04 Oct मद्रास उच्च न्यायालय में ‘वेट्ट्री पयणम’ योजना को असंवैधानिक घोषित करने की मांग
✎ वेट्ट्री पयानम योजना की संवैधानिक वैधता को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है, जिसमें अनुच्छेद 14 के उल्लंघन और निजी बस संचालकों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा के मुद्दे उठाए गए हैं।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — भारतीय संविधान: महत्वपूर्ण प्रावधान, संघ एवं राज्यों के कार्य और उत्तरदायित्व, संघवाद | GS Paper II — सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोजगार
- Prelims: वेट्ट्री पयानम योजना, अनुच्छेद 14, न्यायिक समीक्षा, राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (DPSP), याचिका (Writ Petition), मद्रास उच्च न्यायालय
- Essay: कल्याणकारी योजनाएँ और आर्थिक समानता: संतुलन की चुनौती, न्यायिक सक्रियता और शासन में उसकी भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: वेट्ट्री पयानम योजना की संवैधानिक वैधता को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है, जिसमें अनुच्छेद 14 के उल्लंघन और निजी बस संचालकों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा के मुद्दे उठाए गए हैं।
यह खबर चर्चा में क्यों?
तमिलनाडु सरकार की ‘वेट्ट्री पयानम’ (विजयी यात्रा) योजना, जिसके तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है, की संवैधानिक वैधता को मद्रास उच्च न्यायालय (Madras High Court) में चुनौती दी गई है। एक निजी बस संचालक ने तर्क दिया है कि यह योजना केवल सरकारी बसों तक सीमित होने के कारण निजी संचालकों के व्यवसाय को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी, जिससे प्रतिस्पर्धा में असमानता आएगी और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
पृष्ठभूमि
- तमिलनाडु सरकार ने ‘वेट्ट्री पयानम’ योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य राज्य भर में 12,695 सरकारी बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए मुफ्त यात्रा प्रदान करना है।
- इस योजना के तहत, सरकार प्रति वर्ष लगभग ₹6,000 करोड़ का व्यय राज्य परिवहन निगमों को क्षतिपूर्ति के रूप में दे रही है, जिससे प्रतिदिन 84.32 लाख महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान है।
- एक निजी बस संचालक ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर योजना को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है।
- याचिकाकर्ता का दावा है कि यह योजना निजी बस संचालकों के लिए ‘समान अवसर’ (level playing field) के सिद्धांत का उल्लंघन करती है, क्योंकि यात्री, विशेषकर परिवार, मुफ्त यात्रा के कारण सरकारी बसों को प्राथमिकता देंगे।
- याचिका में तर्क दिया गया है कि केवल सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देना संविधान के अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) का उल्लंघन है।
- निजी बस संचालकों के संघों ने पहले मुख्यमंत्री से योजना को निजी बसों तक भी विस्तारित करने का अनुरोध किया था, लेकिन इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला।
संवैधानिक प्रावधान और न्यायिक समीक्षा
- अनुच्छेद 14: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समानता (Equality before Law) और विधियों के समान संरक्षण (Equal Protection of Laws) का अधिकार प्रदान करता है। इसका अर्थ है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समान व्यवहार से वंचित नहीं करेगा।
- राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (DPSP): संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों का वर्णन है। ये सिद्धांत सरकार के लिए दिशानिर्देश हैं, जिनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना है। कल्याणकारी योजनाएँ अक्सर इन सिद्धांतों से प्रेरित होती हैं।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): यह न्यायपालिका की शक्ति है जिसके तहत वह विधायिका द्वारा पारित कानूनों और कार्यपालिका द्वारा जारी आदेशों की संवैधानिकता की जांच करती है। यदि कोई कानून या आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो न्यायपालिका उसे असंवैधानिक घोषित कर सकती है।
