16 Oct उपराष्ट्रपति ने किया नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय जहाज ‘आईएनएस समर्थक’ का शुभारंभ
✎ आईएनएस समर्थक भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत है, जिसे कारवार में सेवा में शामिल किया गया, और यह आत्मनिर्भर भारत एवं रक्षा स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — रक्षा एवं आंतरिक सुरक्षा (रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण, नौसेना की क्षमता, समुद्री सुरक्षा) | GS Paper II — शासन एवं संविधान (उपराष्ट्रपति का संवैधानिक पद और राज्यसभा के सभापति की भूमिका)
- Prelims: आईएनएस समर्थक (INS Samarthak), बहुउद्देशीय पोत (Multi-Purpose Vessel), कारवार, कर्नाटक, आईएनएस कदंब (INS Kadamba), अनुच्छेद 63 (उपराष्ट्रपति का पद), अनुच्छेद 64 (उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति), आत्मनिर्भर भारत अभियान (मई 2020), रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (Defence Acquisition Procedure), सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation List)
- Essay: आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में रक्षा विनिर्माण का स्वदेशीकरण: उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ, समुद्री सुरक्षा और भारत की नौसैनिक शक्ति: तटीय से हिंद महासागर तक
त्वरित पुनरावृत्ति: आईएनएस समर्थक भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत है, जिसे कारवार में सेवा में शामिल किया गया, और यह आत्मनिर्भर भारत एवं रक्षा स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत आईएनएस समर्थक को सेवा में शामिल (कमीशनिंग) किया। यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे नौसेना के बेड़े में ऐसे पोत का समावेश हुआ है जिसकी संरचना और निर्माण देश के भीतर हुआ है। सेवा में शामिल करना किसी पोत को औपचारिक रूप से परिचालन के लिए नौसेना को सौंपने की प्रक्रिया है। उपराष्ट्रपति का इस समारोह में उपस्थित होना नागरिक और संवैधानिक नेतृत्व की ओर से रक्षा क्षेत्र की उपलब्धियों को मान्यता देने का संकेत है। समाचार के आधार पर इस पोत को नौसेना का पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत बताया गया है, जो घरेलू रक्षा उद्योग की क्षमता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा मई 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा देना है।
- मेक इन इंडिया (Make in India) पहल सितंबर 2014 में आरंभ हुई थी। इसके अंतर्गत रक्षा विनिर्माण में विदेशी और घरेलू निवेश को प्रोत्साहित किया गया।
- रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया के अंतर्गत सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ जारी की हैं, जिनमें शामिल वस्तुओं का आयात रोककर उन्हें स्वदेश में बनाने पर जोर दिया गया है।
- भारतीय नौसेना अपने बेड़े के आधुनिकीकरण और स्वदेशी जहाज-निर्माण के लिए लगातार कार्यरत है। स्वदेशी पोतों के निर्माण से देश के जहाज-निर्माण उद्योग और सहायक उद्योगों को भी लाभ मिलता है।
- भारत का समुद्री भूगोल, लंबी तटरेखा और हिंद महासागर में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा की आवश्यकता नौसैनिक क्षमता को निरंतर बढ़ाने का कारण है।
बहुउद्देशीय पोत और रक्षा स्वदेशीकरण क्या है?
