26 Oct केरल में कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन करेगी राज्यस्तरीय इकाई

✎ अल नीनो जैसी जलवायु प्रवृत्तियों से कृषि को बचाने के लिए समय पर पूर्व चेतावनी और अंतर-विभागीय समन्वय (SDMA, कृषि विभाग और NABARD) अनिवार्य है, क्योंकि कृषि राज्य सूची का विषय है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन (जलवायु परिवर्तन, अल नीनो और आपदा जोखिम न्यूनीकरण) | GS Paper III — कृषि (फसल प्रणाली, जोखिम प्रबंधन और जलवायु-सहिष्णु कृषि) | GS Paper II — शासन (केंद्र-राज्य समन्वय, संघीय ढाँचे में राज्य की भूमिका और अंतर-विभागीय तंत्र)
- Prelims: अल नीनो (El Niño), ENSO (El Niño-Southern Oscillation), ला नीना (La Niña), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005, NABARD (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक), राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC), राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवोन्मेष परियोजना (NICRA), सातवीं अनुसूची की राज्य सूची, प्रविष्टि 14 (कृषि)
- Essay: जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि की सहनशीलता: अनुकूलन रणनीति और संस्थागत तंत्र, संघवाद और जलवायु शासन: राज्य स्तरीय पहलों की भूमिका और सीमाएँ
त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो जैसी जलवायु प्रवृत्तियों से कृषि को बचाने के लिए समय पर पूर्व चेतावनी और अंतर-विभागीय समन्वय (SDMA, कृषि विभाग और NABARD) अनिवार्य है, क्योंकि कृषि राज्य सूची का विषय है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल सरकार ने कृषि मंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में राज्य स्तरीय निगरानी इकाई गठित करने का निर्णय लिया है। इस इकाई में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), NABARD सहित विभिन्न सरकारी विभाग और एजेंसियाँ शामिल होंगी, जो अल नीनो जैसी जलवायु प्रवृत्तियों के कृषि क्षेत्र पर प्रभाव का आकलन करेंगी और निवारक उपायों में समन्वय करेंगी। बैठक में अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाएँ बनाने तथा उपलब्ध वित्तीय स्रोतों के बेहतर समन्वय से उनके प्रभावी उपयोग पर भी सहमति बनी। यह कदम इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि कृषि पर जलवायु जोखिम का प्रभाव अब केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जल-प्रबंधन, ऋण, बीमा और आपदा राहत जैसे कई पहलू जुड़े हैं।
पृष्ठभूमि
- संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 14 में कृषि का विषय आता है, इसलिए कृषि नीति और उसका कार्यान्वयन मुख्यतः राज्यों की जिम्मेदारी है, जबकि वन और पर्यावरण संरक्षण समवर्ती सूची के विषय हैं।
- राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC), 2008 के अंतर्गत आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं, जिनमें राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) भी है। इस ढाँचे के तहत राज्यों से अपनी जलवायु कार्य योजनाएँ तैयार करने की अपेक्षा की गई थी।
- अल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। यह ENSO चक्र का गर्म चरण है, जबकि ला नीना इसका ठंडा चरण है।
- भारत में अल नीनो वाले वर्षों में प्रायः मानसून कमजोर होने और वर्षा के असमान वितरण से जुड़े जोखिम देखे गए हैं, जिससे खरीफ फसलों और जल-संसाधनों पर दबाव पड़ता है।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन योजना तैयार करने और उसके समन्वय का कार्य करता है। इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं।
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की राष्ट्रीय जलवायु अनुकूल कृषि नवोन्मेष परियोजना (NICRA), 2011 से जलवायु-सहिष्णु कृषि पर अनुसंधान और प्रदर्शन कार्य चल रहा है।
राज्य स्तरीय निगरानी इकाई और जलवायु प्रवृत्तियों का कृषि पर प्रभाव क्या है?
