02 Oct गोबरधन योजना: सीबीजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पहल
✎ गोबरधन योजना भारत में संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: गोबरधन योजना, संपीड़ित बायोगैस (CBG), जैव-ऊर्जा, अपशिष्ट से संपदा, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, चक्रीय अर्थव्यवस्था
- Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि में जैव-ऊर्जा की भूमिका, अपशिष्ट प्रबंधन और आर्थिक विकास के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: गोबरधन योजना भारत में संपीड़ित बायोगैस (CBG) उत्पादन को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए एक व्यापक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने संपीड़ित बायोगैस (CBG) क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए एक एकीकृत केंद्रीय क्षेत्र योजना ‘गोबरधन’ का शुभारंभ किया। इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹23,731 करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया है और यह वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक 10-वर्षों की रूपरेखा प्रदान करती है। इस अवसर पर गोबरधन पुस्तिका और एकीकृत गोबरधन पोर्टल का भी विमोचन किया गया, जिसका उद्देश्य घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाना है।
पृष्ठभूमि
- भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है।
- देश में फसल अवशेषों, पशुओं के गोबर और अन्य जैविक कचरे की प्रचुर उपलब्धता है, जिसे स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।
- CBG उत्पादन से ग्रामीण क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसर पैदा होते हैं और जैविक खाद का उत्पादन होता है, जो कृषि के लिए लाभकारी है।
- पूर्व में, CBG क्षेत्र को अस्थिर राजस्व, बिखरी हुई सहायता, दीर्घकालिक नीतिगत स्पष्टता की कमी, फीडस्टॉक की सुनिश्चित उपलब्धता और वित्त तक पहुंच जैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा है।
- प्रधानमंत्री का ‘अपशिष्ट से संपदा’ (Waste to Wealth) और ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ का विजन देश में जैविक कचरे के उपयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता के संयुक्त उद्देश्यों के माध्यम से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
गोबरधन योजना क्या है?
- गोबरधन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना भारत में संपीड़ित बायोगैस (CBG) क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है।
- इसका उद्देश्य घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाकर लगभग 5 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर प्रति दिन (MMSCMD) तक करना है।
- यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक 10-वर्षों की अवधि के लिए ₹23,731 करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित की गई है।
- योजना के तहत सुनिश्चित खरीद, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, ऋण सहायता और पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को एक एकीकृत ढाँचे के अंतर्गत लाया गया है।
- एक एकीकृत गोबरधन पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, जो आवेदनों की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है।
- यह योजना किसानों, सहकारी समितियों, गौशालाओं और स्थानीय उद्यमियों को फीडस्टॉक के संग्रह, एकत्रीकरण, परिवहन और प्रसंस्करण जैसी विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- इसका लक्ष्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना, ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देना और ‘अपशिष्ट से संपदा’ तथा ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ के विजन को साकार करना है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| ₹23,731 करोड़ का परिव्यय | यह योजना भारत में संपीड़ित बायोगैस (CBG) क्षेत्र के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। |
| 10-वर्षीय रूपरेखा (वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36) | यह निवेशकों और ऋणदाताओं को दीर्घकालिक निश्चितता प्रदान करता है, जिससे क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। |
| घरेलू CBG उत्पादन में 10 गुना वृद्धि का लक्ष्य (लगभग 5 MMScMD तक) | यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा। |
| एकीकृत केंद्रीय क्षेत्र योजना | यह सुनिश्चित खरीद, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और ऋण सहायता जैसे विभिन्न घटकों को एक साथ लाता है। |
