31 Oct राज्यों को केंद्र से मिला ₹1,09,019 करोड़ का कर हस्तांतरण: जानें कैसे बढ़ेगी पूंजीगत खर्च
✎ अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघीय करों का विभाज्य पूल राज्यों में बाँटा जाता है, जिसका हिस्सा और मानदंड अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग तय करता है; कर हस्तांतरण संवैधानिक दायित्व है, जबकि अग्रिम किस्त केवल उसके भुगतान का समय बदलती है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, राजकोषीय संघवाद, सार्वजनिक वित्त, पूंजीगत व्यय) | GS Paper II — राजव्यवस्था (संघीय व्यवस्था, संवैधानिक वित्तीय प्रावधान, वित्त आयोग)
- Prelims: विभाज्य पूल (Divisible Pool), अनुच्छेद 270 (Article 270) — संघीय करों का राज्यों में वितरण, अनुच्छेद 280 (Article 280) — वित्त आयोग का गठन और कार्य, 16वाँ वित्त आयोग (16th Finance Commission), कार्यकाल 2026-31, अनुच्छेद 275 — सहायक अनुदान (Grants-in-aid), समेकित निधि (Consolidated Fund of India), अनुच्छेद 266, पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता (SASCI), ऊर्ध्वाधर बनाम क्षैतिज कर-वितरण
- Essay: राजकोषीय संघवाद: सहयोगात्मक संघवाद की संवैधानिक आधारशिला और उसकी चुनौतियाँ, पूंजीगत व्यय बनाम राजस्व व्यय: राज्यों के विकास में वित्तीय हस्तांतरण की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघीय करों का विभाज्य पूल राज्यों में बाँटा जाता है, जिसका हिस्सा और मानदंड अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग तय करता है; कर हस्तांतरण संवैधानिक दायित्व है, जबकि अग्रिम किस्त केवल उसके भुगतान का समय बदलती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने राज्यों को ₹1,09,019 करोड़ की राशि कर हस्तांतरण की अग्रिम किस्त के रूप में जारी की है। यह राशि निर्धारित समय से पहले दी गई है, ताकि त्योहारी मौसम में राज्यों की नकदी आवश्यकताएँ पूरी हों और वे पूंजीगत व्यय को गति दे सकें। इस कदम को संवैधानिक ढांचे में राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और उनके विकास-व्यय की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। समाचार का केंद्रीय बिंदु यह है कि कर हस्तांतरण एक संवैधानिक दायित्व है, जिसकी दर और मानदंड वित्त आयोग तय करता है, जबकि अग्रिम किस्त उसके भुगतान के समय में लचीलेपन की व्यवस्था है।
पृष्ठभूमि
- संविधान के अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ द्वारा लगाए और संग्रहित करों की शुद्ध प्राप्तियों का एक निश्चित हिस्सा राज्यों को दिया जाता है। इस हिस्से का निर्धारण अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग करता है।
- 14वें वित्त आयोग ने राज्यों का हिस्सा 42 प्रतिशत तय किया था। 15वें वित्त आयोग ने इसे 41 प्रतिशत रखा, जिसमें पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन से जुड़े समायोजन का प्रभाव था।
- 16वाँ वित्त आयोग 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए गठित है। इसकी सिफारिशें आगामी पाँच वर्षों के कर-हस्तांतरण ढांचे का आधार बनेंगी।
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद राज्यों के कर-राजस्व का एक बड़ा भाग केंद्रीय कर-संरचना के भीतर आया। इसके समन्वय के लिए अनुच्छेद 279A के तहत जीएसटी परिषद (GST Council) का प्रावधान किया गया है।
- राज्यों के पूंजीगत व्यय को प्रोत्साहन देने के लिए केंद्र सरकार ने पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता (Special Assistance to States for Capital Investment — SASCI) योजना चलाई है, जिसमें दीर्घकालिक ब्याज-मुक्त ऋण दिए जाते हैं।
कर हस्तांतरण (Tax Devolution) क्या है?
