03 Sep अहमदाबाद बना तीसरा ‘हब एंड स्पोक’ अंतरराष्ट्रीय उड़ान केंद्र, जानें पूरा गणित
✎ भारत की 'अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति' के तहत 'हब एंड स्पोक' मॉडल, अहमदाबाद, वाराणसी और अमृतसर जैसे 'स्पोक' हवाई अड्डों से अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करता है, जिससे यात्रा अनुभव बेहतर होता है और…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — अवसंरचना (विमानन)
- Prelims: हब एंड स्पोक मॉडल, अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, अहमदाबाद हवाई अड्डा, वाराणसी हवाई अड्डा, अमृतसर हवाई अड्डा
- Essay: भारत की आर्थिक संवृद्धि में अवसंरचना का महत्व, वैश्विक कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की ‘अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति’ के तहत ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल, अहमदाबाद, वाराणसी और अमृतसर जैसे ‘स्पोक’ हवाई अड्डों से अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करता है, जिससे यात्रा अनुभव बेहतर होता है और वैश्विक विमानन में भारत की स्थिति मजबूत होती है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने हाल ही में अहमदाबाद से ‘हब एंड स्पोक’ अंतर्राष्ट्रीय उड़ान संचालन (International Flight Operation) शुरू किया है। इसके साथ ही, वाराणसी और अमृतसर के बाद अहमदाबाद देश का तीसरा ऐसा हवाई अड्डा बन गया है जिसे अंतर्राष्ट्रीय यात्री आवाजाही के लिए भारत के ‘हब एंड स्पोक’ फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। यह पहल भारत की ‘अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति’ (International Aviation Hub Strategy) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय हवाई अड्डों के माध्यम से वैश्विक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने देश को एक प्रमुख वैश्विक विमानन केंद्र (Global Aviation Hub) बनाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है।
- इस रणनीति का लक्ष्य 2030 तक भारत को भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा विमानन हब और 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक विमानन हब बनाना है।
- इस पहल के तहत, 25 जून 2026 को वाराणसी से ‘हब एंड स्पोक’ ऑपरेशन शुरू किए गए थे, जिसके बाद 28 जुलाई 2026 को अमृतसर हवाई अड्डे से भी ये ऑपरेशन शुरू हुए।
- ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल भारत की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और बड़े हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे का उपयोग करके कनेक्टिविटी को मजबूत करता है और विदेशी ट्रांजिट हवाई अड्डों पर निर्भरता कम करता है।
‘हब एंड स्पोक’ मॉडल क्या है?
- ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल एक परिवहन प्रणाली है जहाँ सभी यात्राएँ एक केंद्रीय बिंदु (हब) से होकर गुजरती हैं, जो विभिन्न गंतव्यों (स्पोक) को जोड़ता है।
- विमानन के संदर्भ में, एक ‘हब’ एक बड़ा हवाई अड्डा होता है जो कई अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को संभालता है, जबकि ‘स्पोक’ छोटे क्षेत्रीय हवाई अड्डे होते हैं जो यात्रियों को हब तक लाते हैं।
- इस प्रणाली के तहत, अंतर्राष्ट्रीय यात्री अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ही शुरुआती ‘स्पोक’ हवाई अड्डे (जो स्वयं एक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है) पर चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की सभी औपचारिकताएँ पूरी कर लेते हैं।
- निर्धारित ‘हब’ हवाई अड्डे पर पहुँचने के बाद, यात्री बिना दोबारा इमिग्रेशन या कस्टम्स प्रक्रिया से गुजरे सीधे अपनी अगली अंतर्राष्ट्रीय उड़ान के लिए जा सकते हैं।
- सामान को आसानी से अंतिम अंतर्राष्ट्रीय गंतव्य तक स्थानांतरित किया जाता है, जिससे यात्रियों की सुविधा काफी बढ़ जाती है और यात्रा की जटिलता कम हो जाती है।
- अहमदाबाद से शुरू हुए ‘हब एंड स्पोक’ ऑपरेशन यात्रियों को मुख्य रूप से यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका और पूर्वी एशिया के कई गंतव्यों से जोड़ेंगे।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अहमदाबाद तीसरा ‘स्पोक’ एयरपोर्ट बना | वाराणसी और अमृतसर के बाद, अहमदाबाद भारत की अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति (International Aviation Hub Strategy) का तीसरा केंद्र बन गया है, जो वैश्विक कनेक्टिविटी का विस्तार कर रहा है। |
