गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मांस राष्ट्रीय उद्यान में अतिक्रमण पर रोका आदेश दिया, जानिए पूरा मामला

Gauhati High Court seeks status quo on encroachment in Manas Tiger Reserve — concept mind map

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मांस राष्ट्रीय उद्यान में अतिक्रमण पर रोका आदेश दिया, जानिए पूरा मामला

✎ मानस टाइगर रिजर्व असम में स्थित एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और बाघ अभयारण्य है, जो अतिक्रमण के कारण चर्चा में है, जिस पर गौहाटी उच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

Manas Tiger Reserve encroachmentCourt OrderStatus quo directivePIL hearingPILRohit ChoudhuryEncroachment removal demandBTC AgricultureKokilabari Seed Farm3,558.32 bigha landNTCANational Tiger AuthorityNoticedMoEFCCMinistry of EnvironmentNoticedField DirectorManas ReserveNoticed
Manas Tiger Reserve encroachment

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी  |  GS Paper II — शासन, न्यायपालिका
  • Prelims: मानस टाइगर रिजर्व, अतिक्रमण, जनहित याचिका, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद
  • Essay: पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन, न्यायपालिका की पर्यावरण संरक्षण में भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: मानस टाइगर रिजर्व असम में स्थित एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और बाघ अभयारण्य है, जो अतिक्रमण के कारण चर्चा में है, जिस पर गौहाटी उच्च न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

गौहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) को मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में किसी भी और अतिक्रमण को रोकने का निर्देश दिया है। यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें मानस के मुख्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग की गई थी, जिसमें कोकिलाबाड़ी बीज फार्म भी शामिल है, जो BTC के कृषि विभाग के नियंत्रण में है। न्यायालय ने अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

पृष्ठभूमि

  • मानस टाइगर रिजर्व असम में स्थित है और भूटान के साथ सीमा साझा करता है। यह एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) और एक महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट है।
  • पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर जनहित याचिका में मानस राष्ट्रीय उद्यान के मुख्य क्षेत्र, विशेष रूप से पनबारी और बेतबारी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है।
  • याचिका में बताया गया है कि कोकिलाबाड़ी बीज फार्म, जो BTC के कृषि विभाग के नियंत्रण में है, एक प्रमुख अतिक्रमणकर्ता है और 3,558.32 बीघा भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रहा है।
  • अधिकारियों ने बताया है कि अतिक्रमण का मुद्दा जनहित याचिका दायर होने से पहले से ही चर्चा में था, और कोकिलाबाड़ी मामले पर बातचीत चल रही है।
  • उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest, and Climate Change), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को भी नोटिस जारी किया है।

मानस टाइगर रिजर्व

  • मानस टाइगर रिजर्व असम में हिमालय की तलहटी में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान, हाथी रिजर्व और बायोस्फीयर रिजर्व है।
  • यह भूटान में रॉयल मानस नेशनल पार्क के साथ एक ट्रांसबाउंड्री संरक्षित क्षेत्र (Transboundary Protected Area) बनाता है।
  • मानस अपनी दुर्लभ और लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों के लिए जाना जाता है, जैसे कि असम रूफ्ड टर्टल, हिस्पिड हेयर, गोल्डन लंगूर और पिग्मी हॉग।
  • यह बाघों की आबादी के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है और इसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
  • मानस को 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था, जो इसके अद्वितीय प्राकृतिक महत्व को दर्शाता है।
  • यह क्षेत्र बोडो समुदाय की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है, और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) का इस क्षेत्र के प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • मानस नदी, जो इस क्षेत्र से होकर बहती है, ब्रह्मपुत्र नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • अतिक्रमण और अवैध कटाई जैसी गतिविधियाँ इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रमुख खतरे हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
मानस राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम में स्थित, भूटान से सटा हुआ, 2,837 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला।
UNESCO विश्व धरोहर स्थल अद्वितीय प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण प्रयासों का केंद्र।
अतिक्रमण का मुद्दा विशेष रूप से पनबारी और बेतबारी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण, कोकिलाबाड़ी बीज फार्म एक प्रमुख अतिक्रमणकर्ता।
गौहाटी उच्च न्यायालय का निर्देश असम सरकार और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) को यथास्थिति बनाए रखने और आगे अतिक्रमण रोकने का निर्देश।
जनहित याचिका (PIL) पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी द्वारा दायर, अनधिकृत अतिक्रमण हटाने और वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग।
स्टाफ की कमी मानस टाइगर रिजर्व में 63% स्टाफ की कमी, संरक्षण प्रयासों के लिए एक बड़ी चुनौती।

