06 Aug गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर रोक लगाने का दिया आदेश
✎ गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जो एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र है, जिसमें बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद के एक बीज फार्म द्वारा कथित…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper II — शासन और न्यायपालिका
- Prelims: मानस टाइगर रिजर्व, गौहाटी उच्च न्यायालय, जनहित याचिका (PIL), बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
- Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन, न्यायपालिका की भूमिका: पर्यावरण संरक्षण में एक प्रहरी
त्वरित पुनरावृत्ति: गौहाटी उच्च न्यायालय ने मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जो एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र है, जिसमें बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद के एक बीज फार्म द्वारा कथित अतिक्रमण शामिल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
गौहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार और बोधोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) को मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में किसी भी नए अतिक्रमण को रोकने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) के जवाब में आया है, जिसमें कार्यकर्ता ने टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का आरोप लगाया है, जिसमें BTC के कृषि विभाग के तहत एक बीज फार्म भी शामिल है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि
- मानस टाइगर रिजर्व असम में स्थित एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है, जो भूटान की सीमा से सटा हुआ है।
- यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) और एक प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व (Project Tiger Reserve) है।
- पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने गौहाटी उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर मानस टाइगर रिजर्व से अनाधिकृत अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
- याचिका में विशेष रूप से कोकिलाबाड़ी बीज फार्म का उल्लेख किया गया है, जो BTC के कृषि विभाग के नियंत्रण में है और कथित तौर पर 3,558.32 बीघा भूमि पर अतिक्रमण कर रहा है।
- न्यायालय ने असम सरकार, BTC, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और मानस राष्ट्रीय उद्यान के फील्ड डायरेक्टर को नोटिस जारी किया है।
मानस टाइगर रिजर्व क्या है?
- मानस टाइगर रिजर्व असम राज्य में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान, प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व, हाथी रिजर्व और बायोस्फीयर रिजर्व है।
- यह हिमालय की तलहटी में स्थित है और भूटान के रॉयल मानस नेशनल पार्क से सटा हुआ है।
- यह अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जिसमें बाघ, हाथी, पिग्मी हॉग, गोल्डन लंगूर और बंगाल फ्लोरिकन जैसी लुप्तप्राय प्रजातियाँ शामिल हैं।
- मानस को 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
- यह ब्रह्मपुत्र घाटी के बाढ़ के मैदानों और हिमालय की तलहटी के बीच एक महत्वपूर्ण संक्रमण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
- रिजर्व का नाम मानस नदी के नाम पर रखा गया है, जो इसके पश्चिमी भाग से होकर बहती है।
- यह क्षेत्र बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (Bodoland Territorial Region) के अंतर्गत आता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व | असम में स्थित, भूटान से सटा हुआ; 2,837 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला। |
| यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल | वैश्विक महत्व का प्राकृतिक स्थल, जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण। |
| अतिक्रमण का मुद्दा | राष्ट्रीय उद्यान के मुख्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा, विशेषकर पनबारी और बेतबारी क्षेत्रों में। |
| कोकिलाबाड़ी बीज फार्म | बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) के कृषि विभाग के नियंत्रण में, 3,558.32 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा। |
| जनहित याचिका (PIL) | पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर, अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग। |
| गुवाहाटी उच्च न्यायालय का निर्देश | असम सरकार और BTC को यथास्थिति बनाए रखने और आगे अतिक्रमण रोकने का आदेश। |
महत्व
पर्यावरण और जैव विविधता
- मानस टाइगर रिजर्व एक महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जो कई लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है, जिनमें बाघ, एशियाई हाथी और pygmy hog शामिल हैं। अतिक्रमण इन प्रजातियों के आवास को गंभीर रूप से खतरे में डालता है।
- यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जिसका अर्थ है कि इसके संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय महत्व है। अतिक्रमण से इस स्थिति को खतरा होता है और भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन होता है।
शासन और कानून का शासन
- सरकारी भूमि, विशेषकर संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण, कानून के शासन के कमजोर होने और प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है।
- उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है कि सरकारी एजेंसियां अपने संवैधानिक और वैधानिक कर्तव्यों का पालन करें और सार्वजनिक हित में कार्य करें।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- अतिक्रमण अक्सर स्थानीय समुदायों और वन-निर्भर आबादी के साथ संघर्ष का कारण बनता है, जिससे उनके आजीविका के अधिकार प्रभावित होते हैं।
- संरक्षित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों से वन संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है।
चुनौतियाँ
1. संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण
- वन भूमि पर अवैध कब्जा, कृषि, आवास और अन्य गतिविधियों के लिए, वन्यजीव आवासों को नष्ट करता है।
- अतिक्रमण के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि होती है, जिससे दोनों पक्षों को नुकसान होता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण संरक्षण; आंतरिक सुरक्षा
2. अंतर-विभागीय समन्वय का अभाव
- वन विभाग, कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासनिक निकायों के बीच समन्वय की कमी अतिक्रमण की समस्या को बढ़ाती है।
- बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) जैसे स्वायत्त निकायों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन; संघवाद
3. कर्मचारियों की कमी और क्षमता निर्माण
- टाइगर रिजर्व में कर्मचारियों की भारी कमी प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन में बाधा डालती है।
- वन कर्मचारियों के लिए अतिक्रमण से निपटने और कानूनी प्रक्रियाओं को समझने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: शासन; पर्यावरण संरक्षण
4. कानूनी और नीतिगत चुनौतियाँ
- अतिक्रमणकारियों को हटाने की प्रक्रिया अक्सर जटिल और लंबी होती है, जिसमें कानूनी अड़चनें आती हैं।