- कर हस्तांतरण का अर्थ है संघ द्वारा लगाए और संग्रहित करों की शुद्ध प्राप्तियों का राज्यों को संवैधानिक रूप से वितरण। यह संघीय वित्तीय व्यवस्था का मूल तत्व है।
- विभाज्य पूल वह राशि है जिसे राज्यों में बाँटा जाता है। सामान्यतः अधिभार (Surcharge) और उपकर (Cess) इस पूल में सम्मिलित नहीं होते, क्योंकि इनकी प्राप्तियाँ संघ अपने पास रखता है।
- ऊर्ध्वाधर वितरण संघ और राज्यों के बीच कुल पूल के हिस्से को तय करता है, जबकि क्षैतिज वितरण राज्यों के बीच उनके हिस्से को विभाजित करता है।
- क्षैतिज वितरण के मानदंड वित्त आयोग तय करता है। इनमें जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय-अंतर, वन आवरण और कर-प्रयास जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं, जो हर आयोग में भिन्न हो सकते हैं।
- कर हस्तांतरण संवैधानिक और अपेक्षाकृत स्वतः-प्रवाहित होता है, जबकि अनुच्छेद 275 के सहायक अनुदान में कई बार शर्तें या योजना-आधारित उद्देश्य जुड़े होते हैं। दोनों को एक-दूसरे से अलग समझना आवश्यक है।
- अग्रिम किस्त का अर्थ है निर्धारित कार्यक्रम से पहले राशि जारी करना। इससे राज्यों के अल्पकालिक नकदी प्रवाह में सुधार होता है और वे आवश्यक व्यय समय पर कर सकते हैं।
- पूंजीगत व्यय से परिसंपत्ति का निर्माण होता है, जैसे सड़क, सिंचाई और भवन, जिनसे दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि को गति मिलती है। इसके विपरीत राजस्व व्यय दैनिक प्रशासनिक और सेवा-संबंधी खर्च होता है।
- राजकोषीय संघवाद में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों, दायित्वों और निर्णय-क्षमता का संतुलन होता है, और कर हस्तांतरण इसका सबसे प्रमुख साधन है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| अग्रिम किस्त (Advance Instalment) | सामान्य अनुसूची से पहले जारी की गई किस्त। इससे राज्यों की कुल हिस्सेदारी नहीं बदलती, केवल भुगतान का समय आगे आता है। |
| कुल राशि | ₹1,09,019 करोड़ का कर हस्तांतरण एक साथ राज्यों को जारी किया गया, जो राज्यों के लिए बड़ी नकद सहायता है। |
| घोषित उद्देश्य | त्योहारी मौसम में व्यय की बढ़ी हुई मांग पूरी करना और राज्यों को पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में तेजी लाने की क्षमता देना। |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ द्वारा संगृहीत करों का संघ और राज्यों के बीच वितरण होता है। यह कर हस्तांतरण की विधिक नींव है। |
| वितरण का ढांचा | केंद्र द्वारा संगृहीत करों का विभाज्य कर-पूल (Divisible Pool) बनता है, जिसका राज्यों के बीच बंटवारा वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार होता है। |
महत्व
राजकोषीय (Fiscal)
- राज्यों के नकदी प्रवाह में सुधार होता है और उन्हें अल्पकालिक उधारी पर निर्भर रहने की आवश्यकता कम होती है।
- त्योहारी मौसम में राज्यों के व्यय की चरम मांग को संभालने में यह सहायक है।
- केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय अनुशासन और पूर्वानुमेय भुगतान व्यवस्था को मज़बूती मिलती है।
आर्थिक
- पूंजीगत व्यय से सड़क, सिंचाई, शहरी अवसंरचना और सामाजिक अवसंरचना में निवेश बढ़ता है।
- सार्वजनिक निवेश का गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) निजी उपभोग और रोजगार पर सकारात्मक असर डालता है।
- त्योहारी मौसम में स्थानीय बाज़ारों और छोटे उद्योगों की मांग को सहारा मिलता है।
संघीय और संस्थागत (Federal and Institutional)
