23 Sep तमिलनाडु के लिए क्या है ‘एल नीनो’ और उत्तर-पूर्वी मानसून का खतरा?
✎ अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान का असामान्य रूप से गर्म होना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न और भारतीय मानसून को प्रभावित करता है, विशेषकर दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और उत्तर-पूर्वी मानसून पर संभावित…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (भारतीय भूगोल, विश्व का भौतिक भूगोल) | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन)
- Prelims: अल नीनो, ला नीना, भारतीय मानसून, दक्षिण-पश्चिम मानसून, उत्तर-पूर्वी मानसून, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर द्विध्रुव, तापमान विसंगति
- Essay: जलवायु परिवर्तन के वैश्विक और स्थानीय प्रभाव, भारत में कृषि और जलवायु परिवर्तन: चुनौतियाँ एवं समाधान
त्वरित पुनरावृत्ति: अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान का असामान्य रूप से गर्म होना है, जो वैश्विक मौसम पैटर्न और भारतीय मानसून को प्रभावित करता है, विशेषकर दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और उत्तर-पूर्वी मानसून पर संभावित अनुकूल प्रभाव के साथ।
यह खबर चर्चा में क्यों?
इस वर्ष अल नीनो (El Nino) की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है, जिससे भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) के दौरान वर्षा में कमी देखी गई है। विशेष रूप से तमिलनाडु सहित दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में, मौसम विज्ञानी अब अल नीनो के आगामी उत्तर-पूर्वी मानसून (North-East Monsoon) पर पड़ने वाले प्रभावों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। सामान्यतः एक मजबूत अल नीनो दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी मानसून के लिए अनुकूल माना जाता है, लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि के संदर्भ में इसके प्रभावों का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- अल नीनो एक जटिल जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान (Sea Surface Temperatures) के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी है।
- यह घटना वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है और इसका भारतीय मानसून पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
- ऐतिहासिक रूप से, एक मजबूत अल नीनो अक्सर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कम वर्षा से जुड़ा होता है, जिससे कृषि और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- हालांकि, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में, विशेषकर तमिलनाडु में, उत्तर-पूर्वी मानसून के लिए अल नीनो की स्थिति को अक्सर अनुकूल माना जाता है, जिससे इस क्षेत्र में सामान्य या अधिक वर्षा हो सकती है।
- इस वर्ष, विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि अल नीनो की तीव्रता काफी अधिक है, और यह 2027 के मध्य तक जारी रह सकता है, जिससे आगामी वर्षों में वैश्विक तापमान के रिकॉर्ड टूटने की संभावना है।
- अल नीनो के प्रभाव अन्य जलवायु चालकों जैसे हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) और अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean) की स्थितियों से भी प्रभावित हो सकते हैं।
अल नीनो क्या है?
- अल नीनो स्पेनिश शब्द है जिसका अर्थ ‘छोटा लड़का’ है, और यह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में आवधिक वार्मिंग को संदर्भित करता है।
- यह घटना तब होती है जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे वायुमंडलीय परिसंचरण (Atmospheric Circulation) पैटर्न में बदलाव आता है।
- अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) चक्र का गर्म चरण है; इसका ठंडा चरण ला नीना (La Nina) कहलाता है, जिसमें समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ठंडा होता है।
- अल नीनो की स्थिति आमतौर पर हर दो से सात साल में एक बार होती है और कई महीनों से लेकर एक वर्ष से अधिक समय तक रह सकती है।
- यह घटना विश्व भर में वर्षा पैटर्न, तापमान और चरम मौसमी घटनाओं को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सूखा और अन्य में भारी वर्षा हो सकती है।
- नीनो 3.4 सूचकांक (Nino 3.4 Index) का उपयोग अल नीनो की तीव्रता को मापने के लिए किया जाता है, जो मध्य-पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत में समुद्री सतह के तापमान की विसंगतियों को मापता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| अल नीनो (El Nino) | मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान का असामान्य रूप से गर्म होना। |
| नीनो 3.4 सूचकांक | मध्य-पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान की विसंगतियों को मापता है; +0.80 डिग्री सेल्सियस से ऊपर अल नीनो की स्थिति दर्शाता है। |
| दक्षिण-पश्चिम मानसून | भारत में अधिकांश वर्षा लाता है; अल नीनो के कारण इस वर्ष इसमें वर्षा की कमी देखी गई। |
| उत्तर-पूर्वी मानसून | तमिलनाडु और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण; अल नीनो की स्थिति इसके लिए अनुकूल मानी जाती है। |
| भारतीय महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) | अल नीनो के प्रभावों को संशोधित करने वाला एक अन्य जलवायु कारक। |
महत्व
पर्यावरणीय महत्व
- अल नीनो वैश्विक मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है, जिससे दुनिया भर में वर्षा और तापमान के पैटर्न में बदलाव आता है।
- यह अत्यधिक मौसमी घटनाओं जैसे सूखा, बाढ़ और जंगल की आग को बढ़ावा दे सकता है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
- समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर भी इसका प्रभाव पड़ता है, क्योंकि गर्म समुद्री जल प्रवाल विरंजन (Coral Bleaching) और समुद्री जीवन के वितरण को प्रभावित कर सकता है।
सामाजिक-आर्थिक महत्व
- मानसून की वर्षा में कमी या अधिकता कृषि उत्पादन को सीधे प्रभावित करती है, जिससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय पर असर पड़ता है।
- पानी की उपलब्धता में बदलाव से पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है।
- अत्यधिक मौसम की घटनाओं से बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है, जिससे पुनर्निर्माण और राहत कार्यों पर सरकारी व्यय बढ़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन से संबंध
