नशामुक्त भारत के लिए पीएम मोदी ने ‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ का किया शुभारंभ

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग(वीसी) के माध्यम से आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए नशा — concept mind map

नशामुक्त भारत के लिए पीएम मोदी ने ‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ का किया शुभारंभ

✎ नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान एक राष्ट्रीय परियोजना है जिसका लक्ष्य युवाओं को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से बचाकर उन्हें 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक मुद्दे  |  GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएँ  |  GS Paper III — आंतरिक सुरक्षा, स्वास्थ्य
  • Prelims: नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान, मादक पदार्थों का दुरुपयोग, युवा सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय परियोजना, नशा मुक्ति
  • Essay: विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की भूमिका और चुनौतियाँ, नशा मुक्त समाज: एक स्वस्थ राष्ट्र की नींव

त्वरित पुनरावृत्ति: नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान एक राष्ट्रीय परियोजना है जिसका लक्ष्य युवाओं को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से बचाकर उन्हें ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाना है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘विकसित भारत संकल्प अभियान के लिए नशा मुक्त युवा’ के शुभारंभ के अवसर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस पहल को ‘काशी की पावन धरती से उठा कल्याणकारी विचार’ बताया, जो अब एक राष्ट्रीय परियोजना बन गया है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से नशा मुक्त रहकर अपनी क्षमता को सुरक्षित रखने का आह्वान किया और देश भर के कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से इस दिशा में विशेष योगदान देने का आग्रह किया।

पृष्ठभूमि

  • भारत में मादक पदार्थों का दुरुपयोग (Substance Abuse) एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रही है।
  • यह न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करता है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • सरकार ने नशा मुक्ति के लिए विभिन्न स्तरों पर कई पहलें की हैं, जिनमें जागरूकता अभियान, पुनर्वास कार्यक्रम और कानून प्रवर्तन शामिल हैं।
  • युवाओं को देश का भविष्य माना जाता है, और उनकी ऊर्जा तथा क्षमता का सही दिशा में उपयोग ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सामूहिकता की शक्ति और जनभागीदारी को ऐसे सामाजिक अभियानों की सफलता के लिए आवश्यक माना जाता है।
  • यह अभियान ‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ का एक अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी योजनाओं और पहलों के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा उनके लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।

‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ क्या है?

  • यह एक राष्ट्रीय परियोजना है जिसका उद्देश्य भारत के युवाओं को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से बचाना और उन्हें नशा मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है।
  • अभियान का मुख्य लक्ष्य युवाओं को यह समझाना है कि ड्रग्स केवल अस्थायी ‘हाई’ प्रदान करते हैं, जबकि करियर और पारिवारिक जीवन को ‘लो’ कर देते हैं।
  • यह पहल ‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ का हिस्सा है, जो देश के समग्र विकास के लिए विभिन्न सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित है।
  • अभियान में देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया है, ताकि वे युवाओं को नशा मुक्ति के महत्व के बारे में शिक्षित कर सकें।
  • इसका उद्देश्य सामूहिकता की ताकत का उपयोग करते हुए हर युवा मन तक पहुँचना और उन्हें नशा मुक्त जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
  • यह अभियान युवाओं को अपनी वास्तविक क्षमता (Potential) को पहचानने और उसे संरक्षित करने के लिए सशक्त बनाने पर बल देता है, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक योगदान दे सकें।
  • यह एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी शामिल है।
  • इसकी जड़ें ‘काशी की पावन धरती’ से निकली एक कल्याणकारी सोच में हैं, जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जा रहा है।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान यह अभियान युवाओं को नशाखोरी से दूर रखने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा काशी से शुरू हुआ यह विचार अब पूरे देश में लागू होगा, जिससे इसकी पहुँच और प्रभाव में वृद्धि होगी।
सामूहिकता की ताकत प्रधानमंत्री ने सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
युवाओं के ‘पोटेंशियल’ की सुरक्षा नशा मुक्ति से युवाओं की क्षमता (Potential) का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित होगा, जो उनके करियर और पारिवारिक जीवन के लिए आवश्यक है।
कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की भूमिका उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रोफेसरों से विशेष आह्वान किया गया है कि वे नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • नशाखोरी समाज में अपराध, स्वास्थ्य समस्याओं और पारिवारिक विघटन का एक प्रमुख कारण है। इस अभियान से सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
  • युवाओं को नशे से दूर रखकर उन्हें स्वस्थ और उत्पादक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।

