27 Jul अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना का एक वर्ष तक विस्तार, जानिए पात्रता और लाभ
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास और रोजगार
- Prelims: अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), बेरोजगारी लाभ, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948
- Essay: भारत में सामाजिक सुरक्षा जाल का महत्व और चुनौतियाँ, बदलते कार्यबल में श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करना
त्वरित पुनरावृत्ति: अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) ESIC द्वारा संचालित एक सामाजिक सुरक्षा योजना है जो बीमित व्यक्तियों को बेरोजगारी की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) की अवधि को 1 जुलाई, 2026 से 30 जून, 2027 तक बढ़ा दिया है। यह विस्तार योजना के तहत बेरोजगारी लाभ प्राप्त करने वाले बीमित व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान कर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है। यह जानकारी श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पृष्ठभूमि
- भारत में सामाजिक सुरक्षा एक महत्वपूर्ण नीतिगत क्षेत्र है, जिसका उद्देश्य श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न आकस्मिकताओं जैसे बीमारी, मातृत्व, चोट और बेरोजगारी से बचाना है।
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जो संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करता है।
- बेरोजगारी एक ऐसी स्थिति है जो श्रमिकों को अचानक आय के नुकसान का सामना कराती है, जिससे उनके और उनके परिवारों के जीवन स्तर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना को बेरोजगारी के कारण आय के नुकसान का सामना करने वाले बीमित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था।
- यह योजना विशेष रूप से उन श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण है जो आर्थिक मंदी या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण अपनी नौकरी खो देते हैं।
- सरकार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी पहलों के माध्यम से योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी कार्यान्वयन पर जोर दे रही है।
अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) क्या है?
- अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा कार्यान्वित एक सामाजिक सुरक्षा योजना है।
- इसका उद्देश्य उन बीमित व्यक्तियों को नकद राहत प्रदान करना है जो अपनी नौकरी खो देते हैं और बेरोजगारी का सामना करते हैं।
- पात्रता के लिए, लाभार्थी को बेरोजगारी से ठीक पहले लगातार 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए।
- उन्हें बेरोजगारी से ठीक पहले के 12 महीनों में किसी एक पूर्ण योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों का योगदान किया हुआ होना चाहिए।
- बेरोजगारी कदाचार (misconduct), लॉकआउट, सेवानिवृत्ति (superannuation) या कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत गलत बयान देने के कारण नहीं होनी चाहिए।
- योजना के तहत दावों का निपटान ऑनलाइन सबमिशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और नियमित निगरानी के माध्यम से त्वरित किया जाता है।
- यह योजना संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को अनैच्छिक बेरोजगारी की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर उनके कल्याण में योगदान करती है।
- हाल ही में, योजना की अवधि 1 जुलाई, 2026 से 30 जून, 2027 तक बढ़ा दी गई है, जो इसकी निरंतर प्रासंगिकता को दर्शाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अवधि विस्तार | अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) को 01.07.2026 से 30.06.2027 तक बढ़ाया गया है, जिससे अनिश्चितता के समय में श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिलती रहेगी। |
| पात्रता मानदंड | बेरोज़गारी से ठीक पहले 12 महीने तक बीमायोग्य रोज़गार में होना और कम से कम 78 दिनों का योगदान अनिवार्य है, जिससे केवल वास्तविक ज़रूरतमंदों को लाभ मिले। |
| अपात्रता के कारण | कदाचार, लॉकआउट, सेवानिवृत्ति या गलत बयानबाजी के कारण हुई बेरोज़गारी पर लाभ नहीं मिलता, जिससे योजना का दुरुपयोग रोका जा सके। |
| दावों का त्वरित निपटान | ऑनलाइन आवेदन, DBT और नियमित निगरानी से लाभार्थियों को समय पर सहायता सुनिश्चित होती है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ती है। |
| वित्तीय सहायता | योजना के तहत लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान कुल ₹5.26 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जो संकटग्रस्त श्रमिकों को महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा प्रदान करता है। |
महत्व
सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण
- यह योजना असंगठित क्षेत्र के उन श्रमिकों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है जो अपनी नौकरी खो देते हैं, जिससे उन्हें बेरोज़गारी के दौरान आर्थिक स्थिरता मिलती है।
- यह श्रमिकों को अनैच्छिक बेरोज़गारी के झटके से बचाने में मदद करती है, उनके परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करती है और गरीबी में धकेलने से रोकती है।
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के दायरे में आने वाले श्रमिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा जाल के रूप में कार्य करती है।
आर्थिक स्थिरता
- बेरोज़गारी लाभ प्रदान करके, यह योजना उपभोक्ता मांग को बनाए रखने में मदद करती है, जिससे अर्थव्यवस्था में मंदी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
- यह श्रमिकों को नई नौकरी खोजने के लिए समय और संसाधन प्रदान करती है, जिससे वे जल्द ही श्रम बल में वापस आ सकें और उत्पादक योगदान दे सकें।
शासन एवं पारदर्शिता
- ऑनलाइन आवेदन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और दावों की नियमित निगरानी जैसी पहलें योजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करती हैं।
- यह सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह ज़रूरतमंदों तक सीधे और प्रभावी ढंग से लाभ पहुंचाए, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।
चुनौतियाँ
1. सीमित कवरेज
- यह योजना केवल ESIC के तहत बीमित व्यक्तियों को कवर करती है, जिससे असंगठित क्षेत्र के एक बड़े हिस्से को बाहर रखा जाता है जिन्हें भी ऐसी सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है।
