैसी दुर्लभ आनुवंशिक विशेषता इसे देश के अन्य बाघ संरक्षित क्षेत्रों से अलग पहचान देती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| स्थिति और विस्तार | ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य (Similipal Tiger Reserve) लगभग 2,750 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह परियोजना बाघ (Project Tiger) के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। |
| पुनः खुलने की तिथि और अवधि | मानसून के कारण 29 जून से बंद यह अभयारण्य 1 नवंबर से पर्यटकों के लिए खुलेगा। बंदी की अवधि मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन और आवास की सुरक्षा से जुड़ी है। |
| दैनिक वाहन सीमा | प्रतिदिन अधिकतम 60 वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी, और वाहन की न्यूनतम भूमि-निकासी (Ground Clearance) 180 मिमी होनी चाहिए। यह सीमा क्षेत्र की वहन क्षमता (Carrying Capacity) के प्रबंधन का साधन है। |
| प्रवेश और समय-सारणी | जशीपुर गेट से प्रातः 5 बजे से 9 बजे तक तथा पीठाबाटा प्रवेश बिंदु से प्रातः 8 बजे से 9 बजे तक प्रवेश होगा। जोरंडा और बड़ेहीपानी जलप्रपात से सायं 4 बजे तक लौटना और 6 बजे तक बाहर निकलना अनिवार्य है। |
| जैव विविधता | यहाँ 96 प्रकार की ऑर्किड, 42 स्तनधारी, 242 पक्षी और 30 प्रकार के सरीसृप मिलते हैं। दुर्लभ मेलानिस्टिक बाघ (Melanistic Tiger) इसकी विशिष्ट पहचान है। |
| ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था | प्रवेश परमिट www.similipal.org से और ओपन-जीप सफारी तथा लॉज आरक्षण www.ecotourodisha.com से हो सकता है। डिजिटल माध्यम से पारदर्शिता और प्रवेश का नियंत्रित प्रबंधन सुनिश्चित होता है। |
महत्व
पारिस्थितिक (Ecological) महत्व
- बाघ अभयारण्य में बाघ, तेंदुए, एशियाई हाथी और गौर जैसे प्रमुख जीव रहते हैं, जो खाद्य श्रृंखला के संतुलन के लिए आवश्यक हैं।
- मानसून के बाद पर्यटन को सीमित और नियंत्रित रखने से वन्यजीवों के आवास में अनावश्यक व्यवधान कम होता है।
- ऊँचे वनस्पति आवरण और ऑर्किड की विविधता से यह क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनता है।
आर्थिक (Economic) महत्व
- नियंत्रित इको-टूरिज़्म (Eco-tourism) से स्थानीय रोज़गार, गाइड सेवाएँ, परिवहन और लॉज व्यवसाय को आय मिलती है।
- पर्यटन शुल्क और परमिट से प्राप्त राजस्व का उपयोग संरक्षण गतिविधियों में किया जा सकता है, जिससे संरक्षण और आजीविका में संतुलन बनता है।
प्रशासनिक और शासन (Governance) महत्व
- प्रवेश समय, वाहन सीमा, गाइड की अनिवार्यता और लिखित वचनबद्धता जैसे नियम बाघ अभयारण्य के प्रबंधन की वैधानिक प्रक्रिया को दर्शाते हैं।
- नियमों के उल्लंघन पर विधि के अनुसार दंड का प्रावधान प्रवर्तन (Enforcement) की जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
चुनौतियाँ
1. वहन क्षमता बनाम पर्यटन दबाव
- सीमित प्रवेश के बावजूद त्योहारी और अवकाश अवधि में माँग बढ़ने पर वाहनों का दबाव और अवैध प्रवेश की आशंका रहती है।
- 60 वाहनों की सीमा का कठोर पालन न होने पर वन्यजीवों के आवास और शिकार व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण
2. मानसून-कालीन बंदी का पारिस्थितिक औचित्य
- मानसून में वन्यजीवों के प्रजनन और शावकों के विकास की अवधि में मानवीय हस्तक्षेप से तनाव बढ़ सकता है।
- बंदी की अवधि और पुनः खुलने की तिथि का निर्णय मौसमी पारिस्थितिक आँकड़ों पर आधारित होना चाहिए, जिसका वैज्ञानिक आधार स्पष्ट रहे।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: वन्यजीव संरक्षण और मौसमी पारिस्थितिक चक्र
3. स्थानीय समुदाय और आजीविका का संतुलन
- संरक्षित क्षेत्र के भीतर और आसपास रहने वाले आदिवासी और वनाश्रित समुदायों के वन-अधिकार और आजीविका के प्रश्न जुड़े रहते हैं।
- पर्यटन से होने वाला लाभ स्थानीय लोगों तक न पहुँचे तो संरक्षण के प्रति जनसहभागिता कमज़ोर हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय और शासन: अनुसूचित जनजाति कल्याण तथा वन-अधिकार अधिनियम, 2006
4. डिजिटल पहुँच और समावेशन
- परमिट और सफारी की ऑनलाइन बुकिंग से तकनीकी साक्षरता और इंटरनेट पहुँच न रखने वाले लोग वंचित हो सकते हैं।
- आरक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी होने के बावजूद स्थानीय गाइड और छोटे व्यवसायियों की भागीदारी सीमित रह सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन और ई-गवर्नेंस: डिजिटल सेवाओं में समावेशन
5. नियम-पालन और प्रवर्तन
- गाइड की अनिवार्यता, निश्चित समय-सीमा और जलप्रपात से लौटने के नियमों का निगरानी तंत्र प्रभावी होना आवश्यक है।