आर्थिक महत्व

  • नशे की लत से ग्रस्त व्यक्ति की उत्पादकता कम हो जाती है, जिससे राष्ट्रीय मानव पूंजी का नुकसान होता है। नशा मुक्ति से कार्यबल की उत्पादकता बढ़ेगी।
  • नशाखोरी पर होने वाला स्वास्थ्य व्यय कम होगा, जिससे व्यक्तियों और सरकार दोनों पर वित्तीय बोझ कम होगा।

मानव संसाधन विकास

  • युवा देश का सबसे महत्वपूर्ण मानव संसाधन हैं। उन्हें नशे से बचाकर उनकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
  • यह अभियान युवाओं को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सक्रिय योगदान देने के लिए सशक्त करेगा।

शासन और नीति

  • यह अभियान सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की नीति को दर्शाता है, जिसमें जनभागीदारी पर जोर दिया गया है।
  • उच्च शिक्षा संस्थानों को इस अभियान से जोड़ना एक रणनीतिक कदम है, क्योंकि वे युवा पीढ़ी के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं।

चुनौतियाँ

1. नशाखोरी का बढ़ता प्रचलन

  • विशेष रूप से युवाओं में विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों का उपयोग बढ़ रहा है, जिसमें सिंथेटिक ड्रग्स भी शामिल हैं।
  • नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता और ऑनलाइन माध्यमों से उनकी खरीद-फरोख्त एक बड़ी चुनौती है।

2. जागरूकता और शिक्षा का अभाव

  • नशे के दुष्प्रभावों और उसके कानूनी परिणामों के बारे में युवाओं में पर्याप्त जानकारी का अभाव है।
  • माता-पिता, शिक्षकों और समुदाय के सदस्यों को भी इस मुद्दे पर शिक्षित करने की आवश्यकता है।

3. पुनर्वास और उपचार सुविधाओं की कमी

  • नशे की लत से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए पर्याप्त और सुलभ पुनर्वास (Rehabilitation) तथा उपचार केंद्रों का अभाव है।
  • पुनर्वास के बाद सामाजिक पुनः एकीकरण (Social Reintegration) भी एक चुनौती है।

4. सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी

  • भारत की भौगोलिक स्थिति इसे ‘गोल्डन क्रिसेंट’ और ‘गोल्डन ट्रायंगल’ के बीच एक पारगमन बिंदु बनाती है, जिससे नशीले पदार्थों की तस्करी आसान हो जाती है।
  • यह आंतरिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर खतरा है।

5. कानूनी और प्रवर्तन संबंधी चुनौतियाँ

  • नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियाँ हैं।
  • पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय और क्षमता निर्माण की आवश्यकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
नशीले पदार्थों की उपलब्धता ऑनलाइन माध्यमों और सीमा पार तस्करी के कारण नशीले पदार्थों तक युवाओं की आसान पहुँच।
सामाजिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य पीयर प्रेशर, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण युवाओं का नशे की ओर झुकाव।
प्रभावी पुनर्वास का अभाव नशे की लत से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण उपचार तथा पुनर्वास सुविधाओं की कमी।
जागरूकता की कमी नशे के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों और कानूनी परिणामों के बारे में युवाओं में अपर्याप्त जानकारी।
कानून प्रवर्तन में चुनौतियाँ नशीले पदार्थों के व्यापार को रोकने और अपराधियों को दंडित करने में प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान

आगे की राह

  • स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में नशा मुक्ति से संबंधित शिक्षा को शामिल किया जाए।
  • नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिसमें सोशल मीडिया का उपयोग हो।
  • नशे की लत से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण उपचार तथा पुनर्वास केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए।
  • सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सीमा सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
  • कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण और उनके बीच समन्वय को बढ़ाया जाए।
  • युवाओं के लिए रचनात्मक गतिविधियों, खेलकूद और कौशल विकास के अवसरों को बढ़ावा दिया जाए ताकि वे सकारात्मक दिशा में ऊर्जा लगा सकें।
  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाया जाए, क्योंकि कई बार मानसिक तनाव भी नशे का कारण बनता है।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