- बहुउद्देशीय पोत ऐसा युद्धपोत या सहायक पोत होता है जिसे एक से अधिक भूमिकाओं के लिए तैयार किया जाता है। सामान्यतः इसका उपयोग रसद और आपूर्ति सहायता, खोज एवं बचाव तथा आपदा राहत जैसे कार्यों में होता है।
- स्वदेशीकरण का अर्थ है कि किसी पोत या हथियार प्रणाली का डिज़ाइन, विकास और निर्माण देश के भीतर हो, और उसमें घरेलू उपकरणों तथा प्रणालियों का अधिकतम उपयोग किया जाए।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) वह ढाँचा है जिसके अंतर्गत सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खरीद, स्वीकृति और परियोजना प्रक्रियाएँ निर्धारित की जाती हैं। इसमें स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता दी जाती है।
- सेवा में शामिल करना (Commissioning) वह औपचारिक चरण है जिसमें पोत का निर्माण, परीक्षण और सत्यापन पूरा होने के बाद उसे नौसेना को सौंपा जाता है और वह परिचालन में आता है।
- कारवार में स्थित आईएनएस कदंब (नौसेना का एक प्रमुख अड्डा) पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है।
- भारत के संविधान में उपराष्ट्रपति का पद अनुच्छेद 63 के अंतर्गत स्थापित है। उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 64 के अनुसार राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, किंतु वे रक्षा या कार्यकारी निर्णयों में सीधे भूमिका नहीं निभाते; ऐसे समारोह उनकी संवैधानिक गरिमा के प्रतीक होते हैं।
- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण से आयात पर निर्भरता घटती है, रोजगार और तकनीकी क्षमता बढ़ती है, और रणनीतिक स्वायत्तता सुदृढ़ होती है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रकार | बहुउद्देशीय पोत (Multi-Purpose Vessel) है, जो एक ही मंच से कई प्रकार की सहायक और परिचालन भूमिकाएँ निभाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे नौसेना की बेड़ा-क्षमता में लचीलापन आता है। |
| स्वदेशी निर्माण | नौसेना का पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत होने से यह रक्षा-उत्पादन में घरेलू डिज़ाइन और घरेलू विनिर्माण की क्षमता का प्रमाण है। आयातित प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भरता घटती है। |
| शुभारंभ का स्थान | कारवार (कर्नाटक) में इसका शुभारंभ हुआ। यह नौसेना के पश्चिमी तटीय क्षेत्र से जुड़ा ठिकाना है, इसलिए पश्चिमी तट की समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में इसका महत्त्व है। |
| शुभारंभकर्ता | उपराष्ट्रपति ने इसका शुभारंभ किया। उपराष्ट्रपति का पद संविधान के अनुच्छेद 63 के तहत स्थापित है, और वे राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं। यह कार्यक्रम कार्यपालिका की सैन्य-शक्ति के राष्ट्रीय गौरव से जुड़े पक्ष को दर्शाता है। |
| आत्मनिर्भरता का संकेत | पोत का स्वदेशी होना रक्षा-आत्मनिर्भरता के उस लक्ष्य को दर्शाता है जिसमें डिज़ाइन, विनिर्माण और आपूर्ति-शृंखला के घरेलू विकास पर बल दिया जाता है। |
महत्व
सामरिक एवं रक्षा महत्त्व
- बहुउद्देशीय पोत नौसेना की परिचालन-क्षमता को बढ़ाते हैं, क्योंकि एक ही इकाई विभिन्न सहायक भूमिकाएँ निभा सकती है और मुख्य युद्धपोतों को अन्य कार्यों से मुक्त रख सकती है।
- स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म से रक्षा-आपूर्ति में विदेशी स्रोतों पर निर्भरता घटती है, जिससे आपात स्थितियों में परिचालन-निरंतरता बेहतर होती है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति और तटीय सुरक्षा की तैयारी को इससे सहारा मिलता है।
आर्थिक महत्त्व