- अल नीनो की बढ़ती तीव्रता और आवृत्ति वैश्विक तापन (Global Warming) के संदर्भ में चिंता का विषय है, क्योंकि यह चरम मौसम की घटनाओं को और बढ़ा सकता है।
- विश्व मौसम विज्ञान संगठन (World Meteorological Organisation) ने चेतावनी दी है कि एक बहुत मजबूत अल नीनो वैश्विक वर्षा और तापमान पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है।
- 2023-2027 की अवधि ऐतिहासिक रूप से सबसे गर्म पाँच वर्ष हो सकती है, जो अल नीनो और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभावों को दर्शाती है।
चुनौतियाँ
1. कृषि पर प्रभाव
- दक्षिण-पश्चिम मानसून में वर्षा की कमी से खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- उत्तर-पूर्वी मानसून में अत्यधिक वर्षा या अनियमितता से तमिलनाडु जैसे राज्यों में खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: कृषि, फसल पैटर्न, सिंचाई
2. जल संसाधन प्रबंधन
- वर्षा पैटर्न में बदलाव से जलाशयों में पानी के स्तर पर असर पड़ता है, जिससे पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है।
- अत्यधिक वर्षा से बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जबकि कम वर्षा से सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, दोनों ही जल प्रबंधन के लिए चुनौती हैं।
यूपीएससी लिंक: जल संसाधन, सिंचाई प्रणाली
3. आपदा प्रबंधन
- अल नीनो से प्रेरित चरम मौसमी घटनाएँ जैसे बाढ़, सूखा और चक्रवात, आपदा प्रबंधन प्रणालियों पर भारी दबाव डालती हैं।
- इन घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और बुनियादी ढाँचे को क्षति पहुँचती है, जिसके लिए प्रभावी तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता होती है।
यूपीएससी लिंक: आपदा और आपदा प्रबंधन
4. सार्वजनिक स्वास्थ्य
- बाढ़ और सूखे की स्थिति से जल-जनित बीमारियों और वेक्टर-जनित रोगों (Vector-borne diseases) का प्रसार बढ़ सकता है।
- गर्मी की लहरें और अत्यधिक तापमान हीटस्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं, खासकर कमजोर आबादी के लिए।
यूपीएससी लिंक: स्वास्थ्य, मानव विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वर्षा की अनिश्चितता | दक्षिण-पश्चिम मानसून में कमी और उत्तर-पूर्वी मानसून में संभावित अधिक वर्षा या अनियमितता। |
| कृषि उत्पादकता | फसल उत्पादन पर सीधा नकारात्मक प्रभाव, जिससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका प्रभावित होती है। |
| जल संकट | पेयजल, सिंचाई और अन्य उपयोगों के लिए पानी की उपलब्धता में कमी या बाढ़ के कारण जल गुणवत्ता में गिरावट। |
| बुनियादी ढाँचे पर दबाव | अत्यधिक मौसम की घटनाओं से सड़क, बिजली और संचार नेटवर्क को नुकसान। |
| आर्थिक अस्थिरता | कृषि क्षेत्र पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं में विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव और मुद्रास्फीति (Inflation) का जोखिम। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)
- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (Rashtriya Krishi Vikas Yojana)
- जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)
आगे की राह
- मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों को सुदृढ़ करना और किसानों तथा संबंधित हितधारकों तक समय पर और सटीक जानकारी का प्रसार करना।
- जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों (Climate-Smart Agriculture Practices) को बढ़ावा देना, जिसमें सूखा-प्रतिरोधी फसलें और कुशल सिंचाई तकनीकें शामिल हों।
- जल संचयन (Water Harvesting) और जल संरक्षण (Water Conservation) के उपायों को प्राथमिकता देना, जैसे कि वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण।
- आपदा प्रतिक्रिया और तैयारी तंत्र को मजबूत करना, जिसमें पूर्व चेतावनी प्रणाली और निकासी योजनाएँ शामिल हों।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन (Adaptation) और शमन (Mitigation) के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों का विकास और कार्यान्वयन।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना ताकि अल नीनो जैसे वैश्विक जलवायु पैटर्न के प्रभावों को बेहतर ढंग से समझा और प्रबंधित किया जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
अल नीनो · ला नीना · भारतीय मानसून · दक्षिण-पश्चिम मानसून · उत्तर-पूर्वी मानसून · जलवायु परिवर्तन · वैश्विक तापन · हिंद महासागर द्विध्रुव · मौसम संबंधी घटनाएँ · कृषि पर प्रभाव · जल संसाधन प्रबंधन · आपदा प्रबंधन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 262’, ‘note’: ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों का न्यायनिर्णयन’}
- {‘article’: ‘सातवीं अनुसूची’, ‘note’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची में विषय’}
अवधारणा प्रवाह
मध्य-पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का गर्म होना (अल नीनो) → वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पैटर्न में बदलाव → भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून में वर्षा की कमी → दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी मानसून पर संभावित प्रभाव → कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था पर परिणामी प्रभाव
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से गर्म होने की घटना है।
2. एक मजबूत अल नीनो आमतौर पर दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में उत्तर-पूर्वी मानसून के लिए अनुकूल माना जाता है।
3. भारतीय मानसून पर अल नीनो का प्रभाव हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) जैसी अन्य जलवायु चालकों से प्रभावित हो सकता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है। अल नीनो मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि को संदर्भित करता है। कथन 2 सही है। सामान्यतः, एक मजबूत अल नीनो दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून के लिए अनुकूल माना जाता है। कथन 3 सही है। अल नीनो के प्रभाव क्षेत्रीय और मौसमी रूप से भिन्न हो सकते हैं और हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) जैसे अन्य जलवायु कारकों से प्रभावित होते हैं।
Q2. अल नीनो के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?