नशा मुक्त युवा · विकसित भारत संकल्प अभियान · मादक द्रव्यों का दुरुपयोग · युवा सशक्तिकरण · सामाजिक न्याय · सार्वजनिक स्वास्थ्य · राष्ट्रीय परियोजना · सामुदायिक भागीदारी · नशा मुक्ति कार्यक्रम · नीतिगत हस्तक्षेप

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 47’, ‘note’: ‘राज्य का कर्तव्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार’}

अवधारणा प्रवाह

नशाखोरी का बढ़ता प्रचलन  →  युवाओं की क्षमता का ह्रास  →  सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ  →  नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान  →  जागरूकता और रोकथाम के प्रयास  →  युवाओं का सशक्तिकरण  →  विकसित भारत का लक्ष्य

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ का उद्देश्य युवाओं को मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से बचाना है।
2. यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों के युवाओं पर केंद्रित है।
3. प्रधानमंत्री ने इस अभियान को ‘नेशनल प्रोजेक्ट’ बताया है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से मुक्त करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि अभियान का लक्ष्य व्यापक है और यह केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि प्रधानमंत्री ने स्वयं इसे ‘नेशनल प्रोजेक्ट’ बताया है।

Q2. अभिकथन (A): मादक द्रव्यों का सेवन व्यक्ति के करियर और पारिवारिक जीवन को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
कारण (R): ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ युवाओं को अपनी क्षमता का संरक्षण करने के लिए प्रेरित करता है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

  1. A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है।
  2. A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  3. A सही है, लेकिन R गलत है।
  4. A गलत है, लेकिन R सही है।

उत्तर: A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या है। — अभिकथन (A) सही है क्योंकि मादक द्रव्यों का सेवन करियर और पारिवारिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, जैसा कि प्रधानमंत्री ने भी उल्लेख किया है। कारण (R) भी सही है क्योंकि अभियान का लक्ष्य युवाओं को नशामुक्त रहकर अपनी क्षमता को बचाने के लिए प्रेरित करना है। R, A की सही व्याख्या है क्योंकि अभियान का उद्देश्य A में वर्णित समस्या का समाधान करना है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम सामाजिक परिवर्तन लाने में किस प्रकार सहायक हो सकते हैं? भारत में मादक द्रव्यों के दुरुपयोग की समस्या से निपटने में सरकार के प्रयासों और चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ का संक्षिप्त परिचय और इसका महत्व।
2. सामाजिक परिवर्तन में भूमिका: यह अभियान युवाओं को सशक्त करके, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर, जागरूकता फैलाकर और व्यवहारिक परिवर्तन लाकर सामाजिक परिवर्तन कैसे ला सकता है, इस पर चर्चा।
3. सरकारी प्रयास: भारत सरकार द्वारा मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से निपटने के लिए किए गए विभिन्न प्रयासों का उल्लेख, जैसे:
* ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (NMBA)
* नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985
* राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP) फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (DDAP)
* विभिन्न मंत्रालयों (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय) की भूमिका।
* पुनर्वास केंद्र और परामर्श सेवाएँ।
4. चुनौतियाँ: मादक द्रव्यों के दुरुपयोग की समस्या से निपटने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण, जैसे:
* सीमा पार से मादक द्रव्यों की तस्करी।
* युवाओं में बढ़ती लत।
* जागरूकता की कमी।
* पुनर्वास सुविधाओं की अपर्याप्तता।
* सामाजिक कलंक (Stigma)।
* कानून प्रवर्तन में चुनौतियाँ।
5. समालोचनात्मक परीक्षण: सरकारी प्रयासों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन, कमियों और सुधार के क्षेत्रों पर प्रकाश डालना।
6. निष्कर्ष: एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल देते हुए, जिसमें शिक्षा, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास शामिल हो।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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