- रक्षा-पोत निर्माण में देश के शिपयार्ड, इंजीनियरिंग कंपनियों और सहायक उद्योगों (MSME सहित) की भागीदारी से घरेलू मूल्य-शृंखला मज़बूत होती है।
- स्वदेशी रक्षा-खरीद से विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह कम होता है और घरेलू विनिर्माण में रोज़गार सृजित होता है।
तकनीकी एवं औद्योगिक महत्त्व
- डिज़ाइन, नौवहन-प्रणाली, प्रणोदन और सेंसर जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता का विकास भविष्य के जटिल प्लेटफ़ॉर्मों के लिए आधार तैयार करता है।
- अनुसंधान एवं विकास और कौशल-विकास के लिए यह एक व्यावहारिक प्रयोगशाला की भूमिका निभाता है।
चुनौतियाँ
1. घटकों में आयात पर निर्भरता
- पोत का ढाँचा स्वदेशी हो सकता है, फिर भी इंजन, उन्नत सेंसर और कुछ इलेक्ट्रॉनिक घटक अक्सर विदेशी स्रोतों से आते हैं।
- घटक-स्तर पर आत्मनिर्भरता के बिना आपूर्ति-शृंखला के झटकों का जोखिम बना रहता है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आंतरिक सुरक्षा
2. परियोजना-समय और लागत प्रबंधन
- रक्षा-पोत परियोजनाओं में डिज़ाइन परिवर्तन, विलंब और लागत-वृद्धि की समस्या सामान्य रही है।
- समय पर वितरण और लागत-नियंत्रण के लिए कठोर परियोजना-प्रबंधन और निरंतर निगरानी आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: सार्वजनिक खरीद और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया
3. रख-रखाव और जीवन-चक्र समर्थन
- पोत की दीर्घकालिक परिचालन-क्षमता रख-रखाव, मरम्मत और पुर्जों की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
- स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म के लिए स्थानीय मरम्मत-सुविधाओं और कुशल तकनीशियनों का विकास अनिवार्य है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: रक्षा-उत्पादन और औद्योगिक आधार
4. कुशल मानव संसाधन की कमी
- जटिल समुद्री प्रणालियों के संचालन और रख-रखाव के लिए विशेष प्रशिक्षित जनशक्ति की आवश्यकता होती है।
- शिपयार्ड और सहायक उद्योगों में कौशल-अंतर के कारण स्वदेशीकरण की गति प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: कौशल विकास और मानव संसाधन
5. बेड़े के आकार और समुद्री चुनौतियों के बीच संतुलन
- भारत की समुद्री सीमा और हिंद महासागर में बढ़ती सुरक्षा-आवश्यकताओं के सामने नौसेना के बेड़े का आकार और उसकी उपलब्धता सीमित हैं।
- बहुउद्देशीय क्षमता इस अंतर को आंशिक रूप से भर सकती है, परंतु पूर्ण समाधान के लिए निरंतर निर्माण-कार्यक्रम आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: GS-3: आंतरिक सुरक्षा और तटीय सुरक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| घटक-स्तर स्वदेशीकरण | इंजन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आयात निर्भरता से आपूर्ति-जोखिम बना रहता है। |
| परियोजना विलंब और लागत | डिज़ाइन परिवर्तन और समय-सारणी में देरी से परियोजना की लागत बढ़ सकती है। |
| जीवन-चक्र समर्थन | लंबे समय तक परिचालन के लिए रख-रखाव, मरम्मत और पुर्जों की व्यवस्था आवश्यक है। |
| कुशल जनशक्ति | जटिल प्रणालियों के लिए विशेष प्रशिक्षित कर्मियों की कमी स्वदेशीकरण की गति धीमी कर सकती है। |
| आपूर्ति-शृंखला का विस्तार | MSME और छोटे विनिर्माताओं की गुणवत्ता-मानक पूर्ति और समय पर आपूर्ति एक चुनौती है। |
आगे की राह
- घटक-स्तर स्वदेशीकरण के लिए महत्त्वपूर्ण इंजन, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की पहचान कर उनके घरेलू विकास के लिए लक्ष्यबद्ध अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाए।
- रक्षा-पोत परियोजनाओं में समय-सारणी और लागत की निगरानी के लिए स्पष्ट मील के पत्थर और स्वतंत्र समीक्षा-तंत्र अपनाए जाएँ।
