06 Aug नमामि गंगे: सीवरेज परियोजनाओं से गंगा प्रदूषण में सुधार 2025 तक
✎ नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने, उसके संरक्षण और जैव-विविधता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और एकीकृत केंद्र सरकार का कार्यक्रम है, जिसमें सीवरेज उपचार, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और जलीय जीवन संरक्षण पर विशेष…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भूगोल (नदी प्रणालियाँ, पर्यावरण भूगोल) | GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप, केंद्र-राज्य संबंध) | GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी (संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन), आपदा प्रबंधन
- Prelims: नमामि गंगे अभियान, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), सीवरेज उपचार संयंत्र (STP), प्रदूषित नदी खंड (PRS), जैविक जल गुणवत्ता (BWQ), घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना, गंगा डॉल्फ़िन, रिवर रैंचिंग, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) संरक्षण
- Essay: नदियाँ: सभ्यता का पालना और पारिस्थितिकी का आधार, सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी का महत्व
त्वरित पुनरावृत्ति: नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने, उसके संरक्षण और जैव-विविधता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक और एकीकृत केंद्र सरकार का कार्यक्रम है, जिसमें सीवरेज उपचार, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और जलीय जीवन संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय ने नमामि गंगे अभियान- II (Namami Gange Abhiyan- II) के अंतर्गत की गई प्रगति पर एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं (Sewerage Infrastructure Projects) के क्रियान्वयन, गंगा की मुख्यधारा में प्रदूषण में कमी, जैविक जल गुणवत्ता (Biological Water Quality) में सुधार और जैव-विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया है। यह अभियान गंगा नदी के समग्र कायाकल्प और संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
पृष्ठभूमि
- नमामि गंगे कार्यक्रम को जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लैगशिप कार्यक्रम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था, जिसका उद्देश्य गंगा नदी का प्रदूषण कम करना, उसका संरक्षण और कायाकल्प करना है।
- यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) और इसके राज्य समकक्ष संगठनों (राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- कार्यक्रम के मुख्य स्तंभों में सीवरेज अवसंरचना, औद्योगिक प्रदूषण निगरानी, नदी-सतह की सफाई, जैव-विविधता संरक्षण, वनीकरण, जन-जागरूकता और नदी-शहरी संबंध शामिल हैं।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2025 में गंगा की मुख्यधारा के कई प्रदूषित खंडों (Polluted River Stretches) में सुधार देखा गया है, विशेषकर उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में।
- इस कार्यक्रम के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों में जलीय जीवन को बनाए रखने के लिए जैव-विविधता संरक्षण को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया है।
नमामि गंगे अभियान क्या है?
- नमामि गंगे अभियान गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए भारत सरकार का एक एकीकृत संरक्षण मिशन है। इसका उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करना और उसके संरक्षण एवं कायाकल्प को सुनिश्चित करना है।
- यह कार्यक्रम गंगा नदी के किनारे सीवरेज उपचार संयंत्रों (Sewerage Treatment Plants – STPs) के निर्माण और उन्नयन पर केंद्रित है, ताकि अनुपचारित सीवेज को नदी में जाने से रोका जा सके। जून 2026 तक 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन किया गया है।
- औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त निगरानी और प्रवर्तन तंत्र स्थापित किए गए हैं, विशेषकर उन उद्योगों पर जो सीधे गंगा में अपशिष्ट छोड़ते हैं।
- जैव-विविधता संरक्षण इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें वैज्ञानिक शोध, प्राकृतिक आवास की बहाली, प्रजातियों के संरक्षण (जैसे घड़ियाल, डॉल्फ़िन, कछुए), मत्स्य पालन संरक्षण और आर्द्रभूमि की बहाली शामिल है।
- ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’ तैयार की गई है और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है।
- गंगा डॉल्फ़िन, कछुओं और अन्य जलीय जीवों के बचाव, पुनर्वास और निगरानी के लिए चार जलीय जीव बचाव और पुनर्वास केंद्र तथा भारत की पहली डॉल्फ़िन बचाव एम्बुलेंस स्थापित की गई है।
- ‘रिवर रैंचिंग’ (नदी में मछलियाँ छोड़ने का कार्य) के माध्यम से देशी मछलियों की संख्या को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें 2.05 करोड़ से अधिक मछली के बीज गंगा और उसकी सहायक नदियों में छोड़े गए हैं।
- वृक्षारोपण अभियान और गंगा प्रहरियों (सामुदायिक स्वयंसेवकों) को संगठित करके सामुदायिक भागीदारी और जन-जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे नदी संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका सुनिश्चित हो सके।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| सीवरेज अवसंरचना परियोजनाएं | गंगा नदी में प्रदूषण कम करने और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए सीवेज उपचार क्षमता का विस्तार। |
| जैविक जल गुणवत्ता निगरानी | नदी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का आकलन करने और जलीय जीवन को बनाए रखने की क्षमता को समझने में सहायक। |
| जैव-विविधता संरक्षण | घड़ियाल, डॉल्फ़िन, कछुए और मछली जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों का संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की बहाली। |
| आर्द्रभूमि बहाली और प्रबंधन | पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों की पहचान, संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन, जो नदी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। |
| नदी रैंचिंग (मछली छोड़ना) | देशी मछली प्रजातियों की संख्या को फिर से बढ़ाने और नदियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण। |
| सामुदायिक भागीदारी (गंगा प्रहरी) | स्थानीय समुदायों को नदी संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, जिससे कार्यक्रम की स्थिरता और प्रभावशीलता बढ़ती है। |
महत्व
पर्यावरणिक महत्व
- गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों की जल गुणवत्ता में सुधार, जिससे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को लाभ होता है।
- संकटग्रस्त जलीय प्रजातियों जैसे घड़ियाल, गंगा डॉल्फ़िन और कछुओं का संरक्षण तथा उनके प्राकृतिक आवासों की बहाली।
- आर्द्रभूमि (Wetland) का वैज्ञानिक प्रबंधन और बहाली, जो नदी के स्वास्थ्य और जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सामाजिक महत्व
- स्वच्छ गंगा जल से लाखों लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका में सुधार, विशेषकर उन समुदायों के लिए जो नदी पर निर्भर हैं।
- गंगा प्रहरियों के माध्यम से स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना, जिससे नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता और स्वामित्व बढ़ता है।
आर्थिक महत्व
- मत्स्य पालन संरक्षण और ‘रिवर रैंचिंग’ के माध्यम से स्थानीय मछुआरों की आजीविका को सुदृढ़ करना।
- स्वच्छ जल पर्यटन और संबंधित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की क्षमता।
शासनिक महत्व
- केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को मजबूत करना, जिससे बड़े पैमाने पर नदी संरक्षण परियोजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो पाता है।
- वैज्ञानिक शोध और निगरानी के माध्यम से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देना।
चुनौतियाँ
1. निरंतर प्रदूषण का दबाव
- शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट का निरंतर प्रवाह।
- कृषि अपवाह और ठोस कचरा प्रबंधन की चुनौतियाँ।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण
2. जैव-विविधता संरक्षण की जटिलता
- संकटग्रस्त प्रजातियों के आवासों का अतिक्रमण और विखंडन।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और आक्रामक प्रजातियों का खतरा।
यूपीएससी लिंक: जैव-विविधता और उसका संरक्षण
3. वित्तीय और तकनीकी बाधाएँ