महत्व

पर्यावरण और पारिस्थितिकी

  • मानस टाइगर रिजर्व एक महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जो कई लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है, जिनमें बाघ भी शामिल हैं।
  • अतिक्रमण से वन्यजीवों के आवासों का विनाश होता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है और पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है।
  • UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में, मानस का संरक्षण वैश्विक पर्यावरण संरक्षण प्रतिबद्धताओं का हिस्सा है।

शासन और प्रशासन

  • अतिक्रमण का मुद्दा राज्य सरकार, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है।
  • न्यायालय का हस्तक्षेप प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के शासन को बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका पर प्रकाश डालता है।
  • वन्यजीव संरक्षण और भूमि प्रबंधन से संबंधित नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।

सामाजिक और आर्थिक

  • अतिक्रमण अक्सर स्थानीय समुदायों की आजीविका और भूमि अधिकारों से जुड़ा होता है, जिससे सामाजिक-आर्थिक तनाव पैदा होता है।
  • संरक्षित क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों से मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • अतिक्रमण से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो अक्सर वन्यजीवों पर निर्भर करती है।

चुनौतियाँ

1. अतिक्रमण का प्रबंधन

  • संरक्षित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को हटाना और रोकना एक जटिल चुनौती है, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारक शामिल हैं।
  • कोकिलाबाड़ी बीज फार्म जैसे संस्थागत अतिक्रमणों से निपटना विशेष रूप से कठिन हो सकता है, क्योंकि इसमें सरकारी विभागों की संलिप्तता होती है।

2. स्टाफ की कमी और क्षमता निर्माण

  • मानस टाइगर रिजर्व में स्टाफ की भारी कमी प्रभावी निगरानी, प्रवर्तन और संरक्षण गतिविधियों में बाधा डालती है।
  • वन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी भी संरक्षण प्रयासों को कमजोर करती है।

3. अंतर-एजेंसी समन्वय

  • केंद्र सरकार, राज्य सरकार और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद जैसे विभिन्न हितधारकों के बीच प्रभावी समन्वय की कमी अतिक्रमण के मुद्दे को बढ़ाती है।
  • भूमि उपयोग और वन संरक्षण नीतियों के बीच सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है।

4. स्थानीय समुदायों की भागीदारी

  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल किए बिना अतिक्रमण को स्थायी रूप से हल करना मुश्किल है।
  • वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान करना और उनके भूमि अधिकारों का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कोकिलाबाड़ी बीज फार्म का अतिक्रमण 3,558.32 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा, सरकारी विभाग की संलिप्तता।
बड़े पैमाने पर मानव अतिक्रमण 18,000 बीघा से अधिक भूमि पर 7,520 लोग अवैध रूप से काबिज हैं।
वन्यजीव आवासों का विनाश अतिक्रमण से बाघों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं।
संरक्षण स्टाफ की कमी मानस टाइगर रिजर्व में 63% स्टाफ की कमी, जिससे प्रभावी निगरानी असंभव है।
कानूनी और प्रशासनिक जटिलताएं विभिन्न सरकारी निकायों के बीच अधिकार क्षेत्र और समन्वय की कमी।
UNESCO स्थिति का उल्लंघन विश्व धरोहर स्थल के रूप में मानस की अखंडता और मूल्य खतरे में।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)

आगे की राह

  • अतिक्रमणों की पहचान और सीमांकन के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण किया जाए, जिसमें नवीनतम भू-स्थानिक तकनीक का उपयोग किया जाए।
  • अतिक्रमणकारियों को हटाने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्य योजना विकसित की जाए, जिसमें कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
  • मानस टाइगर रिजर्व में रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए और वन कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
  • केंद्र, राज्य और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद के बीच एक स्थायी समन्वय तंत्र स्थापित किया जाए ताकि भूमि उपयोग और संरक्षण नीतियों का प्रभावी ढंग से समन्वय किया जा सके।
  • स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल किया जाए और उन्हें वैकल्पिक आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएं ताकि वे संरक्षित क्षेत्रों पर निर्भर न रहें।
  • संरक्षित क्षेत्रों के महत्व के बारे में जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
  • न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
  • मानस टाइगर रिजर्व के लिए एक दीर्घकालिक संरक्षण और प्रबंधन योजना विकसित की जाए, जिसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाए।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मानस टाइगर रिजर्व · अतिक्रमण · गौहाटी उच्च न्यायालय · जनहित याचिका · पर्यावरण संरक्षण · वन्यजीव संरक्षण · यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल · राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण · बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद · स्थायी विकास · वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 · पारिस्थितिक संतुलन

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन
  • अनुच्छेद 51A (g): प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार
  • सातवीं अनुसूची (समवर्ती सूची): वन, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण

अवधारणा प्रवाह

मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण  →  पर्यावरण कार्यकर्ता द्वारा जनहित याचिका  →  गौहाटी उच्च न्यायालय का यथास्थिति का निर्देश  →  संरक्षित क्षेत्र की जैव विविधता को खतरा  →  वन्यजीव संरक्षण और शासन की चुनौतियां  →  स्थायी समाधान के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानस राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
2. यह असम में स्थित है और भूटान के साथ सीमा साझा करता है।
3. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भारत में बाघ संरक्षण के लिए सर्वोच्च वैधानिक निकाय है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि मानस राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। कथन 2 सही है क्योंकि यह असम में स्थित है और भूटान के साथ अपनी सीमा साझा करता है। कथन 3 भी सही है क्योंकि NTCA भारत में बाघ संरक्षण के लिए सर्वोच्च वैधानिक निकाय है।

Q2. जनहित याचिका (PIL) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सबसे उपयुक्त है?

  1. यह केवल सरकार के खिलाफ दायर की जा सकती है।
  2. यह किसी भी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक हित के मामलों में दायर की जा सकती है।
  3. यह केवल सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।
  4. यह केवल आपराधिक मामलों से संबंधित है।

उत्तर: यह किसी भी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक हित के मामलों में दायर की जा सकती है। — जनहित याचिका (PIL) एक कानूनी उपकरण है जो किसी भी व्यक्ति या समूह को सार्वजनिक हित के मामलों में न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की अनुमति देता है, भले ही वे सीधे तौर पर प्रभावित न हों। इसका उद्देश्य न्याय तक पहुंच को व्यापक बनाना है।

Q3. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (संरक्षित क्षेत्र) सूची-II (राज्य)
A. मानस टाइगर रिजर्व 1. उत्तराखंड
B. जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान 2. असम
C. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान 3. राजस्थान
D. सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान 4. पश्चिम बंगाल

  1. A-2, B-1, C-3, D-4
  2. A-1, B-2, C-3, D-4
  3. A-2, B-3, C-1, D-4
  4. A-4, B-1, C-3, D-2

उत्तर: A-2, B-1, C-3, D-4 — मानस टाइगर रिजर्व असम में है। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड में है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में है। सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल में है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण के मुद्दे को उजागर करने वाले हालिया गौहाटी उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में, भारत में संरक्षित क्षेत्रों के समक्ष आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इन चुनौतियों से निपटने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** गौहाटी उच्च न्यायालय के हालिया निर्देश और मानस टाइगर रिजर्व में अतिक्रमण के संदर्भ का संक्षिप्त उल्लेख। संरक्षित क्षेत्रों के महत्व पर प्रकाश डालें।
2. **संरक्षित क्षेत्रों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:**
* **अतिक्रमण:** कृषि, आवास, बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए भूमि पर अवैध कब्जा (मानस टाइगर रिजर्व का उदाहरण)।
* **मानव-वन्यजीव संघर्ष:** संरक्षित क्षेत्रों के पास बढ़ती मानव आबादी के कारण संघर्ष।
* **अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी:** विशेष रूप से बाघ, गैंडे जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए खतरा।
* **संसाधनों की कमी:** कर्मचारियों, धन और बुनियादी ढांचे की कमी।
* **जलवायु परिवर्तन:** आवासों और प्रजातियों पर बढ़ता प्रभाव।
* **विकास परियोजनाएं:** खनन, सड़क निर्माण, जलविद्युत परियोजनाओं से खतरा।
* **स्थानीय समुदायों का विस्थापन और भागीदारी की कमी:** संरक्षण प्रयासों में स्थानीय लोगों को शामिल न करना।
3. **चुनौतियों से निपटने के उपाय:**
* **सख्त कानून प्रवर्तन:** अतिक्रमण हटाने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई।
* **सामुदायिक भागीदारी:** स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना (जैसे इको-टूरिज्म, वैकल्पिक आजीविका)।
* **क्षमता निर्माण:** वन कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण, बेहतर उपकरण और पर्याप्त जनशक्ति।
* **प्रौद्योगिकी का उपयोग:** निगरानी, अवैध शिकार विरोधी उपायों के लिए ड्रोन, जीपीएस आदि का उपयोग।
* **अंतर-विभागीय समन्वय:** वन विभाग, राजस्व विभाग, स्थानीय प्रशासन और बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) जैसे निकायों के बीच समन्वय।
* **पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता:** संरक्षण के महत्व के बारे में जनता को शिक्षित करना।
* **पुनर्वास और मुआवजा नीतियां:** विस्थापितों के लिए उचित पुनर्वास और मानव-वन्यजीव संघर्ष में नुकसान के लिए मुआवजा।
* **राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) जैसी संस्थाओं की भूमिका को मजबूत करना।**
4. **निष्कर्ष:** संरक्षित क्षेत्रों के महत्व को दोहराते हुए, स्थायी संरक्षण और विकास के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दें।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments

Post A Comment