- राज्य स्तरीय निगरानी इकाई विभिन्न विभागों और एजेंसियों का एक समन्वित मंच है, जिसका उद्देश्य जलवायु प्रवृत्तियों, जैसे वर्षा, तापमान और मृदा नमी, की निगरानी कर कृषि पर संभावित प्रभाव का आकलन करना है।
- ऐसे मंच में सामान्यतः कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और मौसम संबंधी विभागों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। NABARD जैसी वित्तीय संस्थाओं की भागीदारी ऋण और बीमा से जुड़े निर्णयों में सहायक होती है।
- अल नीनो समुद्र और वायुमंडल की युग्मित प्रक्रिया है, जिसमें व्यापारिक पवनें कमजोर पड़ती हैं और गर्म जल पूर्व की ओर खिसकता है। इसका प्रभाव अनियमित अंतराल पर, प्रायः कई वर्षों के अंतराल से, दिखाई देता है।
- कृषि पर इसके प्रमुख प्रभाव सूखा, वर्षा का असमान वितरण, तापमान वृद्धि से फसल चक्र में बदलाव और कीट-रोग के प्रसार में वृद्धि के रूप में दिखते हैं।
- पूर्व चेतावनी मिलने पर किसान और प्रशासन बुवाई का समय, फसल का चयन, सिंचाई योजना और जल-संरक्षण के उपाय पहले से तय कर सकते हैं।
- अनुकूलन (Adaptation) में सूखा-सहिष्णु किस्में, फसल विविधीकरण और जल-संरक्षण आते हैं, जबकि शमन (Mitigation) का अर्थ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाना है। निगरानी इकाई मुख्यतः अनुकूलन से जुड़ी है।
- फसल बीमा, आपदा राहत और ऋण पुनर्गठन जैसे जोखिम-प्रबंधन उपाय राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर उपलब्ध हैं। निगरानी इकाई का मूल्य समय पर सूचना देने और इन उपायों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने में है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्त्व |
|---|---|
| राज्य-स्तरीय निगरानी इकाई (State-level monitoring unit) | एल नीनो (El Niño) जैसी जलवायु प्रवृत्तियों के कृषि पर प्रभाव का राज्य स्तर पर आकलन करने हेतु एक समन्वित तंत्र बनाया जा रहा है। |
| बहु-विभागीय संरचना | कृषि, आपदा प्रबंधन और वित्तीय संस्थाओं को एक मंच पर लाकर नीति-निर्माण में विभागीय समन्वय सुनिश्चित किया जाता है। |
| राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) की भागीदारी | आपदा-पूर्व तैयारी और निवारक उपायों को कृषि नियोजन से जोड़ा जा रहा है, जिससे सूखे और अनावृष्टि जैसे जोखिमों का पूर्वानुमान और प्रबंधन बेहतर हो सके। |
| राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की भागीदारी | ग्रामीण ऋण और अवसंरचना वित्त में इसकी भूमिका को देखते हुए, जलवायु-अनुकूल कृषि परियोजनाओं के वित्तपोषण में समन्वय संभव होता है। |
| अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाएँ | तात्कालिक फसल-संरक्षण उपायों के साथ-साथ फसल प्रणाली, जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन (Adaptation) की दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर बल दिया गया है। |
| मौजूदा वित्तीय स्रोतों का बेहतर उपयोग | विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध धनराशि के दोहराव से बचकर संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। |
महत्व
आर्थिक महत्त्व
- कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण आजीविका का मुख्य आधार है। मानसून की अनिश्चितता से उत्पादन में गिरावट सीधे किसानों की आय और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को प्रभावित करती है।
- एल नीनो के वर्षों में समय से पहले पूर्वानुमान मिलने पर बीज, उर्वरक और सिंचाई के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकती है, जिससे फसल-हानि की लागत घटती है।
- नाबार्ड जैसी संस्थाओं के समन्वय से ऋण-वितरण और ऋण-पुनर्गठन की नीति को जलवायु जोखिम से जोड़ा जा सकता है।
पर्यावरणीय एवं संसाधन महत्त्व
- जल संसाधनों के सतत उपयोग, भू-जल पुनर्भरण और मृदा स्वास्थ्य पर जलवायु प्रवृत्तियों के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन इस इकाई के कार्यक्षेत्र में आता है।
- फसल-विविधीकरण और कम जल-उपभोग वाली फसलों की ओर संक्रमण, जलवायु परिवर्तन के शमन (Mitigation) और अनुकूलन (Adaptation) दोनों में सहायक है।
शासन एवं प्रशासनिक महत्त्व