- दूरस्थ प्रवेश बिंदुओं पर कर्मचारियों की कमी से नियमों का व्यावहारिक पालन कठिन हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: प्रशासनिक प्रवर्तन और वन्यजीव अपराध नियंत्रण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| वहन क्षमता | वाहनों की सीमा का उल्लंघन वन्यजीव आवास और शिकार व्यवहार पर दबाव डाल सकता है। |
| मानसून-कालीन संरक्षण | प्रजनन काल में मानवीय हस्तक्षेप से तनाव और शावकों की सुरक्षा पर जोखिम बढ़ सकता है। |
| मानव-वन्यजीव संघर्ष | बाघ अभयारण्य के आसपास के गाँवों में पशुधन हानि और फसल क्षति से स्थानीय असंतोष उत्पन्न हो सकता है। |
| आजीविका और लाभ-वितरण | पर्यटन आय का स्थानीय समुदाय तक न्यायसंगत पहुँचना संरक्षण में जनसहभागिता के लिए आवश्यक है। |
| डिजिटल समावेशन | ऑनलाइन परमिट प्रणाली से तकनीक-वंचित वर्ग की पहुँच सीमित हो सकती है। |
| नियम-प्रवर्तन | दूरस्थ प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी की कमी से नियमों का पालन कमज़ोर पड़ सकता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger)
आगे की राह
- वाहन सीमा और प्रवेश समय का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी और प्रवेश-निकास के रिकॉर्ड का समन्वित उपयोग किया जाए।
- पर्यटन की वहन क्षमता का वैज्ञानिक अध्ययन करके मौसमी और त्योहारी अवधि के लिए अनुकूल सीमा निर्धारित की जाए।
- स्थानीय आदिवासी और वनाश्रित समुदायों को गाइड, लॉज और सफारी सेवाओं में प्राथमिकता देकर पर्यटन आय का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित किया जाए।
- वन-अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम सभाओं के साथ परामर्श की प्रक्रिया को सुदृढ़ किया जाए।
- ऑनलाइन बुकिंग के साथ ऑफ़लाइन प्रवेश सुविधा और सहायता केंद्र उपलब्ध कराए जाएँ, ताकि डिजिटल अंतर से कोई वंचित न रहे।
- गाइड प्रशिक्षण और वन्यजीव शिष्टाचार (Wildlife Etiquette) पर जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाएँ।
- आसपास के गाँवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की निगरानी और त्वरित क्षतिपूर्ति की व्यवस्था मज़बूत की जाए।
- पर्यटन से प्राप्त राजस्व का एक भाग संरक्षण और वन्यजीव आवास विकास में लगाने की पारदर्शी नीति अपनाई जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
बाघ आरक्षित क्षेत्र (Tiger Reserve) · परियोजना बाघ (Project Tiger) · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) · जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) · पारिस्थितिकी पर्यटन (Ecotourism) · वहन क्षमता (Carrying Capacity) · वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Forest Rights Act, 2006) · पर्यावास-पृथक्करण (Habitat Fragmentation) · सह-अस्तित्व (Coexistence) · सामुदायिक वन-प्रबंधन (Community Forest Management) · संरक्षित क्षेत्र (Protected Area)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 48A — राज्य का पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का दायित्व
- अनुच्छेद 51A(g) — प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मूल कर्तव्य
अवधारणा प्रवाह
मानसून में वन्यजीव प्रजनन और आवास सुरक्षा के लिए 29 जून से अभयारण्य बंद किया गया। → पारिस्थितिक स्थिति सामान्य होने पर 1 नवंबर से पुनः पर्यटन की अनुमति का निर्णय लिया गया। → प्रतिदिन 60 वाहनों की सीमा, प्रवेश समय और गाइड की अनिवार्यता से वहन क्षमता का नियंत्रण किया गया। → ऑनलाइन परमिट और लिखित वचनबद्धता से प्रवेश का पंजीकरण और जवाबदेही सुनिश्चित हुई। → नियम-उल्लंघन पर विधि के अनुसार दंड से प्रवर्तन सुदृढ़ होता है, जिससे संरक्षण और इको-टूरिज़्म दोनों का संतुलन बनता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. परियोजना बाघ (Project Tiger) का शुभारंभ वर्ष 1973 में हुआ था। 2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में 2006 के संशोधन के माध्यम से एक वैधानिक निकाय के रूप में गठित किया गया। 3. ओडिशा का सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान और बाघ आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को के मानव एवं जीवमंडल (MAB) कार्यक्रम के अंतर्गत जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के रूप में मान्य है। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: तीनों — कथन 1 सही है: परियोजना बाघ 1973 में आरंभ हुई। कथन 2 सही है: NTCA की स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में 2006 के संशोधन द्वारा की गई और यह बाघ संरक्षण की सर्वोच्च वैधानिक संस्था है। कथन 3 सही है: सिमलीपाल को 2009 में यूनेस्को के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया। अतः तीनों कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए: अभिकथन (A): सिमलीपाल एक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है। कारण (R): जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में कोर क्षेत्र, बफर क्षेत्र और संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone) होते हैं। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
