थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना: भारत में दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

लचीली दवा आपूर्ति श्रृंखला के लिए थोक दवाओं हेतु पीएलआई योजना — diagram

थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना: भारत में दवा निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

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PLI योजना: दवा उत्पादन

✎ थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना भारत को महत्वपूर्ण औषधीय सामग्री के घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और दवा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, थोक दवाएं, सक्रिय औषधीय सामग्री (API), प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (KSM), दवा मध्यवर्ती (DI), दवा आपूर्ति श्रृंखला, आत्मनिर्भर भारत, पेनिसिलिन जी, क्लैवुलैनिक एसिड, पैरा अमीनो फिनोल (PAP)
  • Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा और दवा उद्योग का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना भारत को महत्वपूर्ण औषधीय सामग्री के घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और दवा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में, थोक दवाओं के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (Production-Linked Incentive (PLI) Scheme) के तहत भारत में पाँच ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को सफलतापूर्वक चालू किया गया है। इन परियोजनाओं में एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग संबंधी दवाओं और पैरासिटामोल के लिए महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन शामिल है, जो भारत की घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन बढ़ा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • भारत दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है, लेकिन कई महत्वपूर्ण प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (Key Starting Materials – KSMs), दवा मध्यवर्ती (Drug Intermediates – DIs) और सक्रिय औषधीय सामग्री (Active Pharmaceutical Ingredients – APIs) के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई थी।
  • कोविड-19 महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की भेद्यता को उजागर किया, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हुई।
  • सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के तहत विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजनाओं की शुरुआत की।
  • थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना का उद्देश्य महत्वपूर्ण दवाओं के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करके आयात पर निर्भरता कम करना और दवा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • इस योजना के तहत, विनिर्माताओं को अतिरिक्त बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है, जिससे उन्हें नई विनिर्माण सुविधाओं में निवेश करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
  • यह योजना विशेष रूप से उन महत्वपूर्ण KSMs, DIs और APIs पर केंद्रित है जिनके लिए भारत की आयात निर्भरता अधिक थी।

थोक दवाओं के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना

  • यह योजना भारत में महत्वपूर्ण KSMs, DIs और APIs के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
  • इसका मुख्य उद्देश्य आयात पर निर्भरता को कम करना, दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन बढ़ाना और देश को दवा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
  • योजना के तहत, पात्र विनिर्माताओं को लक्षित उत्पादों की वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
  • इसमें पेनिसिलिन जी, क्लैवुलैनिक एसिड, पैरा अमीनो फिनोल (PAP) जैसे महत्वपूर्ण घटकों का उत्पादन शामिल है, जो विभिन्न एंटीबायोटिक्स, हृदय संबंधी दवाओं और पैरासिटामोल के लिए आवश्यक हैं।
  • यह योजना ग्रीनफील्ड परियोजनाओं (नए सिरे से स्थापित की गई परियोजनाएं) को विशेष रूप से प्रोत्साहित करती है, जिससे अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधाओं का विकास होता है।
  • घरेलू मूल्यवर्धन पर विशेष जोर दिया जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर कच्चे माल और प्रौद्योगिकियों का उपयोग बढ़ता है।
  • इस पहल से न केवल आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा मिलता है, बल्कि रोजगार सृजन भी होता है और क्षेत्रीय विकास में भी योगदान मिलता है, जैसा कि हिमाचल प्रदेश में जैव-औषधीय निवेश के मामले में देखा गया है।
  • योजना का लक्ष्य भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना और बाहरी आपूर्ति व्यवधानों तथा कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करना है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन भारत में महत्वपूर्ण प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (KSM), दवा मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय औषधीय सामग्री (API) के उत्पादन को बढ़ावा देना।
आयात पर निर्भरता में कमी दवा आपूर्ति श्रृंखला में विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को कम करना, जिससे लचीलापन और आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
पेनिसिलिन जी का पुनः विनिर्माण लगभग तीन दशकों के अंतराल के बाद पेनिसिलिन जी का घरेलू उत्पादन फिर से शुरू होना, एंटीबायोटिक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कमजोरी को दूर करना।
किण्वन-आधारित क्षमताओं का विकास पोटेशियम क्लैवुलनेट और पेनिसिलिन जी जैसे किण्वन-आधारित KSM के लिए नई विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना, उन्नत दवा उत्पादन तकनीकों में क्षमता निर्माण।
स्वास्थ्य सुरक्षा में वृद्धि आवश्यक दवाओं के घरेलू उत्पादन से स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत होती है और बाहरी आपूर्ति व्यवधानों के जोखिम कम होते हैं।
रोजगार सृजन और आर्थिक विकास नई विनिर्माण इकाइयों में निवेश से प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • दवा क्षेत्र में आयात बिल में कमी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है।
  • घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता।
  • विनिर्माण इकाइयों में निवेश से पूंजी निर्माण और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन।

