औषध विभाग ने ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए शुरू किया विशेष अभियान 6

औषध विभाग ने ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए शुरू किया विशेष अभियान 6

औषध विभाग ने ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए शुरू किया विशेष अभियान 6

विशेष अभियान 6 प्रक्रियातैयारी चरण15-30 सितंबरशुभारंभ2 अक्टूबरनिष्पादन31 अक्टूबर तकनिपटानई-कचरा, शिकायतेंसमीक्षाकार्यप्रणाली सुधार
विशेष अभियान 6 प्रक्रिया

✎ विशेष अभियान 6 औषध विभाग द्वारा ई-कचरा प्रबंधन, लंबित मामलों के निपटारे और कार्यस्थल स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक राष्ट्रव्यापी पहल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही एवं संस्थागत तथा अन्य उपाय।  |  GS Paper III — पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।
  • Prelims: विशेष अभियान 6, औषध विभाग, ई-कचरा प्रबंधन, राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, गांधी जयंती, राष्ट्रीय SCDPM पोर्टल
  • Essay: स्वच्छता और सुशासन: एक अंतर्संबंध, डिजिटल युग में पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: विशेष अभियान 6 औषध विभाग द्वारा ई-कचरा प्रबंधन, लंबित मामलों के निपटारे और कार्यस्थल स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक राष्ट्रव्यापी पहल है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

औषध विभाग ने 2 अक्टूबर, 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर अपने संबद्ध और अधीनस्थ संगठनों के साथ मिलकर ‘विशेष अभियान 6’ का शुभारंभ किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से ई-कचरे का प्रबंधन करना, लंबित मामलों का निपटारा करना और कार्यस्थलों पर स्वच्छता को बढ़ावा देना है। यह पहल 31 अक्टूबर, 2026 तक चलेगी, जिसमें विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों और अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निपटान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में औषध विभाग ने यह अभियान शुरू किया है।
  • यह अभियान 15 से 30 सितंबर, 2026 तक चले गहन तैयारी चरण के बाद शुरू हुआ है, जिसमें प्रारंभिक लक्ष्य निर्धारित किए गए थे।
  • अभियान में राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority), भारतीय औषध और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो, राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (National Institute of Pharmaceutical Education and Research) तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (Public Sector Undertakings) जैसे संगठन शामिल हैं।
  • इसका उद्देश्य शासन के मानकों को बेहतर बनाना और स्वच्छता की संस्कृति को संस्थागत रूप देना है।
  • अभियान की दैनिक प्रगति और अपनाई गई सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को राष्ट्रीय SCDPM पोर्टल के माध्यम से साझा किया जाएगा।
  • यह अभियान लंबित जन शिकायतों, संसदीय आश्वासनों और आधिकारिक संदर्भों के शीघ्र निपटारे पर भी केंद्रित है।

विशेष अभियान 6 क्या है?

  • विशेष अभियान 6 औषध विभाग और उसके संबद्ध संगठनों द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक तरीके से ई-कचरे का प्रबंधन करना, लंबित सरकारी मामलों का निपटारा करना और कार्यालयों में स्वच्छता सुनिश्चित करना है।
  • इस अभियान के तहत 12,208 स्वच्छता अभियान आयोजित करने और ई-कचरे की 1,011 इकाइयों का निपटान करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, उपभोक्ता विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक और फोटोवोल्टिक उपकरणों सहित विभिन्न प्रकार के अनुपयोगी उपकरणों का सुरक्षित निपटान शामिल है।
  • अभियान जन शिकायतों, संसदीय आश्वासनों, अंतर-मंत्रालयी कैबिनेट प्रस्तावों और राज्य सरकारों के संदर्भों जैसे लंबित मामलों के सक्रिय निपटारे की निगरानी कर रहा है।
  • यह अभिलेख प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिसमें 2,716 भौतिक फाइलों और 20 ई-फाइलों की समीक्षा करके कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग किया जाएगा।
  • ई-कचरे का निपटान पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) द्वारा सूचीबद्ध पुनर्चक्रणकर्ताओं (Recyclers) के माध्यम से किया जाएगा।
  • यह पहल स्वच्छ और अव्यवस्था-मुक्त कार्यस्थल को बढ़ावा देकर सुशासन के सिद्धांतों को मजबूत करने का प्रयास करती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
ई-कचरा प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना।
लंबित मामलों का निपटारा शासन में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाना।
स्वच्छता अभियान कार्यस्थलों पर स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण को बढ़ावा देना।
अभिलेख प्रबंधन कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग और दस्तावेजीकरण को सुव्यवस्थित करना।
राष्ट्रव्यापी पहल विभाग के सभी संबद्ध और अधीनस्थ संगठनों को शामिल करना।