- अवैध पट्टों और भूमि उपयोग परिवर्तनों को रोकना और उन पर कार्रवाई करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: शासन; न्यायिक समीक्षा
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| मानस में अतिक्रमण | वन्यजीव आवासों का विनाश, जैव विविधता को खतरा, मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि। |
| कोकिलाबाड़ी बीज फार्म | सरकारी विभाग द्वारा ही संरक्षित क्षेत्र में अवैध कब्जा, कानून के शासन का उल्लंघन। |
| कर्मचारियों की कमी | प्रभावी निगरानी और प्रवर्तन में बाधा, अतिक्रमण को रोकने में अक्षमता। |
| अंतर-सरकारी समन्वय | राज्य सरकार, BTC और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच समन्वय का अभाव, समस्या का समाधान कठिन। |
| यूनेस्को स्थिति | अतिक्रमण से वैश्विक महत्व के स्थल की अखंडता को खतरा, भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA)
आगे की राह
- अतिक्रमण वाले क्षेत्रों की पहचान के लिए नवीनतम उपग्रह इमेजरी और GIS तकनीक का उपयोग करके एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाए।
- अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्य योजना विकसित की जाए, जिसमें प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए प्रावधान शामिल हों।
- वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) सहित सभी संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए।
- मानस टाइगर रिजर्व में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए तत्काल भर्ती की जाए और मौजूदा कर्मचारियों को अतिक्रमण से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाए और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वे अतिक्रमण से दूर रहें।
- संरक्षित क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन और अवैध पट्टों को रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों को लागू किया जाए और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
- जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि लोगों को संरक्षित क्षेत्रों के महत्व और अतिक्रमण के परिणामों के बारे में शिक्षित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
मानस टाइगर रिजर्व · अतिक्रमण · जनहित याचिका · गौहाटी उच्च न्यायालय · बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद · पर्यावरण संरक्षण · वन्यजीव संरक्षण · राष्ट्रीय उद्यान · बाघ अभयारण्य · यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल · पारिस्थितिक संतुलन · संरक्षित क्षेत्र
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48A’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51A(g)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का कर्तव्य’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 226’, ‘note’: ‘उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति’}
अवधारणा प्रवाह
मानस टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण → पर्यावरण कार्यकर्ता द्वारा जनहित याचिका (PIL) दायर → गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा यथास्थिति का निर्देश → अतिक्रमण से वन्यजीव आवासों और जैव विविधता को खतरा → सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और प्रवर्तन की चुनौती → संरक्षित क्षेत्रों के प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम में स्थित है और भूटान के साथ सीमा साझा करता है।
2. यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भारत में बाघ संरक्षण के लिए शीर्ष वैधानिक निकाय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम में स्थित है और भूटान के साथ अपनी सीमा साझा करता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि मानस एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। कथन 3 भी सही है क्योंकि NTCA भारत में बाघ संरक्षण के लिए शीर्ष वैधानिक निकाय है।
Q2. जनहित याचिका (PIL) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
1. जनहित याचिका केवल सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।
2. जनहित याचिका का उद्देश्य सार्वजनिक हित के मामलों में न्याय तक पहुंच प्रदान करना है।
3. कोई भी व्यक्ति या संगठन जो सार्वजनिक हित में कार्य कर रहा हो, जनहित याचिका दायर कर सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय के साथ-साथ उच्च न्यायालयों में भी दायर की जा सकती है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि जनहित याचिका का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक हित के मामलों में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है, और इसे कोई भी व्यक्ति या संगठन दायर कर सकता है जो सार्वजनिक हित में कार्य कर रहा हो।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण के मुद्दे पर गौहाटी उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश के आलोक में, भारत में संरक्षित क्षेत्रों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण और गौहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश का संक्षिप्त उल्लेख। संरक्षित क्षेत्रों के महत्व पर प्रकाश।
2. **संरक्षित क्षेत्रों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **अतिक्रमण:** कृषि, आवास, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि का अवैध कब्जा।
* **मानव-वन्यजीव संघर्ष:** संरक्षित क्षेत्रों के बाहर रहने वाले समुदायों के साथ संघर्ष।
* **अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार:** बाघों, हाथियों और अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों का अवैध शिकार।
* **संसाधनों की कमी:** कर्मचारियों, धन और बुनियादी ढांचे की कमी।
* **शासन और समन्वय की कमी:** विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय का अभाव (जैसे बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद का मामला)।
* **जलवायु परिवर्तन:** पर्यावासों पर बढ़ता दबाव।
* **स्थानीय समुदायों की भागीदारी का अभाव:** संरक्षण प्रयासों में स्थानीय लोगों को शामिल न करना।
3. **चुनौतियों से निपटने के उपाय:**
* **सख्त कानून प्रवर्तन:** अतिक्रमण हटाने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कार्रवाई।
* **सामुदायिक भागीदारी:** स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना।
* **क्षमता निर्माण:** वन कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और संसाधनों में वृद्धि।
* **अंतर-विभागीय समन्वय:** केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों, स्थानीय निकायों (जैसे BTC) और NTCA के बीच बेहतर समन्वय।
* **प्रौद्योगिकी का उपयोग:** निगरानी और सुरक्षा के लिए ड्रोन, GIS जैसी तकनीकों का उपयोग।
* **पर्यावास बहाली:** degraded क्षेत्रों का पुनर्वास।
* **जागरूकता अभियान:** संरक्षण के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।
4. **निष्कर्ष:** संरक्षित क्षेत्रों के स्थायी प्रबंधन के लिए एक समग्र और बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जो पारिस्थितिक संतुलन और स्थानीय समुदायों के कल्याण को सुनिश्चित करे।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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