जल जीवन मिशन: जल गुणवत्ता प्रबंधन में राज्य सरकारों की भूमिका और नवीन पहल

जल जीवन मिशन: जल गुणवत्ता प्रबंधन में राज्य सरकारों की भूमिका और नवीन पहल

Map of Jharkhand, West Bengal, Bihar, Uttar Pradesh, Rajasthan, Ass highlighted on the map of India — Jal Jeevan Mission…Mind map of Jal Jeevan Mission Water Quality concept mind map — Jal Jeevan Mission water quality management

मानचित्र व माइंड-मैप: Jal Jeevan Mission Water Quality Management

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — शासन, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय और अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — आर्थिक विकास, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन
  • Prelims: जल जीवन मिशन (JJM), पेयजल राज्य का विषय, BIS:10500 मानक, जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS), फील्ड टेस्ट किट (FTK), सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP), जल शक्ति मंत्रालय, JJM-WQMIS पोर्टल
  • Essay: ग्रामीण विकास में पेयजल की भूमिका, भारत में जल सुरक्षा चुनौतियाँ और समाधान, सहकारी संघवाद और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम

त्वरित पुनरावृत्ति: जल जीवन मिशन का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का जल उपलब्ध कराना है, जिसमें BIS:10500 मानकों के अनुरूप जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत जल गुणवत्ता प्रबंधन पर प्रकाश डाला गया है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय, नीतिगत और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का स्वच्छ जल उपलब्ध कराया जा सके। विज्ञप्ति में जल गुणवत्ता मानकों, परीक्षण विधियों और निगरानी प्रणालियों पर विशेष जोर दिया गया है, जो मिशन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

पृष्ठभूमि

  • पेयजल (Drinking Water) राज्य सूची का विषय है, अतः पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है।
  • जल जीवन मिशन (JJM) को अगस्त 2019 में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  • मिशन के तहत, पाइप द्वारा आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS): 10500 मानकों को अपनाया गया है।
  • रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित बस्तियों को जल आपूर्ति योजनाओं में प्राथमिकता दी जाती है, और राज्यों को वैकल्पिक सुरक्षित जल स्रोतों पर आधारित योजनाएं बनाने की सलाह दी गई है।
  • आर्सेनिक (Arsenic) और फ्लोराइड (Fluoride) से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (Community Water Purification Plants – CWPP) स्थापित करने की सलाह दी गई है ताकि पाइपयुक्त आपूर्ति शुरू होने तक पीने योग्य पानी सुनिश्चित किया जा सके।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (Water Quality Monitoring and Surveillance – WQMS) गतिविधियों के लिए JJM निधि का उपयोग करने की अनुमति है, जिसमें प्रयोगशालाओं की स्थापना, उपकरणों की खरीद और कुशल जनशक्ति की भर्ती शामिल है।

जल जीवन मिशन (JJM) क्या है?

  • जल जीवन मिशन (JJM) जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) के अंतर्गत एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को व्यक्तिगत घरेलू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connection – FHTC) के माध्यम से पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध कराना है।
  • मिशन का दृष्टिकोण ‘जल आंदोलन’ के रूप में जल को एक जन आंदोलन बनाना है, जिसमें समुदाय को जल आपूर्ति के नियोजन, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव में शामिल किया जाए।
  • JJM के तहत, जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, साथ ही फील्ड टेस्ट किट (Field Test Kits – FTK) के माध्यम से समुदाय द्वारा निगरानी को बढ़ावा दिया जाता है।
  • JJM-जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (JJM-WQMIS) पोर्टल विकसित किया गया है ताकि जल गुणवत्ता परीक्षण के नमूनों की जांच, रिपोर्टिंग और निगरानी में सहायता मिल सके।
  • मार्च 2023 में पेयजल उपचार प्रौद्योगिकियों पर एक अन्य पुस्तिका जारी की गई थी, जिसका उद्देश्य हितधारकों के बीच उपलब्ध प्रौद्योगिकियों से संबंधित जानकारी का प्रसार करना था।
  • मिशन का लक्ष्य न केवल पानी उपलब्ध कराना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आपूर्ति किया गया पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों (BIS: 10500) के अनुरूप हो।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
पेयजल राज्य का विषय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को योजनाओं की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन और रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी देता है।
BIS:10500 मानक जल आपूर्ति की गुणवत्ता के लिए राष्ट्रीय मानक निर्धारित करता है, जिससे पूरे देश में एकरूपता सुनिश्चित होती है।
रासायनिक प्रदूषण प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता सबसे अधिक ज़रूरतमंद और संवेदनशील क्षेत्रों को पहले सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है।
सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP) पाइपयुक्त आपूर्ति चालू होने तक तत्काल सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक अंतरिम समाधान प्रदान करता है।
जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियाँ जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, जनशक्ति की भर्ती और सामुदायिक निगरानी के माध्यम से गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
JJएम-जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (JJएम-WQMIS) पोर्टल जल गुणवत्ता परीक्षण डेटा की पारदर्शिता और सार्वजनिक पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे जवाबदेही बढ़ती है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार, जल-जनित बीमारियों को कम करना।
  • महिलाओं और लड़कियों पर पानी लाने के बोझ को कम करके उनकी मुक्ति और शिक्षा के अवसरों में वृद्धि।

