19 Sep ओडिशा में 870 एकड़ में बनेगा ‘सिलिकॉन वैली’, जानिए क्या होगा फायदा
✎ ओडिशा सरकार द्वारा कटक के नाराज़ में 'ओडिशा सिलिकॉन वैली' की स्थापना सेमीकंडक्टर और आईटी परियोजनाओं को आकर्षित करने, रोज़गार सृजित करने और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper II — शासन
- Prelims: ओडिशा सिलिकॉन वैली, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी परियोजनाएँ, मेक इन इंडिया, औद्योगिक गलियारे
- Essay: भारत में क्षेत्रीय असंतुलन और संतुलित औद्योगिक विकास का महत्व, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ओडिशा सरकार द्वारा कटक के नाराज़ में ‘ओडिशा सिलिकॉन वैली’ की स्थापना सेमीकंडक्टर और आईटी परियोजनाओं को आकर्षित करने, रोज़गार सृजित करने और भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
ओडिशा सरकार ने कटक जिले के नाराज़ में 870 एकड़ क्षेत्र में ‘ओडिशा सिलिकॉन वैली’ विकसित करने की योजना की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में प्रमुख सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) परियोजनाओं को आकर्षित करना है। राज्य सरकार को लगभग 23,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 6,100 रोज़गार के अवसर सृजित होने की संभावना है। यह कदम भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं, जिनमें ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ (India Semiconductor Mission) प्रमुख है।
- सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए महत्वपूर्ण हैं और इनका उपयोग स्मार्टफोन से लेकर ऑटोमोबाइल तथा रक्षा उपकरणों तक हर चीज़ में होता है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों के कारण सेमीकंडक्टर की कमी ने भारत को घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।
- ओडिशा सरकार ने सेमीकंडक्टर उपकरण विनिर्माण, सेमीकंडक्टर-ग्रेड गैसों, कच्चे माल और आपूर्ति-श्रृंखला खंडों में भारत सेमीकंडक्टर मिशन-अनुमोदित परियोजनाओं को 25% अतिरिक्त राजकोषीय सहायता प्रदान करने की नीति बनाई है।
- नाराज़ का रणनीतिक स्थान, कटक-भुवनेश्वर शहरी गलियारे से कनेक्टिविटी, पारादीप और धामरा जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक पहुँच, तथा महानदी नदी से पानी की उपलब्धता इसे सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक आदर्श स्थल बनाती है।
- यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) जैसी पहलों को बढ़ावा देने में सहायक होगी, जिससे देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- राज्य सरकार इंजीनियरों के स्थानांतरण, जनशक्ति कौशल विकास, इंटर्नशिप, अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए भी सहायता प्रदान कर रही है।
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को विश्वसनीय बिजली और पानी की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है, जिसके लिए नाराज़ का स्थान अनुकूल है।
सेमीकंडक्टर विनिर्माण और भारत का दृष्टिकोण
- सेमीकंडक्टर (Semiconductor) ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता कंडक्टर (जैसे तांबा) और इंसुलेटर (जैसे कांच) के बीच होती है। इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, विशेषकर चिप्स के निर्माण में होता है।
- सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जो कंप्यूटिंग, संचार और स्वचालन सहित विभिन्न क्षेत्रों को शक्ति प्रदान करते हैं।
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक विशिष्ट और स्वतंत्र व्यापार प्रभाग है, जिसे भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है।
- भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) (Production-Linked Incentive) योजनाएँ और अन्य वित्तीय सहायताएँ शुरू की हैं।
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण में अत्यधिक पूंजी-गहन निवेश, उन्नत प्रौद्योगिकी और कुशल जनशक्ति की आवश्यकता होती है।
- घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता से आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति देश की भेद्यता घटेगी और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन बढ़ेगा।
- यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी, जिससे उच्च-प्रौद्योगिकी रोज़गार सृजित होंगे।
- ओडिशा जैसे राज्यों द्वारा इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा और देश के विभिन्न हिस्सों में औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ओडिशा सिलिकॉन वैली | कटक के नाराज़ में 870 एकड़ में अर्धचालक (Semiconductor), इलेक्ट्रॉनिक्स और IT परियोजनाओं के लिए हब। |
| रणनीतिक स्थान | कटक-भुवनेश्वर शहरी गलियारे से कनेक्टिविटी; पारादीप और धामरा जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक मल्टीमॉडल पहुंच; राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ाव। |
| जल और बिजली की उपलब्धता | महानदी नदी के निकटता से औद्योगिक जल आवश्यकताओं की पूर्ति, जो अर्धचालक निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है। |
| निवेश प्रस्ताव | लगभग 23,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव और 6,100 रोजगार के अवसर सृजित होने की क्षमता। |
| नीतिगत समर्थन | इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं को 25% अतिरिक्त वित्तीय सहायता। |
| कौशल विकास और अनुसंधान | इंजीनियरों के स्थानांतरण, जनशक्ति कौशल, इंटर्नशिप, अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए समर्थन। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह परियोजना ओडिशा में औद्योगिक विकास को गति देगी, विशेषकर उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में।
- लगभग 23,600 करोड़ रुपये के निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
- अर्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के विकास से राज्य की जीडीपी (GDP) में वृद्धि होगी और तकनीकी निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