| एकीकृत गोबरधन पोर्टल | यह आवेदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और योजना के कार्यान्वयन में दक्षता लाता है। |
| पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय नोडल मंत्रालय | यह योजना के प्रभावी समन्वय और कार्यान्वयन के लिए एक केंद्रीकृत प्राधिकरण प्रदान करता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसर पैदा करती है, जैसे कि फीडस्टॉक (कच्चा माल) के संग्रह, एकत्रीकरण, परिवहन और प्रसंस्करण में किसानों, सहकारी समितियों और स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी।
- घरेलू CBG उत्पादन में वृद्धि से प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- जैविक खाद का उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करेगा।
पर्यावरणीय महत्व
- फसल अवशेषों, पशुओं के गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित करके, यह योजना अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करती है और प्रदूषण को कम करती है।
- जीवाश्म ईंधन के स्थान पर CBG का उपयोग ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में योगदान मिलेगा।
सामाजिक महत्व
- यह योजना ‘अपशिष्ट से संपदा’ (Waste to Wealth) और ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ (Food Provider to Energy Provider) के विजन को बढ़ावा देती है, जिससे किसानों और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाया जाता है।
- स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता ग्रामीण घरों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करेगी और खाना पकाने के लिए पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करेगी।
रणनीतिक महत्व
- यह योजना भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को उपलब्धता, सामर्थ्य और स्थिरता के उद्देश्यों के माध्यम से पूरा करने में सहायक है।
- यह देश में उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों के अधिक-से-अधिक विकास पर जोर देती है, जिससे ऊर्जा मिश्रण में विविधता आती है।
चुनौतियाँ
1. अस्थिर राजस्व
- CBG परियोजनाओं के लिए राजस्व की अस्थिरता निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाती है, जिससे निवेश आकर्षित करना मुश्किल हो जाता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: निवेश मॉडल
2. बिखरी हुई सहायता
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से मिलने वाली सहायता का बिखरा हुआ स्वरूप परियोजना डेवलपर्स के लिए भ्रम पैदा करता है और प्रक्रिया को जटिल बनाता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: नीति कार्यान्वयन
3. दीर्घकालिक नीतिगत स्पष्टता का अभाव
- नीतिगत अनिश्चितता निवेशकों को दीर्घकालिक प्रतिबद्धताएं करने से रोकती है, जिससे क्षेत्र का स्थायी विकास बाधित होता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: औद्योगिक नीति
4. फीडस्टॉक की सुनिश्चित उपलब्धता
- CBG संयंत्रों के लिए फसल अवशेषों, पशुओं के गोबर जैसे कच्चे माल की निरंतर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: कृषि: कृषि अपशिष्ट प्रबंधन
5. जैविक खाद की खरीद
- CBG उत्पादन के उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त जैविक खाद के लिए एक सुनिश्चित बाजार और खरीद तंत्र का अभाव है।
यूपीएससी लिंक: कृषि: उर्वरक नीति
6. वित्त तक पहुंच
- CBG परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक पूंजी निवेश अधिक होता है, और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करना एक बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| राजस्व की अस्थिरता | निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ाना, निवेश आकर्षित करने में बाधा। |
| सहायता का बिखरा हुआ स्वरूप | परियोजना डेवलपर्स के लिए जटिलता और भ्रम। |
| दीर्घकालिक नीतिगत अनिश्चितता | स्थायी विकास में बाधा, निवेशकों की अनिच्छा। |
| फीडस्टॉक की उपलब्धता | कच्चे माल की निरंतर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना। |
| जैविक खाद का विपणन | उप-उत्पाद के लिए सुनिश्चित बाजार और खरीद तंत्र का अभाव। |
| वित्तपोषण तक पहुंच | उच्च प्रारंभिक पूंजी और ऋण प्राप्त करने में कठिनाई। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- गोबरधन योजना
आगे की राह
- राज्य सरकारों को जमीनी स्तर पर परियोजनाओं को लागू करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और स्थानीय स्तर पर फीडस्टॉक संग्रह तथा जैविक खाद के विपणन के लिए तंत्र विकसित करना चाहिए।