- रिट याचिका: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों को मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करते हैं। इस मामले में, याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की है।
- संघवाद (Federalism): भारत में संघवाद की प्रणाली है, जहाँ शक्तियाँ केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित हैं। राज्य सरकारें अपने अधिकार क्षेत्र में नीतियाँ और योजनाएँ बनाने के लिए स्वतंत्र हैं, बशर्ते वे संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन न करें।
- प्रतिस्पर्धा और बाजार हस्तक्षेप: सरकारी कल्याणकारी योजनाएँ कभी-कभी निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा के मुद्दे उठा सकती हैं, खासकर जब वे केवल सरकारी संस्थाओं तक सीमित हों। ऐसे मामलों में, ‘समान अवसर’ के सिद्धांत का मूल्यांकन महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए निःशुल्क यात्रा | यह योजना तमिलनाडु में सरकारी बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान करती है, जिससे उनकी गतिशीलता और आर्थिक भागीदारी बढ़ती है। |
| सरकारी बसों तक सीमित | यह सुविधा केवल राज्य परिवहन निगमों द्वारा संचालित बसों में उपलब्ध है, निजी बस ऑपरेटरों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। |
| व्यापक कवरेज | यह योजना राज्य भर में 12,695 सरकारी बसों में लागू है, जिससे बड़ी संख्या में लाभार्थियों को कवर किया जा रहा है। |
| राज्य सरकार द्वारा ₹6,000 करोड़ का वार्षिक व्यय | राज्य सरकार इस योजना के लिए प्रति वर्ष ₹6,000 करोड़ का भारी-भरकम व्यय कर रही है, जो इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है। |
| दैनिक 84.32 लाख महिलाओं को लाभ | इस योजना से प्रतिदिन लगभग 84.32 लाख महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान है, जिससे उनकी दैनिक यात्रा लागत में कमी आएगी। |
महत्व
सामाजिक महत्व
- महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की गतिशीलता में वृद्धि: निःशुल्क यात्रा सुविधा से महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शिक्षा, रोजगार और अन्य सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे उनकी सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी।
- लैंगिक समानता को बढ़ावा: यह योजना महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन तक समान पहुंच प्रदान करके लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने में मदद मिलेगी।
आर्थिक महत्व
- महिलाओं की आय में वृद्धि: यात्रा लागत में बचत से महिलाओं की डिस्पोजेबल आय बढ़ेगी, जिसे वे अन्य आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च कर सकती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
- आर्थिक भागीदारी में वृद्धि: निःशुल्क यात्रा से महिलाओं के लिए कार्यस्थलों तक पहुंचना आसान हो जाएगा, जिससे श्रम बल में उनकी भागीदारी बढ़ सकती है और आर्थिक विकास में योगदान मिल सकता है।
शासन और नीतिगत निहितार्थ
- कल्याणकारी राज्य की अवधारणा: यह योजना कल्याणकारी राज्य के सिद्धांत को दर्शाती है, जहां सरकार अपने नागरिकों, विशेषकर कमजोर वर्गों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाती है।
- सार्वजनिक-निजी क्षेत्र के बीच संतुलन: इस योजना ने सार्वजनिक और निजी परिवहन क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्धा और ‘समान अवसर’ (level playing field) के सिद्धांत पर बहस छेड़ दी है, जो भविष्य की नीति निर्माण को प्रभावित कर सकता है।
चुनौतियाँ
1. निजी बस ऑपरेटरों पर प्रतिकूल प्रभाव
- राजस्व में कमी: निजी बस ऑपरेटरों को महिला यात्रियों के नुकसान के कारण भारी राजस्व हानि का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि परिवार मुफ्त यात्रा के लिए सरकारी बसों को प्राथमिकता देंगे।
- व्यवसाय बंद होने का खतरा: लगातार घाटे के कारण कई छोटे निजी ऑपरेटरों को अपना व्यवसाय बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
2. समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन
- अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: याचिकाकर्ता का तर्क है कि केवल सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की अनुमति देना निजी ऑपरेटरों के लिए ‘समान अवसर’ के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) का उल्लंघन है।
