29 Jul एनईपी 2020: कौशल विकास से लेकर डिजिटल शिक्षा तक, जानें प्रमुख बदलाव
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — सामाजिक न्याय, शिक्षा | GS Paper III — मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
- Prelims: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, समग्र शिक्षा योजना, PM e-VIDYA, दीक्षा (DIKSHA), राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF), अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP)
- Essay: भारत में शिक्षा का भविष्य: NEP 2020 के माध्यम से कौशल और प्रौद्योगिकी का एकीकरण, डिजिटल शिक्षा और समावेशी विकास: चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 भारत में शिक्षा के सभी स्तरों पर कौशल-आधारित, अनुभवात्मक और डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देकर रोजगार क्षमता तथा उद्यमशीलता क्षमताओं के विकास पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 की सिफारिशों के अनुरूप स्कूल और उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित तथा अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए किए गए विभिन्न उपायों की जानकारी दी है। इसमें समग्र शिक्षा योजना के तहत कौशल शिक्षा का एकीकरण, PM e-VIDYA और दीक्षा जैसी डिजिटल पहलों का कार्यान्वयन तथा उच्च शिक्षा में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को 29 जुलाई 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत की शिक्षा प्रणाली में परिवर्तनकारी सुधार लाना है।
- नीति का लक्ष्य 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला और बहु-विषयक बनाना है, जिसमें कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
- NEP 2020 ने स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक, सभी स्तरों पर अनुभवात्मक शिक्षण (Experiential Learning) और व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) को मुख्यधारा में लाने की सिफारिश की है।
- नीति ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से शिक्षा की पहुँच तथा गुणवत्ता में सुधार पर भी बल दिया है।
- समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी।
- आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत PM e-VIDYA पहल को मई 2020 में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कौशल-आधारित और डिजिटल शिक्षा
- कौशल शिक्षा का एकीकरण: समग्र शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कौशल शिक्षा को एक नियमित घटक के रूप में एकीकृत किया गया है।
- पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा: कक्षा 6 से 12 के लिए ’10 बैग-रहित दिन’, अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम और NCERT की ‘कौशल बोध’ श्रृंखला के माध्यम से पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा (Pre-vocational Education) का परिचय कराया गया है।
- राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF): कक्षा 9 से 12 के लिए NSQF के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं, जिसमें माध्यमिक स्तर पर कौशल मॉड्यूल एक अतिरिक्त विषय के रूप में और उच्च माध्यमिक स्तर पर वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल हैं।
- उच्च शिक्षा में कौशल: सामुदायिक महाविद्यालयों, B.Voc डिग्री कार्यक्रमों और दीन दयाल उपाध्याय कौशल केंद्रों के माध्यम से उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP): UGC और AICTE ने ‘अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP), 2025’ के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो शैक्षणिक अधिगम को संरचित अप्रेंटिसशिप और उद्योग अनुभव से जोड़ता है।
- उभरते क्षेत्रों में कौशल: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), डेटा विज्ञान (Data Science), साइबर सुरक्षा (Cyber Security), क्वांटम प्रौद्योगिकी (Quantum Technology) जैसे उभरते क्षेत्रों में कार्यक्रमों के माध्यम से कौशल-आधारित अधिगम को समर्थन दिया जा रहा है।
- PM e-VIDYA: यह एक व्यापक पहल है जो डिजिटल, ऑनलाइन और ऑन-एयर शिक्षा से संबंधित सभी प्रयासों को एकीकृत करती है।
- दीक्षा (DIKSHA): यह ‘एक राष्ट्र, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म’ है जो स्कूली शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ई-सामग्री और QR कोड युक्त ऊर्जीकृत पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण | राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की प्रमुख सिफारिश, रोजगार क्षमता में वृद्धि |
| समग्र शिक्षा योजना के तहत कौशल शिक्षा | कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कौशल शिक्षा का नियमित घटक के रूप में एकीकरण |
| ‘बैग-रहित दिन’ और ‘कौशल बोध’ पाठ्यपुस्तकें | पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा |
| राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) अनुरूप पाठ्यक्रम | कक्षा 9 से 12 के लिए कौशल मॉड्यूल और वैकल्पिक कौशल पाठ्यक्रम |
| उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित शिक्षा | सामुदायिक महाविद्यालयों, बी.वोक. कार्यक्रमों, दीन दयाल उपाध्याय कौशल केंद्रों के माध्यम से समर्थन |
| अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP), 2025 | शैक्षणिक अधिगम को संरचित अप्रेंटिसशिप और उद्योग अनुभव से जोड़ना |
महत्व
शैक्षिक महत्व
- यह नीति शिक्षा को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक कौशल और अनुभवात्मक अधिगम पर केंद्रित करती है, जिससे विद्यार्थियों की समग्र क्षमता का विकास होता है।
- कौशल शिक्षा को स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक चरणों से ही एकीकृत करने से विद्यार्थियों को भविष्य के करियर के लिए तैयार करने में मदद मिलती है।
- डिजिटल शिक्षण पहलों जैसे पीएम ई विद्या और दीक्षा के माध्यम से शिक्षा की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होता है, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में।
आर्थिक महत्व
- कौशल-आधारित शिक्षा से युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ती है, जिससे बेरोजगारी कम होती है और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलता है।
- उभरते क्षेत्रों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), डेटा विज्ञान (Data Science), साइबर सुरक्षा (Cyber Security) में कौशल विकास से भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बन सकता है।
- अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करने में सहायक है, जिससे उद्योग-अकादमिक अंतर (Industry-Academia Gap) कम होता है।
सामाजिक महत्व
- बहुभाषावाद (Multilingualism) को बढ़ावा देने वाली डिजिटल सामग्री से विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को लाभ होता है, जिससे समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) सुनिश्चित होती है।
- डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) में वृद्धि से समाज के सभी वर्गों को आधुनिक तकनीक का उपयोग करने में सशक्तिकरण मिलता है।
- उद्यमशीलता (Entrepreneurship) क्षमताओं के विकास से युवा केवल नौकरी चाहने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन सकते हैं, जिससे सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता (Socio-Economic Mobility) बढ़ती है।
शासनिक महत्व
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों का कार्यान्वयन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग का एक उदाहरण है, जिससे शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को गति मिलती है।
- समग्र शिक्षा जैसी केंद्र प्रायोजित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes) राज्यों को शिक्षा के बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता में सुधार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।
- यूजीसी (UGC) और एआईसीटीई (AICTE) जैसे नियामक निकायों द्वारा दिशानिर्देश जारी करना उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित करता है।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढांचे का अभाव
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आईसीटी लैब, स्मार्ट कक्षाओं और डिजिटल उपकरणों की कमी।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी और बिजली आपूर्ति की अविश्वसनीयता, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
2. शिक्षक प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
- कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण विधियों को अपनाने के लिए शिक्षकों के व्यापक प्रशिक्षण की आवश्यकता।
- डिजिटल उपकरणों और प्लेटफॉर्मों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए शिक्षकों की तकनीकी क्षमता को बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
3. पाठ्यक्रम का अद्यतन और प्रासंगिकता
- उभरते क्षेत्रों में कौशल पाठ्यक्रमों को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप लगातार अद्यतन करने की चुनौती।
- क्षेत्रीय और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कौशल शिक्षा को अनुकूलित करना।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
4. जागरूकता और स्वीकार्यता
- विद्यार्थियों, अभिभावकों और समुदायों के बीच कौशल शिक्षा के महत्व और करियर संभावनाओं के बारे में जागरूकता की कमी।
- व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से कमतर आंकने की सामाजिक धारणा।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: शिक्षा, मानव संसाधन
5. वित्तीय संसाधन
- कौशल शिक्षा के लिए आवश्यक प्रयोगशालाओं, उपकरणों और प्रशिक्षित शिक्षकों पर पर्याप्त निवेश की आवश्यकता।
