एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण हेतु ‘परिवर्तन’ योजना के दिशा-निर्देशों को मंजूरी

एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण हेतु 'परिवर्तन' योजना के दिशा-निर्देशों को मंजूरी — Parivartan Scheme Milestones

एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण हेतु ‘परिवर्तन’ योजना के दिशा-निर्देशों को मंजूरी

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भूगोल (शहरीकरण, पर्यावरणीय क्षरण)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, संघीय ढाँचा)  |  GS Paper III — पर्यावरण (प्रदूषण, संरक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन), अर्थव्यवस्था (बुनियादी ढाँचा, औद्योगिक नीतियां)
  • Prelims: परिवर्तन योजना, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR), भारत स्टेज (BS)-VI, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), वाहन स्क्रैपिंग नीति, वायु प्रदूषण, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB), प्रदूषण नियंत्रण
  • Essay: शहरीकरण और पर्यावरणीय स्थिरता: एक संतुलनकारी कार्य, भारत में स्वच्छ परिवहन की दिशा में नीतिगत हस्तक्षेपों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: परिवर्तन योजना एनसीआर में पुराने, प्रदूषणकारी वाणिज्यिक वाहनों को BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए एक व्यापक प्रोत्साहन-आधारित कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को भारत स्टेज (BS)-VI मानक वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘परिवर्तन (परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन में कमी लाने के लिए वाहन परिसंपत्तियों का त्वरित नवीनीकरण एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम) योजना’ के दिशा-निर्देशों को मंज़ूरी दे दी है। यह योजना 3 जून, 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 9,585 करोड़ रुपये के कुल खर्च के साथ अनुमोदित की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा 5,041 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता प्रदान की जाएगी।

पृष्ठभूमि

  • दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है, जहाँ वाहनों से होने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है।
  • पुराने और कम कुशल वाहन, विशेषकर भारी वाणिज्यिक वाहन, उच्च मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (PM), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और अन्य हानिकारक प्रदूषक उत्सर्जित करते हैं।
  • भारत सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न पहलें की हैं, जिनमें भारत स्टेज उत्सर्जन मानकों को चरणबद्ध तरीके से लागू करना और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना शामिल है।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की स्थापना एनसीआर के समन्वित विकास और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक कल्पना प्रस्तुत की है।
  • पूर्व में भी दिल्ली से होकर गुजरने वाले प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही को कम करने के प्रयास किए गए हैं, जैसे कि पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण।

परिवर्तन योजना क्या है?

  • परिवर्तन योजना का पूरा नाम ‘परिवहन से होने वाले वायु प्रदूषण और नेटवर्क उत्सर्जन में कमी लाने के लिए वाहन परिसंपत्तियों का त्वरित नवीनीकरण एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम’ है।
  • इसका प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों को स्वच्छ भारत स्टेज (BS)-VI मानक वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना है।
  • यह योजना 9,585 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित की गई है, जिसमें केंद्र सरकार 5,041 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता प्रदान करेगी।
  • योजना का कार्यान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा किया जाएगा, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
  • लाभार्थियों को व्यापक प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किया जाएगा, जिसमें मोटर वाहन कर में रियायत, पंजीकरण शुल्क में छूट, वाहन ऋण पर ब्याज सब्सिडी और OEM द्वारा छूट शामिल है।
  • यह योजना दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार के समन्वित और क्षेत्रव्यापी दृष्टिकोण का हिस्सा है।
  • योजना का क्रियान्वयन एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाएगा, जो विभिन्न हितधारकों और प्रणालियों को जोड़ेगा।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
लक्ष्य एनसीआर में पुराने, प्रदूषणकारी ट्रकों/बसों को BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना।
कुल परिव्यय ₹9,585 करोड़ (केंद्र सरकार से ₹5,041 करोड़ बजटीय सहायता)।
कार्यान्वयन एजेंसी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा, NCRPB के माध्यम से वित्तीय सहायता।
प्रोत्साहन पैकेज मोटर वाहन कर में रियायत, पंजीकरण शुल्क में छूट, 5% ब्याज सब्सिडी, OEM द्वारा न्यूनतम 8% छूट, ईंधन वाउचर, इलेक्ट्रिक वाहनों पर एकमुश्त आर्थिक सहायता, COD ट्रेडिंग।
राज्य सरकारों की भागीदारी राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली द्वारा 10 वर्षों के लिए मोटर वाहन कर में रियायत और पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट की अधिसूचना जारी।
उद्योग जगत की भागीदारी 11 OEM (95% से अधिक बाजार हिस्सेदारी) ने MoRTH के साथ MoU पर हस्ताक्षर कर निर्धारित छूट प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म वाहन, वी-स्क्रैप, डिजीईएलवी, PFMS, वित्तीय संस्थानों और ईंधन वाउचर प्रणाली से जुड़ा एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान, विशेषकर पार्टिकुलेट मैटर (PM) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) के उत्सर्जन में कमी।
  • स्वच्छ भारत स्टेज (BS)-VI मानकों और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देकर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार।
  • नागरिकों के लिए अधिक स्वस्थ जीवन-पर्यावरण सुनिश्चित करना और प्रदूषण-संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं को कम करना।

