30 Sep ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर-III: बीईएसएस सहित इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन प्रणाली को मजबूत करेगी सरकार
✎ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना का उद्देश्य बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करके भारत की नवीकरणीय ऊर्जा पारेषण क्षमता को बढ़ाना और 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, ऊर्जा | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन
- Prelims: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS), नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy), इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS), केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA), गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता
- Essay: भारत में ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास: चुनौतियाँ और अवसर, जलवायु परिवर्तन से निपटने में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना का उद्देश्य बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के साथ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करके भारत की नवीकरणीय ऊर्जा पारेषण क्षमता को बढ़ाना और 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करना है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के साथ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) के विकास के लिए ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III’ (GEC-III) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट (GW) तक की नवीकरणीय ऊर्जा को स्थानांतरित करने के लिए भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करना है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
पृष्ठभूमि
- भारत ने 2030 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और उसके कुशल पारेषण (Transmission) की आवश्यकता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, विशेषकर सौर और पवन ऊर्जा, की रुक-रुक कर उपलब्धता ग्रिड स्थिरता के लिए एक चुनौती है, जिसके समाधान हेतु ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (Energy Storage Systems) की आवश्यकता होती है।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा समृद्ध क्षेत्रों से बिजली की निकासी और उसे पारंपरिक ग्रिड में एकीकृत करने के लिए आवश्यक पारेषण अवसंरचना का निर्माण करना है।
- GEC चरण-I और चरण-II पहले ही लागू किए जा चुके हैं, जिन्होंने देश में नवीकरणीय ऊर्जा के पारेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- भारत ने 2035 तक 900 गीगावाट स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया है, जिसमें GEC-III जैसी योजनाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना क्या है?
- यह योजना भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को मजबूत करने पर केंद्रित है ताकि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर 135 GW तक की नवीकरणीय ऊर्जा को प्रभावी ढंग से स्थानांतरित किया जा सके।
- योजना में 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्थापना का प्रावधान है, जो ग्रिड की लचीलेपन को बढ़ाएगा और नवीकरणीय ऊर्जा की रुक-रुक कर होने वाली आपूर्ति, भीड़भाड़ और पीक-ऑवर में कटौती जैसी समस्याओं का समाधान करेगा।
- इसकी कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपये है, जिसमें 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) शामिल है, जो बिजली की लागत को नियंत्रित करने में मदद करेगी।
- योजना के तहत सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाएँ टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएंगी, जबकि ब्राउनफील्ड उन्नयन और नेटवर्क सुदृढ़ीकरण कार्य कॉस्ट प्लस बेसिस (CPB) पर किए जाएंगे।
- राज्य पारेषण उपयोगिताएँ (State Transmission Utilities) समग्र कार्यान्वयन एजेंसी होंगी, और पारेषण सेवा प्रदाता (TSP) बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन (BOOM) मॉडल पर TBCB के तहत भाग लेंगे।
- यह योजना वित्तीय वर्ष 2032-33 तक स्थापित किए जाने का लक्ष्य रखती है और 2035 तक 900 GW स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।
- इससे ऊर्जा क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, साथ ही घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा का संचरण | राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर नवीकरणीय ऊर्जा के कुशल हस्तांतरण को सुनिश्चित करेगा। |
| 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्थापना | ग्रिड लचीलेपन को बढ़ाएगा, रुक-रुक कर होने वाली आपूर्ति, भीड़भाड़ और पीक-ऑवर की कमी जैसी समस्याओं का समाधान करेगा। |
| कुल परियोजना लागत 1,86,405 करोड़ रुपये | भारत के ऊर्जा अवसंरचना में महत्वपूर्ण निवेश, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगा। |
| 54,082 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) | इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क को कम करेगा, जिससे बिजली की लागत नियंत्रण में रहेगी और अंतिम उपभोक्ताओं को लाभ होगा। |
| 2035 तक 900 GW गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य | भारत के महत्वाकांक्षी स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- यह योजना ऊर्जा क्षेत्र, विनिर्माण और निर्माण उद्योगों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
- बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के निर्माण और उपयोग से घरेलू ऊर्जा भंडारण उद्योग में अतिरिक्त रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
- केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन शुल्क को कम करने में मदद करेगी, जिससे बिजली की लागत नियंत्रण में रहेगी और अंततः अंतिम उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
पर्यावरणीय महत्व
- यह योजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देगी और कार्बन फुटप्रिंट को कम करके पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देगी।
- नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी।
रणनीतिक महत्व
- यह भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को मजबूत करेगा, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 135 GW तक की नवीकरणीय ऊर्जा को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना संभव हो सकेगा।
- ग्रिड लचीलेपन को सुनिश्चित करने, रुक-रुक कर होने वाली आपूर्ति, भीड़भाड़, पीक-ऑवर में कटौती जैसी समस्याओं से निपटने और सौर ऊर्जा उपलब्ध न होने के समय में मांग को पूरा करने के लिए BESS की स्थापना महत्वपूर्ण है।
- यह योजना 2035 तक 900 GW स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी, जो भारत की वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
चुनौतियाँ
1. भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय मंजूरी
- ट्रांसमिशन लाइनों और BESS सुविधाओं के लिए भूमि अधिग्रहण एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया हो सकती है।
- परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और संबंधित मंजूरियों में देरी से कार्यान्वयन प्रभावित हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी
2. वित्तीय व्यवहार्यता और निवेश
- परियोजना की कुल लागत 1,86,405 करोड़ रुपये है, जिसके लिए पर्याप्त और समय पर वित्तपोषण सुनिश्चित करना एक चुनौती हो सकती है।
- निजी निवेश को आकर्षित करने और जोखिमों को कम करने के लिए अनुकूल नीतिगत ढाँचे की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था और विकास
