17 Jul जींद में हाइड्रोजन ट्रेन और 14,000 करोड़ के विकास प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology) | GS Paper III — अवसंरचना (Infrastructure) | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment & Ecology) | GS Paper II — सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप (Government Policies & Interventions)
- Prelims: हाइड्रोजन ट्रेन, ग्रीन हाइड्रोजन, जींद-सोनीपत मार्ग, डबल इंजन सरकार, स्वच्छता से स्वागत पहल, पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज, महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज, राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन, नेट-ज़ीरो उत्सर्जन, भारतीय रेलवे आधुनिकीकरण
- Essay: हरित ऊर्जा संक्रमण: भारत के विकास पथ का आधार, अवसंरचना विकास और क्षेत्रीय असमानताएँ: एक संतुलित दृष्टिकोण
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का जींद से शुभारंभ देश के हरित ऊर्जा संक्रमण, डीकार्बोनाइजेशन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि इसके व्यापक पैमाने पर कार्यान्वयन के लिए उत्पादन, भंडारण और लागत संबंधी चुनौतियों का समाधान आवश्यक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री ने हरियाणा के जींद में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिसमें भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ भी शामिल था। इस अवसर पर उन्होंने 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे, राजमार्ग, विरासत और स्वास्थ्य सेवा परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिसमें दो नए मेडिकल कॉलेज – भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज और नारनौल में महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज – शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल की भी सराहना की और जींद को ‘डबल इंजन’ सरकार के सुशासन मॉडल का प्रतीक बताया।
पृष्ठभूमि
- भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए परिवहन क्षेत्र का डीकार्बोनाइजेशन महत्वपूर्ण है।
- भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है और इसके विद्युतीकरण के साथ-साथ हरित ईंधन विकल्पों की खोज की जा रही है।
- राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Hydrogen Mission) को 2021 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- हाइड्रोजन ट्रेनें रेलवे के डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, खासकर उन मार्गों पर जहां विद्युतीकरण अव्यावहारिक या महंगा है।
- हरियाणा सरकार ने राज्य में अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है, जिसमें नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना शामिल है।
- प्रधानमंत्री का ‘स्वच्छ भारत अभियान’ देशव्यापी स्वच्छता आंदोलन है, और ‘स्वच्छता से स्वागत’ जैसी पहलें इसके क्षेत्रीय विस्तार हैं।
हाइड्रोजन ट्रेनें और उनका महत्व
- हाइड्रोजन ट्रेनें वे रेलगाड़ियाँ हैं जो अपने प्रणोदन (propulsion) के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल (hydrogen fuel cells) का उपयोग करती हैं।
- ये ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाकर बिजली उत्पन्न करते हैं, जिसका उपयोग ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को शक्ति देने के लिए किया जाता है।
- इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प (water vapor) है, जिससे ये ट्रेनें शून्य-उत्सर्जन (zero-emission) वाली बन जाती हैं।
- पारंपरिक डीजल ट्रेनों की तुलना में, हाइड्रोजन ट्रेनें वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को काफी कम करती हैं।
- ये ट्रेनें उन गैर-विद्युतीकृत (non-electrified) रेल मार्गों के लिए एक आदर्श समाधान प्रदान करती हैं जहाँ विद्युतीकरण महंगा या तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत मार्ग पर शुरू की गई है, जो देश के हरित परिवहन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
- यह पहल राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाना है।
- हाइड्रोजन ट्रेनों का विकास ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि इनका निर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| शून्य उत्सर्जन | पर्यावरण प्रदूषण को कम करता है और भारत के शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों में योगदान देता है। |
| गैर-विद्युतीकृत मार्गों के लिए उपयुक्त | उन रेल खंडों पर परिचालन की अनुमति देता है जहाँ ओवरहेड विद्युतीकरण संभव नहीं है, जिससे नेटवर्क लचीलापन बढ़ता है। |
| स्वदेशी तकनीक | आत्मनिर्भर भारत और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देता है, तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करता है। |
| शांत परिचालन | कम शोर प्रदूषण के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रा अनुभव को बेहतर बनाता है। |
| तेज ईंधन भरना | ईंधन भरने की प्रक्रिया डीजल ट्रेनों के समान है, जिससे परिचालन दक्षता बनी रहती है। |