| हब एंड स्पोक मॉडल का क्रियान्वयन | यह मॉडल यात्रियों को अपने शुरुआती ‘स्पोक’ एयरपोर्ट (जैसे अहमदाबाद) पर ही सभी अंतर्राष्ट्रीय औपचारिकताएं (चेक-इन, इमिग्रेशन, कस्टम्स) पूरी करने की सुविधा देता है, जिससे यात्रा सुगम होती है। |
| दिल्ली हब के माध्यम से कनेक्टिविटी | अहमदाबाद से यात्री दिल्ली में ‘हब’ एयरपोर्ट पर बिना दोबारा औपचारिकताएं पूरी किए सीधे अपनी अगली अंतर्राष्ट्रीय उड़ान के लिए जा सकते हैं, जिससे समय और प्रयास की बचत होती है। |
| सामान की सीधी डिलीवरी | यात्रियों का सामान सीधे उनके अंतिम अंतर्राष्ट्रीय गंतव्य तक पहुँचता है, जिससे ट्रांज़िट के दौरान सामान संभालने की परेशानी खत्म हो जाती है। |
| 2030 तक पसंदीदा एविएशन हब का लक्ष्य | यह पहल भारत को 2030 तक भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा विमानन हब और 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक विमानन हब बनाने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- बेहतर अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी से अहमदाबाद के कपड़ा, फार्मास्युटिकल, हीरा और रत्न, और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, जिससे निर्यात और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
- यात्रियों की संख्या (फुटफॉल) में वृद्धि से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
- विदेशी ट्रांज़िट एयरपोर्ट पर निर्भरता कम होने से भारतीय एयरलाइंस की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।
सामरिक महत्व
- भारत की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाकर, यह मॉडल देश को एक प्रमुख वैश्विक विमानन हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
- यह पहल भारत को अंतर्राष्ट्रीय यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में मजबूत करती है, जिससे भू-राजनीतिक प्रभाव में वृद्धि हो सकती है।
- टियर-II और टियर-III शहरों से बेहतर अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी प्रदान करके क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यात्री अनुभव और सुविधा
- यात्रियों को एक ही स्थान पर सभी अंतर्राष्ट्रीय औपचारिकताएं पूरी करने की सुविधा मिलने से यात्रा की जटिलता कम होगी और उनका अनुभव बेहतर होगा।
- कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम कम होगा और सामान की सीधी डिलीवरी से यात्रियों को तनाव-मुक्त यात्रा का अनुभव मिलेगा।
- यह मॉडल विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जिन्हें पहले अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए घरेलू उड़ानों के माध्यम से बड़े शहरों तक यात्रा करनी पड़ती थी।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढाँचा और क्षमता
- बढ़ते यात्री भार को संभालने के लिए मौजूदा हवाई अड्डों पर बुनियादी ढाँचे (टर्मिनल, रनवे, पार्किंग) का निरंतर उन्नयन और विस्तार आवश्यक है।
- इमिग्रेशन और कस्टम्स जैसी प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: बुनियादी ढाँचा, निवेश मॉडल
2. एयरलाइन समन्वय और परिचालन दक्षता
- विभिन्न एयरलाइंस के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करना ताकि सामान हस्तांतरण और कनेक्टिंग उड़ानों में कोई देरी न हो।
- हब एयरपोर्ट पर उड़ानों के समय-निर्धारण और स्लॉट प्रबंधन को अनुकूलित करना ताकि अधिकतम दक्षता प्राप्त की जा सके।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: विमानन क्षेत्र
3. सुरक्षा और निगरानी
- बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय यात्री यातायात के साथ सुरक्षा प्रोटोकॉल को बनाए रखना और उन्हें मजबूत करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
- हब और स्पोक एयरपोर्ट्स पर उन्नत निगरानी प्रणालियों और कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करना।
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा: विभिन्न सुरक्षा बल और एजेंसियाँ
4. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा
- क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर स्थापित विमानन हब से प्रतिस्पर्धा का सामना करना, जो पहले से ही मजबूत कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचा प्रदान करते हैं।