सामरिक महत्व

  • दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन और सुरक्षा सुनिश्चित करना, विशेषकर वैश्विक संकटों के दौरान।
  • प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों और API के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करके राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना।
  • भारत को वैश्विक दवा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना, जिससे इसकी भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होती है।

सामाजिक महत्व

  • आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और सामर्थ्य सुनिश्चित करना, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होता है।
  • दवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करना, विशेषकर तकनीकी और कुशल श्रम के लिए।
  • दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर बेहतर नियंत्रण, क्योंकि घरेलू उत्पादन नियामक निरीक्षण के अधीन होता है।

पर्यावरणीय महत्व

  • स्थानीय उत्पादन से लंबी दूरी के परिवहन की आवश्यकता कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
  • घरेलू विनिर्माण इकाइयों में पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकता है।

चुनौतियाँ

1. तकनीकी विशेषज्ञता और अनुसंधान एवं विकास

  • कुछ उन्नत KSM और API के उत्पादन के लिए उच्च-स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता और निरंतर अनुसंधान एवं विकास (R&D) निवेश की आवश्यकता होती है।
  • भारत में किण्वन-आधारित प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और नवाचार को और बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

2. कच्चे माल की उपलब्धता और लागत

  • कुछ प्रमुख कच्चे माल अभी भी आयात किए जाते हैं, जिससे उत्पादन लागत प्रभावित हो सकती है।
  • घरेलू स्तर पर कच्चे माल के उत्पादन के लिए और अधिक निवेश और नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है।

3. नियामक और अनुमोदन प्रक्रियाएँ

  • नई विनिर्माण सुविधाओं की स्थापना और उत्पादों के अनुमोदन में लगने वाला समय लंबा हो सकता है।
  • नियामक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और त्वरित अनुमोदन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

4. वैश्विक प्रतिस्पर्धा

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सस्ते आयातित उत्पादों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
  • घरेलू उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागत-दक्षता और गुणवत्ता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

5. बुनियादी ढाँचा और लॉजिस्टिक्स

  • दवा विनिर्माण के लिए आवश्यक विशिष्ट बुनियादी ढाँचे और कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की आवश्यकता होती है।
  • दूरदराज के क्षेत्रों में विनिर्माण इकाइयों के लिए परिवहन और भंडारण सुविधाओं में सुधार की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
तकनीकी अंतर उन्नत किण्वन-आधारित KSM के उत्पादन में विशेषज्ञता की कमी।
लागत प्रतिस्पर्धा वैश्विक बाजारों से सस्ते आयातित उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करना।
पर्यावरणीय अनुपालन दवा उत्पादन में सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
कुशल कार्यबल की कमी दवा विनिर्माण और अनुसंधान के लिए विशिष्ट कौशल वाले श्रमिकों की उपलब्धता।
दीर्घकालिक स्थिरता PLI योजना के बाद भी घरेलू उत्पादन की निरंतरता और व्यवहार्यता बनाए रखना।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना

आगे की राह

  • दवा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश में वृद्धि करना।
  • किण्वन-आधारित प्रौद्योगिकियों सहित उन्नत दवा विनिर्माण तकनीकों में कौशल विकास कार्यक्रमों को लागू करना।
  • कच्चे माल के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने और आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करने के लिए नीतिगत समर्थन प्रदान करना।
  • नियामक अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना।
  • घरेलू दवा उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को लागू करना।
  • वैश्विक बाजारों में भारतीय दवा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए निर्यात प्रोत्साहन रणनीतियाँ विकसित करना।
  • दवा विनिर्माण के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचे, जैसे विशेष औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, का विकास करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना · थोक दवाएं · प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (केएसएम) · दवा मध्यवर्ती (डीआई) · सक्रिय औषधीय सामग्री (एपीआई) · आयात निर्भरता में कमी · दवा आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन · स्वास्थ्य सुरक्षा · घरेलू विनिर्माण · आत्मनिर्भर भारत

