किसानों ने निराश किया बजट, उद्योग ने किया स्वागत

Farmers say Budget is disappointing; industry welcomes announcements — concept mind map

किसानों ने निराश किया बजट, उद्योग ने किया स्वागत

किसानों ने निराश किया बजट, उद्योग ने किया स्वागत — Budget reactions: Farmers vs Industry
आरेख: Budget reactions: Farmers vs Industry

✎ कृषि बजट किसानों की आवश्यकताओं और उद्योग के नवाचारों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और नियोजन, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोज़गार  |  GS Paper III — कृषि, मुख्य फसलें, विभिन्न प्रकार की सिंचाई और सिंचाई प्रणाली, कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन  |  GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय
  • Prelims: कृषि बजट, सूक्ष्म सिंचाई, सौर पंप, कृषि ऋण, जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण, जल उपयोग दक्षता
  • Essay: भारत में कृषि क्षेत्र का भविष्य: चुनौतियाँ और अवसर, सतत कृषि विकास में सरकारी नीतियों की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: कृषि बजट किसानों की आवश्यकताओं और उद्योग के नवाचारों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ावा देना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रस्तुत कृषि बजट को लेकर किसानों और उद्योग जगत की प्रतिक्रियाएँ भिन्न रही हैं। जहाँ एक ओर किसानों ने बजट को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल बताया है, वहीं दूसरी ओर उद्योग जगत ने सिंचाई, जल उपयोग दक्षता और कृषि के लिए विश्वसनीय ऊर्जा समर्थन से संबंधित पहलों का स्वागत किया है। यह भिन्न प्रतिक्रियाएँ कृषि क्षेत्र के जटिल मुद्दों और विभिन्न हितधारकों की अपेक्षाओं को उजागर करती हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत में कृषि एक प्राथमिक आर्थिक गतिविधि है, जो देश की लगभग आधी आबादी को रोज़गार प्रदान करती है और GDP में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
  • किसानों की प्रमुख माँगें अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), ऋण माफी, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि इनपुट पर सब्सिडी और बाज़ार तक पहुँच से संबंधित होती हैं।
  • उद्योग जगत, विशेष रूप से कृषि उपकरण और सिंचाई प्रणाली से जुड़े उद्योग, सरकारी नीतियों में निवेश और तकनीकी उन्नयन के अवसरों की तलाश में रहते हैं।
  • भारत में कृषि अभी भी काफी हद तक मानसून पर निर्भर है, जिससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और जल उपयोग दक्षता में सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • जैविक खेती को बढ़ावा देने और उसके उत्पादों के प्रमाणीकरण की आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है, क्योंकि उपभोक्ता स्वस्थ और सुरक्षित खाद्य विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

कृषि बजट और संबंधित अवधारणाएँ

  • कृषि बजट: यह सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के कल्याण के लिए आवंटित धन का विस्तृत विवरण होता है। इसमें विभिन्न योजनाओं, सब्सिडी और निवेशों का उल्लेख होता है।
  • सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation): यह सिंचाई की एक कुशल विधि है जिसमें ड्रिप (drip) और स्प्रिंकलर (sprinkler) सिस्टम शामिल हैं। यह पानी की बर्बादी को कम करती है और पौधों की जड़ों तक सीधे पानी पहुँचाती है, जिससे जल उपयोग दक्षता (water-use efficiency) बढ़ती है।
  • सौर पंप (Solar Pumps): ये सौर ऊर्जा से चलने वाले पंप होते हैं जिनका उपयोग सिंचाई के लिए पानी निकालने में किया जाता है। ये किसानों को बिजली के बिलों से मुक्ति दिलाते हैं और कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) को कम करने में मदद करते हैं।
  • जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण (Organic Product Certification): यह एक प्रक्रिया है जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई कृषि उत्पाद जैविक खेती के मानकों के अनुसार उगाया और संसाधित किया गया है। यह उपभोक्ताओं को उत्पाद की जैविक प्रामाणिकता का आश्वासन देता है।
  • जल उपयोग दक्षता: यह प्रति इकाई पानी के उपयोग से प्राप्त कृषि उत्पादन की मात्रा को संदर्भित करती है। उच्च दक्षता का अर्थ है कम पानी में अधिक फसल उत्पादन।
  • फसल विविधीकरण (Crop Diversification): यह किसानों द्वारा अपनी भूमि पर विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाने की प्रथा है ताकि जोखिम कम हो सके, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार हो सके और आय के स्रोतों में वृद्धि हो सके।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
कृषि कार्यों के लिए निःशुल्क तीन-फेज बिजली किसानों को विश्वसनीय सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए ₹7,432.58 करोड़ का आवंटन।
सूक्ष्म-सिंचाई (Micro-irrigation) पर जोर जल उपयोग दक्षता में सुधार और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ₹785 करोड़ का आवंटन।
अतिरिक्त सिंचाई स्रोतों का निर्माण बोरवेल, ट्यूबवेल और फार्म पॉन्ड के माध्यम से वर्षा-सिंचित भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के तहत लाना।
लघु एवं सीमांत किसानों के लिए 100% सब्सिडी सूक्ष्म-सिंचाई के विस्तार में छोटे किसानों को पूर्ण सहायता प्रदान करना।
अन्य किसानों के लिए 75% सब्सिडी सूक्ष्म-सिंचाई को व्यापक रूप से अपनाने को प्रोत्साहित करना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि: सूक्ष्म-सिंचाई और विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति से फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
  • जल उपयोग दक्षता में सुधार: सूक्ष्म-सिंचाई के माध्यम से पानी की बर्बादी कम होगी, जिससे सीमित जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
  • कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा: सिंचाई और ऊर्जा सहायता से कृषि व्यवसाय (agri-business) को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे इस क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित होगा।

