27 Sep केरल में बिजली संकट: SHAKTI नीति के तहत 500 मेगावाट कोयला लिंकेज हेतु KSEB का प्रयास
✎ SHAKTI नीति भारत में बिजली उत्पादक कंपनियों को पारदर्शी तरीके से कोयला लिंकेज आवंटित करने और राज्यों को दीर्घकालिक बिजली खरीद में सहायता करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक पहल है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — आधारभूत संरचना (ऊर्जा)
- Prelims: SHAKTI नीति, कोयला लिंकेज, DBFOO मॉडल, KSEB, बिजली खरीद समझौता
- Essay: भारत में ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास, राज्यों में बिजली संकट: कारण, चुनौतियाँ और समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: SHAKTI नीति भारत में बिजली उत्पादक कंपनियों को पारदर्शी तरीके से कोयला लिंकेज आवंटित करने और राज्यों को दीर्घकालिक बिजली खरीद में सहायता करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय की एक पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) ने SHAKTI नीति के तहत 25 वर्षों के लिए 500 मेगावाट (MW) बिजली की आपूर्ति हेतु ‘रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन’ (RfQ) जारी किया है। यह कदम केरल में हाल ही में आए मानसून-सीज़न बिजली संकट के बाद उठाया गया है, जिसने राज्य की बिजली व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। राज्य वर्तमान में अपनी बिजली आवश्यकताओं के लिए देश के अन्य हिस्सों से ‘आयात’ पर अत्यधिक निर्भर है।
पृष्ठभूमि
- केरल अपनी बिजली की आवश्यकता के लिए काफी हद तक जलविद्युत (hydroelectric) और अन्य राज्यों से बिजली खरीद पर निर्भर है।
- हाल के मानसून सीज़न में बिजली की कमी के कारण KSEB को शाम के समय बिजली कटौती लागू करनी पड़ी थी।
- KSEB ने पहले भी SHAKTI नीति के तहत कोयला लिंकेज का लाभ उठाने का प्रयास किया था, लेकिन बोलीदाताओं द्वारा उच्च दरों के कारण वे प्रयास विफल रहे थे।
- यह नया प्रयास राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाहरी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- प्रस्तावित बिजली आपूर्ति समझौता ‘डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट’ (DBFOO) मॉडल पर आधारित होगा।
- KSEB का लक्ष्य जून 2027 से बिजली आपूर्ति शुरू करना है।
SHAKTI नीति क्या है?
- SHAKTI नीति का पूरा नाम ‘स्कीम फॉर हार्नेसिंग एंड एलोकेटिंग कोयला (Coal) ट्रांसपेरेंटली इन इंडिया’ है।
- यह नीति केंद्रीय कोयला मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में शुरू की गई थी।
- इसका मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादक कंपनियों को पारदर्शी तरीके से कोयला लिंकेज आवंटित करना है।
- यह नीति राज्यों और वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार दीर्घकालिक और मध्यम अवधि की बिजली खरीद के लिए टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली लगाने की अनुमति देती है।
- सफल बोलीदाताओं को कोयला लिंकेज प्रदान करने की सिफारिश की जाती है, जिससे उन्हें बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
- यह नीति देश में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और बिजली की लागत को स्थिर करने में मदद करती है।
- SHAKTI नीति के तहत विभिन्न श्रेणियाँ हैं, जिनमें से B(iv) श्रेणी राज्यों और डिस्कॉम द्वारा दीर्घकालिक बिजली खरीद के लिए है।
- यह नीति कोयले के आवंटन में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देती है, जिससे बिजली क्षेत्र में सुधार होता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| SHAKTI नीति (Scheme for Harnessing and Allocating Koyala (Coal) Transparently in India) | यह नीति राज्यों और वितरण कंपनियों को दीर्घकालिक तथा मध्यमकालिक बिजली खरीद के लिए प्रतिस्पर्धी बोली लगाने की अनुमति देती है, जिससे कोयला लिंकेज प्राप्त होता है। |
| दीर्घकालिक बिजली खरीद | केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) 25 वर्षों की अवधि के लिए 500 मेगावाट बिजली की खरीद करना चाहता है, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। |
| डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट (DBFOO) मॉडल | यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल निजी क्षेत्र की दक्षता और निवेश को आकर्षित करता है, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी आती है। |
| कोयला लिंकेज | यह कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करता है, जो बिजली उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है, जिससे ऊर्जा उत्पादन में स्थिरता आती है। |
| प्रतिस्पर्धी बोली | यह प्रक्रिया बिजली खरीद में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करती है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए लागत प्रभावी बिजली उपलब्ध होती है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- दीर्घकालिक बिजली खरीद राज्य की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
- DBFOO मॉडल के तहत निजी निवेश से राज्य के वित्तीय बोझ को कम करने में मदद मिलेगी और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थिर बिजली आपूर्ति से उद्योगों में उत्पादन लागत कम हो सकती है, जिससे आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