- भारत को एक आकर्षक ट्रांज़िट गंतव्य बनाने के लिए सेवाओं की गुणवत्ता और लागत-प्रभावशीलता बनाए रखना।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| एयरपोर्ट क्षमता का विस्तार | बढ़ते यात्री और कार्गो यातायात को संभालने के लिए मौजूदा एयरपोर्ट्स पर रनवे, टर्मिनल और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) क्षमता का पर्याप्त विस्तार। |
| कुशल जनशक्ति | विमानन क्षेत्र में पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और ग्राउंड स्टाफ सहित कुशल जनशक्ति की कमी को पूरा करना। |
| नियामक ढाँचा | अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक मजबूत और कुशल नियामक ढाँचा सुनिश्चित करना, जो सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ावा दे। |
| ईंधन की लागत और कर | विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) की उच्च लागत और उस पर लगने वाले कर भारतीय एयरलाइंस की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करते हैं। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | विमानन क्षेत्र के विस्तार से होने वाले पर्यावरणीय प्रभावों (जैसे कार्बन उत्सर्जन) को कम करने के लिए स्थायी समाधान खोजना। |
आगे की राह
- हब और स्पोक एयरपोर्ट्स पर बुनियादी ढाँचे का निरंतर उन्नयन और विस्तार किया जाए ताकि बढ़ती यात्री संख्या को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।
- इमिग्रेशन, कस्टम्स और सुरक्षा प्रक्रियाओं को और अधिक सुव्यवस्थित और डिजिटल किया जाए ताकि यात्रियों के लिए प्रतीक्षा समय कम हो।
- एयरलाइंस के बीच बेहतर समन्वय और डेटा साझाकरण को बढ़ावा दिया जाए ताकि सामान हस्तांतरण और कनेक्टिंग उड़ानों में निर्बाधता सुनिश्चित हो।
- विमानन क्षेत्र में कुशल जनशक्ति के प्रशिक्षण और विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाए, जिसमें पायलट, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और ग्राउंड स्टाफ शामिल हों।
- भारत को एक आकर्षक अंतर्राष्ट्रीय ट्रांज़िट हब बनाने के लिए प्रतिस्पर्धी हवाई किराए और विश्व स्तरीय सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
- टियर-II और टियर-III शहरों से अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त ‘स्पोक’ एयरपोर्ट्स की पहचान और विकास किया जाए।
- विमानन क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए स्थायी विमानन ईंधन (SAF) और हरित प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हब एंड स्पोक मॉडल · अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति · नागरिक उड्डयन मंत्रालय · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · यात्री अनुभव · आर्थिक संवृद्धि · विमानन अवसंरचना · वैश्विक कनेक्टिविटी · टियर-II शहर · निर्बाध यात्रा
अवधारणा प्रवाह
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ‘हब एंड स्पोक’ ऑपरेशन शुरू किया। → अहमदाबाद, वाराणसी और अमृतसर जैसे ‘स्पोक’ एयरपोर्ट्स को जोड़ा गया। → यात्री ‘स्पोक’ एयरपोर्ट पर सभी अंतर्राष्ट्रीय औपचारिकताएं पूरी करते हैं। → यात्री दिल्ली जैसे ‘हब’ एयरपोर्ट पर बिना दोबारा औपचारिकताएं पूरी किए कनेक्टिंग उड़ान लेते हैं। → इससे अंतर्राष्ट्रीय यात्रा सुगम होती है और भारत एक वैश्विक विमानन हब बनता है।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल का उद्देश्य भारत को 2030 तक भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा विमानन हब बनाना है।
2. इस मॉडल के तहत, अंतर्राष्ट्रीय यात्री ‘हब’ एयरपोर्ट पर ही चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की औपचारिकताएँ पूरी करते हैं।
3. अहमदाबाद, वाराणसी और अमृतसर भारत के ‘हब एंड स्पोक’ फ्रेमवर्क में शामिल होने वाले पहले तीन ‘स्पोक’ एयरपोर्ट हैं।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई भी नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल का लक्ष्य 2030 तक भारत को भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा विमानन हब और 2047 तक एक प्रमुख वैश्विक विमानन हब बनाना है। कथन 2 गलत है। इस मॉडल के तहत, अंतर्राष्ट्रीय यात्री शुरुआती ‘स्पोक’ एयरपोर्ट पर ही चेक-इन, इमिग्रेशन और कस्टम्स की औपचारिकताएँ पूरी करते हैं, न कि ‘हब’ एयरपोर्ट पर। कथन 3 सही है। अहमदाबाद, वाराणसी और अमृतसर भारत के ‘हब एंड स्पोक’ फ्रेमवर्क में शामिल होने वाले पहले तीन ‘स्पोक’ एयरपोर्ट हैं।
Q2. अभिकथन (A): ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल टियर-II और टियर-III शहरों से बेहतर अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
