06 Nov उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन 7 नवंबर को अयोध्या में दीपोत्सव 2026 में शामिल होंगे
✎ उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है (अनुच्छेद 64), निर्वाचन अनुच्छेद 66 के अंतर्गत निर्वाचक मंडल द्वारा एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है, और कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है (अनुच्छेद 67)।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय संस्कृति (त्योहार, धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल और परंपराएँ) | GS Paper II — भारतीय राजव्यवस्था (उपराष्ट्रपति का संवैधानिक पद, राज्यसभा के सभापति की भूमिका)
- Prelims: उपराष्ट्रपति (Vice-President) की योग्यता, निर्वाचन और कार्यकाल, अनुच्छेद 63 (उपराष्ट्रपति का पद), अनुच्छेद 64 (राज्यसभा का पदेन सभापति), अनुच्छेद 66 (उपराष्ट्रपति का निर्वाचन) और निर्वाचक मंडल, अनुच्छेद 67 (कार्यकाल, त्यागपत्र और पद से हटाने की प्रक्रिया), एकल संक्रमणीय मत पद्धति (Single Transferable Vote) का प्रयोग उपराष्ट्रपति निर्वाचन में, अयोध्या: उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के तट पर स्थित प्रमुख धार्मिक नगर, दीपोत्सव: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में आयोजित वार्षिक उत्सव, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) का गठन
- Essay: सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता: उत्सवों की सामाजिक भूमिका, संवैधानिक पदों की गरिमा, निष्पक्षता और संवैधानिक नैतिकता
त्वरित पुनरावृत्ति: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है (अनुच्छेद 64), निर्वाचन अनुच्छेद 66 के अंतर्गत निर्वाचक मंडल द्वारा एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है, और कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है (अनुच्छेद 67)।
यह खबर चर्चा में क्यों?
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन 7 नवंबर 2026 को अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव 2026 में शामिल होंगे। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, वे इस दौरे में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे, प्रभु श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भाग लेंगे और इस अवसर पर पूज्य संतों को सम्मानित करेंगे। यह समाचार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक संवैधानिक पदाधिकारी की सार्वजनिक सहभागिता एक सांस्कृतिक उत्सव के साथ जुड़ती है, जिससे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक पदों की भूमिका, दोनों पर विचार का अवसर मिलता है।
पृष्ठभूमि
- दीपोत्सव उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में आयोजित किया जाने वाला वार्षिक उत्सव है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2017 में हुई। इसमें घाटों पर दीप प्रज्वलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख होते हैं।
- अयोध्या सप्तपुरियों में से एक मानी जाती है और यह भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में रामायण से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिनी जाती है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को अयोध्या भूमि विवाद पर निर्णय दिया था, जिसके बाद केंद्र सरकार की योजना के अंतर्गत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ।
- उपराष्ट्रपति भारतीय संसद के उच्च सदन, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं, इसलिए उनसे सार्वजनिक आचरण में संवैधानिक निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है।
- संस्कृति मंत्रालय और राज्य सरकारें धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सवों के माध्यम से विरासत-संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देती हैं।
उपराष्ट्रपति पद क्या है?
- उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पदाधिकारी है। संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
- अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। वह सदन की कार्यवाही का संचालन करता है और सदन में मत बराबर होने पर निर्णायक मत दे सकता है, परंतु सामान्यतः मत नहीं देता।
- उपराष्ट्रपति का निर्वाचन अनुच्छेद 66 के अंतर्गत संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से गुप्त मतदान द्वारा होता है।
- उपराष्ट्रपति का कार्यकाल अनुच्छेद 67 के अंतर्गत पाँच वर्ष होता है। वह राष्ट्रपति को संबोधित कर अपना त्यागपत्र दे सकता है, और राज्यसभा के संकल्प तथा लोकसभा की सहमति से पद से हटाया जा सकता है।
- यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए, तो उपराष्ट्रपति अनुच्छेद 65 के अंतर्गत राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है।
- उपराष्ट्रपति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप सभी वर्गों के प्रति समान दृष्टि रखे और सदन की कार्यवाही में निष्पक्ष रहे।
- दीपोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में संवैधानिक पदाधिकारियों की उपस्थिति को प्रायः सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान के रूप में देखा जाता है, परंतु उनके आचरण में संवैधानिक तटस्थता का पालन आवश्यक माना जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्यक्रम का स्वरूप | उपराष्ट्रपति (Vice-President) का 7 नवंबर 2026 को अयोध्या में दीपोत्सव 2026 में शामिल होने का आधिकारिक दौरा, जिसकी सूचना भारतीय सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी की गई है |
| संवैधानिक पद | उपराष्ट्रपति पद संविधान के अनुच्छेद 63 द्वारा स्थापित है। पदेन रूप से वे राज्यसभा के सभापति होते हैं (अनुच्छेद 64)। इस दौरे से उनके सार्वजनिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी की प्रथा स्पष्ट होती है |
| धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल | राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना का कार्यक्रम, जो अयोध्या को प्रमुख सांस्कृतिक और तीर्थ-स्थल के रूप में प्रस्तुत करता है |
| प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह | अयोध्या में प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भागीदारी, जो स्थानीय परंपरा और लोक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से जुड़ा आयोजन है |
| संतों का सम्मान | पूज्य संतों को सम्मानित करने का कार्यक्रम, जो सामाजिक-आध्यात्मिक संस्थाओं के साथ सार्वजनिक संवाद का एक रूप है |
| सूचना का स्रोत | सूचना PIB की विज्ञप्ति से प्राप्त हुई है। सरकारी सूचना के प्रसार में PIB की भूमिका इसी प्रकार की घोषणाओं के माध्यम से सामने आती है |
महत्व
संवैधानिक और प्रशासनिक
- उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों की सार्वजनिक उपस्थिति यह दर्शाती है कि पद की गरिमा और कार्य-निष्पादन का संबंध जनता से सीधे संवाद से भी जुड़ा है
- उपराष्ट्रपति का दौरा प्रोटोकॉल के अंतर्गत होता है, जिसमें राज्य सरकार, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक होता है
सांस्कृतिक और पर्यटन
- दीपोत्सव जैसे आयोजनों से अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और तीर्थाटन की संभावनाएँ सुदृढ़ होती हैं
- ऐसे आयोजन स्थानीय हस्तशिल्प, आतिथ्य और छोटे व्यवसायों के लिए आर्थिक अवसर उत्पन्न करते हैं
सामाजिक और सार्वजनिक संवाद
- संतों और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ कार्यक्रम संस्थागत संवाद का माध्यम बनते हैं
- सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति सार्वजनिक जागरूकता बढ़ती है
चुनौतियाँ
1. संवैधानिक तटस्थता का प्रश्न
- धार्मिक स्थलों पर उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों की उपस्थिति को लेकर यह बहस स्वाभाविक रूप से उठती है कि राज्य की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति और व्यक्तिगत आस्था के बीच संतुलन कैसे बना रहे
- सार्वजनिक पद पर रहते हुए सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए स्पष्ट आचरण-मानक और प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है
यूपीएससी लिंक: धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक पद और सार्वजनिक आचरण (GS-2)
2. भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा
- बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन निकासी और यातायात प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होते हैं
- उच्च पदाधिकारियों की उपस्थिति के कारण सुरक्षा व्यवस्था के स्तर में वृद्धि करनी पड़ती है, जिससे स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता है
यूपीएससी लिंक: आंतरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन (GS-3)
3. पर्यावरणीय प्रभाव
- बड़े पैमाने पर दीप प्रज्वलन और आतिशबाजी से वायु गुणवत्ता और अपशिष्ट प्रबंधन पर दबाव पड़ सकता है
- सांस्कृतिक आयोजनों को पर्यावरण-अनुकूल बनाना एक नीतिगत चुनौती है
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और सतत विकास (GS-3)
4. सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और शहरी विकास
- तीर्थ-नगरों में बढ़ती पर्यटक संख्या से आधारभूत संरचना, जल आपूर्ति और स्वच्छता पर भार बढ़ता है
- परंपरा और आधुनिक शहरी नियोजन के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है
यूपीएससी लिंक: सांस्कृतिक विरासत, शहरीकरण और पर्यटन (GS-1 और GS-3)
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| संवैधानिक तटस्थता | उच्च पदाधिकारियों की धार्मिक स्थलों पर उपस्थिति को लेकर धर्मनिरपेक्ष आचरण के मानकों की स्पष्टता |
| भीड़ और सुरक्षा प्रबंधन | बड़े आयोजनों में आपातकालीन योजना, निकासी मार्ग और सुरक्षा बलों का समन्वय |
| पर्यावरणीय दबाव | दीप प्रज्वलन और आतिशबाजी से वायु प्रदूषण और ठोस अपशिष्ट की समस्या |
| आधारभूत संरचना | पर्यटक दबाव के कारण जल, स्वच्छता, परिवहन और आवास पर भार |
| सांस्कृतिक संरक्षण | परंपरागत स्वरूप और शहरी विकास के बीच संतुलन की कठिनाई |
