जगत प्रकाश नड्डा ने ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ में सीईओ गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की

केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 'इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026' में सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन की अध्यक्षता की — concept mind map

जगत प्रकाश नड्डा ने ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ में सीईओ गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की

मेडटेक विकास प्रक्रियानवाचारनई तकनीकनिवेशवित्तीय प्रवाहउत्पादनघरेलू विनिर्माणउपलब्धतासुलभ उपकरणUHCस्वास्थ्य कवरेजपरिणामआर्थिक वृद्धि
मेडटेक विकास प्रक्रिया

✎ भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र नवाचार, घरेलू विनिर्माण और साक्ष्य-आधारित नीतियों के माध्यम से यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — स्वास्थ्य, मानव संसाधन, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव
  • Prelims: इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026, मेडटेक सेक्टर, फार्मास्युटिकल्स विभाग, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA), यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC), घरेलू विनिर्माण
  • Essay: भारत में स्वास्थ्य सेवा का भविष्य: नवाचार, सामर्थ्य और पहुँच, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र की भूमिका

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र नवाचार, घरेलू विनिर्माण और साक्ष्य-आधारित नीतियों के माध्यम से यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

केंद्रीय रसायन और उर्वरक तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ के दूसरे दिन सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन का आयोजन फार्मास्युटिकल्स विभाग और फिक्की (FICCI) के सहयोग से किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के मेडटेक (MedTech) सेक्टर के भविष्य पर चर्चा करना, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देना तथा घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना था। इस दौरान यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) की राह में अभिनव उपचारों के लिए प्रतिपूर्ति (reimbursement) के तरीकों पर भी गहन चर्चा हुई।

पृष्ठभूमि

  • भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है और देश को ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में जाना जाता है।
  • सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।
  • कोविड-19 महामारी ने स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना और चिकित्सा उपकरणों के महत्व को उजागर किया, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार की आवश्यकता बढ़ी।
  • स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (Health Technology Assessment – HTA) प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि साक्ष्य-आधारित निर्णय लिए जा सकें और नई तकनीकों को अपनाने में मदद मिल सके।
  • यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (Universal Health Coverage – UHC) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किफायती, सुलभ और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा समाधानों की आवश्यकता है।
  • चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने और भारतीय कंपनियों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

भारत का चिकित्सा उपकरण (मेडटेक) क्षेत्र क्या है?

  • भारत का चिकित्सा उपकरण (मेडटेक) क्षेत्र निदान, उपचार, निगरानी और रोग की रोकथाम के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरणों, उपकरणों, प्रत्यारोपणों और अन्य संबंधित उत्पादों के डिजाइन, विकास, निर्माण और वितरण से संबंधित है।
  • यह क्षेत्र फार्मास्युटिकल्स विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के दायरे में आता है, जो इसकी नीतियों और विनियमों को नियंत्रित करता है।
  • भारत में मेडटेक क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि यह 2025 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो इसे दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में से एक बनाता है।
  • इस क्षेत्र में घरेलू और वैश्विक दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं, जिनमें बहुराष्ट्रीय निगम (MNCs) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) शामिल हैं।
  • सरकार ‘मेडिकल डिवाइस पार्क’ जैसी पहल के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है और ‘उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production Linked Incentive – PLI) योजना’ के तहत सहायता प्रदान कर रही है।
  • इस क्षेत्र को नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और कुशल कार्यबल की आवश्यकता है ताकि वैश्विक मानकों को पूरा किया जा सके और निर्यात क्षमता बढ़ाई जा सके।
  • स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA) और प्रतिपूर्ति नीतियां इस क्षेत्र में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनकी पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • नियामक (regulatory) ढांचे को सुव्यवस्थित करना और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना मेडटेक क्षेत्र के सतत विकास के लिए आवश्यक है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन भारत के मेडटेक (MedTech) सेक्टर के भविष्य पर चर्चा हेतु नीति-निर्माताओं और उद्योग लीडर्स को एक मंच पर लाना।
घरेलू विनिर्माण क्षमताओं में वृद्धि मेडिकल उपकरणों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना।
नवाचार और निवेश को बढ़ावा मेडिकल डिवाइस इकोसिस्टम को मजबूत करना और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करना।
वैश्विक पहुंच का विस्तार भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाना।
सबूत-आधारित निर्णय प्रक्रिया मेडिकल इनोवेशन के मूल्यांकन, प्रतिपूर्ति और खरीद में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।
यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) की राह किफायती, सुलभ और टिकाऊ स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में अभिनव थेरेपी की भूमिका को समझना।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने से आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
  • मेडटेक क्षेत्र में नवाचार और निवेश से रोजगार सृजन होगा तथा आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
  • भारतीय कंपनियों की वैश्विक पहुंच बढ़ने से निर्यात में वृद्धि होगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवा महत्व