महत्व

पर्यावरणीय महत्व

  • यह अभियान ई-कचरे (E-waste) के वैज्ञानिक और सुरक्षित निपटान पर केंद्रित है, जो पर्यावरण प्रदूषण को कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण है।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध पुनर्चक्रणकर्ताओं के माध्यम से ई-कचरे का निपटान, निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करता है।

प्रशासनिक दक्षता

  • लंबित मामलों, जन शिकायतों और संसदीय आश्वासनों का शीघ्र निपटान सुशासन (Good Governance) और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार करता है।
  • अभिलेखों की समीक्षा और कबाड़ को हटाना कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करता है, जिससे कार्यप्रणाली सुव्यवस्थित होती है।

संस्थागत सुधार

  • यह अभियान स्वच्छता की संस्कृति को संस्थागत रूप देने और शासन के मानकों को बेहतर बनाने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय SCDPM पोर्टल के माध्यम से दैनिक प्रगति की जानकारी साझा करना पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।

चुनौतियाँ

1. ई-कचरा निपटान की जटिलता

  • ई-कचरे में विभिन्न प्रकार के खतरनाक पदार्थ होते हैं, जिनके सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल निपटान के लिए विशेष तकनीकों और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।
  • पुनर्चक्रणकर्ताओं की उपलब्धता और उनकी क्षमता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में।

2. लंबित मामलों का बोझ

  • विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में लंबित मामले, जन शिकायतें और संदर्भ प्रशासनिक संसाधनों पर दबाव डालते हैं और निपटान प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
  • इन मामलों के मूल कारणों की पहचान करना और उन्हें दूर करना दीर्घकालिक समाधान के लिए आवश्यक है।

3. अभियान की निरंतरता

  • एक महीने के अभियान के बाद भी स्वच्छता और दक्षता के मानकों को बनाए रखना एक चुनौती है, जिसके लिए निरंतर निगरानी और संस्थागतकरण की आवश्यकता होती है।
  • कर्मचारियों के बीच जागरूकता और भागीदारी सुनिश्चित करना अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

4. तकनीकी और वित्तीय बाधाएँ

  • ई-कचरा प्रबंधन के लिए आवश्यक उन्नत तकनीकों और उपकरणों में निवेश की आवश्यकता हो सकती है।
  • छोटे और अधीनस्थ संगठनों के पास इन गतिविधियों के लिए पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
ई-कचरे में खतरनाक रसायन अनुचित निपटान से मिट्टी और जल प्रदूषण का खतरा।
लंबित मामलों की संख्या नागरिकों के लिए देरी और प्रशासनिक अक्षमता की धारणा।
संसाधनों की कमी छोटे कार्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के लिए अपर्याप्त साधन।
अभियान के बाद की निरंतरता अल्पकालिक उत्साह के बाद मानकों में गिरावट का जोखिम।
डेटा सुरक्षा ई-कचरे में मौजूद संवेदनशील डेटा के सुरक्षित निपटान की आवश्यकता।

आगे की राह

  • ई-कचरा प्रबंधन के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक नीति विकसित करना, जिसमें पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और सुरक्षित निपटान के सभी पहलू शामिल हों।
  • लंबित मामलों के त्वरित निपटान के लिए एक स्थायी तंत्र स्थापित करना, जिसमें नियमित समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
  • कर्मचारियों के लिए ई-कचरा प्रबंधन, अभिलेख प्रबंधन और स्वच्छता के महत्व पर नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
  • अभियान के बाद भी स्वच्छता और दक्षता के मानकों को बनाए रखने के लिए एक संस्थागत ढाँचा विकसित करना, जिसमें नियमित ऑडिट और प्रोत्साहन शामिल हों।
  • ई-कचरा प्रबंधन के लिए निजी क्षेत्र और गैर-सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना, ताकि विशेषज्ञता और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।
  • तकनीकी नवाचारों का लाभ उठाना, जैसे कि डिजिटल अभिलेख प्रबंधन प्रणाली, ताकि भौतिक फाइलों पर निर्भरता कम हो सके और दक्षता बढ़े।
  • राष्ट्रीय SCDPM पोर्टल का प्रभावी ढंग से उपयोग करना ताकि सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा किया जा सके और विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय स्थापित किया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

