आईसीएआर द्वारा स्वच्छता अभियान: गणेश विसर्जन से पर्यावरण संरक्षण तक

आईसीएआर संस्थानों का स्वच्छता और टिकाऊ कचरा प्रबंधन को बढ़ावा — labelled illustration

आईसीएआर द्वारा स्वच्छता अभियान: गणेश विसर्जन से पर्यावरण संरक्षण तक

✎ ICAR की 'स्वच्छता ही सेवा' पहल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देती है, विशेषकर त्योहारों के दौरान।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology)  |  GS Paper III — आपदा प्रबंधन (Disaster Management)  |  GS Paper II — शासन (Governance)
  • Prelims: स्वच्छता ही सेवा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जैविक खाद (Compost), जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट (Biodegradable Waste), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम
  • Essay: सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास के लिए अपशिष्ट प्रबंधन की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: ICAR की ‘स्वच्छता ही सेवा’ पहल अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देती है, विशेषकर त्योहारों के दौरान।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत अपने संस्थानों में जागरूकता और स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य गणेश विसर्जन के बाद सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई, कचरे का ज़िम्मेदार प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना था।

पृष्ठभूमि

  • भारत में त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी मात्रा में अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें अक्सर गैर-जैव निम्नीकरणीय सामग्री शामिल होती है।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी मूर्तियों और रासायनिक रंगों का उपयोग जल निकायों को प्रदूषित करता है, जिससे जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • केंद्र सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो देश भर में स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 (Solid Waste Management Rules, 2016) अपशिष्ट के पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान के लिए दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
  • ICAR जैसे संस्थान, जो कृषि अनुसंधान में संलग्न हैं, ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि-आधारित समुदायों में स्वच्छता प्रथाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • जैविक खाद बनाना (Composting) जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट के प्रबंधन और कृषि के लिए मूल्यवान संसाधन (जैविक खाद) उत्पन्न करने का एक प्रभावी तरीका है।

स्वच्छता ही सेवा अभियान और अपशिष्ट प्रबंधन

  • ‘स्वच्छता ही सेवा’ एक राष्ट्रव्यापी अभियान है जिसका उद्देश्य स्वच्छता के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
  • यह अभियान ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका लक्ष्य भारत को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त बनाना है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) में अपशिष्ट के संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण या निपटान की प्रक्रियाएं शामिल हैं, ताकि पर्यावरण पर इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके।
  • जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट (Biodegradable Waste) वह अपशिष्ट है जिसे सूक्ष्मजीवों द्वारा प्राकृतिक रूप से विघटित किया जा सकता है, जैसे कि खाद्य अपशिष्ट, पौधों के अवशेष और फूलों की सामग्री।
  • जैविक खाद (Compost) जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट को विघटित करके बनाई गई एक पोषक तत्व-समृद्ध सामग्री है, जिसका उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए किया जाता है।
  • ICAR की पहल में पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों के उपयोग को बढ़ावा देना, प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्तियों के विसर्जन से बचना और पूजा सामग्री के उचित निपटान पर जोर देना शामिल है।
  • इस पहल के तहत, ICAR संस्थानों ने जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट (जैसे फूल और पूजा सामग्री) को इकट्ठा करके जैविक खाद में परिवर्तित किया, जिससे अपशिष्ट को एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सके।
  • सामुदायिक भागीदारी और जन जागरूकता ऐसे कार्यक्रमों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये व्यक्तियों को अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाने और पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
स्वच्छता ही सेवा अभियान सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देना।
पर्यावरण-अनुकूल मूर्तियों का उपयोग जल प्रदूषण को कम करना और प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा करना।
कचरा पृथक्करण और प्रबंधन बायोडिग्रेडेबल कचरे को खाद में परिवर्तित कर संसाधन उपयोग को बढ़ावा देना।
सार्वजनिक स्थानों की सफाई स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना।
जल स्रोतों की सुरक्षा रासायनिक प्रदूषण से बचाकर पीने योग्य पानी की गुणवत्ता बनाए रखना।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह पहल जल निकायों में प्रदूषण को कम करने में सहायक है, विशेषकर त्योहारों के दौरान, जब मूर्तियों और पूजा सामग्री के विसर्जन से जल प्रदूषण में वृद्धि होती है।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस (Plaster of Paris) और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के उपयोग को हतोत्साहित करके जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) की रक्षा की जाती है।
  • बायोडिग्रेडेबल कचरे को खाद में परिवर्तित करने से लैंडफिल (Landfill) पर बोझ कम होता है और जैविक खाद का उत्पादन होता है, जो कृषि के लिए उपयोगी है।

सामाजिक महत्व

  • यह अभियान समुदाय में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, जिससे नागरिकों में सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
  • त्योहारों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करता है, जिससे सांस्कृतिक प्रथाओं और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित होता है।
  • सार्वजनिक स्थानों और जल स्रोतों की सफाई में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है, जिससे स्थानीय स्तर पर स्वच्छता प्रयासों को बल मिलता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • यह ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे सरकारी अभियानों के उद्देश्यों को मजबूत करता है, जो स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • यह टिकाऊ कचरा प्रबंधन (Sustainable Waste Management) प्रथाओं को बढ़ावा देता है, जो राष्ट्रीय स्वच्छता नीतियों के अनुरूप है।
  • आईसीएआर (ICAR) जैसे अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामुदायिक आउटरीच (Outreach) के माध्यम से प्रभावी समाधान प्रदान करती है।