अवधारणा प्रवाह

सरकार द्वारा PLI योजना की घोषणा  →  दवा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन  →  महत्वपूर्ण KSM, DI, API का उत्पादन  →  आयात पर निर्भरता में कमी  →  दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन और स्वास्थ्य सुरक्षा में वृद्धि

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. यह योजना भारत में प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों (KSM), दवा मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय औषधीय सामग्री (API) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है।
2. लाइफियस फार्मा प्राइवेट लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश में पेनिसिलिन जी के बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा स्थापित की है, जिससे लगभग तीन दशकों के अंतराल के बाद इसका घरेलू विनिर्माण फिर से शुरू हुआ है।
3. मेघमानी एलएलपी ने गुजरात में पैरा अमीनो फिनोल (PAP) के लिए विनिर्माण क्षमता स्थापित की है, जो पैरासिटामोल के लिए एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि पीएलआई योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में महत्वपूर्ण दवा सामग्री के घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है। कथन 2 सही है क्योंकि लाइफियस फार्मा ने पेनिसिलिन जी का उत्पादन फिर से शुरू किया है, जो आयात निर्भरता को कम करने में सहायक है। कथन 3 भी सही है क्योंकि मेघमानी एलएलपी ने पैरासिटामोल के लिए महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री PAP का उत्पादन शुरू किया है, जिससे घरेलू क्षमता बढ़ी है।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

  1. A. पेनिसिलिन जी: एंटीबायोटिक दवाओं के लिए एक प्रमुख प्रारंभिक सामग्री
  2. B. क्लैवुलैनिक एसिड: उच्च रक्तचाप के लिए उपयोग की जाने वाली दवा
  3. C. सल्फेडियाज़िन: हृदय रोग संबंधी दवाओं में प्रयुक्त एपीआई
  4. D. पैरा अमीनो फिनोल (PAP): इंसुलिन के उत्पादन में महत्वपूर्ण

उत्तर: A. पेनिसिलिन जी: एंटीबायोटिक दवाओं के लिए एक प्रमुख प्रारंभिक सामग्री — पेनिसिलिन जी एंटीबायोटिक दवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री है। क्लैवुलैनिक एसिड एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने वाला बीटा-लैक्टामेज़ अवरोधक है। सल्फेडियाज़िन एक एंटीबायोटिक है और टेल्मिसार्टन व ओल्मेसार्टन उच्च रक्तचाप के लिए उपयोग किए जाते हैं। पैरा अमीनो फिनोल (PAP) पैरासिटामोल के लिए एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्री है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत में दवा आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ाने में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की भूमिका का मूल्यांकन करें। यह योजना देश की आयात निर्भरता को कम करने और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने में कैसे सहायक है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की संरचना:
1. परिचय: पीएलआई योजना (उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना) का संक्षिप्त परिचय, विशेष रूप से थोक दवाओं के संदर्भ में।
2. योजना की भूमिका और उद्देश्य: प्रमुख प्रारंभिक सामग्री (KSM), दवा मध्यवर्ती (DI) और सक्रिय औषधीय सामग्री (API) के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में पीएलआई योजना की भूमिका का वर्णन करें।
3. लचीलेपन में वृद्धि: उदाहरणों के साथ समझाएं कि कैसे यह योजना दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन बढ़ा रही है (जैसे पेनिसिलिन जी, क्लैवुलैनिक एसिड, PAP के उत्पादन का पुनः आरंभ/वृद्धि)।
4. आयात निर्भरता में कमी: बताएं कि कैसे घरेलू उत्पादन में वृद्धि से आयात पर निर्भरता कम हो रही है (जैसे सल्फेडियाज़िन के आयात में कमी)।
5. स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना: चर्चा करें कि यह योजना बाहरी आपूर्ति व्यवधानों और कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करके देश की स्वास्थ्य सुरक्षा में कैसे योगदान करती है।
6. केस स्टडी/उदाहरण: लेख में उल्लिखित परियोजनाओं (लाइफियस फार्मा, किनवान प्राइवेट लिमिटेड, आंध्र ऑर्गेनिक्स लिमिटेड, मेघमानी एलएलपी) का उपयोग उदाहरण के रूप में करें।
7. निष्कर्ष: ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य और भारत को वैश्विक दवा विनिर्माण केंद्र बनाने में पीएलआई योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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