- कर हस्तांतरण संघवाद (Federalism) की वित्तीय आधारशिला है, जिसमें राज्यों की व्यय स्वायत्तता सुनिश्चित होती है।
- अनुच्छेद 270 और वित्त आयोग की संस्थागत व्यवस्था से हस्तांतरण पारदर्शी और नियम-आधारित बनता है।
चुनौतियाँ
1. नकदी प्रबंधन और केंद्र का राजकोषीय दबाव
- अग्रिम किस्त जारी करने से केंद्र की नकदी स्थिति और वर्ष के भीतर उसके राजकोषीय संतुलन पर अल्पकालिक दबाव आ सकता है।
- यदि केंद्र का राजस्व संग्रह अनुमान से कम रहे, तो वर्ष के अंत में राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) लक्ष्य से अधिक हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: केंद्रीय बजट, राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन
2. ऊर्ध्वाधर असंतुलन (Vertical Imbalance)
- राज्यों पर व्यय की जिम्मेदारी अधिक है जबकि कर संग्रह की शक्ति मुख्यतः केंद्र के पास है।
- कर हस्तांतरण पर राज्यों की निर्भरता बढ़ने से उनकी स्वतंत्र राजस्व जुटाने की क्षमता पर प्रश्न उठते हैं।
यूपीएससी लिंक: GS-2: संघवाद, केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध और अनुच्छेद 270
3. पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता और क्षमता
- पूंजीगत व्यय तभी प्रभावी होता है जब परियोजनाएं समय पर पूरी हों और धनराशि का उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों में हो।
- कई राज्यों में परियोजना तैयारी, निविदा प्रक्रिया और प्रशासनिक क्षमता की कमी बाधा बनती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: अवसंरचना, सार्वजनिक निवेश और शासन में सुधार
4. राजस्व व्यय बनाम पूंजीगत व्यय का संतुलन
- अतिरिक्त नकदी का उपयोग कभी-कभी राजस्व व्यय में हो सकता है, जिससे दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण कमजोर होता है।
- राज्यों के बीच पूंजीगत व्यय के अनुपात में व्यापक अंतर है, जिससे नीति का प्रभाव असमान हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण
5. राज्यों के बीच वितरण का आधार
- विभाज्य कर-पूल का बंटवारा जनसंख्या, आय अंतर, वन क्षेत्र और कर प्रयास जैसे मानकों पर आधारित होता है।
- कम आय वाले और अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की अपेक्षाएं प्रायः वितरण सूत्र से मेल नहीं खातीं, जिससे असंतोष बना रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-2: वित्त आयोग, संघीय वित्तीय हस्तांतरण और क्षेत्रीय असमानता
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| केंद्र का नकदी प्रवाह | अग्रिम भुगतान से वर्ष के भीतर केंद्र का नकदी संतुलन और राजकोषीय लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। |
| राज्यों की निर्भरता | कर हस्तांतरण पर अत्यधिक निर्भरता से राज्यों की अपनी राजस्व जुटाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। |
| व्यय की गुणवत्ता | अतिरिक्त धनराशि का उपयोग परियोजनाओं में न होकर राजस्व व्यय में होने का जोखिम रहता है। |
| प्रशासनिक क्षमता | परियोजना तैयारी और क्रियान्वयन क्षमता की कमी से पूंजीगत व्यय का लक्ष्य पूरा नहीं होता। |
| क्षेत्रीय असंतुलन | वितरण सूत्र से कुछ राज्यों को असंतोष रहता है, जिससे सहकारी संघवाद की भावना पर प्रभाव पड़ता है। |
आगे की राह
- अग्रिम किस्त का उपयोग पूंजीगत व्यय के लिए सुनिश्चित करने हेतु राज्य-स्तरीय व्यय योजनाओं की समय-सीमा तय की जाए।
- परियोजना तैयारी, निविदा और स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाकर राज्यों की क्रियान्वयन क्षमता बढ़ाई जाए।