- आपदा प्रबंधन और कृषि जैसे दो अलग विषयों के बीच संस्थागत सेतु बनने से नीति-क्रियान्वयन में विभागीय बिखराव कम होता है।
- साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि निगरानी इकाई के आंकड़े भविष्य के नियोजन का आधार बन सकते हैं।
संघीय परिप्रेक्ष्य
- कृषि राज्य सूची का विषय होने के कारण राज्य स्तर पर पहल स्वाभाविक है। साथ ही, राज्य की सीमाओं से परे फैली जलवायु प्रवृत्तियों के लिए केंद्र और अन्य राज्यों के साथ समन्वय भी आवश्यक होता है।
चुनौतियाँ
1. पूर्वानुमान की सीमाएँ
- एल नीनो और मानसून के पूर्वानुमान में अनिश्चितता बनी रहती है। स्थानीय स्तर पर वर्षा के वितरण का सटीक अनुमान लगाना कठिन होता है।
- राज्य स्तर का आंकड़ा-संग्रह मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) के डेटा पर निर्भर रहता है, इसलिए उसकी उपलब्धता और गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
यूपीएससी लिंक: जलवायु परिवर्तन और भारतीय मानसून; आपदा प्रबंधन
2. विभागीय समन्वय का अभाव
- कृषि, जल संसाधन, राजस्व और आपदा प्रबंधन विभागों के अलग-अलग लक्ष्य और कार्य-प्रणालियाँ होती हैं, जिससे निर्णयों में विलंब हो सकता है।
- निगरानी इकाई की जवाबदेही, नियमित बैठकों की प्रक्रिया और निर्णयों के अनुपालन की व्यवस्था स्पष्ट न होने पर यह तंत्र औपचारिक बनकर रह सकता है।
यूपीएससी लिंक: सहकारी संघवाद; शासन में समन्वय तंत्र
3. वित्तीय संसाधनों का विखंडित उपयोग
- जलवायु-संबंधी धन विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं, राष्ट्रीय आपदा प्रत्युत्तर कोष और बैंकिंग स्रोतों में बिखरा रहता है।
- एक ही उद्देश्य के लिए अलग-अलग स्रोतों से धन मिलने पर दोहराव और अप्रयुक्त राशि की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध; सार्वजनिक वित्त
4. छोटे और सीमांत किसानों की संवेदनशीलता
- सिंचाई के साधनों और बीमा की पहुँच सीमित होने से छोटे किसान जलवायु झटकों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
- ऋण-बोझ और फसल-हानि का दुष्चक्र ग्रामीण ऋणग्रस्तता को बढ़ा सकता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि अर्थव्यवस्था; ग्रामीण ऋण और वित्तीय समावेशन
5. दीर्घकालिक अनुकूलन की चुनौती
- अल्पकालिक राहत उपायों और दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलावों के बीच संतुलन बनाना कठिन है।
- फसल-प्रतिरूप में परिवर्तन के लिए किसानों की जागरूकता, बाज़ार-व्यवस्था और तकनीकी सहायता आवश्यक है, जिसे लागू करना धीमा रहता है।
यूपीएससी लिंक: जलवायु अनुकूलन; सतत कृषि
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| समस्या | चिंता का विषय |
|---|---|
| पूर्वानुमान की अनिश्चितता | एल नीनो के प्रभाव का स्थानीय स्तर पर सटीक अनुमान कठिन होने से समय पर निर्णय लेने में बाधा। |
| विभागीय समन्वय | कृषि और आपदा प्रबंधन विभागों के बीच जवाबदेही स्पष्ट न होने से इकाई का प्रभाव सीमित रह सकता है। |
| वित्तीय संसाधनों का बिखराव | विभिन्न स्रोतों में धन का दोहराव या कम उपयोग होने से संसाधनों की क्षमता घटती है। |
| छोटे किसानों की असुरक्षा | सिंचाई और बीमा की सीमित पहुँच के कारण जलवायु झटकों से आय में गहरी गिरावट का खतरा। |
| दीर्घकालिक योजना का क्रियान्वयन | अल्पकालिक उपायों पर अधिक ध्यान रहने से संरचनात्मक अनुकूलन की प्रगति धीमी पड़ सकती है। |
आगे की राह
- निगरानी इकाई के लिए स्पष्ट संस्थागत ढाँचा, नियमित बैठक-कार्यक्रम और उत्तरदायी नोडल अधिकारी निर्धारित किए जाएँ।
- मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान, मृदा और जल-स्तर के आंकड़े तथा स्थानीय फसल-क्षति के आंकड़ों को एक एकीकृत डेटा-मंच पर लाया जाए।
- राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की आपदा-पूर्व योजनाओं में कृषि-विशिष्ट सूखा और अनावृष्टि के परिदृश्य शामिल किए जाएँ।
- जलवायु-अनुकूल फसल-प्रतिरूप, कम जल-उपभोग वाली फसलों और मृदा-संरक्षण की दीर्घकालिक योजना को स्थानीय कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार तैयार किया जाए।
- नाबार्ड जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर जलवायु-संवेदनशील परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण का एक समेकित खाका बनाया जाए, ताकि धन का दोहराव न हो।