- सीवेज उपचार संयंत्रों के निर्माण और रखरखाव के लिए पर्याप्त वित्तपोषण की आवश्यकता।
- उन्नत उपचार प्रौद्योगिकियों को अपनाने और कुशल जनशक्ति की कमी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे आदि
4. अंतर-राज्यीय समन्वय
- गंगा बेसिन कई राज्यों में फैला हुआ है, जिससे प्रभावी समन्वय और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
- जल-साझाकरण और प्रदूषण नियंत्रण नीतियों पर राज्यों के बीच सहमति बनाना।
यूपीएससी लिंक: संघवाद, केंद्र-राज्य संबंध
5. जन जागरूकता और भागीदारी
- नदी को प्रदूषित न करने और संरक्षण प्रयासों में सहयोग करने के लिए जन जागरूकता की कमी।
- स्थानीय समुदायों को दीर्घकालिक रूप से कार्यक्रम से जोड़े रखना।
यूपीएससी लिंक: शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| शहरी सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट | नदी में लगातार प्रदूषण का मुख्य स्रोत, उपचार क्षमता बढ़ाने के बावजूद। |
| कृषि अपवाह | कीटनाशकों और उर्वरकों का बहाव, जो जल गुणवत्ता को प्रभावित करता है और यूट्रोफिकेशन का कारण बनता है। |
| जलीय जैव-विविधता का क्षरण | आवासों का नुकसान, अवैध शिकार और प्रदूषण के कारण कई प्रजातियों का संकटग्रस्त होना। |
| आर्द्रभूमि का अतिक्रमण और क्षरण | शहरीकरण और कृषि विस्तार के कारण आर्द्रभूमियों का सिकुड़ना, जो नदी के प्राकृतिक फिल्टर के रूप में कार्य करती हैं। |
| कार्यक्रमों का दीर्घकालिक रखरखाव | निर्मित अवसंरचनाओं (जैसे STP) के संचालन और रखरखाव के लिए निरंतर धन और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता। |
| जलवायु परिवर्तन के प्रभाव | बदलते वर्षा पैटर्न और ग्लेशियरों के पिघलने से नदी के प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाला दीर्घकालिक प्रभाव। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- नमामि गंगे अभियान (Namami Gange Programme)
आगे की राह
- सीवेज उपचार क्षमता का और विस्तार करना तथा मौजूदा संयंत्रों के प्रभावी संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करना।
- औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियामक उपाय लागू करना और उद्योगों को शून्य तरल निर्वहन (Zero Liquid Discharge) की ओर प्रोत्साहित करना।
- कृषि अपवाह को कम करने के लिए जैविक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना।
- जलीय जैव-विविधता के संरक्षण के लिए आवास बहाली, प्रजाति-विशिष्ट संरक्षण कार्यक्रमों और अवैध शिकार विरोधी उपायों को मजबूत करना।
- आर्द्रभूमि (Wetland) संरक्षण और प्रबंधन को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्राथमिकता देना, जिसमें उनकी वैज्ञानिक पहचान और बहाली शामिल हो।
- गंगा बेसिन के राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन दृष्टिकोण को अपनाना।
- जन जागरूकता अभियानों को तेज करना और स्थानीय समुदायों, विशेषकर युवाओं को नदी संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करना।
- नदी के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों (जैसे रिमोट सेंसिंग) का उपयोग करना और डेटा-आधारित निर्णय लेने को बढ़ावा देना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नमामि गंगे अभियान · गंगा नदी संरक्षण · सीवेज उपचार संयंत्र · जैव-विविधता संरक्षण · जलीय जीव संरक्षण · प्रदूषित नदी खंड · जैविक जल गुणवत्ता · नदी पुनरुद्धार · आर्द्रभूमि बहाली · राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 21’, ‘note’: ‘स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 48क’, ‘note’: ‘पर्यावरण का संरक्षण और सुधार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 51क (छ)’, ‘note’: ‘प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन’}
अवधारणा प्रवाह
शहरीकरण और औद्योगिक विकास से प्रदूषण → नदी में सीवेज और अपशिष्ट का निर्वहन → जल गुणवत्ता में गिरावट और जलीय जीवन को खतरा → नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सीवेज उपचार और संरक्षण प्रयास → जल गुणवत्ता में सुधार और जैव-विविधता का संरक्षण → स्वच्छ नदी पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य को लाभ