- पूंजीगत व्यय की प्रगति का नियमित और सार्वजनिक मूल्यांकन हो, ताकि व्यय की गुणवत्ता पर निगरानी रहे।
- केंद्र अपने नकदी प्रबंधन और राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के बीच संतुलन का स्पष्ट लेखा-जोखा रखे।
- राज्यों की अपनी कर-आधार विस्तार क्षमता, जैसे राज्य जीएसटी और गैर-कर राजस्व, मज़बूत की जाए।
- वित्त आयोग के सिफारिशों में राज्यों की आवश्यकताओं और वितरण मानकों की पारदर्शी समीक्षा सुनिश्चित हो।
- सहकारी संघवाद की भावना के लिए केंद्र-राज्य वित्तीय परिषद जैसे मंचों पर नियमित संवाद बनाए रखा जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) · विभाज्य पूल (Divisible Pool) · वित्त आयोग (Finance Commission) · अनुच्छेद 270 और अनुच्छेद 280 · अग्रिम किश्त (Advance Instalment) · पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) · ऊर्ध्वाधर असंतुलन (Vertical Imbalance) · क्षैतिज असंतुलन (Horizontal Imbalance) · अनुच्छेद 275 और अनुच्छेद 282 · वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Council) · राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 (Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2003) · सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 270 — संघ के करों का राज्यों में वितरण
- अनुच्छेद 280 — वित्त आयोग की सिफारिशों का आधार
- अनुच्छेद 266 — संचित निधि से हस्तांतरण भुगतान
अवधारणा प्रवाह
त्योहारी मौसम में राज्यों के व्यय की मांग और पूंजीगत व्यय की योजना बढ़ती है। → केंद्र अनुच्छेद 270 के अंतर्गत विभाज्य कर-पूल से राज्यों का हिस्सा अग्रिम किस्त के रूप में जारी करता है। → भुगतान संचित निधि से होता है, जिससे राज्यों के पास तत्काल नकदी उपलब्ध होती है। → राज्य इस नकदी का उपयोग पूंजीगत व्यय और अवसंरचना परियोजनाओं में करते हैं। → परियोजनाओं से निर्माण गतिविधि, रोजगार और निजी मांग बढ़ती है, जिससे आर्थिक संवृद्धि को सहारा मिलता है। → केंद्र का राजकोषीय संतुलन और वर्ष-अंत का लक्ष्य नकदी प्रवाह के आधार पर प्रबंधित होता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ द्वारा आरोपित और संगृहीत कुछ करों की शुद्ध आय का राज्यों के बीच वितरण होता है।
2. संघ द्वारा संगृहीत अधिभार (Surcharge) और उपकर (Cess) भी विभाज्य पूल का भाग होते हैं।
3. अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 270 के अंतर्गत संघ के कर-राजस्व की शुद्ध आय का राज्यों में वितरण होता है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 270(2) के अनुसार अधिभार और उपकर विभाज्य पूल से बाहर रहते हैं। कथन 3 सही है: वित्त आयोग का गठन राष्ट्रपति करते हैं, जैसा अनुच्छेद 280(1) में वर्णित है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): भारत में वित्त आयोग की सिफारिशें भारत संघ सरकार पर विधिक रूप से बाध्यकारी होती हैं।
कारण (R): वित्त आयोग की सिफारिशें सलाहकारी प्रकृति की होती हैं और राष्ट्रपति उन्हें व्याख्यापरक ज्ञापन के साथ संसद के समक्ष रखते हैं।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) गलत है, किंतु (R) सही है। — वित्त आयोग की सिफारिशें सलाहकारी होती हैं, इसलिए (A) गलत है। अनुच्छेद 281 के अंतर्गत राष्ट्रपति इन्हें संसद के समक्ष रखते हैं और व्याख्यापरक ज्ञापन के साथ सरकार उन पर कार्रवाई-प्रतिवेदन देती है, इसलिए (R) सही है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
सूची-I (संवैधानिक अनुच्छेद): (a) अनुच्छेद 270, (b) अनुच्छेद 275, (c) अनुच्छेद 280, (d) अनुच्छेद 293