ऊर्जा सुरक्षा
- कोयला लिंकेज के माध्यम से बिजली की खरीद केरल की ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करेगी, जिससे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी।
- 25 वर्षों के लिए 500 मेगावाट बिजली की सुनिश्चित आपूर्ति राज्य को मानसून-संबंधी बिजली संकट जैसी स्थितियों से निपटने में मदद करेगी।
- यह कदम राज्य के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने और जलविद्युत पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने में सहायक होगा।
शासन और नीति
- SHAKTI नीति का उपयोग केंद्र और राज्य सरकारों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को दर्शाता है।
- प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया और DBFOO मॉडल सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देते हैं।
- यह पहल राज्यों को अपनी विशिष्ट ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुसार रणनीतिक निर्णय लेने में सशक्त बनाती है।
चुनौतियाँ
1. उच्च बोली दरें
- पिछली बार बोलीदाताओं द्वारा प्रस्तुत दरें उच्च थीं, जिससे निविदा रद्द करनी पड़ी थी।
- उच्च दरें उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत बढ़ा सकती हैं और KSEB के वित्तीय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: ऊर्जा क्षेत्र के मुद्दे
2. परियोजना कार्यान्वयन में देरी
- पिछली निविदा के रद्द होने से परियोजना के कार्यान्वयन में देरी हुई है।
- दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों को अंतिम रूप देने में देरी से राज्य की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: शासन: सार्वजनिक-निजी भागीदारी
3. ईंधन आपूर्ति की अस्थिरता
- कोयला आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा बिजली उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, भले ही लिंकेज आवंटित हो।
- अंतर्राष्ट्रीय कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बिजली की लागत को प्रभावित कर सकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: ऊर्जा संसाधन
4. पर्यावरणीय चिंताएँ
- कोयला आधारित बिजली उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव, जैसे वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, चिंता का विषय हैं।
- कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण: प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च बोली दरें | पिछली निविदा में उच्च दरों के कारण रद्द करना पड़ा, जिससे उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो सकती है। |
| कार्यान्वयन में देरी | निविदा प्रक्रिया में बार-बार देरी से राज्य की ऊर्जा सुरक्षा योजनाएँ प्रभावित होती हैं। |
| ईंधन आपूर्ति जोखिम | कोयले की उपलब्धता और कीमतों में उतार-चढ़ाव बिजली उत्पादन की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | कोयला आधारित बिजली उत्पादन से जुड़े प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन की चिंताएँ। |
| राज्य की निर्भरता | अन्य राज्यों से बिजली ‘आयात’ पर अत्यधिक निर्भरता राज्य की बिजली प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- SHAKTI नीति (Scheme for Harnessing and Allocating Koyala (Coal) Transparently in India)
आगे की राह
- KSEB को बोली प्रक्रिया को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए शर्तों की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि प्रतिस्पर्धी दरों पर बोलीदाताओं को आकर्षित किया जा सके।
- दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों को समय पर अंतिम रूप देने के लिए एक सुव्यवस्थित और कुशल निविदा प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।
- राज्य को अपनी ऊर्जा मिश्रण में विविधता लानी चाहिए, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों में निवेश बढ़ाना शामिल है।
- कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर विचार करना चाहिए ताकि पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।
- अंतर-राज्यीय बिजली पारेषण (transmission) बुनियादी ढांचे को मजबूत करना चाहिए ताकि देश के अन्य हिस्सों से बिजली आयात की दक्षता बढ़ाई जा सके।
- राज्य को अपनी बिजली प्रणाली की आंतरिक कमजोरियों को दूर करने के लिए वितरण और पारेषण हानियों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- ऊर्जा दक्षता उपायों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे कि स्मार्ट मीटर और ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग, ताकि मांग-पक्ष प्रबंधन में सुधार हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
शक्ति नीति · कोयला लिंकेज · विद्युत खरीद समझौता · सार्वजनिक-निजी भागीदारी · ऊर्जा सुरक्षा · राज्य विद्युत बोर्ड · दीर्घकालिक विद्युत खरीद · टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली · डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) · केंद्रीय विद्युत मंत्रालय · ऊर्जा आयात पर निर्भरता · नवीकरणीय ऊर्जा