आर्थिक महत्व

  • स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से उत्पादकता में वृद्धि और स्वास्थ्य देखभाल लागत में कमी आती है।
  • जल शोधन और आपूर्ति बुनियादी ढांचे में निवेश से स्थानीय रोजगार सृजन होता है।

शासनिक महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
  • डेटा-संचालित निर्णय लेने और सार्वजनिक जवाबदेही के लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली का उपयोग।

पर्यावरणीय महत्व

  • सुरक्षित और स्थायी जल स्रोतों की पहचान और विकास को बढ़ावा देता है।
  • जल प्रदूषण के मुद्दों को संबोधित करने और जल संरक्षण प्रथाओं को प्रोत्साहित करने में मदद करता है।

चुनौतियाँ

1. जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी

  • दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त परीक्षण प्रयोगशालाओं और कुशल जनशक्ति की कमी।
  • परीक्षण परिणामों की विश्वसनीयता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करना।

2. रासायनिक संदूषण का समाधान

  • आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे भूजल संदूषकों का स्थायी समाधान ढूंढना।
  • प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक सुरक्षित स्रोतों की पहचान और विकास।

3. बुनियादी ढाँचे का रखरखाव

  • पाइपयुक्त जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त धन और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता।
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी और क्षमता निर्माण सुनिश्चित करना।

4. अंतर-राज्यीय और अंतर-जिला समन्वय

  • जल संसाधनों के साझाकरण और गुणवत्ता प्रबंधन के लिए विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय स्थापित करना।
  • जल-संबंधित मुद्दों पर राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।

5. जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन

  • समुदायों के बीच सुरक्षित पेयजल प्रथाओं और जल संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
  • जल गुणवत्ता परीक्षण में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
पेयजल की गुणवत्ता रासायनिक (आर्सेनिक, फ्लोराइड) और जैविक संदूषण ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा।
बुनियादी ढाँचे की कमी दूरस्थ क्षेत्रों में पाइपयुक्त जल आपूर्ति और उपचार संयंत्रों की स्थापना और रखरखाव की चुनौती।
वित्तीय स्थिरता जल आपूर्ति योजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और रखरखाव के लिए पर्याप्त और स्थायी वित्तपोषण।
तकनीकी विशेषज्ञता जल गुणवत्ता परीक्षण, उपचार प्रौद्योगिकियों के संचालन और डेटा प्रबंधन के लिए कुशल जनशक्ति की कमी।
सामुदायिक भागीदारी योजनाओं के स्वामित्व, रखरखाव और जल संरक्षण में स्थानीय समुदायों को प्रभावी ढंग से शामिल करना।
जलवायु परिवर्तन जल स्रोतों की उपलब्धता और गुणवत्ता पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का प्रबंधन।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • जल जीवन मिशन (JJM)

आगे की राह

  • जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं के नेटवर्क का विस्तार और उन्हें ISO/NABL मान्यता प्राप्त कराना।
  • जल गुणवत्ता निगरानी के लिए फील्ड टेस्ट किट (FTK) के उपयोग को बढ़ावा देना और सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • रासायनिक रूप से दूषित क्षेत्रों के लिए स्थायी और लागत प्रभावी जल उपचार प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना।
  • जल गुणवत्ता प्रभावित गांवों में सुरक्षित वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान और उनके विकास को प्राथमिकता देना।
  • जल जीवन मिशन-जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (JJएम-WQMIS) पोर्टल पर डेटा की सटीकता और नियमित अपडेट सुनिश्चित करना।
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जल गुणवत्ता प्रबंधन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता जारी रखना।
  • पेयजल की गुणवत्ता और संरक्षण के महत्व के बारे में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