कारण (R): यह मॉडल विदेशी ट्रांज़िट एयरपोर्ट पर निर्भरता कम करता है और भारतीय हब के ज़रिए कनेक्टिविटी को मज़बूत करता है।
- A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल का एक प्रमुख लाभ टियर-II और टियर-III शहरों से अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी में सुधार करना है। कारण (R) भी सही है क्योंकि यह मॉडल भारत की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का उपयोग करके भारतीय हब के माध्यम से कनेक्टिविटी को मजबूत करता है और विदेशी ट्रांज़िट एयरपोर्ट पर निर्भरता कम करता है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि विदेशी ट्रांज़िट एयरपोर्ट पर निर्भरता कम होने और भारतीय हब के माध्यम से कनेक्टिविटी मजबूत होने से ही टियर-II और टियर-III शहरों से बेहतर अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी संभव हो पाती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की ‘अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति’ के तहत ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के प्रमुख उद्देश्यों और अपेक्षित लाभों का परीक्षण कीजिए। यह मॉडल भारत के टियर-II और टियर-III शहरों की वैश्विक कनेक्टिविटी को किस प्रकार सुदृढ़ कर सकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल की संक्षिप्त परिभाषा और भारत की ‘अंतर्राष्ट्रीय विमानन हब रणनीति’ के संदर्भ में इसका महत्व।
2. **प्रमुख उद्देश्य:**
* 2030 तक भारत को भारतीय यात्रियों के लिए पसंदीदा विमानन हब बनाना।
* 2047 तक भारत को एक प्रमुख वैश्विक विमानन हब के रूप में स्थापित करना।
* विदेशी ट्रांज़िट एयरपोर्ट पर निर्भरता कम करना।
* भारत की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाना।
3. **अपेक्षित लाभ:**
* **यात्री अनुभव में सुधार:** निर्बाध चेक-इन, इमिग्रेशन और बैगेज चेक-थ्रू प्रक्रियाएँ।
* **बेहतर कनेक्टिविटी:** टियर-II और टियर-III शहरों से सीधी अंतर्राष्ट्रीय पहुँच।
* **एयरपोर्ट अवसंरचना का बेहतर उपयोग:** मौजूदा बड़े एयरपोर्टों का प्रभावी ढंग से उपयोग।
* **एयरलाइंस के लिए परिचालन क्षमता:** बेहतर रूट प्लानिंग और लागत दक्षता।
* **भारतीय विमानन की प्रतिस्पर्धात्मकता:** वैश्विक स्तर पर भारतीय एयरलाइंस की स्थिति मजबूत करना।
* **आर्थिक संवृद्धि:** पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना (अहमदाबाद के टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, हीरा और रत्न, इंजीनियरिंग सेक्टर का उदाहरण)।
4. **टियर-II और टियर-III शहरों की वैश्विक कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण:**
* ‘स्पोक’ एयरपोर्ट (जैसे वाराणसी, अमृतसर, अहमदाबाद) से सीधे अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुँच।
* इन शहरों के यात्रियों के लिए दिल्ली जैसे बड़े हब पर अनावश्यक ठहराव और प्रक्रियाओं से मुक्ति।
* स्थानीय उद्योगों और व्यवसायों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ना।
* इन शहरों में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना (कॉमनवेल्थ गेम्स का उदाहरण)।
5. **निष्कर्ष:** इस मॉडल की क्षमता और भारत के समग्र विकास पर इसके दूरगामी प्रभावों का संक्षिप्त सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Gujarat PCS (GPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा हाल ही में अहमदाबाद से शुरू किए गए ‘हब एंड स्पोक’ अंतर्राष्ट्रीय उड़ान संचालन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. गुजरात के पर्यटन को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी को सुगम बनाना
- B. केवल गुजरात के भीतर आंतरिक उड़ानों को सुगम बनाना
- C. गुजरात में औद्योगिक विकास को सीमित करना
- D. गुजरात के स्थानीय विमानन उद्योग को बंद करना
उत्तर: A. गुजरात के पर्यटन को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी को सुगम बनाना — अहमदाबाद को ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के तहत अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए केंद्र बनाकर गुजरात की अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
Mains: गुजरात के ‘हब एंड स्पोक’ अंतर्राष्ट्रीय उड़ान संचालन मॉडल के महत्व और इसके राज्य की अर्थव्यवस्था तथा पर्यटन पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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