26 Sep गैर-लाभकारी संगठनों में डिजिटल परिपक्वता और एआई अपनाने में कमी: रिपोर्ट 2026

✎ भारतीय गैर-लाभकारी संगठन डिजिटल परिपक्वता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने में पीछे हैं, जिससे उनकी दक्षता और प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है, जबकि मुफ्त डिजिटल संसाधनों का भी पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय। | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी-विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव; सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरूकता।
- Prelims: डिजिटल फॉर नॉन-प्रॉफिट्स (D4NP) रिपोर्ट, गैर-लाभकारी संगठन (Non-Profits), डिजिटल परिपक्वता (Digital Maturity), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI), बृहत् भाषा मॉडल (Large Language Models – LLMs), ई-गवर्नेंस
- Essay: भारत में डिजिटल विभाजन और समावेशी विकास, प्रौद्योगिकी और सामाजिक क्षेत्र: चुनौतियाँ एवं अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: भारतीय गैर-लाभकारी संगठन डिजिटल परिपक्वता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने में पीछे हैं, जिससे उनकी दक्षता और प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है, जबकि मुफ्त डिजिटल संसाधनों का भी पर्याप्त उपयोग नहीं हो पा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में जारी ‘डिजिटल फॉर नॉन-प्रॉफिट्स (D4NP) रिपोर्ट’ के अनुसार, भारतीय गैर-लाभकारी संगठन (Non-Profits) डिजिटल परिपक्वता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अपनाने में पिछड़ रहे हैं। रिपोर्ट में पाया गया कि ये संगठन डिजिटल परिपक्वता पर 50% से भी कम अंक प्राप्त कर रहे हैं और मुफ्त ऑनलाइन विज्ञापन अनुदानों का लाभ उठाने में भी विफल रहे हैं, जबकि रिपोर्ट और विपणन में सहायता के लिए बृहत् भाषा मॉडल (LLMs) में उनकी रुचि बढ़ रही है।
पृष्ठभूमि
- D4NP रिपोर्ट ने भारत के गैर-लाभकारी क्षेत्र में 500 संगठनों के सर्वेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।
- रिपोर्ट के अनुसार, गैर-लाभकारी संगठन डिजिटल परिपक्वता में 50% से कम अंक प्राप्त कर रहे हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में कॉलेज-शिक्षित कर्मचारियों वाले संगठन AI के साथ प्रयोग कर रहे हैं।
- D4NP के संस्थापक अभिनव चेतन ने बताया कि गैर-लाभकारी संगठन किसी भी तकनीकी प्रवृत्ति को अपनाने में हमेशा सबसे पीछे रहते हैं।
- कई संगठन $10,000 मासिक विज्ञापन अनुदान जैसे मुफ्त ऑनलाइन विज्ञापन अवसरों का लाभ नहीं उठा रहे हैं, जिससे लाखों डॉलर का मुफ्त विज्ञापन अप्रयुक्त पड़ा है।
- सर्वेक्षण किए गए 20 संकेतों में से केवल एक संगठन, चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY), डिजिटल परिपक्वता के सही पक्ष में पाया गया, जिसका श्रेय उसके कर्मचारियों की कॉर्पोरेट पृष्ठभूमि को दिया गया।
- रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग एक चौथाई गैर-लाभकारी संगठनों के पास AI उपकरणों द्वारा संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को संभालने के लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं हैं, और केवल एक चौथाई ही ऑनलाइन एनालिटिक्स टूल का उपयोग करते हैं।
डिजिटल परिपक्वता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्या है?