- पात्रता मानदंड, जैसे कि 12 महीने का निरंतर बीमायोग्य रोज़गार, कई आकस्मिक या मौसमी श्रमिकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय
2. जागरूकता का अभाव
- कई पात्र श्रमिकों को अभी भी इस योजना और इसके लाभों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, जिससे वे इसका लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
- विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों और कम साक्षरता वाले समूहों में जागरूकता कार्यक्रमों की कमी एक बड़ी बाधा है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
3. दावों की जटिलता
- यद्यपि ऑनलाइन प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं, फिर भी कुछ लाभार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया जटिल या तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
- आवश्यक दस्तावेज़ों को इकट्ठा करने और जमा करने में कठिनाई भी दावों के निपटान में देरी का कारण बन सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप
4. वित्तीय स्थिरता
- योजना के लिए आवश्यक धन का प्रबंधन और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, खासकर आर्थिक मंदी के दौरान जब बेरोज़गारी बढ़ती है।
- लाभार्थियों की बढ़ती संख्या के साथ, योजना पर वित्तीय बोझ भी बढ़ सकता है, जिसके लिए सतत वित्तपोषण मॉडल की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सरकारी बजट
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| सीमित पहुंच | योजना का लाभ केवल ESIC के दायरे में आने वाले श्रमिकों तक सीमित है, जिससे असंगठित क्षेत्र के अधिकांश श्रमिक बाहर रह जाते हैं। |
| जागरूकता की कमी | पात्र लाभार्थियों के बीच योजना के बारे में जानकारी का अभाव है, जिससे वे अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते। |
| प्रशासनिक बाधाएं | ऑनलाइन प्रक्रिया के बावजूद, कुछ श्रमिकों के लिए आवेदन और दस्तावेज़ जमा करने में कठिनाई अभी भी बनी हुई है। |
| वित्तीय स्थिरता | बढ़ते दावों और संभावित आर्थिक मंदी के कारण योजना की दीर्घकालिक वित्तीय वहनीयता एक चिंता का विषय है। |
| पात्रता की कठोरता | निरंतर 12 महीने के रोज़गार और 78 दिनों के योगदान जैसे मानदंड लचीले रोज़गार वाले श्रमिकों के लिए मुश्किल हो सकते हैं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)
आगे की राह
- योजना के कवरेज का विस्तार किया जाए ताकि असंगठित क्षेत्र के अधिक श्रमिकों को इसके दायरे में लाया जा सके, संभवतः चरणबद्ध तरीके से।
- योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाए जाएं, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
- आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए, जिसमें क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता और डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण शामिल हो।
- दावों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए ESIC के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत किया जाए, जिसमें मानव संसाधन और तकनीकी क्षमता में वृद्धि शामिल है।
- योजना की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक दीर्घकालिक वित्तपोषण रणनीति विकसित की जाए, जिसमें विभिन्न हितधारकों से योगदान पर विचार किया जा सकता है।
- पात्रता मानदंडों की समीक्षा की जाए ताकि लचीले रोज़गार वाले श्रमिकों को भी शामिल किया जा सके, जबकि दुरुपयोग को रोका जा सके।
- लाभार्थियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना · कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) · बेरोज़गारी लाभ · सामाजिक सुरक्षा · श्रम कल्याण · प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) · कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 · पात्रता मानदंड · श्रम बाजार · कल्याणकारी योजनाएँ
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘बेरोज़गारी की दशा में सहायता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 43’, ‘note’: ‘श्रमिकों के लिए निर्वाह मज़दूरी आदि’}
अवधारणा प्रवाह
श्रमिक ESIC के तहत बीमायोग्य रोज़गार में योगदान करता है। → श्रमिक अनैच्छिक रूप से बेरोज़गार हो जाता है। → पात्रता मानदंडों को पूरा करते हुए ABVKY के तहत दावा प्रस्तुत करता है। → दावे का ऑनलाइन सत्यापन और प्रसंस्करण होता है। → लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल उन व्यक्तियों के लिए है जो सेवानिवृत्ति के कारण बेरोजगार हुए हैं।
2. योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए, लाभार्थी को बेरोजगारी से ठीक पहले कम से कम 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए।
3. दावों के निपटान को तीव्र करने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि योजना कदाचार, लॉकआउट या सेवानिवृत्ति के कारण हुई बेरोजगारी को कवर नहीं करती है। कथन 2 सही है, लाभार्थी को बेरोजगारी से ठीक पहले 12 महीने तक बीमायोग्य रोजगार में रहना चाहिए। कथन 3 सही है, दावों के त्वरित निपटान के लिए DBT का उपयोग किया जाता है।
Q2. अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) का क्रियान्वयन निम्नलिखित में से किस संस्था द्वारा किया जाता है?
- श्रम और रोजगार मंत्रालय
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO)
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC)
- नीति आयोग
उत्तर: कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) — अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) का क्रियान्वयन कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा किया जाता है, जैसा कि प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) का उद्देश्य क्या है और यह भारत में सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करने में किस प्रकार सहायक है? योजना के तहत पात्रता मानदंड और इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) के उद्देश्य को स्पष्ट करें और बताएं कि यह कैसे सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करती है। दूसरे भाग में योजना के पात्रता मानदंडों का विस्तार से उल्लेख करें। अंत में, योजना के क्रियान्वयन में संभावित चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे जागरूकता की कमी, दस्तावेज़ीकरण की समस्याएँ या दावों के निपटान में देरी, भले ही DBT जैसी पहलें की गई हों।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments