18 Feb ट्रांसअटलांटिक तनाव : यूरोप और अमेरिका के बीच बदलते संबंध
पाठ्यक्रम :
मुख्य परीक्षा : GS2–अंतर्राष्ट्रीय संबंध (IR) : ट्रांसअटलांटिक संबंध, यूरोपीय सामरिक स्वायत्तता और वैश्विक शक्ति संतुलन
प्रारंभिक परीक्षा : अंतर्राष्ट्रीय संबंध
खबरों में क्यों ?
हाल ही में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय “नियम-आधारित व्यवस्था” अब अस्तित्व में नहीं रही। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोप के लिए अधिक “सैन्य स्वायत्तता” की आवश्यकता पर बल दिया। अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सहयोग का आश्वासन दिया, परंतु इसे साझा रणनीतिक हितों के बजाय सांस्कृतिक-सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर परिभाषित किया। इससे ट्रांसअटलांटिक संबंधों में वैचारिक बदलाव के संकेत मिले। पूर्व में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस द्वारा यूरोप की लोकतांत्रिक नीतियों और शरणार्थी नीति की आलोचना तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान ने यूरोप की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ाया है।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन : प्रारंभिक परीक्षा हेतु तथ्य
स्थापना – 1963 (संस्थापक : जर्मन प्रकाशक Ewald-Heinrich von Kleist)
स्थान – म्यूनिख, जर्मनी (वार्षिक, सामान्यतः फरवरी माह में)
प्रतिभागी – राष्ट्राध्यक्ष एवं सरकार प्रमुख, विदेश और रक्षा मंत्री, सैन्य अधिकारी, शिक्षाविद एवं सुरक्षा विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि
प्रकृति – अनौपचारिक, उच्च-स्तरीय सुरक्षा संवाद
मुख्य विषय – वैश्विक सुरक्षा और भू-राजनीति
विशेषता : सम्मेलन से पूर्व Munich Security Report प्रकाशित होती है जिसमें वैश्विक सुरक्षा पर विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है। प्रारंभ में इसे International Wehrkunde Meeting कहा जाता था ।
यूरोप के सामने प्रमुख चुनौतियाँ :
1. यूक्रेन युद्ध और सुरक्षा संकट : द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में यह सबसे बड़ा भू-संघर्ष है। यूरोप ने यूक्रेन को सैन्य सहायता दी, रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, फिर भी युद्ध का निर्णायक समाधान नहीं हो सका। इससे आर्थिक दबाव और सामरिक अनिश्चितता बढ़ी ह
2. अमेरिका पर सुरक्षा निर्भरता : द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए नाटो और अमेरिका पर निर्भर रहा है। शीत युद्ध के बाद यह निर्भरता और बढ़ी। अमेरिकी राजनीति में बदलाव और “अमेरिका-प्रथम” दृष्टिकोण से यूरोप की चिंता बढ़ी है। एशिया-प्रशांत पर अमेरिका का ध्यान केंद्रित होने से यूरोप की सामरिक स्थिति अस्थिर हो रही है।
3. यूरोप में उभरती दक्षिणपंथी राजनीति : कई यूरोपीय देशों में –
A.आप्रवासन, वैश्वीकरण और यूरोपीय संघ की नीतियों का विरोध
B.राजनीतिक असंतोष और आर्थिक असमानता
C.यह प्रवृत्ति यूरोपीय संघ की एकता और उदार लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती बन रही है।
यूरोप के लिए संभावित रास्ता :
1. सामरिक स्वायत्तता का निर्माण :
A. रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना
B. संयुक्त यूरोपीय रक्षा नीति विकसित करना
C. अमेरिका के साथ संतुलित साझेदारी
2. पश्चिम से परे व्यापक वैश्विक सहभागिता : यदि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर हो रही है, तो-
A. एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों से सहयोग बढ़ाना
B. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाना
C. वैश्विक दक्षिण के साथ नई साझेदारी बनाना
3. रूस के साथ व्यावहारिक संतुलन
A. निकट भविष्य में युद्ध समाप्ति या स्थिर स्थिति की दिशा में प्रयास
B. महाद्वीपीय स्थिरता के लिए नई सुरक्षा संरचना
4. आंतरिक असंतोष का समाधान
A. आर्थिक असमानता कम करना
B. रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना
C. लोकतांत्रिक संस्थाओं में विश्वास बहाल करना
बदलती विश्व व्यवस्था में यूरोप की भूमिका :
वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन के इस दौर में अमेरिका की भूमिका पुनर्परिभाषित हो रही है, चीन और अन्य शक्तियाँ उभर रही हैं और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था दबाव में है। ऐसे में यदि यूरोप सक्रिय और स्वायत्त भूमिका नहीं निभाता तो वह महाशक्तियों के बीच “दबाव” की स्थिति में आ सकता है।
भारत के लिए निहितार्थ (अतिरिक्त परिप्रेक्ष्य) :
भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” नीति के संदर्भ में यूरोप की बढ़ती स्वायत्तता:
A. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी
B. वैश्विक दक्षिण और यूरोप के बीच सहयोग के अवसर बढ़ाएगी
C. भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा दे सकती है
निष्कर्ष :
ट्रांसअटलांटिक संबंधों में उभरते तनाव संकेत देते हैं कि विश्व व्यवस्था परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। यूरोप को चाहिए कि वह अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करे और अपनी सामरिक, आर्थिक और राजनीतिक स्वायत्तता विकसित करे। वैश्विक स्तर पर व्यापक साझेदारियाँ स्थापित करे । महाद्वीपीय शांति, स्थिरता और वैश्विक सहयोग ही यूरोप की नई भूमिका की आधारशिला होनी चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
प्रश्न 1. म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (Munich Security Conference) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. इसकी स्थापना वर्ष 1963 में की गई थी।
2. यह संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में आयोजित एक औपचारिक वार्षिक सम्मेलन है।
3. सम्मेलन से पूर्व एक वार्षिक Munich Security Report प्रकाशित की जाती है।
4. प्रारंभ में इसे International Wehrkunde Meeting के नाम से जाना जाता था।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 4
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (c)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :
Q. “ट्रांसअटलांटिक संबंधों में उभरते तनाव यूरोप को नई सामरिक दिशा अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।” इस कथन की दिशा में में यूरोप की सामरिक स्वायत्तता की आवश्यकता और उसके वैश्विक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

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