- प्रतिस्पर्धा में विकृति: यह योजना परिवहन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को विकृत करती है, जिससे निजी क्षेत्र के लिए बाजार में बने रहना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: संविधान: मौलिक अधिकार
3. राजकोषीय बोझ और स्थिरता
- राज्य के वित्त पर दबाव: ₹6,000 करोड़ का वार्षिक व्यय राज्य के खजाने पर एक महत्वपूर्ण बोझ डालता है, जिससे अन्य विकास परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
- दीर्घकालिक स्थिरता: योजना की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता एक चिंता का विषय है, खासकर यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती रहती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: राजकोषीय नीति
4. सेवा की गुणवत्ता और भीड़
- सरकारी बसों में भीड़: मुफ्त यात्रा के कारण सरकारी बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे भीड़भाड़ और सेवा की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है।
- निजी बसों की उपयोगिता में कमी: निजी बसों में यात्रियों की कमी से उनकी उपयोगिता कम हो जाएगी, जिससे संसाधनों का अक्षम उपयोग होगा।
यूपीएससी लिंक: शासन: सार्वजनिक सेवाएं
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| निजी बस ऑपरेटरों का राजस्व | महिला यात्रियों के सरकारी बसों में जाने से निजी ऑपरेटरों को भारी नुकसान होगा। |
| समान अवसर | केवल सरकारी बसों को लाभ मिलने से निजी ऑपरेटरों के लिए बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होगी। |
| संवैधानिक वैधता | याचिकाकर्ता अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है। |
| राज्य का राजकोषीय बोझ | योजना पर ₹6,000 करोड़ का वार्षिक व्यय राज्य के वित्त पर दबाव डालता है। |
| रोजगार पर प्रभाव | निजी बस व्यवसायों के बंद होने से कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- वेट्री पयानम योजना (Vettri Payanam scheme)
आगे की राह
- निजी बस ऑपरेटरों के लिए मुआवजे या प्रोत्साहन पर विचार करना, ताकि उन्हें भी योजना का हिस्सा बनाया जा सके या उनके नुकसान की भरपाई की जा सके।
- सार्वजनिक और निजी परिवहन क्षेत्रों के बीच ‘समान अवसर’ सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक ढांचा विकसित करना।
- योजना के वित्तीय प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण करना और राज्य के वित्त पर दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उपाय करना।
- सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में परिवहन सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार के लिए समग्र परिवहन नीति तैयार करना।
- न्यायिक समीक्षा के परिणामों का सम्मान करना और यदि आवश्यक हो तो योजना में उचित संशोधन करना।
- योजना के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का नियमित मूल्यांकन करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अपने उद्देश्यों को पूरा कर रही है और अनपेक्षित नकारात्मक परिणामों को कम किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संवैधानिक वैधता · अनुच्छेद 14 · समानता का अधिकार · राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत · कल्याणकारी योजनाएँ · न्यायिक समीक्षा · संघवाद · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · प्रतिस्पर्धा · आर्थिक न्याय · सामाजिक न्याय · सरकारी हस्तक्षेप
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता
- अनुच्छेद 19(1)(g): व्यवसाय करने की स्वतंत्रता
अवधारणा प्रवाह
तमिलनाडु सरकार ने ‘वेट्री पयानम’ योजना शुरू की। → इस योजना के तहत महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा मिलती है। → निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व हानि का सामना करना पड़ता है। → एक निजी ऑपरेटर ने मद्रास उच्च न्यायालय में योजना को असंवैधानिक चुनौती दी। → याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के उल्लंघन का आरोप लगाया।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 14 राज्य को किसी भी व्यक्ति को कानून के समक्ष समानता या कानूनों के समान संरक्षण से वंचित करने से रोकता है।