चुनौतियाँ

1. जन जागरूकता का अभाव

  • पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं और हानिकारक कचरे के प्रभावों के बारे में अभी भी बड़ी आबादी में जागरूकता की कमी है।
  • पारंपरिक प्रथाओं में बदलाव लाने में सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता एक चुनौती हो सकती है।

2. कचरा प्रबंधन अवसंरचना की कमी

  • त्योहारों के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे की भारी मात्रा को संभालने के लिए पर्याप्त पृथक्करण और प्रसंस्करण सुविधाओं का अभाव।
  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रभावी कचरा संग्रहण और निपटान प्रणालियों की कमी।

3. सामुदायिक भागीदारी में निरंतरता

  • अभियानों के दौरान भागीदारी उत्साहजनक हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक और निरंतर सामुदायिक जुड़ाव बनाए रखना कठिन है।
  • स्थानीय निकायों और स्वयंसेवी संगठनों के बीच समन्वय की कमी।

4. प्रवर्तन और निगरानी

  • पर्यावरण नियमों और कचरा प्रबंधन दिशानिर्देशों का प्रभावी ढंग से प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
  • जल निकायों में प्रदूषण को रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियाँ जल प्रदूषण, जलीय जीवन को खतरा, पानी की गुणवत्ता में गिरावट।
रासायनिक रंग और पेंट पानी में विषाक्त पदार्थों का रिसाव, मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव।
गैर-बायोडिग्रेडेबल पूजा सामग्री प्लास्टिक, थर्मोकोल जैसे कचरे का ढेर, जो लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है।
अव्यवस्थित विसर्जन नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों का प्रदूषण, स्वच्छता का अभाव।
कचरा पृथक्करण का अभाव बायोडिग्रेडेबल और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का मिश्रण, जिससे पुनर्चक्रण और खाद बनाना मुश्किल होता है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • स्वच्छ भारत अभियान
  • स्वच्छता ही सेवा

आगे की राह

  • पर्यावरण-अनुकूल त्योहारों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिसमें मिट्टी की मूर्तियों और प्राकृतिक रंगों के उपयोग पर जोर दिया जाए।
  • शहरी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों द्वारा त्योहारों के दौरान कचरा संग्रहण, पृथक्करण और प्रसंस्करण के लिए पर्याप्त अवसंरचना विकसित की जाए।
  • सामुदायिक संगठनों, धार्मिक नेताओं और स्वयंसेवकों को शामिल करके स्वच्छता अभियानों में दीर्घकालिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
  • जल निकायों के पास विसर्जन के लिए निर्दिष्ट और नियंत्रित स्थान स्थापित किए जाएं, जहाँ कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था हो।
  • बायोडिग्रेडेबल कचरे को खाद में बदलने की तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय स्तर पर खाद बनाने की इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाए।
  • पर्यावरण नियमों के प्रभावी प्रवर्तन और निगरानी के लिए स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाया जाए, ताकि प्रदूषण फैलाने वालों पर उचित कार्रवाई हो सके।
  • शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान निकायों को पर्यावरण-अनुकूल समाधानों पर शोध करने और उन्हें लागू करने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

स्वच्छता ही सेवा · ठोस अपशिष्ट प्रबंधन · जैव निम्नीकरणीय कचरा · कम्पोस्ट खाद · पर्यावरण संरक्षण · सामुदायिक भागीदारी · जल प्रदूषण नियंत्रण · सतत विकास

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

त्योहारों के दौरान उत्पन्न होने वाला कचरा (मूर्तियाँ, पूजा सामग्री)  →  जल निकायों में विसर्जन से प्रदूषण (रासायनिक, गैर-बायोडिग्रेडेबल)  →  पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव  →  आईसीएआर द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम  →  जागरूकता, कचरा पृथक्करण और खाद निर्माण को बढ़ावा  →  प्रदूषण में कमी और टिकाऊ कचरा प्रबंधन  →  स्वच्छ पर्यावरण और सामुदायिक भागीदारी

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का उद्देश्य जन भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देना है।
2. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) कृषि मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है।
3. गणेश विसर्जन के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों का उपयोग जल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान जन भागीदारी के माध्यम से स्वच्छता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि ICAR कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है। कथन 3 भी सही है क्योंकि PoP की मूर्तियाँ पानी में आसानी से नहीं घुलतीं और उनमें रासायनिक रंग होते हैं, जो जल प्रदूषण का कारण बनते हैं।

Q2. कथन (A): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जैसे संस्थान ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
कारण (R): ये कार्यक्रम केवल शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A सही है, लेकिन R गलत है। — कथन (A) सही है क्योंकि ICAR संस्थान स्वच्छता कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। कारण (R) गलत है क्योंकि ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रम केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण और कृषि संस्थानों सहित व्यापक क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) में सामुदायिक भागीदारी के महत्व का परीक्षण कीजिए। ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों के माध्यम से इसे कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की संक्षिप्त परिभाषा और इसकी वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करें। सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डालें, जिसमें जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन, कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण और स्थानीय समाधानों में सहभागिता शामिल हो। ‘स्वच्छता ही सेवा’ जैसे अभियानों की भूमिका का विश्लेषण करें, जिसमें जन आंदोलन, संस्थागत सहयोग (जैसे ICAR का उदाहरण), और स्थायी प्रथाओं को बढ़ावा देना शामिल हो। जल प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन पुनर्प्राप्ति (जैसे कम्पोस्ट खाद बनाना) के संदर्भ में इसके लाभों पर चर्चा करें। निष्कर्ष में, सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सामुदायिक भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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