सामाजिक महत्व

  • किसानों की आय में वृद्धि: बेहतर सिंचाई और ऊर्जा सहायता से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम होगी।
  • खाद्य सुरक्षा: कृषि उत्पादकता में वृद्धि से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी और खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • ग्रामीण विकास: कृषि क्षेत्र में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और समग्र विकास को गति मिलेगी।

पर्यावरणीय महत्व

  • जल संरक्षण: सूक्ष्म-सिंचाई तकनीकों के उपयोग से पानी की अत्यधिक खपत कम होगी, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा।
  • ऊर्जा दक्षता: ऊर्जा-कुशल पंपसेटों के उपयोग से बिजली की खपत कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है।
  • जलवायु परिवर्तन अनुकूलन: बेहतर सिंचाई प्रणालियाँ किसानों को अनियमित वर्षा पैटर्न और सूखे जैसी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में मदद करेंगी।

चुनौतियाँ

1. किसानों की अपेक्षाओं और बजट प्रावधानों के बीच अंतर

  • किसानों का मानना है कि बजट उनकी आवश्यकताओं को पूरी तरह से संबोधित करने में विफल रहा है, विशेष रूप से जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण कार्यालय और सौर पंपों के संबंध में।
  • बजट का जोर कृषि व्यवसाय पर अधिक है, जबकि कृषि क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं पर कम ध्यान दिया गया है।

2. सूक्ष्म-सिंचाई के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधाएँ

  • सूक्ष्म-सिंचाई प्रणालियों के लिए ऊर्जा-कुशल पंपसेटों का समावेश सब्सिडी घटक में नहीं किया गया है, जो प्रणाली की दक्षता को प्रभावित कर सकता है।
  • किसानों में नई तकनीकों को अपनाने के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी एक चुनौती हो सकती है।

3. जल संसाधनों का सतत उपयोग

  • बोरवेल और ट्यूबवेल के माध्यम से अतिरिक्त सिंचाई स्रोतों का निर्माण भूजल स्तर पर दबाव डाल सकता है, यदि इसका प्रबंधन ठीक से न किया जाए।
  • वर्षा-सिंचित भूमि को सुनिश्चित सिंचाई के तहत लाने के लिए जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता है।

4. कृषि क्षेत्र में असमान विकास

  • बजट के लाभों का वितरण सभी किसानों तक समान रूप से नहीं हो सकता है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को कम लाभ मिल सकता है।
  • क्षेत्रीय असमानताएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, यदि कुछ क्षेत्रों को दूसरों की तुलना में अधिक लाभ मिलता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
किसानों की निराशा बजट में जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण कार्यालय और सौर पंपों पर पर्याप्त घोषणाओं का अभाव।
कृषि व्यवसाय पर अधिक ध्यान किसानों के अनुसार, बजट का जोर कृषि व्यवसाय पर अधिक है, न कि कृषि की मूलभूत आवश्यकताओं पर।
पंपसेट सब्सिडी का अभाव सूक्ष्म-सिंचाई के लिए ऊर्जा-कुशल पंपसेटों को सब्सिडी घटक में शामिल न करना, जिससे प्रणाली की दक्षता प्रभावित हो सकती है।
भूजल पर दबाव बोरवेल और ट्यूबवेल के माध्यम से अतिरिक्त सिंचाई स्रोतों का निर्माण भूजल स्तर को प्रभावित कर सकता है।

आगे की राह

  • किसानों की मांगों को समझने और उन्हें बजट निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने के लिए एक प्रभावी तंत्र स्थापित करना।
  • जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और सौर पंपों के लिए विशिष्ट योजनाओं और आवंटनों की घोषणा करना।
  • सूक्ष्म-सिंचाई के लिए सब्सिडी घटक में ऊर्जा-कुशल पंपसेटों को शामिल करना ताकि जल और ऊर्जा दक्षता दोनों सुनिश्चित हो सकें।
  • किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, विशेषकर सूक्ष्म-सिंचाई के उपयोग के लिए व्यापक प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम प्रदान करना।
  • भूजल स्तर की निगरानी और प्रबंधन के लिए सख्त नियम लागू करना ताकि अतिरिक्त सिंचाई स्रोतों के निर्माण से पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।
  • कृषि व्यवसाय के साथ-साथ छोटे और सीमांत किसानों की आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता देना ताकि समावेशी कृषि विकास सुनिश्चित हो सके।
  • कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि नई और टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को अपनाया जा सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

