24 Jul केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भव्य रसायन योजना’ को दी मंजूरी, जानिए 5 प्रमुख लाभ
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — अवसंरचना | GS Paper III — पर्यावरण
- Prelims: भव्य-रसायन योजना, रसायन पार्क, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल, विनिर्माण क्षेत्र, मेक इन इंडिया
- Essay: भारत के आर्थिक विकास में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, सतत विकास और पर्यावरणीय अनुपालन के साथ औद्योगिक संवृद्धि
त्वरित पुनरावृत्ति: भव्य-रसायन योजना का लक्ष्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करके भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ या ‘भव्य-रसायन’ योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है, जिसकी घोषणा वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी। यह योजना भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पृष्ठभूमि
- रसायन उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, निर्माण और ऑटोमोबाइल जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यक कच्चे माल का उत्पादन करता है।
- वर्तमान में, भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा, अवसंरचनात्मक कमियों और पर्यावरणीय अनुपालन से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर दे रही है।
- औद्योगिक पार्कों की स्थापना से साझा अवसंरचना, लागत-दक्षता और पर्यावरणीय प्रबंधन में सुधार होता है, जिससे उद्योगों को लाभ मिलता है।
- यह योजना 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी, जिसमें औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
- वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी, जो सरकार की औद्योगिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भव्य-रसायन योजना क्या है?
- यह योजना देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ का संक्षिप्त नाम है।
- योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया गया है, जिसमें 3,000 करोड़ रुपये अवसंरचना विकास और 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के लिए हैं।
- यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
- केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार के न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
- ये पार्क कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) के निर्बाध भूमि क्षेत्र पर स्थापित किए जाएंगे।
- पार्क में सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF), जल आपूर्ति, विलायक पुनर्प्राप्ति, भाप उत्पादन, पाइपलाइन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स जैसी साझा अवसंरचना सुविधाएं होंगी।
- योजना का उद्देश्य कच्चे माल की सोर्सिंग से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है।
- यह भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने, निर्यात बढ़ाने और आयात प्रतिस्थापन में सुधार करने में मदद करेगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| योजना का नाम | भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) |
| उद्देश्य | देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना |
| वित्तीय आवंटन | कुल 3,030 करोड़ रुपये (3,000 करोड़ रुपये अवसंरचना के लिए, 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के लिए) |
| कार्यकाल | वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पाँच वर्ष |
| केंद्र सरकार का अनुदान | प्रत्येक पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये तक, राज्य सरकार के न्यूनतम 500 करोड़ रुपये के योगदान के बाद |
| पार्क का न्यूनतम क्षेत्र | कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (2,000 एकड़) |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना कच्चे माल की सोर्सिंग (अपस्ट्रीम) से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (डाउनस्ट्रीम) और सहायक उद्योगों सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा देगी।
- साझा बुनियादी ढांचा सुविधाओं और मूलभूत उपयोगिताओं के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, जिससे भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
- यह भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत होने में मदद करेगा, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी और आयात प्रतिस्थापन में सुधार होगा।
- घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित करके, घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और रोजगार सृजित करके इस क्षेत्र के विकास में सहायता मिलेगी।
पर्यावरणीय महत्व
- यह योजना पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर भारतीय रसायन उद्योग के सतत विकास को बढ़ावा देगी।
- केंद्रीकृत सुविधाओं जैसे साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (TSDF), तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना से पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा।
सामाजिक महत्व
- रसायन क्षेत्र के विकास से अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों के विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था का अधिक विकास होगा।
- यह योजना 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।
रणनीतिक महत्व
- यह योजना कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विभिन्न उद्योगों के लिए आवश्यक रसायनों और पेट्रोकेमिकल्स के उत्पादन को बढ़ावा देगी।
- इससे क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा और इस प्रकार आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण
- प्रत्येक पार्क के लिए कम से कम 2,000 एकड़ के निर्बाध भूमि क्षेत्र की आवश्यकता है, जो भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं और स्थानीय विरोध के कारण एक चुनौती हो सकती है।
- पर्याप्त और उपयुक्त भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण बाधा हो सकती है, खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में।
यूपीएससी लिंक: भू-सुधार, अवसंरचना विकास
2. पर्यावरणीय मंजूरी और अनुपालन
- रासायनिक पार्कों की स्थापना और संचालन के लिए कठोर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) और विभिन्न नियामक अनुपालनों की आवश्यकता होगी।
- साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं का प्रभावी संचालन और निगरानी सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण
3. राज्यों का योगदान और समन्वय
- राज्य सरकारों द्वारा न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है, खासकर वित्तीय रूप से कमजोर राज्यों के लिए।
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगा।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
4. तकनीकी विशेषज्ञता और कौशल विकास
- रसायन उद्योग में उन्नत प्रौद्योगिकियों और प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक तकनीकी विशेषज्ञता और कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- पार्कों में स्थापित होने वाले उद्योगों के लिए विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक विकास, कौशल विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | बड़े भू-भाग की आवश्यकता और स्थानीय विरोध की संभावना। |
| पर्यावरणीय अनुपालन | कठोर नियामक आवश्यकताओं और अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियाँ। |
| राज्य सरकारों का योगदान | राज्यों की वित्तीय क्षमता और योगदान सुनिश्चित करने में कठिनाई। |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करना और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना। |
| बुनियादी ढांचा विकास | समय पर और गुणवत्तापूर्ण सामान्य अवसंरचना सुविधाओं का निर्माण। |
आगे की राह
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाए, जिसमें स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखा जाए।
- पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) प्रक्रियाओं को मजबूत किया जाए और प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित किए जाएं ताकि सतत विकास सुनिश्चित हो सके।
- राज्य सरकारों को वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जाए ताकि वे अपने योगदान को पूरा कर सकें और परियोजनाओं को समय पर लागू कर सकें।
- रसायन उद्योग के लिए आवश्यक कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण संस्थानों को बढ़ावा दिया जाए ताकि कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
- अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहित किया जाए ताकि भारतीय रसायन उद्योग नवाचार और नई प्रौद्योगिकियों को अपना सके।
- वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीतियों और आयात प्रतिस्थापन रणनीतियों को मजबूत किया जाए।
- उद्योगों के लिए एक अनुकूल नियामक वातावरण बनाया जाए जो निवेश को आकर्षित करे और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा दे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) · रसायन पार्क · विनिर्माण क्षेत्र · आत्मनिर्भर भारत · पर्यावरण अनुकूल विकास · रोजगार सृजन · वैश्विक मूल्य श्रृंखला · बुनियादी ढाँचा · राजकोषीय प्रोत्साहन · सतत विकास
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘केंद्र-राज्य विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘केंद्र और राज्यों द्वारा अनुदान’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची के विषय’}
अवधारणा प्रवाह
मंत्रिमंडल की मंजूरी → भव्य रसायन योजना का शुभारंभ → तीन रासायनिक पार्कों की स्थापना → साझा अवसंरचना का विकास → रासायनिक उद्योग का संवृद्धि → निर्यात वृद्धि और रोजगार सृजन → विकसित भारत का लक्ष्य
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है।
2. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
3. केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार की ओर से न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान करने के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि योजना की कार्यान्वयन अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्ष निर्धारित की गई है। कथन 3 भी सही है क्योंकि केंद्र सरकार 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी, बशर्ते राज्य सरकार न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान करे।
Q2. भव्य रसायन योजना के संभावित लाभों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
1. यह भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत होने में मदद करेगा।
2. यह साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों जैसी केंद्रीकृत सुविधाओं के माध्यम से पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करेगा।
3. यह योजना केवल कच्चे माल की सोर्सिंग (अपस्ट्रीम) पर ध्यान केंद्रित करेगी, न कि अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (डाउनस्ट्रीम) पर।
- केवल 1
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का लक्ष्य भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करना है। कथन 2 भी सही है क्योंकि योजना में पर्यावरण अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं शामिल हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि योजना कच्चे माल की सोर्सिंग (अपस्ट्रीम) और अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (डाउनस्ट्रीम) सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं के विकास को बढ़ावा देगी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (भव्य रसायन) का उद्देश्य भारतीय रसायन उद्योग के सतत विकास को बढ़ावा देना है। इस कथन के आलोक में, योजना के प्रमुख उद्देश्यों, अपेक्षित लाभों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभाव का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में भव्य रसायन योजना के प्रमुख उद्देश्यों को स्पष्ट करें, जैसे कि समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना, बुनियादी ढाँचे का विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना। दूसरे भाग में, योजना से अपेक्षित लाभों पर चर्चा करें, जिसमें मूल्य श्रृंखला का विकास, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि, निर्यात में वृद्धि, आयात प्रतिस्थापन और पर्यावरण अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण शामिल है। अंत में, भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके व्यापक प्रभाव का विश्लेषण करें, जिसमें रोजगार सृजन, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान शामिल है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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