- केंद्र और पड़ोसी राज्यों के साथ आंकड़ों और अनुभवों के आदान-प्रदान की व्यवस्था की जाए, क्योंकि जलवायु प्रवृत्तियाँ राज्य की सीमाओं तक सीमित नहीं रहतीं।
- किसानों तक पूर्वानुमान और सलाह समय पर पहुँचाने के लिए पंचायत और कृषि विस्तार तंत्र को सक्रिय किया जाए।
- इकाई की प्रगति का नियमित मूल्यांकन सार्वजनिक रिपोर्ट के माध्यम से किया जाए, ताकि नीति में सुधार संभव हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) · एल नीनो (El Niño) · राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority, SDMA) · आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act, 2005) · नाबार्ड (NABARD) · राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change, NAPCC) · राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (State Action Plan on Climate Change, SAPCC) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) · जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture) · अनुकूलन एवं शमन (Adaptation and Mitigation) · राज्य आपदा मोचन निधि (State Disaster Response Fund, SDRF) · वित्तीय समन्वय (Financial Coordination)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 162 — राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
- सातवीं अनुसूची, राज्य सूची की प्रविष्टि 14 — कृषि का राज्य विषय होना
- अनुच्छेद 275 — राज्यों को केंद्रीय सहायता अनुदान
अवधारणा प्रवाह
एल नीनो और अन्य जलवायु प्रवृत्तियों से मानसून की वर्षा में अनियमितता उत्पन्न होती है। → इस अनियमितता से सूखा, अनावृष्टि या असमय वर्षा जैसे जोखिम कृषि-उत्पादन को प्रभावित करते हैं। → राज्य सरकार बहु-विभागीय निगरानी इकाई गठित कर विभागों, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नाबार्ड को समन्वित करती है। → इकाई आंकड़ों के आधार पर अल्पकालिक राहत और दीर्घकालिक अनुकूलन योजनाएँ तैयार करती है। → उपलब्ध वित्तीय स्रोतों का समन्वित उपयोग होने से संसाधनों की क्षमता बढ़ती है। → परिणामस्वरूप किसानों की आय-सुरक्षा, फसल-हानि में कमी और सतत कृषि की दिशा में प्रगति होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल नीनो (El Niño) मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य गर्म होने की स्थिति है।
2. एल नीनो की स्थिति में प्रायः भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून की वर्षा कमज़ोर होने की प्रवृत्ति देखी जाती है।
3. भारतीय महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) का भारतीय मानसून पर कोई प्रभाव नहीं होता।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: एल नीनो में मध्य-पूर्वी विषुवतीय प्रशांत के सतही जल का तापमान सामान्य से ऊपर हो जाता है। कथन 2 सही है: इस स्थिति में वॉकर परिसंचरण कमज़ोर होता है, जिससे भारतीय मानसून की वर्षा प्रायः घटती है। कथन 3 गलत है, क्योंकि भारतीय महासागर द्विध्रुव भी मानसून की वर्षा को प्रभावित करने वाला एक महत्त्वपूर्ण कारक माना जाता है।
Q2. कथन (A): राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) की अध्यक्षता पदेन मुख्यमंत्री करता है।
कारण (R): आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 14 के अंतर्गत राज्य स्तर पर राज्य प्राधिकरण का गठन किया गया है, जिसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 14 राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के गठन और उसके अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री का प्रावधान करती है। अतः (R) वैध आधार देता है और (A) की सही व्याख्या है। आपदा प्रबंधन राज्य स्तर पर भी संस्थागत रूप से संचालित होता है, इसलिए यह कथन ठीक है।
Q3. निम्नलिखित संस्था/अवधारणा को उसके विवरण से सुमेलित कीजिए:
सूची-I
A. नाबार्ड (NABARD)
B. राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF)
C. राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC)
D. एल नीनो (El Niño)
सूची-II
1. प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य गर्म होने की प्राकृतिक घटना
2. आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय वित्तीय कोष
3. वर्ष 2008 में प्रस्तुत जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना
4. कृषि और ग्रामीण विकास के लिए शीर्ष विकास वित्तीय संस्था
सही सुमेलन चुनिए:
- A-4, B-2, C-3, D-1
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-4, B-3, C-2, D-1
- A-2, B-4, C-1, D-3
उत्तर: A-4, B-2, C-3, D-1 — नाबार्ड कृषि और ग्रामीण विकास हेतु शीर्ष विकास वित्तीय संस्था है (A-4)। SDRF आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत राज्य स्तरीय कोष है (B-2)। NAPCC वर्ष 2008 में प्रस्तुत हुई (C-3)। एल नीनो प्रशांत महासागर की सतही गर्मी से जुड़ी घटना है (D-1)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ केरल सरकार द्वारा जलवायु परिवर्तन के कृषि पर प्रभाव का आकलन करने हेतु राज्य-स्तरीय निगरानी इकाई के गठन का प्रस्ताव, संस्थागत समन्वय और वित्तीय स्रोतों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक कदम है। कृषि के राज्य विषय होने और आपदा प्रबंधन में केंद्र-राज्य साझेदारी को ध्यान में रखते हुए, इस प्रकार की राज्य-स्तरीय इकाइयों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि यदि ऐसी इकाइयों को वैधानिक आधार और पर्याप्त आँकड़ा-समन्वय न मिले, तो जलवायु-अनुकूल कृषि के लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON:
(1) प्रस्तावना: एल नीनो (El Niño) और अनियमित मानसून से फसल-चक्र पर पड़ता दबाव; समाचार का तथ्य: केरल में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), नाबार्ड सहित विभागों की संयुक्त निगरानी इकाई का प्रस्ताव, तथा अल्प-कालिक एवं दीर्घ-कालिक योजनाओं का निर्णय।
(2) संवैधानिक ढाँचा: कृषि सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 14) का विषय है, अतः राज्य की प्राथमिक भूमिका; अनुच्छेद 48 (कृषि एवं पशुपालन का आधुनिक आधार पर संगठन) और अनुच्छेद 48-क (पर्यावरण संरक्षण) का नीति-निर्देशक संदर्भ; अनुच्छेद 246 के अंतर्गत विषयों का विभाजन; आपदा प्रबंधन में केंद्र-राज्य समन्वय का प्रश्न।
(3) वैधानिक-संस्थागत आधार: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 14 (राज्य प्राधिकरण), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का ढाँचा, राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) तथा राज्य आपदा शमन निधि का उल्लेख; भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आँकड़े, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की भूमिका।
(4) नीति-ढाँचा: राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC, 2008) में सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन (NMSA); राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (SAPCC) के माध्यम से राज्य स्तर पर अनुकूलन और शमन की योजनाएँ; प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी जोखिम-वित्त व्यवस्थाएँ।
(5) पक्ष में तर्क: बहु-विभागीय समन्वय से एकीकृत आँकड़ा-प्रणाली, जिला-स्तरीय पूर्वानुमान का स्थानीयकरण, सहकारी संघवाद की भावना, निधियों का समन्वित उपयोग और दोहराव से बचाव।
(6) आलोचनात्मक पक्ष: वैधानिक शक्तियों का अभाव, संस्थाओं के बीच अधिकार-क्षेत्र का अस्पष्ट बँटवारा, आँकड़ों का खंडित होना, कार्यान्वयन-क्षमता और मानव संसाधन की कमी, योजनाओं का केवल कागज़ी बने रहना, तथा विशेषज्ञ परामर्श की सीमित भागीदारी।
(7) निष्कर्ष: संतुलित दृष्टि से निगरानी इकाई उपयोगी है, परंतु उसकी प्रभावशीलता के लिए स्पष्ट वैधानिक जनादेश, समयबद्ध आँकड़ा-साझेदारी, स्थानीय किसान-संस्थाओं की भागीदारी और उत्तरदायी निगरानी तंत्र आवश्यक है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best geography optional coaching
- Best geography optional coaching
- Best geography optional teacher
- Best geography optional teacher
- Odisha’s Godabarisha Yojana: Laptop Aid for Plus II Pass-outs - November 3, 2026
- पुणे मेट्रो का विस्तार: शहरी विकास और ईज ऑफ लिविंग में मील का पत्थर - November 3, 2026
- INS Sahyadri Concludes India-ROK Naval Exercise - November 3, 2026

No Comments