- डिजिटल परिपक्वता (Digital Maturity) एक संगठन की क्षमता को संदर्भित करती है कि वह अपने संचालन, प्रक्रियाओं और रणनीतियों में डिजिटल प्रौद्योगिकियों का कितनी प्रभावी ढंग से उपयोग करता है। इसमें डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, मोबाइल तकनीक और स्वचालन जैसे विभिन्न पहलू शामिल हैं।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) कंप्यूटर विज्ञान का एक क्षेत्र है जो मशीनों को मानव जैसी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित करने में सक्षम बनाता है। इसमें सीखने, समस्या-समाधान, निर्णय लेने और भाषा समझने जैसी क्षमताएं शामिल हैं।
- बृहत् भाषा मॉडल (Large Language Models – LLMs) AI के एक प्रकार हैं जो बड़ी मात्रा में पाठ्य डेटा पर प्रशिक्षित होते हैं ताकि मानव भाषा को समझ सकें, उत्पन्न कर सकें और उसका विश्लेषण कर सकें। ये रिपोर्ट लेखन, सामग्री निर्माण और ग्राहक सेवा जैसे कार्यों में सहायक हो सकते हैं।
- गैर-लाभकारी संगठनों के लिए डिजिटल परिपक्वता का अर्थ है अपने मिशन को अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना, जैसे कि धन उगाहना, स्वयंसेवकों का प्रबंधन करना, लाभार्थियों तक पहुंचना और पारदर्शिता बढ़ाना।
- AI को अपनाने से गैर-लाभकारी संगठनों को नियमित कार्यों को स्वचालित करने, डेटा का विश्लेषण करने, लक्षित संचार बनाने और संसाधनों का अधिक कुशलता से उपयोग करने में मदद मिल सकती है।
- डिजिटल उपकरणों और AI के उपयोग में डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है, खासकर संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को संभालने वाले संगठनों के लिए।
- ऑनलाइन एनालिटिक्स टूल गैर-लाभकारी संगठनों को अपनी डिजिटल गतिविधियों के प्रदर्शन को ट्रैक करने और सुधारने में मदद करते हैं, जिससे वे अपनी रणनीतियों को अनुकूलित कर सकें।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| गैर-लाभकारी संगठनों में डिजिटल परिपक्वता का निम्न स्तर | रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण किए गए अधिकांश गैर-लाभकारी संगठन डिजिटल परिपक्वता में 50% से भी कम अंक प्राप्त कर रहे हैं, जो उनके संचालन में प्रौद्योगिकी के सीमित एकीकरण को दर्शाता है। |
| AI अपनाने में पिछड़ापन | उच्च शिक्षित कर्मचारियों वाले संगठनों के विपरीत, गैर-लाभकारी संगठन AI उपकरणों को अपनी कार्यप्रणाली में एकीकृत करने में पीछे हैं, हालांकि बड़े भाषा मॉडल (LLMs) में कुछ रुचि दिखाई गई है। |
| निःशुल्क ऑनलाइन विज्ञापन अनुदान का अप्रयुक्त रहना | अधिकांश गैर-लाभकारी संगठन प्रति माह 10,000 डॉलर के निःशुल्क विज्ञापन अनुदान का लाभ नहीं उठा रहे हैं, जिससे लाखों डॉलर का विज्ञापन पैसा अप्रयुक्त पड़ा है। |
| संवेदनशील डेटा सुरक्षा का अभाव | लगभग एक-चौथाई गैर-लाभकारी संगठनों के पास AI उपकरणों द्वारा संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के प्रबंधन के लिए कोई सुरक्षा उपाय नहीं हैं। |
| ऑनलाइन एनालिटिक्स उपकरणों का सीमित उपयोग | केवल एक-चौथाई गैर-लाभकारी संगठन ऑनलाइन एनालिटिक्स उपकरणों का उपयोग करते हैं, जो निर्णय लेने और प्रभाव मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
महत्व
सामाजिक क्षेत्र पर प्रभाव
- गैर-लाभकारी संगठन (Non-profit organizations) समाज के कमजोर वर्गों की सहायता और विकास परियोजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डिजिटल उपकरणों को अपनाने में उनकी अक्षमता उनके संचालन की दक्षता, पहुंच और प्रभावशीलता को सीमित करती है।
- डिजिटल उपकरणों का सीमित उपयोग गैर-लाभकारी संगठनों को दाताओं, स्वयंसेवकों और लाभार्थियों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ने से रोक सकता है, जिससे उनके कार्यक्रमों के लिए समर्थन जुटाना मुश्किल हो जाता है।
- डेटा-संचालित निर्णय लेने और पारदर्शिता की कमी से संसाधनों का उप-इष्टतम उपयोग हो सकता है, जिससे सामाजिक प्रभाव कम हो सकता है।
शासन और पारदर्शिता
- डिजिटल उपकरणों को अपनाने से गैर-लाभकारी संगठनों के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है, जो दाताओं और हितधारकों के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।
- AI और एनालिटिक्स उपकरण गैर-लाभकारी संगठनों को अपने कार्यक्रमों के प्रभाव को मापने और रिपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं, जिससे बेहतर शासन और निधि के उपयोग में जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
आर्थिक और तकनीकी विकास
- भारत में AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने के बावजूद, गैर-लाभकारी क्षेत्र का पिछड़ापन देश के समग्र डिजिटल परिवर्तन लक्ष्यों में एक अंतर को उजागर करता है।
- डिजिटल साक्षरता और AI कौशल में वृद्धि से गैर-लाभकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है।
चुनौतियाँ
1. डिजिटल साक्षरता और कौशल की कमी
- गैर-लाभकारी संगठनों के कर्मचारियों के बीच डिजिटल उपकरणों और AI प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान का अभाव है।
- प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की कमी इस अंतर को बढ़ाती है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