रणनीतिक महत्व
- भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत अर्धचालक निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- नाराज़ का रणनीतिक स्थान, बंदरगाहों और राष्ट्रीय राजमार्गों से कनेक्टिविटी, इसे अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है।
- यह परियोजना भारत को वैश्विक अर्धचालक मूल्य श्रृंखला (Global Semiconductor Value Chain) में एक मजबूत स्थिति बनाने में मदद करेगी, जिससे भू-राजनीतिक निर्भरता कम होगी।
रोजगार और कौशल विकास
- 6,100 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे, जिससे स्थानीय आबादी को लाभ मिलेगा।
- कौशल विकास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में कुशल जनशक्ति का निर्माण होगा, जो भविष्य की औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
- इंजीनियरों के स्थानांतरण और अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट के लिए समर्थन से अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।
पर्यावरणीय और संसाधन प्रबंधन
- महानदी नदी के निकटता से जल की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जो अर्धचालक निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है।
- परियोजना के दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रभावों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और प्रबंधन आवश्यक होगा ताकि सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
चुनौतियाँ
1. बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी
- परियोजना के लिए आवश्यक विश्व-स्तरीय बुनियादी ढाँचे (सड़क, बिजली, पानी) का समय पर विकास और रखरखाव सुनिश्चित करना।
- परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करना ताकि कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों का वितरण सुचारू रूप से हो सके।
यूपीएससी लिंक: आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचा
2. कुशल जनशक्ति की उपलब्धता
- अर्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए आवश्यक अत्यधिक कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की कमी को पूरा करना।
- स्थानीय स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाना।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
3. पर्यावरणीय स्थिरता
- अर्धचालक निर्माण में भारी मात्रा में जल और बिजली की आवश्यकता होती है; इन संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना।
- औद्योगिक अपशिष्ट और प्रदूषण के प्रबंधन के लिए प्रभावी नीतियां और प्रौद्योगिकियां लागू करना।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास
4. निवेश और वित्तीय प्रोत्साहन
- घोषित निवेश प्रस्तावों को वास्तविकता में बदलना और अतिरिक्त घरेलू व विदेशी निवेश आकर्षित करना।
- राजकोषीय समर्थन और अन्य प्रोत्साहनों को प्रभावी ढंग से लागू करना ताकि निवेशकों का विश्वास बना रहे।
यूपीएससी लिंक: निवेश मॉडल, सरकारी नीतियां
5. तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार
- केवल असेंबली इकाइयों के बजाय उच्च-स्तरीय अनुसंधान और विकास तथा फैब्रिकेशन (Fabrication) क्षमताओं को विकसित करना।
- अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नवाचार को बढ़ावा देना।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | 870 एकड़ भूमि के अधिग्रहण में संभावित चुनौतियाँ और स्थानीय निवासियों का पुनर्वास। |
| तकनीकी विशेषज्ञता | अर्धचालक निर्माण की जटिल प्रक्रिया के लिए आवश्यक उन्नत तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता की कमी। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | वैश्विक अर्धचालक बाजार में पहले से स्थापित खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना। |
| पर्यावरणीय प्रभाव आकलन | परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का सटीक आकलन और शमन उपायों का प्रभावी कार्यान्वयन। |
| दीर्घकालिक वित्तपोषण | परियोजना के विभिन्न चरणों के लिए दीर्घकालिक और स्थिर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| नीतिगत स्थिरता | निवेशकों के विश्वास के लिए नीतिगत स्थिरता और नियामक स्पष्टता बनाए रखना। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission)
आगे की राह
- उच्च-तकनीकी कौशल विकास के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना।
- अर्धचालक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक विश्व-स्तरीय बुनियादी ढाँचे का तीव्र और सतत विकास सुनिश्चित करना।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) को प्राथमिकता देना और सतत जल एवं ऊर्जा प्रबंधन रणनीतियों को लागू करना।
- निवेशकों के लिए एक स्थिर और पारदर्शी नीतिगत ढाँचा बनाए रखना तथा अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
- अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना ताकि भारत केवल असेंबली हब के बजाय डिजाइन और फैब्रिकेशन में भी अग्रणी बन सके।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, विशेषकर जापान, स्वीडन और ताइवान जैसे देशों के साथ तकनीकी हस्तांतरण और विशेषज्ञता साझा करने के लिए।
- स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा करना ताकि परियोजना का लाभ समावेशी हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ओडिशा सिलिकॉन वैली · सेमीकंडक्टर विनिर्माण · इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र · सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाएँ · औद्योगिक गलियारा · बुनियादी ढांचा विकास · निवेश प्रोत्साहन · रोजगार सृजन · मेक इन इंडिया · आत्मनिर्भर भारत · क्षेत्रीय विकास · विनिर्माण क्षेत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 19(1)(g) – व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता
- अनुच्छेद 246 – संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
