बक्सा टाइगर रिजर्व में वापसी: बिहार से आई बाघिन से शुरू हुआ नया अध्याय

बक्सा टाइगर रिजर्व में वापसी: बिहार से आई बाघिन से शुरू हुआ नया अध्याय

बक्सा टाइगर रिजर्व में वापसी: बिहार से आई बाघिन से शुरू हुआ नया अध्याय

बक्सा में बाघ पुनर्प्राप्ति प्रक्रियाआवास क्षरणदशकोंपुनर्प्राप्ति परियोजना2018 सेबाघिन छोड़ा गयाहाल ही मेंतीन और बाघअगले दो महीनेस्थिर आबादीलक्ष्य
बक्सा में बाघ पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया

✎ बुक्सा टाइगर रिज़र्व में बाघों का पुनर्वास भारत में बाघ संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा
  • Prelims: बुक्सा टाइगर रिज़र्व, वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), वन्यजीव संस्थान (WII), प्रोजेक्ट टाइगर, बाघ संरक्षण
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास, भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रयास

त्वरित पुनरावृत्ति: बुक्सा टाइगर रिज़र्व में बाघों का पुनर्वास भारत में बाघ संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व से एक बाघिन को पश्चिम बंगाल के बुक्सा टाइगर रिज़र्व में छोड़ा गया है। यह दशकों बाद बुक्सा में बाघों की स्थिर आबादी को फिर से स्थापित करने के लिए एक चरणबद्ध कार्यक्रम की शुरुआत का प्रतीक है। अगले दो महीनों में तीन और बाघों को बुक्सा में छोड़े जाने की योजना है, जो भारत में बाघ संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • बुक्सा टाइगर रिज़र्व को 1983 में एक बाघ रिज़र्व घोषित किया गया था और यह उत्तरी बंगाल का एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्य रहा है।
  • यह भूटान और असम के जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के साथ पारिस्थितिक संपर्क वाले एक बड़े पारिस्थितिक परिदृश्य का हिस्सा है।
  • दशकों से, आवास क्षरण और विखंडन, भूमि उपयोग में परिवर्तन और शिकार की उपलब्धता में गिरावट ने एक स्थिर बाघ आबादी को बनाए रखने के लिए आवश्यक पारिस्थितिक स्थितियों को प्रभावित किया था।
  • परिणामस्वरूप, रिज़र्व में एक स्थिर निवासी बाघ आबादी की लंबे समय तक अनुपस्थिति देखी गई थी।
  • 2018 से, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) के सहयोग से राज्य के बाघ संवर्धन और पुनर्प्राप्ति परियोजना को लागू किया गया है।
  • पुनर्प्राप्ति प्रयासों का समर्थन करने के लिए, अधिकारियों ने 800 से अधिक चीतलों को रिज़र्व में छोड़ा है और 2018 से लगभग 380 हेक्टेयर घास के मैदानों को बहाल या परिवर्तित किया है।
  • कैमरा ट्रैप ने 2021, 2023 और 2026 में परिदृश्य में बाघों की आवाजाही भी दर्ज की है, जिसमें असम के मानस टाइगर रिज़र्व से मेल खाने वाला एक बाघ भी शामिल है।

भारत में बाघ संरक्षण

  • भारत दुनिया की बाघ आबादी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है, जो इसे बाघ संरक्षण में एक वैश्विक नेता बनाता है।
  • भारत सरकार ने 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ लॉन्च किया, जो बाघों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक प्रमुख पहल है।
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जिसे बाघ संरक्षण को मजबूत करने के लिए 2006 में स्थापित किया गया था।
  • NTCA ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के कार्यान्वयन की देखरेख करता है और बाघ रिज़र्व के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।
  • भारत में 50 से अधिक अधिसूचित बाघ रिज़र्व हैं, जो बाघों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करते हैं।
  • बाघ संरक्षण के प्रयासों में आवास सुधार, शिकार आधार में वृद्धि, अवैध शिकार विरोधी उपाय और स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल है।
  • बाघों का पुनर्वास और स्थानांतरण एक महत्वपूर्ण संरक्षण रणनीति है, जिसका उद्देश्य बाघों की आबादी को उन क्षेत्रों में फिर से स्थापित करना है जहाँ वे ऐतिहासिक रूप से मौजूद थे लेकिन अब नहीं हैं।
  • बुक्सा टाइगर रिज़र्व में बाघों का पुनर्वास भारत के वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्य में एक व्यवहार्य और आत्मनिर्भर बाघ आबादी को बहाल करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
बाघिन का स्थानांतरण बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन को स्थानांतरित किया गया है, जो दशकों बाद बक्सा में बाघों की स्थायी आबादी को फिर से स्थापित करने की दिशा में पहला कदम है।
चरणबद्ध कार्यक्रम यह बक्सा में बाघों की आबादी को फिर से स्थापित करने के लिए एक चरणबद्ध कार्यक्रम की शुरुआत है, जिसमें अगले दो महीनों में तीन और बाघों को लाने की योजना है।
ऐतिहासिक महत्व बक्सा टाइगर रिजर्व उत्तरी बंगाल का एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्य रहा है, जिसे 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
पर्यावरणीय संबंध यह भूटान और असम के जंगलों तथा संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ाव के साथ एक बड़े पारिस्थितिक परिदृश्य का हिस्सा है।
पुनर्प्राप्ति के प्रयास 2018 से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से ‘टाइगर ऑग्मेंटेशन एंड रिकवरी प्रोजेक्ट’ लागू किया जा रहा है।
पर्यावास सुधार पुनर्प्राप्ति प्रयासों के तहत 800 से अधिक चीतल छोड़े गए हैं और लगभग 380 हेक्टेयर घास के मैदानों को बहाल या परिवर्तित किया गया है।