- डिजिटल बुनियादी ढांचे के रखरखाव और उन्नयन के लिए सतत वित्तपोषण की चुनौती।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: संसाधन जुटाना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल विभाजन | शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच डिजिटल संसाधनों और पहुंच में असमानता। |
| गुणवत्तापूर्ण सामग्री की उपलब्धता | स्थानीय भाषाओं और संदर्भों में उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल और कौशल-आधारित सामग्री की कमी। |
| मूल्यांकन प्रणाली | कौशल-आधारित अधिगम के लिए पारंपरिक मूल्यांकन प्रणालियों की अपर्याप्तता। |
| उद्योग-अकादमिक सहयोग | उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रभावी और सतत साझेदारी स्थापित करने में बाधाएं। |
| शिक्षण-अधिगम का बोझ | कौशल शिक्षा को मुख्य पाठ्यक्रम के साथ एकीकृत करते समय विद्यार्थियों और शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ। |
| प्रौद्योगिकी का तेजी से बदलना | उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ कौशल पाठ्यक्रमों को अद्यतन रखने की निरंतर चुनौती। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020
- समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha)
- पीएम ई विद्या (PM eVIDYA)
- राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (National Apprenticeship Training Scheme)
आगे की राह
- कौशल शिक्षा के लिए आवश्यक डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढांचे (ICT लैब, स्मार्ट कक्षाएं) को विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत करना।
- शिक्षकों के लिए नियमित और व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना ताकि वे कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण विधियों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
- उद्योग जगत के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित करना ताकि पाठ्यक्रम को उद्योग की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।
- कौशल शिक्षा के महत्व और करियर संभावनाओं के बारे में छात्रों, अभिभावकों और समुदायों के बीच जागरूकता बढ़ाना।
- डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्मों पर स्थानीय भाषाओं और संदर्भों में उच्च गुणवत्ता वाली, इंटरैक्टिव सामग्री का विकास और उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- कौशल-आधारित अधिगम के लिए नवीन और परिणाम-उन्मुख मूल्यांकन प्रणालियों को विकसित करना।
- कौशल विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन सुनिश्चित करना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना।
- उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए कौशल शिक्षा के साथ-साथ इन्क्यूबेशन और मेंटरशिप सहायता प्रदान करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 · कौशल-आधारित शिक्षा · अनुभवात्मक शिक्षण · समग्र शिक्षा · डिजिटल शिक्षण · पीएम ई विद्या · दीक्षा प्लेटफॉर्म · रोजगार क्षमता · उद्यमशीलता · राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार
- अनुच्छेद 45: बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा
- अनुच्छेद 39(f): बच्चों के स्वस्थ विकास के अवसर
अवधारणा प्रवाह
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशें → कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर → समग्र शिक्षा और डिजिटल पहलों का कार्यान्वयन → रोजगार क्षमता और उद्यमशीलता क्षमताओं का विकास → आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक समावेशन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समग्र शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कौशल शिक्षा को एक नियमित घटक के रूप में एकीकृत किया गया है।
2. राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रम केवल उच्च माध्यमिक स्तर पर वैकल्पिक विषय के रूप में उपलब्ध कराए जाते हैं।
3. पीएम ई विद्या पहल को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 17 मई, 2020 को शुरू किया गया था।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीनों
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। समग्र शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत, कक्षा छठी से बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए कौशल शिक्षा को एक नियमित घटक के रूप में एकीकृत किया गया है।
कथन 2 गलत है। राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा के अनुरूप कौशल पाठ्यक्रम माध्यमिक स्तर पर एक अतिरिक्त विषय के रूप में और उच्च माध्यमिक स्तर पर एक वैकल्पिक विषय के रूप में प्रदान किए जाते हैं।
कथन 3 सही है। पीएम ई विद्या नामक एक व्यापक पहल को आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत 17 मई, 2020 को शुरू किया गया था।
अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल है/हैं?