- अल नीनो स्पेनिश भाषा का शब्द है जिसका अर्थ ‘छोटा लड़का’ है।
- यह आमतौर पर हर दो से सात साल में होता है।
- अल नीनो की स्थिति आमतौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान भारत में वर्षा की कमी से जुड़ी होती है।
- ला नीना अल नीनो का एक मजबूत रूप है और यह और भी अधिक गंभीर मौसम की घटनाओं का कारण बनता है।
उत्तर: ला नीना अल नीनो का एक मजबूत रूप है और यह और भी अधिक गंभीर मौसम की घटनाओं का कारण बनता है। — ला नीना अल नीनो का विपरीत है, जहाँ मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक ठंडा हो जाता है, न कि अल नीनो का मजबूत रूप। ला नीना भी वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है लेकिन अल नीनो से अलग तरीके से।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ अल नीनो एक जटिल जलवायु घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। भारतीय मानसून पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए और भारत में कृषि एवं जल संसाधनों पर इसके संभावित परिणामों की चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: अल नीनो की संक्षिप्त परिभाषा और यह कैसे वैश्विक मौसम को प्रभावित करता है।
मुख्य भाग:
1. भारतीय मानसून पर अल नीनो का प्रभाव: दक्षिण-पश्चिम मानसून और उत्तर-पूर्वी मानसून पर इसके विशिष्ट प्रभावों का वर्णन करें। वर्षा की कमी, सूखे की स्थिति और वर्षा पैटर्न में बदलाव का उल्लेख करें।
2. कृषि पर परिणाम: फसल उत्पादन (विशेषकर खरीफ फसलें), खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभावों की व्याख्या करें।
3. जल संसाधनों पर परिणाम: भूजल स्तर, जलाशयों में पानी की उपलब्धता, पेयजल आपूर्ति और सिंचाई पर प्रभावों का विश्लेषण करें।
4. अन्य कारक: हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) और वैश्विक तापन जैसे अन्य जलवायु चालकों के साथ अल नीनो के अंतर्संबंध पर चर्चा करें जो इसके प्रभावों को संशोधित कर सकते हैं।
निष्कर्ष: अल नीनो के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन और शमन रणनीतियों, जैसे कि बेहतर मौसम पूर्वानुमान, जल प्रबंधन तकनीकों और जलवायु-लचीली कृषि पद्धतियों की आवश्यकता पर बल दें।
स्रोत: The Hindu
Tamil Nadu PCS (TNPSC) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: तमिलनाडु में ‘एल नीनो’ और उत्तर-पूर्वी मानसून के प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल नीनो के कारण उत्तर-पूर्वी मानसून कमजोर होता है, जिससे तमिलनाडु में वर्षा में कमी होती है। 2. एल नीनो के प्रभाव से तमिलनाडु में ग्रीष्मकालीन मानसून (दक्षिण-पश्चिम मानसून) अधिक तीव्र हो जाता है। 3. एल नीनो के दौरान तमिलनाडु में जलाशयों में जलस्तर सामान्य से कम रहता है। 4. एल नीनो के कारण तमिलनाडु में चक्रवाती तूफानों की तीव्रता में वृद्धि होती है। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 4
- केवल 1, 3 और 4
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: केवल 1, 3 और 4 — एल नीनो के कारण उत्तर-पूर्वी मानसून कमजोर होता है, जिससे तमिलनाडु में वर्षा में कमी होती है। एल नीनो के प्रभाव से तमिलनाडु में जलाशयों में जलस्तर सामान्य से कम रहता है। एल नीनो के दौरान तमिलनाडु में चक्रवाती तूफानों की तीव्रता में वृद्धि होती है।
Mains: तमिलनाडु में ‘एल नीनो’ और उत्तर-पूर्वी मानसून के प्रभाव का विश्लेषण करते हुए, राज्य सरकार द्वारा जल संसाधन प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में अपनाए जाने वाले उपायों का वर्णन कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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