आर्थिक महत्व

  • वाहन उद्योग में नए वाहनों की मांग को बढ़ावा देना, जिससे विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को गति देना, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी उत्पादन शामिल हैं।
  • पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग से धातु और अन्य सामग्रियों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी को समर्थन मिलेगा।
  • ईंधन दक्षता में सुधार से परिचालन लागत में कमी और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी।

सामाजिक महत्व

  • स्वच्छ वायु से नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव।
  • परिवहन क्षेत्र में आधुनिक और कुशल प्रौद्योगिकियों को अपनाने से सुरक्षा में सुधार।
  • स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन विकल्पों तक पहुंच में वृद्धि।

शासन और नीतिगत महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वित प्रयास को दर्शाता है, जो संघीय ढांचे में पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करेगा, जिससे लाभार्थियों को सुचारू रूप से लाभ मिल सके।
  • यह योजना भारत की राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) और अन्य प्रदूषण नियंत्रण पहलों के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होगी।

चुनौतियाँ

1. वित्तीय व्यवहार्यता

  • छोटे ऑपरेटरों के लिए नए वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत, भले ही प्रोत्साहन दिए गए हों।
  • ब्याज सब्सिडी और OEM छूट के बावजूद, शेष वित्तीय बोझ वहन करने की क्षमता।

2. इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर

  • एनसीआर में वाणिज्यिक वाहनों के लिए पर्याप्त चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों की उपलब्धता।
  • लंबी दूरी के ट्रकों के लिए चार्जिंग समय और रेंज की चिंताएँ।

3. प्रौद्योगिकी अपनाने में बाधाएँ

  • पुराने वाहनों के ऑपरेटरों के लिए नई BS-VI और EV प्रौद्योगिकियों के रखरखाव और मरम्मत की जानकारी का अभाव।
  • प्रशिक्षित मैकेनिकों और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता।

4. कार्यान्वयन और निगरानी

  • योजना के लाभों को लक्षित लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म की दक्षता और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करना।

5. अंतर-राज्यीय समन्वय

  • एनसीआर में शामिल विभिन्न राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली) के बीच नीतियों और प्रोत्साहनों का सामंजस्य।
  • सीमा पार प्रदूषण के मुद्दों से निपटना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
पुराने वाहनों का प्रतिरोध कम आय वाले ऑपरेटरों द्वारा नए वाहनों की उच्च लागत के कारण योजना को अपनाने में हिचकिचाहट।
प्रोत्साहन का दुरुपयोग योजना के तहत दिए गए प्रोत्साहनों का अनुचित या धोखाधड़ी से उपयोग होने की संभावना।
स्क्रैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पुराने वाहनों के सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल स्क्रैपिंग के लिए पर्याप्त सुविधाओं की उपलब्धता और क्षमता।
जागरूकता का अभाव योजना के लाभों और प्रक्रिया के बारे में संभावित लाभार्थियों के बीच जागरूकता की कमी।
डेटा एकीकरण विभिन्न डिजिटल प्रणालियों (वाहन, PFMS, OEM) के बीच निर्बाध डेटा प्रवाह और एकीकरण सुनिश्चित करना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)
  • फेम इंडिया योजना (FAME India Scheme)
  • वाहन स्क्रैपिंग नीति (स्वैच्छिक वाहन बेड़ा आधुनिकीकरण कार्यक्रम)
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)
  • गोबर-धन योजना (GOBAR-Dhan Scheme)
  • राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना (NEMMP)
  • स्मार्ट सिटी मिशन
  • अमृत मिशन (AMRUT Mission)
  • वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम
  • राष्ट्रीय पर्यावरण नीति

