06 Aug गगनयान मिशन: 2026 में व्योममित्र मिशन, 2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन
✎ गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र के साथ मानवरहित मिशन और 2027 तक मानव मिशन के साथ-साथ 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को स्थापित करना है, जो देश की…
Crew modulePropulsion stagesSafety mechanismsविषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)
- Prelims: गगनयान मिशन, व्योममित्र, मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3), क्रू एस्केप सिस्टम (CES), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS), अंतरिक्ष अन्वेषण, ISRO
- Essay: भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का राष्ट्र निर्माण में योगदान
त्वरित पुनरावृत्ति: गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र के साथ मानवरहित मिशन और 2027 तक मानव मिशन के साथ-साथ 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को स्थापित करना है, जो देश की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को गगनयान मिशन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों और भारत के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन मानव-रेटिंग से संबंधित प्रणालियों के विकास और प्रमाणीकरण में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है, जिससे भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन वास्तविकता के करीब आ गया है। इसके साथ ही, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना भी साझा की गई है।
पृष्ठभूमि
- गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
- मिशन में मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3), क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम (CES) जैसी प्रमुख प्रणालियाँ शामिल हैं।
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्रू एस्केप सिस्टम (CES) का सफल परीक्षण किया गया है, जो आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों को रॉकेट से दूर ले जाने में सक्षम है।
गगनयान मिशन और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) क्या हैं?
- गगनयान मिशन: यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसका लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है। यह भारत को अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों की सूची में शामिल करेगा।
- मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3): यह गगनयान मिशन के लिए विकसित किया गया एक विशेष प्रक्षेपण यान है, जिसे मानव सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन और परीक्षण किया गया है। इसके सभी प्रणोदन चरणों और संरचनाओं का विकास तथा ग्राउंड टेस्टिंग पूरी हो चुकी है।
- क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल: क्रू मॉड्यूल वह हिस्सा है जिसमें अंतरिक्ष यात्री रहते हैं, जबकि सर्विस मॉड्यूल मिशन के लिए आवश्यक प्रणोदन, शक्ति और अन्य प्रणालियाँ प्रदान करता है। दोनों के प्रणोदन प्रणालियों का विकास, परीक्षण और प्रमाणीकरण हो चुका है।
- पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS): यह प्रणाली अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सांस लेने योग्य हवा, उचित तापमान और दबाव बनाए रखने के साथ-साथ अपशिष्ट प्रबंधन सुनिश्चित करती है। इसका सफलतापूर्वक विकास और परीक्षण किया जा चुका है।
- व्योममित्र (Vyommitra): यह एक ‘हाफ-ह्यूमनॉइड’ (अर्ध-मानव) रोबोट है जिसे पहले मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन में भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य मानव शरीर पर अंतरिक्ष उड़ान के प्रभावों का अध्ययन करना है।
- टीवी-डी1 (TV-D1) मिशन: यह एक टेस्ट व्हीकल मिशन था जिसका उद्देश्य उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम का सत्यापन करना था, जिसे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अगला टेस्ट व्हीकल मिशन (TV-D2) की तैयारियां जारी हैं।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): यह 2035 तक चालू करने की योजना है। ISRO ने पांच मॉड्यूल वाले अंतरिक्ष स्टेशन की समग्र संरचना तैयार कर ली है और सरकार ने पहले मॉड्यूल BAS-01 के विकास और प्रक्षेपण को मंजूरी दे दी है। यह भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण विजन का हिस्सा है।
- मिशन रोडमैप: पहला मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है, जिसमें व्योममित्र को भेजा जाएगा। इसके बाद 2027 तक पहले क्रू उड़ान के कॉन्फ़िगरेशन में दो अतिरिक्त मानवरहित मिशन का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) का विकास | यह गगनयान मिशन के लिए मानव सुरक्षा सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण घटक है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाने में सक्षम है। |
| क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल प्रणोदन प्रणालियों का परीक्षण | अंतरिक्ष यान की गतिशीलता और नियंत्रण के लिए आवश्यक, यह अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित यात्रा और वापसी सुनिश्चित करता है। |
| पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) का सफल विकास | अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अंतरिक्ष में एक रहने योग्य वातावरण बनाए रखने हेतु महत्वपूर्ण, जिसमें ऑक्सीजन, तापमान और दबाव नियंत्रण शामिल है। |
| क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के मोटरों का विकास और परीक्षण | आपातकालीन स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की जान बचाने के लिए यह प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उन्हें लॉन्च के दौरान किसी भी खतरे से बचाती है। |
| टीवी-डी1 (TV-D1) प्रक्षेपण यान मिशन की सफलता | यह उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम के सत्यापन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण था, जिससे मिशन की सुरक्षा में वृद्धि हुई। |
| भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की 2035 तक स्थापना की योजना | यह भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के दृष्टिकोण को दर्शाता है और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक स्थायी मंच प्रदान करेगा। |
महत्व
सामरिक महत्व
- गगनयान मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों के एक विशिष्ट समूह में शामिल करेगा, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में इसकी स्थिति मजबूत होगी।
- यह मिशन आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भरता) को बढ़ावा देता है, क्योंकि अधिकांश प्रणालियों का विकास और परीक्षण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी।
वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व
- मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए नई प्रौद्योगिकियों का विकास और परीक्षण, जैसे कि मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान और जीवन समर्थन प्रणाली, देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाएगा।
- यह अंतरिक्ष में मानव शरीर विज्ञान, विकिरण प्रभावों और दीर्घकालिक मिशनों के लिए नई वैज्ञानिक खोजों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- यह मिशन युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे देश में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होंगे और संबद्ध उद्योगों में वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
- यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (ASA) जैसे अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ सहयोग वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा।
चुनौतियाँ
1. तकनीकी जटिलताएँ
- मानव-रेटेड प्रणालियों का विकास और प्रमाणीकरण अत्यंत जटिल और त्रुटिहीन होना चाहिए, क्योंकि इसमें मानव जीवन शामिल है।
- अंतरिक्ष में विकिरण, माइक्रोग्रैविटी और तापमान भिन्नता जैसी कठोर परिस्थितियों में प्रणालियों का विश्वसनीय प्रदर्शन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
2. वित्तीय बाधाएँ
- मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए भारी बजटीय आवंटन की आवश्यकता होती है, और धन का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
- अप्रत्याशित लागत वृद्धि और संसाधनों के आवंटन में प्राथमिकताएं तय करना एक चुनौती हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था – राजकोषीय नीति
3. सुरक्षा और विश्वसनीयता
- अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और किसी भी विफलता की स्थिति में बचाव प्रणालियों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करना एक निरंतर चुनौती है।
- मिशन के प्रत्येक चरण में उच्च विश्वसनीयता मानकों को बनाए रखना और जोखिमों को कम करना आवश्यक है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – आपदा प्रबंधन
4. दीर्घकालिक योजना और अवसंरचना
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) जैसी दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए निरंतर निवेश, तकनीकी उन्नयन और कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।
- अंतरिक्ष मलबे और अन्य बाहरी खतरों से अंतरिक्ष स्टेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मानव-रेटिंग प्रमाणीकरण | सभी प्रणालियों का कड़े सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना और शून्य-त्रुटि प्रदर्शन सुनिश्चित करना। |
| बजटीय आवंटन का प्रबंधन | 20,193 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना। |
| अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण और स्वास्थ्य | अंतरिक्ष के कठोर वातावरण के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों का प्रबंधन। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का समन्वय | विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ तकनीकी और परिचालन समन्वय बनाए रखना। |
| तकनीकी विफलता का जोखिम | जटिल प्रणालियों में किसी भी अप्रत्याशित विफलता की संभावना को कम करना और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना। |
| अंतरिक्ष मलबे का खतरा | पृथ्वी की निचली कक्षा में बढ़ते अंतरिक्ष मलबे से गगनयान और भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन की सुरक्षा। |
आगे की राह
- मानव-रेटेड प्रणालियों के विकास और परीक्षण में निरंतर निवेश तथा नवाचार को बढ़ावा देना।
- अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण और स्वास्थ्य निगरानी कार्यक्रमों को और मजबूत करना, जिसमें मनोवैज्ञानिक तैयारी भी शामिल हो।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और अन्य अंतरिक्ष शक्तियों के साथ ज्ञान और प्रौद्योगिकी साझा करना।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के विकास के लिए एक स्पष्ट और चरणबद्ध रोडमैप का पालन करना, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाए।
- अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और शमन के लिए प्रभावी रणनीतियों को लागू करना।
- सार्वजनिक जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि पैदा करना।
- मिशन के लिए आवश्यक मानव संसाधनों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना, जिसमें वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीशियन शामिल हैं।
- मिशन की लागत-प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशीकरण और लागत-बचत प्रौद्योगिकियों पर जोर देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
गगनयान मिशन · मानव अंतरिक्ष अन्वेषण · भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) · मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) · क्रू एस्केप सिस्टम (CES) · व्योममित्र · अंतरिक्ष विभाग · इसरो (ISRO) · अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी · आत्मनिर्भर भारत
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A (j)’, ‘note’: ‘वैज्ञानिक सोच विकसित करना’}
अवधारणा प्रवाह
गगनयान मिशन की घोषणा और बजटीय आवंटन → मानव-रेटेड प्रणालियों का विकास और परीक्षण (HLVM3, ECLSS, CES) → मानवरहित परीक्षण मिशन (TV-D1, TV-D2) का सफल संचालन → व्योममित्र के साथ पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन (2026 की चौथी तिमाही) → भारत का पहला मानव कक्षीय मिशन (2027 तक) → भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना (2035 तक)
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. गगनयान मिशन का लक्ष्य 2026 की चौथी तिमाही में व्योममित्र नामक अर्ध-मानव को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन लॉन्च करना है।
2. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है।
3. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गगनयान कार्यक्रम के लिए 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन स्वीकृत किया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि व्योममित्र को ले जाने वाला पहला मानवरहित प्रायोगिक गगनयान मिशन 2026 की चौथी तिमाही में लक्षित है।
कथन 2 सही है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) को 2035 तक चालू करने की योजना है।
कथन 3 सही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत आठ मिशनों के निष्पादन के लिए 20,193 करोड़ रुपये का बजटीय आवंटन स्वीकृत किया था।
Q2. गगनयान मिशन के संदर्भ में, ‘व्योममित्र’ क्या है?
- एक नया विकसित प्रक्षेपण यान
- एक मानव-रेटेड अंतरिक्ष कैप्सूल
- एक अर्ध-मानव रोबोट
- एक ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क
उत्तर: एक अर्ध-मानव रोबोट — व्योममित्र (Vyommitra) एक अर्ध-मानव (हाफ-ह्यूमनॉइड) रोबोट है जिसे गगनयान के मानवरहित प्रायोगिक मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों के स्थान पर भेजा जाएगा ताकि अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जा सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत का गगनयान मिशन देश के मानव अंतरिक्ष अन्वेषण रोडमैप में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस मिशन की प्रमुख उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा करें तथा भारत के दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण विजन में इसकी भूमिका का मूल्यांकन करें। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: गगनयान मिशन का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व।
प्रमुख उपलब्धियाँ: मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान (HLVM3) का विकास और परीक्षण, क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल के प्रणोदन प्रणालियों का प्रमाणीकरण, पर्यावरण नियंत्रण और जीवन समर्थन प्रणाली (ECLSS) का सफल विकास, क्रू एस्केप सिस्टम (CES) का परीक्षण, TV-D1 मिशन की सफलता, ग्राउंड कम्युनिकेशन नेटवर्क की स्थापना।
चुनौतियाँ: जटिल प्रौद्योगिकियों का विकास, अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, लागत प्रबंधन, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन, अंतरिक्ष मलबे का खतरा।
दीर्घकालिक विजन में भूमिका: भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना (2035 तक), भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए आधार तैयार करना, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन, भू-राजनीतिक महत्व।
निष्कर्ष: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती क्षमता और वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में इसकी स्थिति पर संक्षिप्त टिप्पणी।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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