सूची-II (विषय): 1. वित्त आयोग का गठन, 2. संघ और राज्यों के बीच करों का वितरण, 3. राज्यों को अनुदान-सहायता, 4. राज्यों द्वारा उधार लेना
सही सुमेलन चुनिए:
- a-1, b-2, c-3, d-4
- a-2, b-3, c-1, d-4
- a-3, b-1, c-2, d-4
- a-4, b-2, c-1, d-3
उत्तर: a-2, b-3, c-1, d-4 — अनुच्छेद 270 करों के वितरण से, अनुच्छेद 275 संचित निधि से राज्यों को अनुदान-सहायता से, अनुच्छेद 280 वित्त आयोग के गठन से और अनुच्छेद 293 राज्यों की उधार-शक्ति से संबंधित है। अतः सही सुमेलन a-2, b-3, c-1, d-4 है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राज्यों को करों के हिस्से की अग्रिम किश्त जारी करना पूंजीगत व्यय को गति देने का एक व्यावहारिक साधन है, किंतु यह राजकोषीय संघवाद के संवैधानिक ढाँचे के लिए कितना सुसंगत है? इस व्यवस्था के आर्थिक लाभों और संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या ऊर्ध्वाधर असंतुलन को कम करने के लिए वित्त आयोग की व्यवस्था पर्याप्त है, या इसके लिए अन्य संस्थागत उपाय आवश्यक हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना: (1) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 270 के अंतर्गत विभाज्य पूल (अधिभार और उपकर अनुच्छेद 270(2) के अनुसार इससे बाहर); अनुच्छेद 280 के अंतर्गत वित्त आयोग, जो करों की शुद्ध आय में राज्यों का हिस्सा और उसका अंतर-राज्य वितरण सिफारिश करता है; अनुच्छेद 281 के अंतर्गत सिफारिशों को संसद के समक्ष रखना; अनुच्छेद 275 के अंतर्गत अनुदान-सहायता; अनुच्छेद 282 के अंतर्गत विवेकाधीन अनुदान; अनुच्छेद 293 के अंतर्गत राज्यों की उधार-सीमा। (2) अंतर: अग्रिम किश्त हिस्से में वृद्धि नहीं है, बल्कि भुगतान के समय में परिवर्तन है; इसे वित्त आयोग द्वारा निर्धारित हिस्से (14वें वित्त आयोग में 42 प्रतिशत और 15वें में 41 प्रतिशत) से अलग करके समझना आवश्यक है। (3) सैद्धांतिक आधार: रिचर्ड मस्ग्रेव का कार्य-त्रय सिद्धांत (आवंटन, वितरण, स्थिरीकरण) और वालेस ओट्स का विकेंद्रीकरण प्रमेय (1972) जिसमें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय वित्त का तर्क है। (4) समर्थक पक्ष: समय पर पूंजीगत निवेश, मंदी के दौर में मांग-सृजन, और राज्यों की नकदी-प्रवाह संबंधी कठिनाइयों का समाधान; विशेष सहायता राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु (Special Assistance to States for Capital Investment, SASCI) जैसे उपकरण भी इसी दिशा में हैं। (5) आलोचनात्मक पक्ष: विवेकाधीन हस्तांतरण से वित्त आयोग की संवैधानिक भूमिका का क्षरण, केंद्र की ओर झुकाव, क्षैतिज असंतुलन (प्रति व्यक्ति आय में अंतर) की अनदेखी, और राजकोषीय घाटे (FRBM अधिनियम, 2003 के लक्ष्य) पर दबाव। सरकारिया आयोग (1988) और पुंछी आयोग (2010) की सिफारिशें, जिनमें अंतर-सरकारी परिषद और संवैधानिक विवेकाधीन अनुदानों की सीमा पर बल दिया गया। (6) वर्तमान संदर्भ: 16वें वित्त आयोग का कार्यकाल (2026-31) और वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Council, अनुच्छेद 279A) की भूमिका। (7) निष्कर्ष: अग्रिम किश्त को पूरक उपाय मानना, वित्त आयोग की स्वायत्तता बनाए रखना, और सहकारी संघवाद के लिए पारदर्शी नियम-आधारित हस्तांतरण पर बल देना।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best economics services coaching
- Best economics optional coaching
- Best economics optional coaching for upsc
- best teacher of economics optional

No Comments