कृषि बजट · सूक्ष्म सिंचाई · जल उपयोग दक्षता · किसानों की आय · कृषि उत्पादकता · सरकारी नीतियां · सिंचाई के स्रोत · कृषि क्षेत्र में चुनौतियां · कृषि व्यवसाय · नवीकरणीय ऊर्जा कृषि में · किसानों का सशक्तिकरण · राजकोषीय आवंटन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि का प्रयास करेगा’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 39 (क)’, ‘note’: ‘आजीविका के पर्याप्त साधनों का अधिकार’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 48’, ‘note’: ‘कृषि और पशुपालन का संगठन’}

अवधारणा प्रवाह

बजट में कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन और नीतियाँ घोषित की गईं।  →  किसानों ने बजट को निराशाजनक बताया, जबकि उद्योग ने स्वागत किया।  →  सूक्ष्म-सिंचाई और ऊर्जा सहायता पर जोर दिया गया।  →  किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ने की संभावना।  →  जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो सकता है।  →  हालांकि, प्रभावी कार्यान्वयन और किसानों की चिंताओं का समाधान आवश्यक है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) प्रणाली में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई शामिल है।
2. भारत में सूक्ष्म सिंचाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा 100% सब्सिडी केवल छोटे और सीमांत किसानों को प्रदान की जाती है।
3. कृषि क्षेत्र में तीन-चरण बिजली (three-phase electricity) का उपयोग मुख्य रूप से सिंचाई के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। सूक्ष्म सिंचाई में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी प्रणालियाँ शामिल हैं जो पानी का कुशलतापूर्वक उपयोग करती हैं। कथन 2 सही है। समाचार के अनुसार, छोटे और सीमांत किसानों को सूक्ष्म सिंचाई के लिए 100% सब्सिडी मिलती है, जबकि अन्य किसानों को 75% सब्सिडी मिलती है। कथन 3 सही है। कृषि कार्यों, विशेषकर सिंचाई के लिए, तीन-चरण बिजली एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है।

Q2. अभिकथन (A): कृषि बजट में सूक्ष्म सिंचाई पर जोर देने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है।
कारण (R): सूक्ष्म सिंचाई जल उपयोग दक्षता (water-use efficiency) में सुधार करती है और पानी की बर्बादी को कम करती है।

  1. A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सत्य हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सत्य है, लेकिन R असत्य है।
  4. A असत्य है, लेकिन R सत्य है।

उत्तर: A और R दोनों सत्य हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि सूक्ष्म सिंचाई से पानी की बचत और उर्वरकों के बेहतर उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ती है। कारण (R) भी सही है क्योंकि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुँचाकर जल उपयोग दक्षता में सुधार करती है और पानी की बर्बादी को कम करती है। कारण (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ हालिया कृषि बजट में सूक्ष्म सिंचाई और जल उपयोग दक्षता पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र में इन पहलों के महत्व का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए और इसमें निहित चुनौतियों पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कृषि बजट में सूक्ष्म सिंचाई और जल उपयोग दक्षता पर दिए गए जोर का संक्षिप्त उल्लेख। (20-30 शब्द)
2. **महत्व (सकारात्मक पक्ष):**
* **जल संरक्षण:** सीमित जल संसाधनों का कुशल उपयोग, भूजल स्तर में सुधार।
* **उत्पादकता वृद्धि:** प्रति बूंद अधिक फसल (Per Drop More Crop) की अवधारणा, उर्वरक उपयोग दक्षता में वृद्धि।
* **किसानों की आय:** लागत में कमी और बेहतर उपज से आय में वृद्धि।
* **जलवायु परिवर्तन अनुकूलन:** सूखे जैसी स्थितियों का सामना करने की क्षमता।
* **ऊर्जा दक्षता:** कम पानी के उपयोग से पंपिंग में कम ऊर्जा खपत।
3. **चुनौतियाँ (नकारात्मक पक्ष/कमियां):**
* **प्रारंभिक लागत:** सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की स्थापना की उच्च प्रारंभिक लागत।
* **जागरूकता और प्रशिक्षण:** किसानों के बीच इन तकनीकों के बारे में जागरूकता और उनके उपयोग के लिए प्रशिक्षण की कमी।
* **तकनीकी सहायता:** उचित रखरखाव और मरम्मत के लिए तकनीकी सहायता की उपलब्धता।
* **सब्सिडी का वितरण:** सब्सिडी के प्रभावी और समय पर वितरण में चुनौतियाँ, छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँच सुनिश्चित करना।
* **पंपसेट का मुद्दा:** ऊर्जा-कुशल पंपसेट को सब्सिडी में शामिल करने की मांग।
* **कृषि-व्यवसाय पर अधिक ध्यान:** किसानों की चिंताओं के अनुसार कृषि-व्यवसाय पर अधिक ध्यान बनाम कृषि पर कम ध्यान।
4. **निष्कर्ष:** इन पहलों के समग्र लाभों को स्वीकार करते हुए, चुनौतियों का समाधान करने और किसानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल। (20-30 शब्द)

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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