ई-कचरा प्रबंधन · वैज्ञानिक निपटान · स्वच्छता अभियान · लंबित मामलों का निपटारा · सुशासन · डिजिटल इंडिया · पर्यावरण संरक्षण · चक्रीय अर्थव्यवस्था

अवधारणा प्रवाह

औषध विभाग द्वारा विशेष अभियान 6 का शुभारंभ  →  ई-कचरा प्रबंधन और लंबित मामलों के निपटारे पर ध्यान  →  वैज्ञानिक निपटान और स्वच्छता गतिविधियों का लक्ष्य  →  शासन में दक्षता और पर्यावरण संरक्षण में सुधार  →  सार्वजनिक सेवा वितरण और कार्यस्थल के माहौल में सकारात्मक प्रभाव

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. विशेष अभियान 6 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह अभियान केवल ई-कचरा प्रबंधन पर केंद्रित है।
2. इसका शुभारंभ गांधी जयंती के अवसर पर किया गया था।
3. राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण इस अभियान में शामिल संगठनों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि अभियान ई-कचरा प्रबंधन के साथ-साथ स्वच्छता और लंबित मामलों के निपटारे पर भी केंद्रित है। कथन 2 सही है क्योंकि इसका शुभारंभ 2 अक्टूबर, 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर किया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority) उन संगठनों में से एक है जो इस अभियान में शामिल हैं।

Q2. ई-कचरा (E-waste) प्रबंधन नियम, 2016 के तहत, निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धांत ई-कचरा प्रबंधन के लिए केंद्रीय है?

  1. उपभोक्ता का उत्तरदायित्व
  2. उत्पादक का विस्तारित उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR)
  3. पुनर्चक्रणकर्ता का उत्तरदायित्व
  4. सरकार का उत्तरदायित्व

उत्तर: उत्पादक का विस्तारित उत्तरदायित्व (Extended Producer Responsibility – EPR) — ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2016 (E-waste Management Rules, 2016) में ‘उत्पादक का विस्तारित उत्तरदायित्व’ (EPR) एक प्रमुख सिद्धांत है, जिसके तहत उत्पादकों को अपने उत्पादों के जीवन-चक्र के अंत में उनके संग्रह और निपटान की जिम्मेदारी लेनी होती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ई-कचरा प्रबंधन भारत में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती के रूप में उभरा है। इस संदर्भ में, विशेष अभियान 6 जैसे सरकारी अभियानों की प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए और ई-कचरा के वैज्ञानिक निपटान में आने वाली चुनौतियों तथा उनके संभावित समाधानों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: परिचय में ई-कचरा की बढ़ती समस्या और इसके पर्यावरणीय प्रभावों का संक्षिप्त उल्लेख करें। विशेष अभियान 6 जैसे अभियानों की प्रासंगिकता को बताएं, जिसमें स्वच्छता, लंबित मामलों का निपटारा और ई-कचरा के वैज्ञानिक प्रबंधन जैसे बहुआयामी दृष्टिकोण शामिल हैं। ई-कचरा के वैज्ञानिक निपटान में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करें, जैसे अनौपचारिक क्षेत्र की भूमिका, जागरूकता की कमी, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा, और नियमों का कमजोर प्रवर्तन। चुनौतियों के संभावित समाधानों को प्रस्तुत करें, जिनमें EPR का प्रभावी कार्यान्वयन, उपभोक्ता जागरूकता, औपचारिक पुनर्चक्रण क्षेत्र को बढ़ावा देना, प्रौद्योगिकी का उपयोग, और अंतर-मंत्रालयी समन्वय शामिल हैं। निष्कर्ष में, सुशासन और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऐसे अभियानों के महत्व पर बल दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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