1. सामुदायिक महाविद्यालय
2. बी.वोक. डिग्री कार्यक्रम
3. दीन दयाल उपाध्याय कौशल मानव क्षमताओं एवं आजीविका के लिए ज्ञान अर्जन और उन्नयन केंद्र
4. अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP), 2025
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2, 3 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — दिए गए सभी विकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की पहलें हैं। सामुदायिक महाविद्यालय, बी.वोक. डिग्री कार्यक्रम, दीन दयाल उपाध्याय कौशल मानव क्षमताओं एवं आजीविका के लिए ज्ञान अर्जन और उन्नयन केंद्र, और अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP), 2025 सभी उच्च शिक्षा में कौशल-आधारित शिक्षा का समर्थन करते हैं।
Q3. अभिकथन (A): राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का उद्देश्य अनुभवात्मक, कौशल-आधारित और उद्योग-संबद्ध अधिगम को बढ़ावा देना है।
कारण (R): यह पहल रोजगार क्षमता और उद्यमशीलता क्षमताओं के विकास में सहायता करती है।
- A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
- A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
- A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
- A असत्य है, लेकिन R सत्य है।
उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि NEP 2020 का मुख्य जोर अनुभवात्मक, कौशल-आधारित और उद्योग-संबद्ध अधिगम पर है। कारण (R) भी सही है क्योंकि ये पहलें सीधे तौर पर रोजगार क्षमता और उद्यमशीलता क्षमताओं के विकास में सहायक होती हैं, जो NEP के लक्ष्यों में से एक है। इस प्रकार, R, A की सही व्याख्या है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 भारत में कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने में किस प्रकार सहायक है? इस संदर्भ में, डिजिटल शिक्षण पहलों की भूमिका का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के मुख्य उद्देश्यों का संक्षिप्त परिचय, विशेष रूप से कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण पर जोर।
2. NEP 2020 के तहत कौशल-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा देने के उपाय:
क. स्कूली शिक्षा में: समग्र शिक्षा योजना के तहत कक्षा 6-12 में कौशल शिक्षा का एकीकरण, 10 बैग-रहित दिन, पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा, एनसीईआरटी की कौशल बोध श्रृंखला, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढाँचा (NSQF) अनुरूप पाठ्यक्रम।
ख. उच्च शिक्षा में: सामुदायिक महाविद्यालय, बी.वोक. डिग्री कार्यक्रम, दीन दयाल उपाध्याय कौशल केंद्र, UGC और AICTE के अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP), 2025, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना।
ग. उभरते क्षेत्रों में कार्यक्रम: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान, साइबर सुरक्षा, क्वांटम प्रौद्योगिकी आदि में कौशल-आधारित कार्यक्रम।
3. डिजिटल शिक्षण पहलों की भूमिका का विश्लेषण:
क. समग्र शिक्षा के अंतर्गत ICT और डिजिटल पहलें: पीएम ई विद्या और दीक्षा जैसे प्लेटफॉर्म।
ख. पीएम ई विद्या: आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत लॉन्च, बहु-माध्यम पहुंच (200 डीटीएच टीवी चैनल, 400 रेडियो चैनल), डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा।
ग. दीक्षा (DIKSHA): ‘एक देश, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म’, गुणवत्तापूर्ण ई-सामग्री, क्यूआर कोड युक्त ऊर्जीकृत पाठ्यपुस्तकें, बहुभाषावाद को बढ़ावा (3.67 लाख से अधिक सामग्री), वर्चुअल लैब्स।
घ. प्रौद्योगिकी का एकीकरण: शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में सुधार, शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि।
4. निष्कर्ष: NEP 2020 और डिजिटल पहलों के माध्यम से रोजगार क्षमता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में भारत की प्रगति और भविष्य की संभावनाएं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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