| दीर्घकालिक लागत बचत | जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करता है और भविष्य में कार्बन क्रेडिट से लाभ हो सकता है। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- हाइड्रोजन ट्रेनें शून्य-उत्सर्जन परिवहन प्रदान करती हैं, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आती है।
- यह भारत के 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करता है।
आर्थिक महत्व
- ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
- विदेशी तेल आयात पर निर्भरता कम करता है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
- नई तकनीक के विकास और स्वदेशी उत्पादन से ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बल मिलता है।
सामाजिक महत्व
- बेहतर स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना (नए मेडिकल कॉलेज) से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य पहुंच में सुधार होगा।
- मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों के लिए नए रास्ते खुलेंगे, जिससे रोजगार सृजन होगा।
- ‘स्वच्छता से स्वागत’ जैसी पहलें सामुदायिक सहभागिता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देती हैं।
रणनीतिक महत्व
- भारत को हरित परिवहन प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है।
- रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण और विस्तार से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिलता है।
- डबल इंजन सरकार के मॉडल के माध्यम से केंद्र और राज्य के बीच सहयोग को प्रदर्शित करता है, जिससे परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन होता है।
चुनौतियाँ
1. हाइड्रोजन उत्पादन और भंडारण
- ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है और इसके लिए पर्याप्त नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होती है।
- हाइड्रोजन के भंडारण और परिवहन के लिए विशेष अवसंरचना की आवश्यकता होती है, क्योंकि यह अत्यधिक ज्वलनशील और कम घनत्व वाला होता है।
यूपीएससी लिंक: GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
2. उच्च प्रारंभिक लागत
- हाइड्रोजन ट्रेनों और संबंधित अवसंरचना (जैसे ईंधन भरने वाले स्टेशन) की प्रारंभिक लागत पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में अधिक होती है।
- इस उच्च लागत को वहनीय बनाने के लिए सरकारी सब्सिडी और निजी निवेश की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: GS Paper III — अर्थव्यवस्था
3. सुरक्षा चिंताएँ
- हाइड्रोजन की ज्वलनशीलता के कारण इसके उपयोग और भंडारण में उच्च सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल की आवश्यकता होती है।
- सार्वजनिक स्वीकृति और विश्वास सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
यूपीएससी लिंक: GS Paper III — आपदा प्रबंधन
4. तकनीकी परिपक्वता
- हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अभी भी विकास के प्रारंभिक चरण में है और बड़े पैमाने पर तैनाती से पहले इसे और अधिक परिपक्व होने की आवश्यकता है।
- दीर्घकालिक विश्वसनीयता और रखरखाव की चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं।
यूपीएससी लिंक: GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
5. अवसंरचनात्मक अंतराल
- पूरे रेल नेटवर्क पर हाइड्रोजन ईंधन भरने वाले स्टेशनों का एक व्यापक नेटवर्क स्थापित करना एक बड़ी चुनौती है।
- मौजूदा रेल अवसंरचना को हाइड्रोजन ट्रेनों के अनुकूल बनाने के लिए महत्वपूर्ण उन्नयन की आवश्यकता होगी।
यूपीएससी लिंक: GS Paper III — अवसंरचना
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन | नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता और उच्च उत्पादन लागत। |
| भंडारण और परिवहन | उच्च दबाव वाले टैंक और विशेष पाइपलाइन की आवश्यकता। |
| वित्तीय व्यवहार्यता | उच्च प्रारंभिक निवेश और परिचालन लागत को कम करने की आवश्यकता। |
| सुरक्षा मानक | हाइड्रोजन की ज्वलनशीलता के कारण कठोर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन। |
| तकनीकी एकीकरण | मौजूदा रेल प्रणालियों के साथ नई तकनीक का सहज एकीकरण। |
| मानव संसाधन | हाइड्रोजन तकनीक के संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Hydrogen Mission)
- मेक इन इंडिया (Make in India)
- स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan)
- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY)
- गति शक्ति मास्टर प्लान (Gati Shakti Master Plan)
- राष्ट्रीय रेल योजना (National Rail Plan)
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission)
- अमृत काल (Amrit Kaal)
- वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local)
आगे की राह
- ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार करना।
- हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण के लिए एक मजबूत और सुरक्षित अवसंरचना विकसित करना।
- हाइड्रोजन ट्रेनों और संबंधित प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना ताकि लागत कम की जा सके और दक्षता बढ़ाई जा सके।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से निवेश आकर्षित करना और वित्तीय बाधाओं को दूर करना।