- शिपयार्ड, MSME और सहायक उद्योगों को गुणवत्ता-मानक और विश्वसनीय आपूर्ति के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता दी जाए।
- कुशल तकनीशियनों और इंजीनियरों के लिए नौसैनिक-औद्योगिक कौशल-पाठ्यक्रम और व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ साझेदारी विकसित की जाए।
- पोत के जीवन-चक्र के लिए स्थानीय मरम्मत-सुविधाओं और पुर्जों की आपूर्ति-व्यवस्था का पहले से नियोजन किया जाए।
- शैक्षणिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच समुद्री प्रौद्योगिकी पर संयुक्त अनुसंधान को संस्थागत रूप दिया जाए।
- रक्षा-खरीद प्रक्रिया में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने वाले नीतिगत ढाँचे की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि नीति और परियोजना-अनुभव के बीच तालमेल बना रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
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संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 53: राष्ट्रपति सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर होता है
- अनुच्छेद 63: उपराष्ट्रपति पद की संवैधानिक स्थापना
- सातवीं अनुसूची, संघ सूची प्रविष्टि 1: देश की रक्षा और सशस्त्र बल संघ का विषय
अवधारणा प्रवाह
स्वदेशी डिज़ाइन और रक्षा-आवश्यकता की पहचान → घरेलू शिपयार्ड में निर्माण और घटकों का एकीकरण → परीक्षण, प्रमाणन और औपचारिक नौसेना में शामिल होना → कारवार में शुभारंभ और बहुउद्देशीय परिचालन की शुरुआत → नौसेना की परिचालन-क्षमता में वृद्धि और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता में कमी → घरेलू रक्षा-उद्योग और MSME की मूल्य-शृंखला में विस्तार → आत्मनिर्भर रक्षा-उत्पादन और दीर्घकालिक समुद्री सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के भूभागीय जल (Territorial Waters) का विस्तार आधार रेखा से 12 नौटिकल मील तक है।
2. भारत के संलग्न क्षेत्र (Contiguous Zone) का विस्तार आधार रेखा से 24 नौटिकल मील तक है।
3. कारवार (Karwar) बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) के तट पर स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। भारत के समुद्री क्षेत्र भूभागीय जल, संलग्न क्षेत्र और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के रूप में भारतीय भूभागीय जल, महाद्वीपीय मग्नतट, अनन्य आर्थिक क्षेत्र और अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 द्वारा परिभाषित हैं।
कथन 3 गलत है, क्योंकि कारवार कर्नाटक में अरब सागर (Arabian Sea) के तट पर स्थित है।
कारवार में भारतीय नौसेना का महत्वपूर्ण आधार (नौसेना बेस कदंब) है।
Q2. निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए:
कथन (A): संघ सरकार नीतिगत उपायों के माध्यम से नौसेना के लिए स्वदेश में पोत निर्माण को बढ़ावा दे रही है।
कारण (R): संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 1 में भारत की रक्षा और उसके प्रत्येक भाग की रक्षा की तैयारी शामिल है।
उपर्युक्त के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, लेकिन (R) गलत है।
- (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है। — रक्षा संघ सूची का विषय है, इसलिए रक्षा नीति, अधिग्रहण और उद्योग संबंधी निर्णय संघ सरकार लेती है। इसी संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया और सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जैसे उपाय लागू होते हैं।
अतः (R) (A) की सही व्याख्या है।
Q3. भारत के संविधान के अनुसार राज्यसभा के पदेन सभापति (ex officio Chairman) कौन होते हैं?