आगे की राह
- तीर्थ और सांस्कृतिक नगरों के लिए बड़े आयोजनों हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का निर्माण और उसका नियमित पुनरीक्षण किया जाए
- भीड़ प्रबंधन के लिए डिजिटल निगरानी, पूर्व-पंजीकरण और बहु-स्तरीय निकासी योजना अपनाई जाए
- पर्यावरण-अनुकूल दीपोत्सव के लिए प्रदूषण नियंत्रण मानकों और अपशिष्ट निपटान की स्पष्ट नीति लागू की जाए
- स्थानीय निकायों, राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए स्थायी अंतर-विभागीय तंत्र बनाया जाए
- पर्यटन विकास में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि आर्थिक लाभ समावेशी रूप से पहुँचे
- सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और शहरी नियोजन को एक साथ जोड़ने वाली दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए
- सार्वजनिक कार्यक्रमों में संवैधानिक पदाधिकारियों की भागीदारी के लिए पारदर्शी प्रोटोकॉल दिशानिर्देश बनाए जाएँ
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
उपराष्ट्रपति (Vice-President) · राज्यसभा के सभापति (Chairman of Rajya Sabha) · निर्वाचक मंडल (Electoral College) · एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) · कार्यवाहक राष्ट्रपति (Acting President) · संवैधानिक पद की निष्पक्षता · औपचारिक और कार्यात्मक भूमिका · धर्मनिरपेक्षता (Secularism) · धार्मिक स्वतंत्रता (Freedom of Religion) · संवैधानिक शिष्टाचार (Constitutional Conventions) · पदच्युति की प्रक्रिया (Removal Procedure) · सांस्कृतिक विरासत और राज्य की भूमिका
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 63: उपराष्ट्रपति पद की स्थापना
- अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का राज्यसभा सभापति होना
अवधारणा प्रवाह
उपराष्ट्रपति का 7 नवंबर 2026 को अयोध्या दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित होता है और PIB द्वारा विज्ञप्ति जारी की जाती है → राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियाँ प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवस्था और समन्वय सुनिश्चित करती हैं → दीपोत्सव के दौरान राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना तथा प्रतीकात्मक राज्याभिषेक समारोह में भागीदारी होती है → संतों के सम्मान से सामाजिक-आध्यात्मिक संस्थाओं के साथ सार्वजनिक संवाद बनता है → बड़े आयोजन से पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा मिलता है → इसके साथ भीड़ प्रबंधन, पर्यावरणीय दबाव और आधारभूत संरचना जैसी चुनौतियाँ सामने आती हैं, जिनके लिए नीतिगत समाधान आवश्यक होते हैं
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन उस निर्वाचक मंडल द्वारा होता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं।
2. उपराष्ट्रपति का निर्वाचन गुप्त मतदान द्वारा एकल संक्रमणीय मत पद्धति से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होता है।
3. उपराष्ट्रपति को केवल लोकसभा के संकल्प द्वारा पदच्युत किया जा सकता है।
4. किसी राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने की स्थिति में उपराष्ट्रपति नए राष्ट्रपति के निर्वाचन तक राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी चार
उत्तर: केवल तीन — कथन 1 सही है: अनुच्छेद 66(1) के अनुसार निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य आते हैं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 66(1) के अनुसार निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत द्वारा गुप्त मतदान से होता है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 67(ख) के अनुसार पदच्युति का संकल्प पहले राज्यसभा में राज्यसभा के कुल सदस्यों के बहुमत से पारित होना चाहिए और लोकसभा की सहमति आवश्यक है। कथन 4 सही है: अनुच्छेद 65 उपराष्ट्रपति को यह अधिकार देता है, अतः सही कथनों की संख्या तीन है।
Q2. अभिकथन (A): भारत में उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।
कारण (R): संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और वह राज्यसभा का सदस्य नहीं होता, परंतु उसे मत देने का अधिकार नहीं होता।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
- (A) और (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
उत्तर: (A) सही है, परंतु (R) गलत है। — अभिकथन (A) सही है: अनुच्छेद 64 के अनुसार उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। कारण (R) का दूसरा भाग गलत है: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता, परंतु यह कथन भी त्रुटिपूर्ण है क्योंकि सभापति को केवल बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत (अनुच्छेद 100(1)) का अधिकार है, सामान्य मत का नहीं। अतः विकल्प तीन सही है।
Q3. निम्नलिखित स्तंभों का मिलान कीजिए:
स्तंभ I (संवैधानिक प्रावधान)
A. अनुच्छेद 63
B. अनुच्छेद 64
C. अनुच्छेद 65
D. अनुच्छेद 67
स्तंभ II (विषय)
1. राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करना
2. उपराष्ट्रपति पद की स्थापना