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नमामि गंगे अभियान- II के अंतर्गत, वर्ष 2025 के दौरान कुल 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया।
2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2025 में गंगा की मुख्यधारा में प्रदूषित खंडों की संख्या में वृद्धि हुई है।
3. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि नमामि गंगे अभियान- II के अंतर्गत, वर्ष 2025 के दौरान कुल 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया। कथन 2 गलत है क्योंकि रिपोर्ट में ‘सुधार हुआ’ और ‘कोई पीआरएस नहीं’ जैसी प्रवृत्तियों का उल्लेख है, जो प्रदूषित खंडों में कमी या सुधार को दर्शाता है। कथन 3 सही है क्योंकि भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है।
Q2. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत जैव-विविधता संरक्षण के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
1. इस कार्यक्रम में वैज्ञानिक शोध, प्राकृतिक आवास की बहाली और प्रजातियों के संरक्षण को एक प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया है।
2. ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’ गंगा नदी खंडों में पाए गए घड़ियालों की संख्या के आधार पर तैयार की गई है।
3. ‘टर्टल सर्वाइवल अलायंस फ़ाउंडेशन इंडिया’ (TSAFI) गंभीर रूप से लुप्तप्राय ‘रेड-क्राउंड रूफ़्ड टर्टल’ के संरक्षण में मदद कर रहा है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि जैव-विविधता संरक्षण में वैज्ञानिक शोध, आवास बहाली और प्रजाति संरक्षण शामिल हैं। कथन 2 सही है क्योंकि 3,037 घड़ियाल पाए जाने के बाद ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’ तैयार की गई। कथन 3 सही है क्योंकि TSAFI ‘रेड-क्राउंड रूफ़्ड टर्टल’ के संरक्षण में सहायता कर रहा है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नमामि गंगे अभियान गंगा नदी के पुनरुद्धार और संरक्षण में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों और अब तक प्राप्त सफलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: परिचय: नमामि गंगे अभियान (Namami Gange Mission) का संक्षिप्त परिचय, इसके लॉन्च का वर्ष और मुख्य उद्देश्य (गंगा नदी का प्रदूषण कम करना और उसका संरक्षण व कायाकल्प करना) बताएँ।
मुख्य भाग:
1. प्रमुख उद्देश्य: अभियान के व्यापक उद्देश्यों को सूचीबद्ध करें, जैसे:
* प्रदूषण का प्रभावी उन्मूलन (Effective Abatement of Pollution) – सीवेज उपचार, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण।
* नदी का संरक्षण और कायाकल्प (Conservation and Rejuvenation) – जैव-विविधता संरक्षण, वनीकरण, आर्द्रभूमि बहाली।
* जनभागीदारी (Public Participation)।
2. प्राप्त सफलताएँ (सकारात्मक पहलू):
* सीवेज अवसंरचना: सीवेज उपचार संयंत्रों (STPs) की स्थापना और क्षमता वृद्धि (जैसे 4,263 एमएलडी क्षमता का सृजन)।
* जल गुणवत्ता में सुधार: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषित नदी खंडों में कमी और जैविक जल गुणवत्ता (BWQ) में सुधार (जैसे उत्तराखंड में पीआरएस का हटना)।
* जैव-विविधता संरक्षण: घड़ियाल, डॉल्फ़िन, कछुओं और मछली प्रजातियों का संरक्षण (जैसे ‘राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना’, डॉल्फ़िन बचाव एम्बुलेंस, रिवर रैंचिंग)।
* आर्द्रभूमि बहाली और वनीकरण: आर्द्रभूमियों की वैज्ञानिक पहचान और प्रबंधन योजनाएँ, वनीकरण के प्रयास (जैसे 33,024 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण)।
* संस्थागत सुदृढ़ीकरण: भारतीय वन्यजीव संस्थान में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र की स्थापना।
3. चुनौतियाँ और समालोचना (नकारात्मक पहलू/सुधार के क्षेत्र):
* अभी भी कुछ प्रदूषित खंडों का अस्तित्व (जैसे बिहार और पश्चिम बंगाल में आंशिक प्रदूषण)।
* कार्यक्रम की गति और क्रियान्वयन में चुनौतियाँ।
* सतत वित्तपोषण और रखरखाव की आवश्यकता।
* सभी सहायक नदियों और उप-नदियों तक पहुँच का विस्तार।
निष्कर्ष: अभियान के महत्व को रेखांकित करें और भविष्य की राह सुझाएँ, जिसमें सतत प्रयासों, प्रौद्योगिकी के उपयोग और जनभागीदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया जाए।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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