- वित्तीय संस्थानों को CBG परियोजनाओं के लिए विशेष ऋण उत्पाद और रियायती वित्तपोषण विकल्प प्रदान करने चाहिए ताकि पूंजी तक पहुंच आसान हो सके।
- CBG के लिए एक मजबूत मांग सुनिश्चित करने हेतु तेल और गैस कंपनियों तथा सिटी गैस वितरण संस्थाओं के साथ दीर्घकालिक खरीद समझौतों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- CBG उत्पादन के उप-उत्पाद, जैविक खाद के लिए एक प्रभावी विपणन और वितरण नेटवर्क स्थापित किया जाना चाहिए, जिसमें किसानों को इसके उपयोग के लाभों के बारे में शिक्षित किया जाए।
- प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को CBG उत्पादन प्रक्रियाओं की दक्षता और लागत-प्रभावशीलता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना चाहिए।
- CBG क्षेत्र में कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि कुशल जनशक्ति की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
- योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए एकीकृत गोबरधन पोर्टल का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
संपीड़ित बायोगैस (CBG) · गोबरधन योजना · अपशिष्ट से संपदा · चक्रीय अर्थव्यवस्था · ऊर्जा सुरक्षा · ग्रामीण अर्थव्यवस्था · जैविक खाद · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · नवीकरणीय ऊर्जा · जलवायु परिवर्तन
अवधारणा प्रवाह
जैविक अपशिष्ट (फसल अवशेष, गोबर) का संग्रहण → अपशिष्ट का CBG संयंत्रों में प्रसंस्करण → संपीड़ित बायोगैस (CBG) का उत्पादन → CBG का ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग → जैविक खाद का उप-उत्पाद के रूप में उत्पादन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. गोबरधन योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना केवल पशुओं के गोबर से संपीड़ित बायोगैस (CBG) के उत्पादन पर केंद्रित है।
2. योजना का उद्देश्य घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाना है।
3. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस योजना के लिए एकमात्र नोडल मंत्रालय है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है क्योंकि गोबरधन योजना फसल के अवशेषों, पशुओं के गोबर और अन्य जैविक संसाधनों से CBG उत्पादन पर केंद्रित है। कथन 2 सही है, योजना का लक्ष्य घरेलू CBG उत्पादन को लगभग 5 एमएमएससीएमडी तक बढ़ाना है, जो वर्तमान स्तर से लगभग 10 गुना अधिक है। कथन 3 सही है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस योजना के लिए एकमात्र नोडल मंत्रालय बनाया गया है।
Q2. संपीड़ित बायोगैस (CBG) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. CBG का उत्पादन केवल औद्योगिक अपशिष्टों से किया जा सकता है।
2. CBG, प्राकृतिक गैस के समान गुणों वाली नवीकरणीय ऊर्जा है।
3. CBG उत्पादन से जैविक खाद भी प्राप्त होती है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है क्योंकि CBG का उत्पादन फसल के अवशेषों, पशुओं के गोबर और अन्य जैविक संसाधनों सहित विभिन्न जैविक अपशिष्टों से किया जा सकता है। कथन 2 सही है, CBG में प्राकृतिक गैस के समान गुण होते हैं और इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में उपयोग किया जा सकता है। कथन 3 सही है, CBG उत्पादन प्रक्रिया के सह-उत्पाद के रूप में जैविक खाद प्राप्त होती है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में ऊर्जा सुरक्षा और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने में संपीड़ित बायोगैस (CBG) क्षेत्र की क्षमता का परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, गोबरधन योजना के प्रमुख प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: उत्तर में संपीड़ित बायोगैस (CBG) की अवधारणा, इसके उत्पादन के स्रोत और भारत के लिए इसके महत्व को स्पष्ट करें। ऊर्जा सुरक्षा (आयात निर्भरता में कमी) और ग्रामीण समृद्धि (किसानों की आय, रोजगार सृजन, जैविक खाद) के संदर्भ में इसकी क्षमता का विश्लेषण करें। गोबरधन योजना के प्रमुख प्रावधानों (₹23,731 करोड़ का परिव्यय, 10-वर्षीय रूपरेखा, सुनिश्चित खरीद, स्थिर मूल्य निर्धारण, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी, ऋण सहायता, एकीकृत पोर्टल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य) का उल्लेख करें। अंत में, ‘अपशिष्ट से संपदा’ और ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ जैसे विजन को साकार करने में योजना के संभावित प्रभावों और चुनौतियों पर संक्षिप्त चर्चा करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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