2. वित्तीय बाधाएँ
- डिजिटल बुनियादी ढांचे, सॉफ्टवेयर और AI समाधानों में निवेश के लिए पर्याप्त धन की कमी।
- निःशुल्क उपलब्ध संसाधनों (जैसे विज्ञापन अनुदान) का लाभ उठाने के लिए जागरूकता और क्षमता का अभाव।
यूपीएससी लिंक: गैर-लाभकारी क्षेत्र का वित्तपोषण
3. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा चिंताएँ
- संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को संभालने वाले AI उपकरणों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपायों और नीतियों का अभाव।
- डेटा उल्लंघनों और दुरुपयोग के जोखिमों के बारे में जागरूकता की कमी।
यूपीएससी लिंक: साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण
4. तकनीकी एकीकरण और अनुकूलन
- मौजूदा कार्यप्रणाली में नई डिजिटल और AI प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने में चुनौतियाँ।
- संगठन-विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित समाधानों की कमी।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन, प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| डिजिटल परिपक्वता में पिछड़ापन | गैर-लाभकारी संगठनों के संचालन की दक्षता और प्रभावशीलता में कमी, जिससे उनके सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ति बाधित होती है। |
| AI अपनाने की धीमी गति | नियमित कार्यों को स्वचालित करने और निर्णय लेने में सुधार के लिए AI की क्षमता का अप्रयुक्त रहना, जिससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग नहीं हो पाता। |
| निःशुल्क विज्ञापन अनुदानों का उपयोग न करना | लाखों डॉलर के निःशुल्क विज्ञापन अवसरों का नुकसान, जिससे गैर-लाभकारी संगठन अपनी पहुंच और धन उगाहने के प्रयासों को बढ़ाने में विफल रहते हैं। |
| डेटा सुरक्षा उपायों का अभाव | संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग या उल्लंघनों का उच्च जोखिम, जिससे लाभार्थियों और दाताओं का विश्वास कम हो सकता है। |
| ऑनलाइन एनालिटिक्स उपकरणों का सीमित उपयोग | कार्यक्रम के प्रभाव का मूल्यांकन करने, रुझानों की पहचान करने और डेटा-संचालित निर्णय लेने की क्षमता में कमी। |
आगे की राह
- गैर-लाभकारी संगठनों के कर्मचारियों के लिए डिजिटल साक्षरता और AI कौशल विकास पर केंद्रित व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करना।
- डिजिटल बुनियादी ढांचे और AI समाधानों में निवेश के लिए विशेष अनुदान और वित्तीय सहायता तंत्र स्थापित करना।
- गैर-लाभकारी संगठनों को निःशुल्क ऑनलाइन विज्ञापन अनुदानों और अन्य डिजिटल संसाधनों का लाभ उठाने के बारे में शिक्षित और सहायता करना।
- AI उपकरणों का उपयोग करते समय संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए मजबूत डेटा गोपनीयता नीतियों और सुरक्षा उपायों को विकसित करने में सहायता प्रदान करना।
- गैर-लाभकारी संगठनों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप अनुकूलित डिजिटल और AI समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करना।
- डिजिटल परिवर्तन में सफल गैर-लाभकारी संगठनों के सर्वोत्तम अभ्यासों को साझा करने के लिए एक मंच स्थापित करना।
- सरकार, कॉर्पोरेट क्षेत्र और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि गैर-लाभकारी क्षेत्र के डिजिटल सशक्तिकरण का समर्थन किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
डिजिटल परिपक्वता · गैर-लाभकारी संगठन · कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) · डिजिटल विभाजन · क्षमता निर्माण · शासन और पारदर्शिता · सतत विकास लक्ष्य (SDGs) · सामाजिक प्रभाव · डिजिटल साक्षरता · तकनीकी एकीकरण
अवधारणा प्रवाह
डिजिटल विभाजन (Digital Divide) का अस्तित्व → गैर-लाभकारी संगठनों में डिजिटल परिपक्वता की कमी → AI और उन्नत उपकरणों को अपनाने में पिछड़ापन → परिचालन अक्षमता और सीमित पहुंच → सामाजिक प्रभाव में कमी और संसाधनों का अप्रयुक्त रहना → दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. भारत में गैर-लाभकारी संगठन (Non-profit organisations) डिजिटल परिपक्वता में पिछड़ रहे हैं।
2. ‘डिजिटल फॉर नॉनप्रॉफिट्स (D4NP)’ रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश गैर-लाभकारी संगठन AI उपकरणों के उपयोग में अग्रणी हैं।
3. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई गैर-लाभकारी संगठन मुफ्त ऑनलाइन विज्ञापन अनुदान का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि रिपोर्ट बताती है कि भारतीय गैर-लाभकारी संगठन डिजिटल परिपक्वता में पिछड़ रहे हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि रिपोर्ट बताती है कि गैर-लाभकारी संगठन AI अपनाने में पीछे हैं, हालांकि कुछ रुचि दिखा रहे हैं। कथन 3 सही है क्योंकि रिपोर्ट में मुफ्त ऑनलाइन विज्ञापन अनुदान का उपयोग न कर पाने का उल्लेख है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।
Q2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के संदर्भ में, ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल (Large Language Model – LLM)’ शब्द का सबसे अच्छा वर्णन क्या करता है?