- अनुच्छेद 282 – संघ और राज्यों द्वारा व्यय
अवधारणा प्रवाह
ओडिशा सरकार की ‘सिलिकॉन वैली’ योजना → अर्धचालक, इलेक्ट्रॉनिक्स और IT परियोजनाओं को आकर्षित करना → निवेश और रोजगार के अवसरों का सृजन → राज्य की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता में वृद्धि → भारत की अर्धचालक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ओडिशा सरकार कटक जिले के नाराज़ में ‘ओडिशा सिलिकॉन वैली’ विकसित करने की योजना बना रही है।
2. यह परियोजना विशेष रूप से कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों पर केंद्रित होगी।
3. राज्य सरकार ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन-अनुमोदित परियोजनाओं को अतिरिक्त राजकोषीय सहायता देने की घोषणा की है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि ओडिशा सरकार कटक के नाराज़ में सिलिकॉन वैली हब की योजना बना रही है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह परियोजना सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी परियोजनाओं पर केंद्रित है, न कि कृषि पर। कथन 3 सही है क्योंकि ओडिशा सरकार ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन-अनुमोदित परियोजनाओं के लिए 25% अतिरिक्त राजकोषीय सहायता की घोषणा की है।
Q2. अभिकथन (A): ओडिशा में नाराज़ क्षेत्र को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक रणनीतिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
कारण (R): नाराज़ क्षेत्र महानदी नदी के निकट है, जो औद्योगिक जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान का लाभ प्रदान करता है।
सही विकल्प चुनें:
- A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
- A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
- A सही है, लेकिन R गलत है।
- A गलत है, लेकिन R सही है।
उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A का सही स्पष्टीकरण है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि नाराज़ को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। कारण (R) भी सही है और A का सही स्पष्टीकरण है क्योंकि महानदी नदी से निकटता जल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण लाभ है, जो सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए आवश्यक है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ ओडिशा सरकार द्वारा कटक के नाराज़ में ‘ओडिशा सिलिकॉन वैली’ की स्थापना की योजना भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए क्या निहितार्थ रखती है? इस पहल से जुड़े संभावित लाभों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर कंकाल:
1. **परिचय:** ओडिशा सिलिकॉन वैली पहल का संक्षिप्त परिचय, इसका उद्देश्य और स्थान।
2. **भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए निहितार्थ:**
* **आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा:** घरेलू विनिर्माण क्षमता में वृद्धि।
* **आयात निर्भरता में कमी:** महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए विदेशी निर्भरता कम करना।
* **वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिति:** भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना।
* **अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा:** अन्य राज्यों को भी ऐसे हब विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
3. **संभावित लाभ:**
* **आर्थिक संवृद्धि और रोजगार सृजन:** प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर।
* **बुनियादी ढांचा विकास:** कनेक्टिविटी, बिजली और जल आपूर्ति में सुधार।
* **कौशल विकास:** विशिष्ट तकनीकी कौशल वाले कार्यबल का विकास।
* **निवेश प्रोत्साहन:** घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करना (जैसे जापान, स्वीडन, ताइवान से)।
* **पारिस्थितिकी तंत्र का विकास:** सहायक उद्योगों और अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा।
* **भौगोलिक लाभ:** महानदी नदी से जल की उपलब्धता और प्रमुख बंदरगाहों (पारादीप, धामरा) से कनेक्टिविटी।
4. **चुनौतियाँ:**
* **उच्च पूंजी निवेश:** सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक पूंजी-गहन उद्योग है।
* **तकनीकी विशेषज्ञता की कमी:** उन्नत विनिर्माण के लिए विशेषज्ञता और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता।
* **वैश्विक प्रतिस्पर्धा:** स्थापित वैश्विक खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा।
* **पर्यावरणीय चिंताएँ:** जल और ऊर्जा की बड़ी खपत से उत्पन्न पर्यावरणीय प्रभाव।
* **नीतिगत स्थिरता:** दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन और स्थिरता की आवश्यकता।
* **भूमि अधिग्रहण और स्थानीय प्रतिरोध:** बड़े पैमाने की परियोजनाओं में अक्सर आने वाली समस्याएँ।
5. **निष्कर्ष:** इन चुनौतियों का समाधान करते हुए, यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, जिससे व्यापक आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिलेंगे।
स्रोत: The Hindu
Odisha PCS (OPSC (OAS)) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: ओडिशा सरकार द्वारा कटक के नरज में प्रस्तावित 870 एकड़ के सिलिकॉन वैली हब का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- A. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देना
- B. कृषि उत्पादन में वृद्धि करना
- C. पर्यटन क्षेत्र का विकास करना
- D. शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करना
उत्तर: A. राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देना — इस परियोजना का उद्देश्य ओडिशा में सूचना प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर उद्योग को विकसित करना है, जिससे राज्य में नवाचार और रोजगार सृजन हो सके।
Mains: ओडिशा सरकार द्वारा प्रस्तावित सिलिकॉन वैली हब (870 एकड़, नरज, कटक) के संभावित आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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