08 Aug केरल सरकार ने कल्याण पेंशन वितरण में सहकारी बैंकों को किया बाहर, डीबीटी लागू

✎ केरल सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से घर-घर वितरण प्रणाली को समाप्त कर आधार-संबद्ध बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को अनिवार्य कर दिया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय
- Prelims: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), आधार-संबद्ध बैंक खाते, सहकारी बैंक, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, कल्याणकारी योजनाएँ, वित्तीय समावेशन
- Essay: डिजिटल इंडिया और सुशासन: चुनौतियाँ एवं अवसर, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: केरल सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से घर-घर वितरण प्रणाली को समाप्त कर आधार-संबद्ध बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) को अनिवार्य कर दिया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केरल सरकार ने सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी पेंशनों के वितरण के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब तक सहकारी बैंकों के माध्यम से घर-घर जाकर पेंशन वितरित करने की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर, बिस्तर पर पड़े लाभार्थियों को छोड़कर, सभी पेंशनभोगियों के लिए आधार-संबद्ध बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) को अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही लाना है तथा केंद्र सरकार के DBT मानदंडों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करना है।
पृष्ठभूमि
- केरल में पहले सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी पेंशनों का वितरण मुख्य रूप से सहकारी बैंकों के माध्यम से किया जाता था, जिसमें बैंक कर्मचारी लाभार्थियों के घर जाकर पेंशन राशि सौंपते थे।
- इस प्रणाली में देरी, अभिलेखों को अद्यतन न कर पाना, समाधान संबंधी समस्याएँ (reconciliation issues) और कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति को एक से अधिक बार भुगतान जैसी अनियमितताओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
- सरकार को सहकारी बैंकों को घर-घर वितरण सेवा के लिए प्रोत्साहन भुगतान (incentive payments) भी करना पड़ता था, जिससे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर बोझ पड़ रहा था।
- केंद्र सरकार DBT मानदंडों का पूर्ण अनुपालन न करने पर राज्य को केंद्रीय वित्तीय सहायता (Central financial assistance) खोने का जोखिम था।
- वित्त विभाग ने DBT मोड के माध्यम से सभी सामाजिक सुरक्षा और कल्याण निधि बोर्ड पेंशनों के संवितरण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी।
- यह निर्णय सुशासन (Good Governance) और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देने की व्यापक राष्ट्रीय नीति के अनुरूप है।
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) क्या है?
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी और लाभों को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित करना है।
- इसका मुख्य उद्देश्य वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना, रिसाव (leakage) को कम करना और बिचौलियों को समाप्त करना है।
- यह आधार (Aadhaar) संख्या को लाभार्थी के बैंक खाते से जोड़कर काम करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचे।
- यह प्रणाली वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है क्योंकि यह लाभार्थियों को बैंक खातों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- DBT से सरकार को सब्सिडी के बोझ को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और लक्षित लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाने में मदद मिलती है।
- केरल का यह कदम केंद्र सरकार के DBT मानदंडों के साथ राज्य की कल्याणकारी योजनाओं को संरेखित करने का एक प्रयास है।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) का अनिवार्य होना | पेंशन वितरण में पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि। |
| आधार-लिंक्ड बैंक खातों का उपयोग | लाभार्थियों की सटीक पहचान सुनिश्चित करना और दोहराव को रोकना। |
| सहकारी बैंकों की भूमिका में कमी | वितरण लागत में कमी और केंद्रीय वित्तीय सहायता के मानदंडों का अनुपालन। |
| बिस्तर पर पड़े लाभार्थियों को छूट | सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखना। |
| वितरण में देरी और रिकॉर्ड संबंधी मुद्दों का समाधान | पेंशन प्रणाली की समग्र विश्वसनीयता और जवाबदेही में सुधार। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- DBT प्रणाली अपनाने से राज्य सरकार को सहकारी बैंकों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन भुगतानों में कमी आएगी, जिससे राजकोषीय बोझ कम होगा।