आगे की राह

  • योजना के वित्तीय प्रोत्साहनों को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता या कम ब्याज वाले ऋण विकल्पों पर विचार करना, विशेषकर छोटे ऑपरेटरों के लिए।
  • एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों के लिए एक मजबूत और व्यापक चार्जिंग/बैटरी स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विकास करना।
  • लाभार्थियों, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, योजना के लाभों और आवेदन प्रक्रिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाना।
  • BS-VI और EV प्रौद्योगिकियों के रखरखाव और मरम्मत के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना, जिससे प्रशिक्षित कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
  • योजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन करना, ताकि किसी भी बाधा को समय पर पहचाना जा सके और सुधारात्मक उपाय किए जा सकें।
  • विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना, ताकि नीतियों का सामंजस्य और प्रभावी कार्यान्वयन हो सके।
  • पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग के लिए पर्यावरण-अनुकूल और कुशल स्क्रैपिंग सुविधाओं की स्थापना को बढ़ावा देना।
  • डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करते हुए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की दक्षता और उपयोगकर्ता-मित्रता में लगातार सुधार करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

वायु प्रदूषण नियंत्रण · स्वच्छ परिवहन · भारत स्टेज-VI · इलेक्ट्रिक वाहन · वाहन स्क्रैपिंग · सतत शहरीकरण · पर्यावरणीय शासन · सहकारी संघवाद · डिजिटल परिवर्तन · सर्कुलर इकोनॉमी · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · स्वास्थ्य और कल्याण

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और सुधार तथा वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा।
  • अनुच्छेद 246: संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में विषयों का वितरण (पर्यावरण समवर्ती सूची का विषय)।
  • अनुच्छेद 282: संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से अनुदान (योजना के लिए बजटीय सहायता)।
  • वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981: वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने का कानूनी ढाँचा।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक कानून।

अवधारणा प्रवाह

एनसीआर में पुराने, प्रदूषणकारी वाहन  →  उच्च वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम  →  परिवर्तन योजना का शुभारंभ (प्रोत्साहन पैकेज)  →  पुराने वाहनों का BS-VI/EV से प्रतिस्थापन  →  वाहन उत्सर्जन में कमी  →  एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार  →  स्वस्थ जीवन-पर्यावरण और सतत विकास

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. परिवर्तन योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल दिल्ली में पुराने ट्रकों और बसों को बदलने पर केंद्रित है।
2. योजना का कार्यान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
3. लाभार्थियों को वाहन ऋण पर 5% ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि योजना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में पुराने ट्रकों और बसों को बदलने पर केंद्रित है, न कि केवल दिल्ली में। कथन 2 और 3 सही हैं, योजना का कार्यान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा किया जाएगा और लाभार्थियों को वाहन ऋण पर 5% ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।

Q2. परिवर्तन योजना के तहत, निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रोत्साहन पैकेज का हिस्सा नहीं है?

  1. मोटर वाहन कर में रियायत
  2. पंजीकरण शुल्क में पूर्ण छूट
  3. वाहन ऋण पर 10% ब्याज सब्सिडी
  4. पात्र नए वाहनों पर OEM द्वारा न्यूनतम 8% की छूट

उत्तर: वाहन ऋण पर 10% ब्याज सब्सिडी — योजना के तहत वाहन ऋण पर 5% ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है, न कि 10%। अन्य सभी विकल्प योजना के प्रोत्साहन पैकेज का हिस्सा हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण से निपटने में ‘परिवर्तन’ योजना के महत्व का विश्लेषण कीजिए। इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधान हेतु सुझावों पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में, ‘परिवर्तन’ योजना का संक्षिप्त परिचय दें और एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने में इसके बहुआयामी महत्व (पर्यावरणीय, आर्थिक, सामाजिक, शासन) पर विस्तार से चर्चा करें। दूसरे भाग में, योजना के कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों जैसे वित्तीय व्यवहार्यता, EV इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रौद्योगिकी अपनाने में बाधाएँ, और अंतर-राज्यीय समन्वय को रेखांकित करें। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए ठोस और व्यवहार्य सुझाव (जैसे अतिरिक्त वित्तीय सहायता, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, जागरूकता अभियान, कौशल विकास, प्रभावी निगरानी) प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष लिखें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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