एसएएससीआई योजना: पर्यटन केंद्रों के विकास के लिए 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं को मंजूरी

एसएएससीआई योजना का कार्यान्वयन — concept mind map

एसएएससीआई योजना: पर्यटन केंद्रों के विकास के लिए 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं को मंजूरी

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एसएएससीआई योजना कार्यान्वयन

✎ एसएएससीआई योजना पर्यटन मंत्रालय की एक पहल है जो राज्यों को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्रों के विकास के लिए पूँजी निवेश हेतु विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करना, रोजगार सृजित करना और निजी…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय विरासत और संस्कृति, भूगोल  |  GS Paper II — संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, अवसंरचना, पर्यटन क्षेत्र
  • Prelims: एसएएससीआई योजना, पर्यटन मंत्रालय, पूँजी निवेश, केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (CSMC), कार्यक्रम प्रबंधन सूचना प्रणाली (PMIS), राज्य-विशिष्ट सहायता, पर्यटन अवसंरचना विकास, रोजगार सृजन
  • Essay: भारत में पर्यटन क्षेत्र का महत्व और सतत विकास की चुनौतियाँ, केंद्र-राज्य सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना और समावेशी विकास को बढ़ावा देना

त्वरित पुनरावृत्ति: एसएएससीआई योजना पर्यटन मंत्रालय की एक पहल है जो राज्यों को विश्व स्तरीय पर्यटन केंद्रों के विकास के लिए पूँजी निवेश हेतु विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करना, रोजगार सृजित करना और निजी निवेश को आकर्षित करना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री ने राज्य सभा में ‘राज्यों के लिए पूँजी निवेश (एसएएससीआई) – वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास’ योजना के कार्यान्वयन की जानकारी दी। इस योजना के तहत देश भर के 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें कर्नाटक की दो बड़ी परियोजनाएँ भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, व्यय विभाग द्वारा संशोधित दिशानिर्देशों के तहत नागालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश को भी विशेष सहायता स्वीकृत की गई है, जो देश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पर्यटन क्षेत्र आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
  • देश में पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद, विश्व स्तरीय अवसंरचना और सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती रही है।
  • केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं जैसे स्वदेश दर्शन, प्रसाद (PRASAD) आदि के माध्यम से पर्यटन विकास को बढ़ावा दे रही है।
  • राज्यों की वित्तीय क्षमता और प्राथमिकताएँ पर्यटन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भिन्नता लाती हैं, जिसके लिए विशेष केंद्रीय सहायता की आवश्यकता महसूस की गई।
  • पर्यटन मंत्रालय ने देश के विख्यात पर्यटन केंद्रों को विकसित करने के उद्देश्य से ‘राज्यों के लिए पूँजी निवेश (एसएएससीआई) – वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास’ नामक एक विशेष सहायता योजना शुरू की है।
  • इस योजना का उद्देश्य राज्यों को पूँजी निवेश के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वे विश्व स्तरीय पर्यटन अवसंरचना का निर्माण कर सकें।
  • योजना के तहत, प्रस्तावों का मूल्यांकन परिवहन-संपर्क, मौजूदा पर्यटन इको-सिस्टम, क्षमता, उपयोगी सेवाओं की उपलब्धता, परियोजना का प्रभाव और अपेक्षित मूल्य (जैसे आगंतुकों की संख्या में वृद्धि, पर्यटक खर्च, रोजगार सृजन, निजी निवेश) जैसे मानदंडों के आधार पर किया जाता है।

एसएएससीआई योजना क्या है?