- केंद्रीय वित्तीय सहायता के मानदंडों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित होने से राज्य को केंद्र से मिलने वाली सहायता में कोई कटौती नहीं होगी।
- वितरण प्रणाली में दक्षता बढ़ने से प्रशासनिक लागत में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
प्रशासनिक महत्व
- पेंशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी क्योंकि धनराशि सीधे लाभार्थियों के खातों में जाएगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी।
- आधार-आधारित भुगतान प्रणाली से लाभार्थियों की पहचान में सटीकता आएगी और एक ही व्यक्ति को कई बार भुगतान जैसी त्रुटियां कम होंगी।
- रिकॉर्ड के अद्यतन न होने और सामंजस्य संबंधी समस्याओं का समाधान होगा, जिससे पेंशन प्रबंधन अधिक सुव्यवस्थित होगा।
सामाजिक महत्व
- पेंशन वितरण में देरी की समस्या का समाधान होने से लाभार्थियों को समय पर वित्तीय सहायता मिलेगी, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होगा।
- बिस्तर पर पड़े (bedridden) लाभार्थियों को घर पर पेंशन वितरण जारी रखने का प्रावधान मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है और यह सुनिश्चित करता है कि सबसे कमजोर वर्ग को भी लाभ मिले।
- पेंशन प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा क्योंकि यह अधिक विश्वसनीय और जवाबदेह होगी, जिससे सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ेगी।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल साक्षरता और पहुंच
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लाभार्थियों के बीच डिजिटल साक्षरता की कमी DBT प्रणाली को अपनाने में बाधा बन सकती है।
- सभी लाभार्थियों के पास बैंक खातों तक पहुंच और उन्हें संचालित करने की क्षमता सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ
2. तकनीकी बुनियादी ढांचा
- बैंकों और सरकारी विभागों के बीच मजबूत और निर्बाध तकनीकी एकीकरण सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि भुगतान में कोई रुकावट न आए।
- साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है ताकि लाभार्थियों की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रहे।
यूपीएससी लिंक: शासन: ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही
3. शिकायत निवारण तंत्र
- DBT प्रणाली में किसी भी समस्या या त्रुटि के लिए एक प्रभावी और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना महत्वपूर्ण है।
- विशेष रूप से उन लाभार्थियों के लिए जो डिजिटल रूप से कम साक्षर हैं, उन्हें सहायता प्रदान करने की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
4. सहकारी बैंकों का समायोजन
- सहकारी बैंकों की भूमिका में कमी आने से उनके कर्मचारियों पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रबंधित करना एक चुनौती हो सकती है।
- सहकारी बैंकों को नई भूमिकाओं या सेवाओं में समायोजित करने की आवश्यकता हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: भारतीय अर्थव्यवस्था: वित्तीय क्षेत्र सुधार
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| वितरण में देरी | लाभार्थियों को समय पर पेंशन न मिलना, जिससे उनकी वित्तीय सुरक्षा प्रभावित होती है। |
| अवितरित राशि का विलंबित प्रेषण | सहकारी बैंकों द्वारा अप्रयुक्त पेंशन राशि को सरकार को वापस करने में देरी, जिससे वित्तीय प्रबंधन में समस्या आती है। |
| रिकॉर्ड अद्यतन न होना | लाभार्थियों के डेटा में त्रुटियां और विसंगतियां, जिससे गलत भुगतान या अपात्र व्यक्तियों को लाभ मिलने का जोखिम होता है। |
| सामंजस्य संबंधी मुद्दे | भुगतान रिकॉर्ड और सरकारी डेटा के बीच बेमेल, जिससे लेखापरीक्षा और जवाबदेही में समस्या आती है। |
| दोहरा भुगतान | आधार-आधारित भुगतान के अधूरे कार्यान्वयन के कारण एक ही व्यक्ति को कई बार पेंशन का भुगतान, जिससे सरकारी धन का अपव्यय होता है। |
| प्रोत्साहन भुगतान | सहकारी बैंकों को घर-घर वितरण के लिए दिए जाने वाले प्रोत्साहन भुगतान से राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (Direct Benefit Transfer – DBT)
आगे की राह
- सभी लाभार्थियों के लिए आधार-लिंक्ड बैंक खातों की उपलब्धता और सक्रियता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाएं।
- डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए, विशेषकर ग्रामीण और वृद्ध लाभार्थियों के लिए, ताकि वे DBT प्रणाली का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
- बैंकों और सरकारी विभागों के बीच तकनीकी एकीकरण को मजबूत किया जाए ताकि भुगतान प्रक्रिया निर्बाध और सुरक्षित हो।