  • किफायती और सुलभ मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता से यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (Universal Health Coverage) के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • नवीन थेरेपी और प्रौद्योगिकियों को अपनाने से मरीजों के लिए बेहतर नैदानिक और उपचार परिणाम सुनिश्चित होंगे।
  • सबूत-आधारित निर्णय लेने से स्वास्थ्य सेवा संसाधनों का कुशल उपयोग होगा और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित होगी।

रणनीतिक महत्व

  • मेडिकल उपकरणों में आत्मनिर्भरता से स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Security) बढ़ेगी, विशेष रूप से संकट के समय।
  • मेडटेक क्षेत्र में नवाचार भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख विनिर्माण और अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership) के माध्यम से क्षेत्र का विकास देश की समग्र विकास रणनीति का हिस्सा है।

चुनौतियाँ

1. नियामक चुनौतियाँ

  • मेडिकल उपकरणों के लिए एक सुसंगत और कुशल नियामक फ्रेमवर्क (Regulatory Framework) का अभाव।
  • नई प्रौद्योगिकियों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में लगने वाला समय और जटिलता।

2. अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश

  • मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए अपर्याप्त निवेश।
  • नवाचार को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन और बुनियादी ढांचे की कमी।

3. घरेलू विनिर्माण क्षमता

  • उच्च गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरणों के घरेलू विनिर्माण के लिए आवश्यक कौशल और प्रौद्योगिकी का अभाव।
  • छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए वित्तपोषण और बाजार पहुंच की चुनौतियाँ।

4. प्रतिपूर्ति और खरीद

  • अभिनव मेडिकल प्रौद्योगिकियों के लिए प्रतिपूर्ति (Reimbursement) तंत्र की कमी या अपर्याप्तता।
  • सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता की कमी।

5. कौशल विकास

  • मेडटेक क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) की कमी।
  • प्रशिक्षण और शिक्षा के अवसरों का अभाव।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
नियामक ढाँचा जटिल और धीमा अनुमोदन, नवाचार में बाधा।
अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश कम निवेश, स्वदेशी नवाचार की कमी।
घरेलू विनिर्माण गुणवत्ता, लागत और पैमाने पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने में कठिनाई।
प्रतिपूर्ति तंत्र अभिनव प्रौद्योगिकियों तक पहुंच और वित्तीय स्थिरता के बीच असंतुलन।
कौशल और प्रशिक्षण मेडटेक क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ कार्यबल की कमी।
डेटा और साक्ष्य सबूत-आधारित निर्णय लेने के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले क्लिनिकल डेटा का अभाव।

आगे की राह

  • मेडिकल उपकरणों के लिए एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी नियामक ढाँचा (Regulatory Framework) स्थापित करना, जिसमें नई प्रौद्योगिकियों के लिए त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया शामिल हो।
  • मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना, साथ ही कर प्रोत्साहन और अनुदान प्रदान करना।
  • घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को मजबूत करना, जिसमें एमएसएमई (MSMEs) को विशेष सहायता प्रदान की जाए।
  • अभिनव मेडिकल प्रौद्योगिकियों के लिए एक टिकाऊ प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रणाली विकसित करना, जो पहुंच, सामर्थ्य और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखे।
  • मेडटेक क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम और कौशल विकास पहल शुरू करना।
  • स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (Health Technology Assessment – HTA) प्रक्रियाओं को मजबूत करना और सबूत-आधारित निर्णय लेने के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले क्लिनिकल साक्ष्य के संग्रह को प्रोत्साहित करना।
  • उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देना ताकि नवाचार को बढ़ावा मिले और एक मजबूत मेडटेक इकोसिस्टम का निर्माण हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

मेडिकल डिवाइस क्षेत्र · घरेलू विनिर्माण · नवाचार और निवेश · सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) · स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA) · पुनर्भुगतान प्रणाली · सबूत-आधारित निर्णय · आत्मनिर्भर भारत