- हाइड्रोजन तकनीक के सुरक्षित संचालन और रखरखाव के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करना।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाना ताकि हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाई जा सके।
- जन जागरूकता अभियान चलाकर हाइड्रोजन ट्रेनों की सुरक्षा और पर्यावरणीय लाभों के बारे में जनता को शिक्षित करना।
- चरणबद्ध तरीके से हाइड्रोजन ट्रेनों के रोलआउट की योजना बनाना, पहले कम दूरी के मार्गों पर और फिर धीरे-धीरे विस्तार करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
हाइड्रोजन ट्रेन · ग्रीन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था · डीकार्बोनाइजेशन · शुद्ध-शून्य उत्सर्जन · राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन · ऊर्जा सुरक्षा · आत्मनिर्भर भारत · अवसंरचना विकास · सतत परिवहन · जलवायु परिवर्तन · सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना · डबल इंजन सरकार
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार): स्वच्छ पर्यावरण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच।
- राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत (DPSP): अनुच्छेद 47 (सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार), अनुच्छेद 48A (पर्यावरण का संरक्षण)।
- सातवीं अनुसूची (संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची): रेलवे (संघ सूची), सार्वजनिक स्वास्थ्य (राज्य सूची), आर्थिक और सामाजिक योजना (समवर्ती सूची)।
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986: पर्यावरण संरक्षण के लिए वैधानिक ढाँचा।
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम: वायु प्रदूषण कम करने की नीति।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017: स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार का लक्ष्य।
अवधारणा प्रवाह
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता → ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन → जलवायु परिवर्तन → शुद्ध-शून्य उत्सर्जन लक्ष्य → हाइड्रोजन ट्रेनें (शून्य उत्सर्जन) → राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन → हरित परिवहन → सतत विकास।
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन हाल ही में किस राज्य में किया गया?
- उत्तर प्रदेश
- हरियाणा
- महाराष्ट्र
- गुजरात
उत्तर: हरियाणा — प्रधानमंत्री ने हरियाणा के जींद में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन किया। यह पहल देश के हरित परिवहन लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Q2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कथन I: हाइड्रोजन ट्रेनें अपने प्रणोदन के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल का उपयोग करती हैं और इनका एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प है। कथन II: राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
- कथन I सत्य है, लेकिन कथन II असत्य है।
- कथन I असत्य है, लेकिन कथन II सत्य है।
- कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है।
- कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं, लेकिन कथन II, कथन I की सही व्याख्या नहीं करता है।
उत्तर: कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं और कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है। — कथन I सत्य है क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेनें ईंधन सेल का उपयोग करती हैं जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली उत्पन्न करती हैं, जिससे केवल जलवाष्प उत्सर्जित होता है। कथन II भी सत्य है क्योंकि राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात में आत्मनिर्भर बनाना है। दोनों कथन हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था और हरित परिवहन के संदर्भ में सही हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ के संदर्भ में, देश के ऊर्जा संक्रमण और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी की क्षमता और चुनौतियों का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
रूपरेखा: प्रश्न के परिचय में हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ का उल्लेख करें और हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी को परिभाषित करें। मुख्य भाग में, पहले हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी की क्षमता पर चर्चा करें, जिसमें पर्यावरणीय लाभ, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक अवसर और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना शामिल है। इसके बाद, हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें, जैसे उच्च लागत, अवसंरचनात्मक कमी, सुरक्षा चिंताएं और तकनीकी परिपक्वता। अंत में, इन चुनौतियों का समाधान करने और भारत के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक संतुलित और व्यवहार्य ‘आगे की राह’ सुझाते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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