- एक सॉफ्टवेयर जो केवल संख्यात्मक डेटा का विश्लेषण करता है।
- एक प्रकार का AI जो केवल छवियों को पहचानता है।
- एक AI मॉडल जो बड़ी मात्रा में पाठ्य डेटा पर प्रशिक्षित होता है और मानव जैसी भाषा को समझ व उत्पन्न कर सकता है।
- एक हार्डवेयर घटक जो AI गणनाओं को गति देता है।
उत्तर: एक AI मॉडल जो बड़ी मात्रा में पाठ्य डेटा पर प्रशिक्षित होता है और मानव जैसी भाषा को समझ व उत्पन्न कर सकता है। — लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) एक प्रकार का कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल है जिसे बड़े पैमाने पर पाठ्य डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वह मानव जैसी भाषा को समझ सके, उत्पन्न कर सके और विभिन्न भाषा-आधारित कार्यों को कर सके।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में गैर-लाभकारी संगठनों द्वारा डिजिटल प्रौद्योगिकियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को अपनाने में आने वाली चुनौतियों का परीक्षण करें। इन चुनौतियों का समाधान करने और उनके सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) की भूमिका और डिजिटल परिवर्तन की वर्तमान स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख। ‘डिजिटल फॉर नॉनप्रॉफिट्स (D4NP)’ जैसी हालिया रिपोर्टों का संदर्भ दें जो डिजिटल परिपक्वता में कमी को उजागर करती हैं।
2. चुनौतियों का परीक्षण:
a. डिजिटल साक्षरता और क्षमता की कमी: कर्मचारियों में तकनीकी कौशल का अभाव।
b. वित्तीय बाधाएँ: डिजिटल उपकरण, सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षण में निवेश के लिए धन की कमी।
c. बुनियादी ढाँचे का अभाव: दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी पहुँच की समस्या।
d. AI अपनाने में झिझक: AI के लाभों और उपयोगिता के बारे में जागरूकता की कमी, डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।
e. शासन और डेटा प्रबंधन: संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को संभालने के लिए AI उपकरणों में सुरक्षा उपायों का अभाव।
f. मुफ्त संसाधनों का उपयोग न कर पाना: जैसे ऑनलाइन विज्ञापन अनुदान का लाभ न उठाना।
3. समाधान और उपाय:
a. क्षमता निर्माण कार्यक्रम: NPOs के कर्मचारियों के लिए डिजिटल साक्षरता और AI उपकरणों के उपयोग पर लक्षित प्रशिक्षण।
b. वित्तीय सहायता: सरकार, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा डिजिटल परिवर्तन के लिए विशेष अनुदान।
c. सहयोगी मंच: NPOs, प्रौद्योगिकी कंपनियों और शिक्षाविदों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना ताकि ज्ञान और संसाधनों को साझा किया जा सके।
d. AI नैतिकता और शासन: AI उपकरणों के सुरक्षित और नैतिक उपयोग के लिए दिशानिर्देश विकसित करना, विशेषकर डेटा गोपनीयता के संबंध में।
e. जागरूकता अभियान: AI की क्षमता और NPOs के कार्यों को सुव्यवस्थित करने में इसके लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
f. सरकारी नीतियाँ: डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने वाली नीतियों का निर्माण और NPOs के लिए डिजिटल बुनियादी ढाँचे तक पहुँच को आसान बनाना।
4. निष्कर्ष: डिजिटल प्रौद्योगिकियों और AI को अपनाने से NPOs की दक्षता, पारदर्शिता और सामाजिक प्रभाव में कैसे वृद्धि हो सकती है, इस पर बल दें, जिससे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में मदद मिलेगी।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
Related guides on our sites
- Best economics services coaching
- Anthropology VS PSIR
- Best PSIR optional coaching
- Best PSIR optional coaching online
- यूपी में हाइब्रिड सोलर सिस्टम: पीएम सूर्यघर योजना में बिजली कटौती से मुक्ति का विकल्प - September 26, 2026
- UPSC Alert: Hybrid Solar Systems in PM Surya Ghar Scheme for Power Backup - September 26, 2026
- गैर-लाभकारी संगठनों में डिजिटल परिपक्वता और एआई अपनाने में कमी: रिपोर्ट 2026 - September 26, 2026

No Comments