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 246: संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण, जिसमें ऊर्जा और बिजली से संबंधित विषय शामिल हैं।
- अनुच्छेद 282: संघ और राज्यों द्वारा व्यय, जिसमें बिजली परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता शामिल हो सकती है।
- सातवीं अनुसूची: सूची II (राज्य सूची) में ‘बिजली’ का उल्लेख है, जबकि सूची III (समवर्ती सूची) में ‘बिजली’ से संबंधित कुछ पहलू भी शामिल हैं, जो केंद्र और राज्यों दोनों को कानून बनाने की शक्ति देते हैं।
अवधारणा प्रवाह
केरल में बिजली संकट और आयात पर निर्भरता। → KSEB द्वारा SHAKTI नीति के तहत कोयला लिंकेज का उपयोग करने का प्रयास। → 25 वर्षों के लिए 500 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए RfQ जारी करना। → DBFOO मॉडल के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी। → कोयला इंडिया से ईंधन प्राप्त कर प्रतिस्पर्धी बोली द्वारा बिजली खरीद। → राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता में सुधार की उम्मीद।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. SHAKTI नीति का उद्देश्य कोयले के पारदर्शी आवंटन को सुनिश्चित करना है।
2. यह नीति राज्यों और वितरण कंपनियों को दीर्घकालिक विद्युत खरीद के लिए प्रतिस्पर्धी बोली लगाने की अनुमति देती है।
3. SHAKTI नीति के तहत कोयला लिंकेज केवल केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को ही आवंटित किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 और 2 सही हैं। SHAKTI (Scheme for Harnessing and Allocating Koyala (Coal) Transparently in India) नीति का मुख्य उद्देश्य कोयले का पारदर्शी आवंटन सुनिश्चित करना और राज्यों तथा वितरण कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से दीर्घकालिक विद्युत खरीद की सुविधा प्रदान करना है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह नीति सफल बोलीदाताओं को कोयला लिंकेज की सिफारिश करने की अनुमति देती है, जो निजी संस्थाएं भी हो सकती हैं।
Q2. SHAKTI नीति के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे उपयुक्त रूप से ‘कोयला लिंकेज’ का वर्णन करता है?
- यह कोयला खदानों और विद्युत संयंत्रों के बीच एक भौतिक रेल संपर्क है।
- यह कोयला आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक अनुबंध है जो विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है।
- यह कोयला आयात पर लगाए गए कर को संदर्भित करता है।
- यह कोयला खनन के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया है।
उत्तर: यह कोयला आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक अनुबंध है जो विद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है। — कोयला लिंकेज से तात्पर्य कोयला आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक अनुबंध से है, जो विशेष रूप से विद्युत उत्पादन संयंत्रों के लिए कोयले की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है। SHAKTI नीति इस तरह के लिंकेज के पारदर्शी आवंटन की सुविधा प्रदान करती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में SHAKTI नीति की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण करें। साथ ही, राज्यों द्वारा विद्युत आयात पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न चुनौतियों पर भी चर्चा करें। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्व और SHAKTI नीति के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. SHAKTI नीति की भूमिका: नीति के उद्देश्य (पारदर्शी कोयला आवंटन, प्रतिस्पर्धी बोली, दीर्घकालिक विद्युत खरीद) और इसके लाभों (लागत दक्षता, आपूर्ति सुरक्षा, निवेश प्रोत्साहन) पर प्रकाश डालें।
3. आलोचनात्मक परीक्षण: नीति की सीमाओं और चुनौतियों पर चर्चा करें, जैसे कि कोयले पर निरंतर निर्भरता, पर्यावरणीय चिंताएं, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ संतुलन की आवश्यकता, और बोली प्रक्रिया में संभावित बाधाएं।
4. राज्यों द्वारा विद्युत आयात पर निर्भरता की चुनौतियाँ: केरल के उदाहरण का उपयोग करते हुए, मानसून संकट जैसी स्थितियों में आपूर्ति की कमी, ग्रिड अस्थिरता, उच्च लागत, बाहरी कारकों पर निर्भरता और राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव जैसे मुद्दों को उजागर करें।
5. आगे का रास्ता: ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, अंतर-राज्यीय पारेषण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और राज्यों के लिए आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दें।
6. निष्कर्ष: ऊर्जा सुरक्षा के लिए संतुलित दृष्टिकोण और राज्यों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियों के महत्व पर जोर दें।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- Best PSIR optional teacher
- हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए 1,158 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहण करेगी - October 3, 2026
- Wildlife Corridors: Key to Survival for UPSC & State PCS Aspirants - October 3, 2026
- अमित शाह भोपाल में गौपालक सम्मेलन को संबोधित करेंगे, न्याय संहिता प्रदर्शनी का उद्घाटन - October 3, 2026

No Comments