- प्रधानमंत्री
- उप राष्ट्रपति
- लोकसभा अध्यक्ष
- राष्ट्रपति
उत्तर: उप राष्ट्रपति — अनुच्छेद 89(1) के अनुसार भारत का उप राष्ट्रपति पदेन राज्यसभा का सभापति होता है।
उप राष्ट्रपति का चुनाव अनुच्छेद 66 के अंतर्गत निर्वाचक मंडल द्वारा होता है।
लोकसभा अध्यक्ष लोकसभा का पीठासीन अधिकारी होता है, राज्यसभा का नहीं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारतीय नौसेना में स्वदेश निर्मित बहुउद्देशीय पोत के शामिल होने को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रक्षा स्वदेशीकरण की नीतिगत व्यवस्था का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही तर्क सहित विवेचना कीजिए कि क्या केवल स्वदेशी पोत निर्माण से समुद्री सामर्थ्य सुनिश्चित हो जाती है? (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर संरचना:
1. भूमिका: भारतीय नौसेना में स्वदेश निर्मित बहुउद्देशीय पोत के शामिल होने का संदर्भ, कारवार में समारोह, और यह कि यह पोत स्वदेशी क्षमता का प्रतीक है। आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा का परिचय।
2. संवैधानिक और संस्थागत आधार: रक्षा विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची की प्रविष्टि 1 में आता है, इसलिए नीति-निर्माण का अधिकार संघ सरकार के पास है। रक्षा मंत्रालय की भूमिका और रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में श्रेणियाँ (जैसे Buy (Indian-IDDM), Make श्रेणी) स्वदेशी उद्योग को प्राथमिकता देती हैं।
3. नीतिगत उपाय: सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची के माध्यम से आयात-प्रतिबंधित मदों की पहचान; मेक इन इंडिया के अंतर्गत रक्षा उत्पादन का विकास; रक्षा औद्योगिक गलियारे (उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु); सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड (जैसे मझगांव डॉक, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एवं इंजीनियर्स, कोचीन शिपयार्ड) और निजी क्षेत्र की भागीदारी।
4. समुद्री अवसंरचना और नीति का समग्र ढांचा: सागरमाला कार्यक्रम, मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और शिपबिल्डिंग से जुड़े वित्तीय सहायता उपाय, जो नागरिक और सैन्य पोत निर्माण दोनों के लिए आपूर्ति-श्रृंखला तैयार करते हैं।
5. सैद्धांतिक परिप्रेक्ष्य: अल्फ्रेड थायर महान (Alfred Thayer Mahan) की पुस्तक The Influence of Sea Power upon History (1890) के अनुसार समुद्री शक्ति व्यापार, नौसैनिक क्षमता और तटीय अवसंरचना के संयोजन से बनती है। इसके आधार पर केवल पोत संख्या नहीं, बल्कि पूरी औद्योगिक और मानव-संसाधन क्षमता मायने रखती है।
6. समालोचनात्मक विश्लेषण (पक्ष): आयात पर निर्भरता में कमी, रक्षा निर्यात की संभावना, रोज़गार सृजन, तकनीकी क्षमता का विकास, और रणनीतिक स्वायत्तता।
7. समालोचनात्मक विश्लेषण (विपक्ष/चुनौतियाँ): उप-प्रणालियों और उच्च-तकनीकी घटकों (इंजन, सेंसर, प्रणोदन) पर अब भी विदेशी निर्भरता; परियोजना विलंब और लागत वृद्धि; सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की सीमित भागीदारी; अनुसंधान एवं विकास में निवेश की कमी; आपूर्ति-श्रृंखला का बहुत अधिक केंद्रीकरण।
8. दोनों पक्षों का संतुलित मूल्यांकन: स्वदेशी निर्माण आवश्यक है, पर पर्याप्त नहीं। समुद्री सामर्थ्य के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति, सुदृढ़ रखरखाव-तंत्र, संचालन-सिद्धांत (जैसे भारतीय नौसेना का समुद्री सिद्धांत) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी आवश्यक हैं।
9. निष्कर्ष: तर्कसंगत मत यह हो कि स्वदेशीकरण सामर्थ्य का आधार है, परंतु उसकी प्रभावशीलता तभी सुनिश्चित होती है जब उसे नीतिगत स्थिरता, उद्योग-विश्वविद्यालय सहयोग और समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ जोड़ा जाए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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