3. उपराष्ट्रपति का पदेन राज्यसभा सभापति होना
4. उपराष्ट्रपति का कार्यकाल और पदत्याग
सही मिलान का चयन कीजिए:
- A-2, B-3, C-1, D-4
- A-3, B-2, C-4, D-1
- A-2, B-1, C-3, D-4
- A-1, B-3, C-2, D-4
उत्तर: A-2, B-3, C-1, D-4 — अनुच्छेद 63 उपराष्ट्रपति पद की स्थापना करता है (A-2)। अनुच्छेद 64 उपराष्ट्रपति को राज्यसभा का पदेन सभापति बनाता है (B-3)। अनुच्छेद 65 उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करने की शक्ति देता है (C-1)। अनुच्छेद 67 कार्यकाल, पदत्याग और पदच्युति से संबंधित है (D-4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ उपराष्ट्रपति को संविधान में मुख्यतः एक औपचारिक पद के रूप में देखा जाता है, परंतु राज्यसभा के सभापति के रूप में उसकी कार्यात्मक भूमिका और अनुच्छेद 65 के अंतर्गत कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में उसकी संभावित भूमिका इसे केवल औपचारिक पद से कहीं आगे ले जाती है। भारत में उपराष्ट्रपति पद की संवैधानिक स्थिति की समीक्षा कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या उपराष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक समारोहों में भाग लेना उस पद की निष्पक्षता की संवैधानिक अपेक्षाओं के अनुरूप है। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल उत्तर के बिंदु:
1. उपराष्ट्रपति पद की स्थापना: अनुच्छेद 63 (पद की स्थापना), अनुच्छेद 64 (राज्यसभा का पदेन सभापति), अनुच्छेद 89 (राज्यसभा के सभापति का उल्लेख), अनुच्छेद 100(1) (सभापति का केवल बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत)।
2. निर्वाचन और पात्रता: अनुच्छेद 66 (निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य; आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा एकल संक्रमणीय मत से गुप्त मतदान), अनुच्छेद 66(3) (पात्रता: भारत का नागरिक, 35 वर्ष की आयु, लाभ के पद पर न होना)। अनुच्छेद 71 के अंतर्गत निर्वाचन संबंधी विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार।
3. कार्यकाल और पदच्युति: अनुच्छेद 67 (पाँच वर्ष का कार्यकाल, राष्ट्रपति को संबोधित पदत्याग पत्र, राज्यसभा के समस्त सदस्यों के बहुमत के संकल्प और लोकसभा की सहमति से पदच्युति, 14 दिन की पूर्व सूचना)। अनुच्छेद 68 (पद रिक्त होने से पहले निर्वाचन)।
4. कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका: अनुच्छेद 65 के अंतर्गत राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पदच्युति पर उपराष्ट्रपति कार्य करता है; डॉ. एस. राधाकृष्णन का भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति से राष्ट्रपति बनने का ऐतिहासिक उदाहरण, और संसदीय व्यवस्था में पद की गरिमा का महत्व।
5. औपचारिक बनाम कार्यात्मक भूमिका: सभापति के रूप में सदन का संचालन, राज्यसभा के नियम (Rules of Procedure and Conduct of Business in Rajya Sabha) के अनुसार निष्पक्षता; अनुच्छेद 25 से 28 के अंतर्गत राज्य की धार्मिक तटस्थता (धर्मनिरपेक्षता) के सिद्धांत के संदर्भ में व्यक्तिगत धार्मिक सहभागिता और संस्थागत तटस्थता के बीच अंतर।
6. संतुलित दृष्टिकोण: (क) इस मत का समर्थन कि सांस्कृतिक समारोहों में व्यक्तिगत सहभागिता संवैधानिक निष्पक्षता के विपरीत नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को धार्मिक आचरण की स्वतंत्रता देता है; (ख) इस मत का समर्थन कि सभापति जैसे पद पर आसीन व्यक्ति से संस्थागत निष्पक्षता की अधिक अपेक्षा होती है और संवैधानिक शिष्टाचार (Constitutional Conventions) का पालन आवश्यक है; ग्रैनविल ऑस्टिन (Granville Austin) के ‘Indian Constitution: Cornerstone of a Nation’ में संवैधानिक संस्थाओं की नैतिक भूमिका पर चर्चा का संदर्भ दिया जा सकता है।
7. निष्कर्ष: संवैधानिक अपेक्षा और व्यक्तिगत अधिकार के बीच संतुलन, तथा यह स्पष्ट करना कि आचरण की मर्यादा संस्थागत विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Uttar Pradesh PCS (UPPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: 7 नवंबर को अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव 2026 में निम्नलिखित में से कौन शामिल हुए?
- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
- उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन
- मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ
- राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल
उत्तर: उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन — उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन 7 नवंबर को अयोध्या में दीपोत्सव 2026 में शामिल हुए थे।
Mains: उत्तर प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक विकास में अयोध्या के दीपोत्सव जैसे आयोजनों की भूमिका का मूल्यांकन करें। विशेष रूप से राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर इसके प्रभावों पर प्रकाश डालें।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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