2. ‘कानूनों का समान संरक्षण’ की अवधारणा अमेरिकी संविधान से ली गई है।
3. अनुच्छेद 14 केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होता है, विदेशियों पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण दोनों को सुनिश्चित करता है। कथन 2 सही है। ‘कानूनों का समान संरक्षण’ की अवधारणा अमेरिकी संविधान से ली गई है, जबकि ‘कानून के समक्ष समानता’ ब्रिटिश मूल की है। कथन 3 गलत है। अनुच्छेद 14 नागरिकों और गैर-नागरिकों दोनों पर लागू होता है।
Q2. अभिकथन (A): राज्य द्वारा महिलाओं के लिए निःशुल्क यात्रा योजनाएँ अक्सर सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की जाती हैं।
कारण (R): ऐसी योजनाएँ निजी ऑपरेटरों के लिए एक समान अवसर के सिद्धांत का उल्लंघन कर सकती हैं, जिससे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि महिलाओं के लिए निःशुल्क यात्रा योजनाएँ अक्सर सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की जाती हैं। कारण (R) भी सही है क्योंकि ऐसी योजनाएँ निजी ऑपरेटरों के लिए प्रतिस्पर्धा में असंतुलन पैदा कर सकती हैं, जिससे उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है क्योंकि R एक संभावित नकारात्मक परिणाम है, जबकि A योजना के पीछे का उद्देश्य है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ तमिलनाडु की ‘वेट्री पयानम’ जैसी निःशुल्क यात्रा योजनाओं की संवैधानिक वैधता पर मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती के आलोक में, भारत में कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन के मुद्दे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘वेट्री पयानम’ योजना और मद्रास उच्च न्यायालय में इसकी संवैधानिक चुनौती का संक्षिप्त उल्लेख करें।
2. राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत (DPSP): DPSP की अवधारणा, उनके गैर-न्यायसंगत स्वरूप और राज्य के लिए उनके मार्गदर्शक सिद्धांतों के रूप में भूमिका की व्याख्या करें। विशेष रूप से अनुच्छेद 38, 39 और 46 जैसे प्रासंगिक DPSP का उल्लेख करें जो सामाजिक और आर्थिक न्याय तथा कमजोर वर्गों के कल्याण से संबंधित हैं।
3. मौलिक अधिकार: मौलिक अधिकारों की अवधारणा, उनके न्यायसंगत स्वरूप और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के महत्व पर प्रकाश डालें, जो वर्तमान मामले में चुनौती का आधार है।
4. DPSP और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन: केशवानंद भारती मामले (1973) में ‘बुनियादी संरचना’ सिद्धांत और मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का उल्लेख करें, जिन्होंने DPSP और मौलिक अधिकारों के बीच सामंजस्य और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।
5. ‘वेट्री पयानम’ के संदर्भ में विश्लेषण:
क) योजना के कल्याणकारी पहलू: महिलाओं के सशक्तिकरण, गतिशीलता में वृद्धि और आर्थिक बोझ को कम करने में योजना की भूमिका पर चर्चा करें।
ख) अनुच्छेद 14 का संभावित उल्लंघन: निजी बस ऑपरेटरों के ‘समान अवसर’ के तर्क और राज्य द्वारा केवल सरकारी बसों को सब्सिडी देने से उत्पन्न होने वाली प्रतिस्पर्धात्मक असमानता पर प्रकाश डालें।
ग) राज्य के हस्तक्षेप का औचित्य: क्या राज्य का हस्तक्षेप सार्वजनिक हित में है और क्या यह आनुपातिक है।
6. न्यायिक समीक्षा की भूमिका: ऐसी योजनाओं की संवैधानिक वैधता का निर्धारण करने में न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा करें, जिसमें वह DPSP के लक्ष्यों और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के दावों के बीच संतुलन बनाती है।
7. निष्कर्ष: कल्याणकारी राज्य के लक्ष्यों को प्राप्त करने और साथ ही निजी क्षेत्र के हितों और संवैधानिक सिद्धांतों का सम्मान करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- मद्रास उच्च न्यायालय में ‘वेट्ट्री पयणम’ योजना को असंवैधानिक घोषित करने की मांग - October 4, 2026
- Gurugram’s groundwater extraction exceeds limit by 212%; HC seeks ban - October 4, 2026
- स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा की जन्म जयंती पर पीएम का श्रद्धांजलि - October 4, 2026

No Comments