  • एसएएससीआई (Special Assistance to States for Capital Investment – Development of Globally Renowned Tourist Centres) योजना पर्यटन मंत्रालय की एक पहल है जिसका उद्देश्य राज्यों को पूँजी निवेश के लिए विशेष वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य देश में वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास करना है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिले और संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ें।
  • योजना के तहत राज्यों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं, जिनकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) का मूल्यांकन विशिष्ट मानदंडों के आधार पर किया जाता है।
  • इन मानदंडों में स्थल से परिवहन-संपर्क, मौजूदा पर्यटन इको-सिस्टम, क्षमता, उपयोगी सेवाओं की उपलब्धता, परियोजना का प्रभाव और अपेक्षित मूल्य शामिल हैं।
  • अपेक्षित मूल्य में पर्यटन आगंतुकों की संख्या में वृद्धि, पर्यटक खर्च में वृद्धि, नई रोजगार संभावनाएँ और निजी निवेश आकर्षित करना जैसे पहलू शामिल हैं।
  • योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की नियमित रूप से विभिन्न स्तरों पर निगरानी की जाती है ताकि समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।
  • एसएएससीआई के दिशा-निर्देशों में एक राष्ट्रीय संस्थागत फ्रेमवर्क शामिल है, जिसमें केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (CSMC) और मिशन निदेशालय (MD) जैसे निकाय शामिल हैं।
  • केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (CSMC) में संस्कृति, आवास और शहरी कार्य, नागरिक उड्डयन, सड़क परिवहन और राजमार्ग, पत्तन, पर्यावरण और वन, ग्रामीण विकास, रेलवे और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जैसे मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जो समन्वित विकास को सुगम बनाते हैं।
  • पर्यटन मंत्रालय ने अपनी गंतव्य विकास से जुड़ी योजनाओं की निगरानी के लिए एक कार्यक्रम प्रबंधन सूचना प्रणाली (PMIS) भी विकसित की है, जो एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
विशेष सहायता योजना राज्यों को पूंजी निवेश के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, विशेषकर पर्यटन केंद्रों के विकास हेतु।
वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय बनाना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके।
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) खाका परियोजना प्रस्तावों की एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानक दिशानिर्देश प्रदान करता है।
मूल्यांकन मानदंड परिवहन-संपर्क, पर्यटन इको-सिस्टम, क्षमता, उपयोगी सेवाओं की उपलब्धता, परियोजना का प्रभाव और अपेक्षित मूल्य जैसे कारकों पर आधारित है, जो परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करते हैं।
बहु-मंत्रालयी समन्वय केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (CSMC) में विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जिससे पर्यटन विकास में समग्र और समन्वित दृष्टिकोण सुनिश्चित हो सके।
कार्यक्रम प्रबंधन सूचना प्रणाली (PMIS) परियोजनाओं की निगरानी और प्रबंधन के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • पर्यटन क्षेत्र में पूंजी निवेश से आधारभूत संरचना का विकास होता है, जिससे पर्यटकों की संख्या और खर्च में वृद्धि होती है।
  • नई रोजगार संभावनाएँ सृजित होती हैं, विशेषकर स्थानीय समुदायों के लिए, जो गरीबी उन्मूलन में सहायक है।
  • निजी निवेश को आकर्षित करने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और राज्य के राजस्व में वृद्धि होती है।

सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व

  • पर्यटन स्थलों के विकास से स्थानीय कला, संस्कृति और विरासत का संरक्षण होता है, जिससे सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है।
  • पर्यटकों और स्थानीय समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है, जिससे आपसी समझ बढ़ती है।
  • स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों में शामिल करने से उनका सशक्तिकरण होता है और जीवन स्तर में सुधार आता है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • योजना के तहत राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करना सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देता है।
  • DPR खाका और मूल्यांकन मानदंड परियोजनाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
  • PMIS जैसी डिजिटल प्रणालियों का उपयोग परियोजनाओं की निगरानी और कार्यान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता लाता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • परियोजनाओं में सतत संचालन और रखरखाव की व्यवस्थाओं को शामिल करना पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करता है।
  • इको-टूरिज्म और एडवेंचर हब जैसी परियोजनाओं का विकास पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देता है।

चुनौतियाँ

1. भूमि अधिग्रहण और वैधानिक अनुमतियाँ

  • पर्यटन परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण अक्सर जटिल और समय लेने वाला होता है।
  • पर्यावरणीय मंजूरी, वन मंजूरी और अन्य वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त करने में देरी से परियोजना लागत बढ़ सकती है।

2. अंतर-मंत्रालयी समन्वय

  • विभिन्न केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों/विभागों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी से परियोजनाओं के कार्यान्वयन में बाधा आ सकती है।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी और विभिन्न हितधारकों के हितों में टकराव एक चुनौती हो सकती है।

3. सतत संचालन और रखरखाव

  • परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उनके दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त धन और विशेषज्ञता की कमी हो सकती है।
  • स्थानीय निकायों की क्षमता और संसाधनों की कमी से पर्यटन स्थलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

4. निजी निवेश आकर्षित करना

  • पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल और स्पष्ट नीतियों की आवश्यकता होती है।
  • निवेशकों के लिए रिटर्न की अनिश्चितता और नियामक बाधाएँ निजी निवेश को हतोत्साहित कर सकती हैं।

5. स्थानीय समुदाय की भागीदारी

  • पर्यटन परियोजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
  • समुदायों को लाभों का उचित वितरण न होने से असंतोष पैदा हो सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
परियोजना कार्यान्वयन में देरी भूमि अधिग्रहण, वैधानिक अनुमतियों और अंतर-मंत्रालयी समन्वय की कमी के कारण परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं।
गुणवत्ता और मानक कुछ परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाओं की कमी हो सकती है।
पर्यावरणीय प्रभाव पर्यटन विकास से जुड़े निर्माण और गतिविधियों का स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय क्षमता निर्माण पर्यटन स्थलों के प्रबंधन और संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन और विशेषज्ञता की कमी।
पर्यटन का मौसमी स्वरूप कई पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या मौसमी होती है, जिससे राजस्व और रोजगार में अस्थिरता आती है।
सुरक्षा और संरक्षा पर्यटकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राज्यों के लिए पूँजी निवेश (SASCII) – वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास

आगे की राह

  • भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और वैधानिक अनुमतियों के लिए एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System) को लागू करना।
  • केंद्रीय और राज्य स्तर पर अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत करने के लिए एक समर्पित नोडल एजेंसी का गठन करना।
  • परियोजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव के लिए एक स्थायी वित्तपोषण मॉडल विकसित करना, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा दिया जाए।
  • स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करना और उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • पर्यटन स्थलों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने और सतत पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए सख्त दिशानिर्देश लागू करना।
  • निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए कर प्रोत्साहन, सब्सिडी और नियामक सरलीकरण जैसे उपाय करना।
  • PMIS जैसी डिजिटल निगरानी प्रणालियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करके परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

एसएएससीआई योजना · पर्यटन अवसंरचना विकास · राज्यों के लिए पूंजी निवेश · पर्यटन मंत्रालय · केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति · मिशन निदेशालय · कार्यक्रम प्रबंधन सूचना प्रणाली · सतत पर्यटन · रोजगार सृजन · निजी निवेश

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा अनुदान’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 292’, ‘note’: ‘भारत सरकार द्वारा उधार लेना’}
  • {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ और राज्य के बीच शक्तियों का वितरण’}

अवधारणा प्रवाह

पर्यटन मंत्रालय द्वारा SASCII योजना की घोषणा  →  राज्यों से पर्यटन परियोजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित करना  →  DPR और मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर परियोजनाओं का चयन  →  केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को वित्तीय सहायता का अनुमोदन  →  परियोजनाओं का कार्यान्वयन और PMIS द्वारा निगरानी  →  पर्यटन स्थलों का विकास और आर्थिक-सामाजिक लाभ