महत्व

पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण

  • यह पहल बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की आबादी को बहाल करने और भारत में बाघ संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।
  • यह भारत के वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्य में एक व्यवहार्य और आत्मनिर्भर बाघ आबादी को बहाल करना है।
  • बक्सा में बाघों की पुनर्प्राप्ति परिदृश्य स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके पारिस्थितिक संबंध पड़ोसी देशों और राज्यों के साथ हैं।

जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र

  • बाघों की वापसी से बक्सा के पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बहाल होगा, क्योंकि बाघ शीर्ष शिकारी के रूप में खाद्य श्रृंखला को विनियमित करने में मदद करते हैं।
  • यह क्षेत्र की समग्र जैव विविधता को बढ़ावा देगा और अन्य वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण में भी सहायक होगा।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था

  • बाघों की आबादी बढ़ने से वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर और आय के स्रोत बढ़ेंगे।
  • प्रस्तावित विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्र के विकास से क्षेत्र में पर्यटन को और गति मिलेगी।

चुनौतियाँ

1. पर्यावास का क्षरण और विखंडन

  • दशकों से पर्यावास का क्षरण (habitat degradation) और विखंडन (fragmentation) बक्सा में बाघों की स्थायी आबादी को बनाए रखने के लिए आवश्यक पारिस्थितिक स्थितियों को प्रभावित कर रहा है।

2. भूमि उपयोग में परिवर्तन

  • भूमि उपयोग में परिवर्तन ने बाघों के प्राकृतिक आवास और गलियारों को बाधित किया है, जिससे उनके आवागमन और प्रजनन में बाधा उत्पन्न हुई है।

3. शिकार की उपलब्धता में कमी

  • शिकार प्रजातियों की उपलब्धता में गिरावट ने बाघों के लिए पर्याप्त भोजन स्रोतों की कमी पैदा की है, जिससे उनकी आबादी के लिए खतरा पैदा हुआ है।

4. मानव-वन्यजीव संघर्ष

  • बाघों की आबादी बढ़ने के साथ मानव बस्तियों के करीब आने पर मानव-वन्यजीव संघर्ष (human-wildlife conflict) की संभावना बढ़ सकती है, जिससे दोनों पक्षों को खतरा हो सकता है।

5. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • विभिन्न राज्यों (बिहार, पश्चिम बंगाल, असम) और भूटान के साथ पारिस्थितिक संबंधों को देखते हुए प्रभावी संरक्षण के लिए अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय समन्वय आवश्यक है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
स्थानीय आबादी की स्वीकृति बाघों की वापसी से स्थानीय समुदायों के बीच संभावित संघर्ष या भय को प्रबंधित करना।
पर्याप्त शिकार आधार पुनर्स्थापित बाघों के लिए पर्याप्त और स्थायी शिकार आधार सुनिश्चित करना।
अवैध शिकार और सुरक्षा बाघों को अवैध शिकार से बचाना और रिजर्व में प्रभावी सुरक्षा उपाय लागू करना।
आनुवंशिक विविधता पुनर्स्थापित आबादी में आनुवंशिक विविधता बनाए रखना ताकि दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित हो सके।
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जलवायु परिवर्तन के कारण पर्यावास में होने वाले संभावित परिवर्तनों के लिए अनुकूलन।