- A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, किंतु R गलत है।
- A गलत है, किंतु R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है। — A सही है, क्योंकि सिमलीपाल यूनेस्को के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में सम्मिलित है। R भी सही है, क्योंकि जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का त्रि-स्तरीय क्षेत्रीकरण होता है। परंतु R केवल संरचना बताता है, यह नहीं बताता कि सिमलीपाल को जैवमंडल का दर्जा क्यों मिला; इसलिए R, A की व्याख्या नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ बाघ आरक्षित क्षेत्रों को मानसून के बाद पर्यटकों के लिए पुनः खोलने का निर्णय संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन की व्यावहारिक परीक्षा है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और परियोजना बाघ के ढाँचे के आधार पर आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए कि प्रवेश-सीमा, वाहन-मानक और गाइड की अनिवार्यता जैसे नियमन बाघ संरक्षण के उद्देश्य को किस सीमा तक पूरा करते हैं। साथ ही स्पष्ट कीजिए कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के संदर्भ में ऐसे प्रतिबंध स्थानीय वनवासी समुदायों के अधिकारों के साथ कहाँ तक न्यायसंगत ठहरते हैं। (15 Marks)
रूपरेखा: 1. भूमिका: सिमलीपाल (मयूरभंज, ओडिशा) का बाघ आरक्षित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित होना, 2,750 वर्ग किमी में फैला होना, मानसून (जून) से बंद रहना और अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के अनुसार 1 नवंबर से पुनः खुलना; अधिसूचना के मुख्य नियम (प्रतिदिन अधिकतम 60 वाहन, न्यूनतम 180 मिमी भू-निकासी, गाइड अनिवार्य, प्रवेश समय-सीमा, ऑनलाइन परमिट, पहचान-पत्र और लिखित वचनबद्धता) का उल्लेख। 2. संवैधानिक-वैधानिक ढाँचा: अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण का राज्य का नीति-निदेशक तत्व) और अनुच्छेद 51A(छ) (प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का मौलिक कर्तव्य); वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में 2006 का संशोधन जिससे NTCA बना और बाघ आरक्षित क्षेत्र के कोर (क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट) और बफर क्षेत्रों का प्रावधान (धारा 38V); परियोजना बाघ (1973) का उद्देश्य। 3. नियमनों का आलोचनात्मक विश्लेषण: (क) प्रवेश-सीमा और वहन क्षमता (Carrying Capacity) की अवधारणा, प्रतिदिन वाहनों की सीमा का तर्क, ऑनलाइन बुकिंग से पारदर्शिता; (ख) गाइड की अनिवार्यता और समय-प्रतिबंध (सुबह 5 से 9, झरनों से 4 बजे तक) का व्यावहारिक प्रभाव, जैसे रात्रिचर और प्रजनन-काल में व्यवधान; (ग) पारिस्थितिकी पर्यटन (Ecotourism) की सीमाएँ: राजस्व-आधारित दबाव बनाम संरक्षण-लक्ष्य; (घ) प्रवर्तन: नियम-उल्लंघन पर दंड का प्रावधान और निगरानी की क्षमता। 4. वन अधिकार अधिनियम, 2006 का संदर्भ: धारा 4(2) के अंतर्गत बाघ आरक्षित क्षेत्र के ‘क्रिटिकल वाइल्डलाइफ हैबिटेट’ से विस्थापन की शर्तें (वैज्ञानिक प्रमाण, ग्राम सभा की सहमति, पुनर्वास); मानकीय बहस: संरक्षणवादी (जैसे पर्यावरण-केंद्रित दृष्टि) बनाम वनवासी अधिकार-आधारित दृष्टि; सह-अस्तित्व (Coexistence) और सामुदायिक वन-प्रबंधन का मॉडल; सिमलीपाल के आदिवासी समुदायों तथा मानकीर्डिया जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की आजीविका पर पर्यटन-प्रतिबंधों का प्रभाव। 5. समकालीन आयाम: पर्यटन से स्थानीय रोज़गार (गाइड, लॉज, वाहन-चालक) और उनका संरक्षण-सहभागिता से संबंध; बाघ संख्या-वृद्धि के नीतिगत लक्ष्यों के संदर्भ में पर्यटन-नियमन की भूमिका। 6. निष्कर्ष: नियमन आवश्यक हैं, पर उनकी वैधता तभी है जब वे वैज्ञानिक वहन-क्षमता, ग्राम सभा की सहभागिता और लाभ-साझेदारी से संचालित हों; संतुलित, बहु-हितधारक दृष्टिकोण से ही संरक्षण और आजीविका दोनों सुरक्षित रह सकते हैं।
स्रोत: orissapost.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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