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘राज्यों के लिए पूंजी निवेश (एसएएससीआई) – वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास’ योजना का उद्देश्य देश में विख्यात पर्यटन केंद्रों को विकसित करना है।
2. इस योजना के तहत, पर्यटन परियोजनाओं के लिए 100% केंद्रीय निधि केवल उन्हीं राज्यों को प्रदान की जाती है जो पूर्वोत्तर क्षेत्र से संबंधित हैं।
3. एसएएससीआई योजना के दिशा-निर्देशों में एक राष्ट्रीय संस्थागत फ्रेमवर्क शामिल है, जिसमें केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (CSMC) और मिशन निदेशालय (MD) जैसे निकाय शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास है। कथन 2 गलत है क्योंकि कर्नाटक जैसे गैर-पूर्वोत्तर राज्यों को भी 100% केंद्रीय निधि प्राप्त हुई है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना में राष्ट्रीय संस्थागत फ्रेमवर्क का प्रावधान है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से कारक ‘राज्यों के लिए पूंजी निवेश (एसएएससीआई)’ योजना के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की जांच के लिए बनाए गए मानदंडों में शामिल है/हैं?
1. स्थल से परिवहन-सम्पर्क
2. स्थल पर मौजूदा पर्यटन इको-सिस्टम
3. परियोजना का प्रभाव और अपेक्षित मूल्य
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी कारक – स्थल से परिवहन-सम्पर्क, स्थल/गंतव्य पर मौजूदा पर्यटन इको-सिस्टम, क्षमता, उपयोगी सेवाओं की उपलब्धता, परियोजना का प्रभाव और अपेक्षित मूल्य – एसएएससीआई योजना के तहत डीपीआर की जांच के लिए बनाए गए मानदंडों में शामिल हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में पर्यटन क्षेत्र के विकास में ‘राज्यों के लिए पूंजी निवेश (एसएएससीआई) – वैश्विक स्तर पर विख्यात पर्यटन केंद्रों का विकास’ योजना की भूमिका का परीक्षण कीजिए। यह योजना किस प्रकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** एसएएससीआई योजना का संक्षिप्त परिचय, इसके उद्देश्य और पर्यटन मंत्रालय की पहल के रूप में इसकी पहचान।
2. **योजना की भूमिका का परीक्षण:**
* **अवसंरचना विकास:** पर्यटन स्थलों पर परिवहन-सम्पर्क, उपयोगी सेवाओं और पर्यटन इको-सिस्टम के विकास में योगदान।
* **वित्तीय सहायता:** राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता प्रदान करना, विशेषकर 100% केंद्रीय निधि के प्रावधान का उल्लेख।
* **परियोजना चयन मानदंड:** डीपीआर जांच के मानदंडों (जैसे क्षमता, प्रभाव, अपेक्षित मूल्य) का उल्लेख और वे कैसे गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं को सुनिश्चित करते हैं।
* **रोजगार सृजन और निजी निवेश:** अपेक्षित मूल्य के तहत रोजगार संभावनाओं और निजी निवेश आकर्षित करने के लक्ष्यों पर प्रकाश।
* **समन्वित विकास:** केंद्रीय अनुमोदन और निगरानी समिति (CSMC) में विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों की भूमिका का उल्लेख।
3. **क्षेत्रीय असंतुलन और सतत पर्यटन में सहायता:**
* **क्षेत्रीय असंतुलन:** उन राज्यों को प्राथमिकता या विशेष प्रावधान (जैसे संशोधित दिशानिर्देशों के तहत नागालैंड, मिजोरम, हिमाचल प्रदेश को ₹250 करोड़ की विशेष सहायता) का उल्लेख जो पर्यटन विकास में पीछे हैं या विशेष भौगोलिक चुनौतियों का सामना करते हैं।
* **सतत पर्यटन:** डीपीआर में वैधानिक अनुमतियों, हितधारकों के परामर्श और सतत संचालन व रखरखाव की व्यवस्थाओं को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर। पर्यावरण और वन मंत्रालय के प्रतिनिधियों की CSMC में उपस्थिति का उल्लेख।
* **निगरानी और मूल्यांकन:** कार्यक्रम प्रबंधन सूचना प्रणाली (PMIS) के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित निगरानी और पारदर्शिता का उल्लेख।
4. **निष्कर्ष:** योजना की समग्र क्षमता का मूल्यांकन, भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने और समावेशी तथा सतत विकास को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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