आगे की राह

  • बाघों के लिए पर्याप्त शिकार आधार सुनिश्चित करने हेतु शाकाहारी प्रजातियों की आबादी को बढ़ाना।
  • पर्यावास की गुणवत्ता में सुधार के लिए वनीकरण, घास के मैदानों का जीर्णोद्धार और जल स्रोतों का प्रबंधन जारी रखना।
  • अवैध शिकार को रोकने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गश्त और निगरानी को मजबूत करना।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाना।
  • बाघों की आबादी और उनके व्यवहार की निगरानी के लिए वैज्ञानिक तकनीकों जैसे कैमरा ट्रैप और रेडियो-टैगिंग का उपयोग करना।
  • पड़ोसी राज्यों और देशों के साथ समन्वय स्थापित करना ताकि एक बड़े पारिस्थितिक परिदृश्य में बाघों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।
  • पर्यटन के बुनियादी ढांचे का सतत विकास करना ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ हो और संरक्षण प्रयासों को समर्थन मिले।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

बाघ संरक्षण · बुक्सा टाइगर रिजर्व · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण · वन्यजीव संरक्षण अधिनियम · पर्यावास बहाली · पारिस्थितिक गलियारे · प्रजाति पुनर्स्थापन · जैव विविधता संरक्षण · जलवायु परिवर्तन · सतत पर्यटन · संरक्षण नीतियां · सामुदायिक भागीदारी

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘टिप्पणी’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन’}
  • {‘अनुच्छेद’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘टिप्पणी’: ‘वन्यजीवों के प्रति दया रखना’}

अवधारणा प्रवाह

बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों की अनुपस्थिति  →  पर्यावास क्षरण और शिकार की कमी  →  टाइगर ऑग्मेंटेशन एंड रिकवरी प्रोजेक्ट की शुरुआत  →  बाघिन का स्थानांतरण और पुनर्वास  →  बक्सा में बाघों की आबादी की बहाली  →  जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी मध्य प्रदेश में पाई जाती है।
2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है।
3. प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1973 में हुई थी।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। मध्य प्रदेश में भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी है। कथन 2 सही है। NTCA वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। कथन 3 सही है। प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1973 में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत में बाघों और उनके आवासों का संरक्षण करना था।

Q2. बुक्सा टाइगर रिजर्व (Buxa Tiger Reserve) भारत के किस राज्य में स्थित है?

  1. असम
  2. पश्चिम बंगाल
  3. बिहार
  4. ओडिशा

उत्तर: पश्चिम बंगाल — बुक्सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है। यह उत्तरी बंगाल के महत्वपूर्ण बाघ परिदृश्यों में से एक है।

Q3. अभिकथन (A): बाघों का पुनर्स्थापन जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
कारण (R): बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर हैं और उनके संरक्षण से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होता है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि बाघों का पुनर्स्थापन जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। कारण (R) भी सही है क्योंकि बाघ एक शीर्ष शिकारी (apex predator) के रूप में पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक होते हैं और उनके संरक्षण से पूरे खाद्य जाल को लाभ होता है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में बाघ संरक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए और बुक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन कार्यक्रम के संदर्भ में इसके समक्ष आने वाली चुनौतियों और संभावित समाधानों का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में बाघों की स्थिति और उनके संरक्षण के महत्व का संक्षिप्त परिचय। (जैसे – प्रोजेक्ट टाइगर, NTCA की भूमिका)
2. बाघ संरक्षण का महत्व: पारिस्थितिकी तंत्र में बाघों की भूमिका (शीर्ष शिकारी, पारिस्थितिकी तंत्र का स्वास्थ्य), जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और जलवायु परिवर्तन शमन में योगदान।
3. बुक्सा टाइगर रिजर्व में पुनर्स्थापन कार्यक्रम: बुक्सा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, बाघों की अनुपस्थिति के कारण (पर्यावास क्षरण, शिकार की कमी), वर्तमान पुनर्स्थापन पहल (वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बाघिन का स्थानांतरण, घास के मैदानों का जीर्णोद्धार, शिकार आधार का संवर्धन)।
4. चुनौतियाँ: पर्यावास विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष, अवैध शिकार, शिकार आधार की कमी, स्थानीय समुदायों का विस्थापन, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, अपर्याप्त निगरानी और प्रबंधन।
5. संभावित समाधान: वैज्ञानिक प्रबंधन योजनाएँ, सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता कार्यक्रम, पारिस्थितिक गलियारों का विकास, पर्यावास बहाली, शिकार आधार का संवर्धन, उन्नत निगरानी तकनीकें (कैमरा ट्रैप, ड्रोन), अंतर-राज्यीय सहयोग, सतत पर्यटन को बढ़ावा देना, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का प्रभावी कार्यान्वयन।

स्रोत: The Indian Express


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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