जल जीवन मिशन · जल गुणवत्ता प्रबंधन · पेयजल आपूर्ति · राज्यों की भूमिका · केंद्र सरकार की सहायता · BIS 10500 मानक · सामुदायिक जल शोधन संयंत्र · जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण · ऑनलाइन WQMIS पोर्टल · रासायनिक संदूषण · आर्सेनिक और फ्लोराइड · तकनीकी सहायता

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243G’, ‘note’: ‘पंचायतों की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 243W’, ‘note’: ‘नगरपालिकाओं की शक्तियों, प्राधिकार और उत्तरदायित्व’}
  • {‘article’: ‘राज्य सूची (सातवीं अनुसूची)’, ‘note’: ‘पेयजल आपूर्ति राज्य का विषय’}

अवधारणा प्रवाह

ग्रामीण परिवारों को नल का पानी उपलब्ध कराना (जल जीवन मिशन)  →  पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए BIS:10500 मानक  →  जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं और निगरानी गतिविधियों की स्थापना  →  JJएम-WQMIS पोर्टल पर जल गुणवत्ता डेटा की रिपोर्टिंग  →  गुणवत्ता संबंधी समस्याओं वाले गांवों के लिए वैकल्पिक स्रोतों/उपचार संयंत्रों की योजना  →  सुरक्षित पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. जल जीवन मिशन (JJM) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराना है, जिसे अगस्त 2019 में शुरू किया गया था।
2. पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन और कार्यान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
3. जल की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS): 10500 मानकों को JJM के अंतर्गत अपनाया गया है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। जल जीवन मिशन अगस्त 2019 में शुरू किया गया था जिसका लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल का पानी उपलब्ध कराना है। कथन 2 गलत है। पेयजल राज्य का विषय होने के कारण, पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, अनुमोदन, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। केंद्र सरकार वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता प्रदान करती है। कथन 3 सही है। JJM के अंतर्गत, जल की गुणवत्ता के लिए BIS: 10500 मानकों को अपनाया गया है।

Q2. जल जीवन मिशन (JJM) के तहत जल गुणवत्ता प्रबंधन के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित बस्तियों को जल आपूर्ति योजनाओं की योजना बनाते समय प्राथमिकता दी जाती है।
2. आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र (CWPP) स्थापित करने की सलाह दी गई है।
3. राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियों के लिए JJM निधि का उपयोग नहीं कर सकते हैं।

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2 — कथन 1 सही है। JJM योजना के अंतर्गत, रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित बस्तियों को प्राथमिकता दी जाती है। कथन 2 सही है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष रूप से आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित बस्तियों में सामुदायिक जल शोधन संयंत्र स्थापित करने की सलाह दी गई है। कथन 3 गलत है। परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण गतिविधियों के लिए JJM निधि का उपयोग कर सकते हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत जल गुणवत्ता प्रबंधन के महत्व और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए। इस संदर्भ में, केंद्र सरकार द्वारा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रदान की जा रही सहायता का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत जल जीवन मिशन के संक्षिप्त परिचय और इसके मुख्य उद्देश्य से करें। जल गुणवत्ता प्रबंधन के महत्व को विस्तार से समझाएं, जिसमें स्वास्थ्य, सामाजिक-आर्थिक प्रभावों और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से इसके जुड़ाव को शामिल करें। जल गुणवत्ता प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित करें, जैसे रासायनिक संदूषण (आर्सेनिक, फ्लोराइड), अपर्याप्त परीक्षण अवसंरचना, कुशल जनशक्ति की कमी और जागरूकता का अभाव। केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सहायता का मूल्यांकन करें, जिसमें वित्तीय सहायता, नीतिगत मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, BIS: 10500 मानकों का निर्धारण, सामुदायिक जल शोधन संयंत्रों की स्थापना, जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्वेक्षण (WQMS) गतिविधियों के लिए JJM निधि का उपयोग, ऑनलाइन JJM-WQMIS पोर्टल का विकास, और पेयजल उपचार प्रौद्योगिकियों पर पुस्तिकाओं का प्रकाशन शामिल है। अंत में, एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें जो आगे के मार्ग और सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दे।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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