अवधारणा प्रवाह

सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन का आयोजन  →  मेडटेक क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा  →  घरेलू विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा  →  किफायती और सुलभ मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता  →  यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) के लक्ष्य की प्राप्ति  →  स्वास्थ्य परिणामों में सुधार और आर्थिक संवृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ सम्मेलन का आयोजन रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग ने फिक्की (FICCI) के सहयोग से किया था।
2. स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नई मेडिकल टेक्नोलॉजी अपनी नैदानिक ​​मूल्य साबित करें और मरीजों के बेहतर परिणामों में सार्थक योगदान दें।
3. भारत में इनोवेटिव मेडिकल टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए केवल भरोसेमंद नैदानिक ​​सबूत ही पर्याप्त हैं।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ का आयोजन रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल्स विभाग ने फिक्की के सहयोग से किया था। कथन 2 सही है। डॉ. राजीव बहल ने इस बात पर बल दिया कि सबूत-आधारित तरीके बहुत ज़रूरी हैं ताकि इनोवेटिव टेक्नोलॉजी अपनी नैदानिक ​​मूल्य साबित करें और मरीज़ों के बेहतर नतीजों में सार्थक योगदान दें। कथन 3 गलत है। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत में इनोवेटिव मेडिकल टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए भरोसेमंद नैदानिक ​​सबूत, पारदर्शी एचटीए प्रक्रियाएं, सही कीमत, टिकाऊ पुनर्भुगतान प्रणाली, डॉक्टरों की ज़्यादा भागीदारी और मज़बूत प्रशिक्षण प्रणाली की ज़रूरत होगी, केवल नैदानिक ​​सबूत ही पर्याप्त नहीं हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026’ के सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन के मुख्य फोकस को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?

  1. भारत के मेडटेक सेक्टर में विदेशी निवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित करना।
  2. घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना।
  3. केवल सरकारी अस्पतालों में मेडिकल डिवाइस की खरीद को बढ़ावा देना।
  4. मेडिकल डिवाइस के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।

उत्तर: घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाना। — सीईओ राउंडटेबल सम्मेलन ने भारत के मेडिकल डिवाइस इकोसिस्टम को मजबूत करने, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और भारतीय मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने हेतु अनुकूल माहौल तैयार करने पर उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए मंच प्रदान किया। अन्य विकल्प सम्मेलन के उद्देश्यों को सही ढंग से नहीं दर्शाते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत के मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का परीक्षण कीजिए। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) प्राप्त करने में यह क्षेत्र किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है? (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** भारत के मेडिकल डिवाइस क्षेत्र का संक्षिप्त परिचय और इसके महत्व पर प्रकाश।
2. **घरेलू विनिर्माण और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कदम:**
* **उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना:** मेडिकल डिवाइस के लिए पीएलआई योजना का उल्लेख।
* **मेडिकल डिवाइस पार्क:** ऐसे पार्कों की स्थापना का उद्देश्य।
* **’आत्मनिर्भर भारत’ अभियान:** इस संदर्भ में घरेलू उत्पादन पर जोर।
* **नियामक सुधार:** मेडटेक क्षेत्र के लिए अनुकूल नियामक वातावरण।
* **अनुसंधान और विकास (R&D) को प्रोत्साहन:** नवाचार के लिए सरकारी पहल।
* **कौशल विकास:** इस क्षेत्र में कुशल कार्यबल तैयार करने के कार्यक्रम।
3. **सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) में भूमिका:**
* **किफायती पहुंच:** घरेलू उत्पादन से लागत कम होना और पहुंच बढ़ना।
* **गुणवत्तापूर्ण देखभाल:** उन्नत उपकरणों की उपलब्धता से नैदानिक और उपचार क्षमताओं में सुधार।
* **स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन (HTA):** सबूत-आधारित निर्णय लेने और संसाधनों के कुशल उपयोग का महत्व।
* **पुनर्भुगतान प्रणाली:** इनोवेटिव टेक्नोलॉजी तक पहुंच और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन।
* **ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच:** स्थानीय विनिर्माण से आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होना।
4. **चुनौतियाँ और आगे की राह:** इस क्षेत्र की कुछ प्रमुख चुनौतियों (जैसे आयात पर निर्भरता, अनुसंधान में निवेश की कमी) और उनके संभावित समाधानों पर संक्षिप्त चर्चा।
5. **निष्कर्ष:** मेडिकल डिवाइस क्षेत्र के सतत विकास और UHC लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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