3. प्रौद्योगिकी एकीकरण और ग्रिड स्थिरता
- बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा और BESS को मौजूदा ग्रिड में एकीकृत करने के लिए उन्नत ग्रिड प्रबंधन तकनीकों और बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होगी।
- नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनशीलता के कारण ग्रिड स्थिरता बनाए रखना एक तकनीकी चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान और प्रौद्योगिकी
4. अंतर-राज्य समन्वय
- चूंकि यह योजना राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करती है, विभिन्न राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग आवश्यक होगा।
- विभिन्न राज्यों की नियामक और नीतिगत ढाँचे में भिन्नताएँ कार्यान्वयन में बाधाएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | विस्तृत ट्रांसमिशन नेटवर्क और BESS साइटों के लिए भूमि की उपलब्धता और अधिग्रहण में देरी। |
| वित्तीय जोखिम | परियोजना की विशाल लागत और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए आकर्षक रिटर्न सुनिश्चित करना। |
| तकनीकी एकीकरण | बड़ी मात्रा में नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में एकीकृत करने और ग्रिड स्थिरता बनाए रखने की जटिलताएँ। |
| नियामक बाधाएँ | विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियामक ढाँचे और नीतियों के कारण कार्यान्वयन में संभावित बाधाएँ। |
| कौशल विकास | BESS और उन्नत ग्रिड प्रबंधन प्रणालियों के संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल की उपलब्धता। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना
आगे की राह
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और पर्यावरणीय मंजूरियों में तेजी लाने के लिए एक केंद्रीकृत और समयबद्ध तंत्र स्थापित करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा और BESS परियोजनाओं में निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अनुकूल नीतिगत ढाँचे, प्रोत्साहन और जोखिम-साझाकरण तंत्र विकसित करना।
- उन्नत ग्रिड प्रबंधन प्रौद्योगिकियों और स्मार्ट ग्रिड समाधानों में निवेश करना ताकि नवीकरणीय ऊर्जा के उच्च प्रवेश के साथ ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच प्रभावी समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देना ताकि इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं का सुचारु कार्यान्वयन हो सके।
- BESS निर्माण, संचालन और ग्रिड प्रबंधन के लिए आवश्यक कौशल विकास कार्यक्रमों और प्रशिक्षण पहलों में निवेश करना।
- घरेलू BESS विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित करना तथा स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना।
- परियोजना के कार्यान्वयन की नियमित निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करना ताकि किसी भी बाधा को समय पर पहचाना और संबोधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III · बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) · नवीकरणीय ऊर्जा · इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) · ऊर्जा सुरक्षा · कार्बन फुटप्रिंट · ग्रिड एकीकरण · केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) · गैर-जीवाश्म क्षमता · टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 282’, ‘note’: ‘संघ या राज्य द्वारा किए गए व्यय’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘विद्युत समवर्ती सूची का विषय’}
अवधारणा प्रवाह
नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि → नवीकरणीय ऊर्जा के संचरण की आवश्यकता → इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) का सुदृढ़ीकरण → बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का एकीकरण → ग्रिड लचीलापन और स्थिरता में सुधार → ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन फुटप्रिंट में कमी
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना का लक्ष्य 2035 तक 900 GW स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता प्राप्त करना है।
2. इस योजना में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्थापना का प्रावधान है, जो ग्रिड की लचीलेपन को बढ़ाएगा।
3. इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) के तहत आने वाली सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाएं कॉस्ट प्लस बेसिस (CPB) माध्यम से क्रियान्वित की जाएंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना का लक्ष्य 2035 तक 900 GW स्थापित गैर-जीवाश्म क्षमता प्राप्त करना है। कथन 2 सही है। योजना में 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्थापना का प्रावधान है, जो ग्रिड की लचीलेपन को सुनिश्चित करेगा। कथन 3 गलत है। InSTS कंपोनेंट के अंतर्गत आने वाली सभी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा, जबकि ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन और नेटवर्क मजबूत करने के कार्य कॉस्ट प्लस बेसिस (CPB) के तहत निष्पादित किए जाएंगे।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना का/के मुख्य उद्देश्य है/हैं?
1. राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 135 GW तक की नवीकरणीय ऊर्जा का संचरण संभव बनाना।
2. ग्रिड की लचीलेपन को सुनिश्चित करने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित करना।
3. इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज को कम करने के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी उद्देश्य ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना के मुख्य उद्देश्य हैं। यह योजना राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 135 GW तक की नवीकरणीय ऊर्जा को आगे बढ़ाने में मदद के लिए भारत की इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को मजबूत करेगी। इसमें 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्थापना का प्रावधान भी है। साथ ही, केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) से इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन चार्ज को कम करने में मदद मिलेगी।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना के महत्व का मूल्यांकन कीजिए। यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में किस प्रकार सहायक होगी? (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर चरण-III योजना का संक्षिप्त परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य।
महत्व: इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को मजबूत करने, 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा के संचरण, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्थापना और ग्रिड लचीलेपन में वृद्धि पर प्रकाश डालें।
ऊर्जा सुरक्षा में सहायता: गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य (2035 तक 900 GW) की प्राप्ति, ऊर्जा मिश्रण में विविधता, आयात पर निर्भरता में कमी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान।
पर्यावरणीय स्थिरता में सहायता: कार्बन फुटप्रिंट में कमी, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा, जलवायु परिवर्तन शमन और पर्यावरण के अनुकूल विकास।
कार्यान्वयन तंत्र: केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) की भूमिका, टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) और कॉस्ट प्लस बेसिस (CPB) मॉडल का उल्लेख।
निष्कर्ष: भारत के सतत विकास लक्ष्यों और वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में योजना की समग्र भूमिका का सारांश।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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