- एक मजबूत और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए, जिसमें हेल्पलाइन और भौतिक सहायता केंद्र शामिल हों, ताकि लाभार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
- सहकारी बैंकों को नई भूमिकाओं में समायोजित करने के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाए, जैसे कि वित्तीय साक्षरता शिविर आयोजित करना या अन्य सरकारी योजनाओं में सहायता करना।
- DBT प्रणाली के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन किया जाए ताकि किसी भी कमी को समय पर पहचाना और सुधारा जा सके।
- बिस्तर पर पड़े और अन्य विशेष आवश्यकताओं वाले लाभार्थियों के लिए घर-घर वितरण प्रणाली को प्रभावी ढंग से जारी रखा जाए, यह सुनिश्चित करते हुए कि उन्हें कोई असुविधा न हो।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) · सहकारी बैंक · सामाजिक सुरक्षा पेंशन · आधार-आधारित भुगतान · राजकोषीय दक्षता · वित्तीय समावेशन · कल्याणकारी योजनाएँ · केंद्र-राज्य संबंध · डिजिटल इंडिया · सुशासन
अवधारणा प्रवाह
राज्य सरकार द्वारा पेंशन वितरण में देरी और अक्षमता की पहचान। → सहकारी बैंकों के माध्यम से वितरण में लागत और अनुपालन संबंधी मुद्दे। → प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली अपनाने का निर्णय। → आधार-लिंक्ड बैंक खातों के माध्यम से सीधे लाभार्थियों को भुगतान। → पेंशन वितरण में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही में वृद्धि। → राजकोषीय बोझ में कमी और केंद्रीय मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. DBT का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में सब्सिडी और लाभ हस्तांतरित करके रिसाव को कम करना है।
2. यह योजना केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित योजनाओं पर लागू होती है, राज्य सरकार की योजनाओं पर नहीं।
3. आधार संख्या का उपयोग DBT के तहत लाभार्थियों की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि DBT का प्राथमिक उद्देश्य बिचौलियों को हटाकर और सीधे लाभार्थियों के खातों में धन हस्तांतरित करके रिसाव और भ्रष्टाचार को कम करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि DBT केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की विभिन्न योजनाओं पर लागू होता है। कथन 3 सही है क्योंकि आधार संख्या DBT प्रणाली में लाभार्थियों की सटीक पहचान और प्रमाणीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण घटक है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के लाभों में शामिल है/हैं?
1. बिचौलियों की भूमिका में कमी
2. लाभार्थियों तक लाभों का त्वरित वितरण
3. सरकारी व्यय में पारदर्शिता में वृद्धि
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — DBT बिचौलियों को हटाकर, धन के सीधे हस्तांतरण को सक्षम करके, और वास्तविक लाभार्थियों तक लाभों की समय पर पहुँच सुनिश्चित करके बिचौलियों की भूमिका को कम करता है, लाभों का त्वरित वितरण करता है और सरकारी व्यय में पारदर्शिता बढ़ाता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना भारत में कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में कैसे सहायक रही है? केरल सरकार द्वारा सहकारी बैंकों के माध्यम से पेंशन वितरण को DBT में स्थानांतरित करने के हालिया निर्णय के आलोक में इसकी चुनौतियों और संभावनाओं का विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) की अवधारणा और इसके प्राथमिक उद्देश्य को संक्षेप में परिभाषित करें।
मुख्य भाग:
1. DBT के लाभ और दक्षता: इस बात पर प्रकाश डालें कि DBT ने बिचौलियों को कैसे समाप्त किया है, रिसाव को कम किया है, लाभार्थियों तक समय पर लाभ सुनिश्चित किया है, और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। उदाहरण के तौर पर LPG सब्सिडी (पहल योजना), मनरेगा मजदूरी आदि का उल्लेख करें।
2. केरल के निर्णय का संदर्भ: केरल सरकार द्वारा सहकारी बैंकों से DBT में बदलाव के कारणों का उल्लेख करें (जैसे देरी, रिकॉर्ड में त्रुटियां, प्रोत्साहन भुगतान, केंद्रीय सहायता का नुकसान)।
3. DBT की चुनौतियाँ: उन चुनौतियों पर चर्चा करें जो DBT के पूर्ण कार्यान्वयन में बाधा डालती हैं, जैसे डिजिटल साक्षरता की कमी, बैंक खातों तक पहुंच, आधार सीडिंग के मुद्दे, तकनीकी बुनियादी ढांचा, और विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कमजोर वर्गों के लिए बहिष्करण त्रुटियां।
4. संभावनाएँ: DBT के माध्यम से सुशासन, वित्तीय समावेशन और लक्षित वितरण को और मजबूत करने की संभावनाओं पर प्रकाश डालें।
निष्कर्ष: एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करें, जिसमें DBT की क्षमता को स्वीकार किया जाए, साथ ही इसके प्रभावी और समावेशी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक सुधारों और उपायों पर भी जोर दिया जाए।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments