17 Sep मोदी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए भारत को सर्वश्रेष्ठ विकल्प बताया
✎ भारत सरकार देश को सेमीकंडक्टर विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए व्यापक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से घरेलू उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाना, संवृद्धि, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय। आधारभूत संरचना: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, विमानपत्तन, रेलवे आदि। निवेश मॉडल। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता। | GS Paper II — सरकार की नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
- Prelims: सेमीकंडक्टर (Semiconductor), राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission), सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme), मेक इन इंडिया (Make in India), आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat), उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजना
- Essay: भारत का आर्थिक उदय और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में इसकी भूमिका।, तकनीकी आत्मनिर्भरता: 21वीं सदी के भारत की कुंजी।
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत सरकार देश को सेमीकंडक्टर विनिर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके लिए व्यापक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से घरेलू उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री ने हाल ही में ‘सेमीकॉन इंडिया’ सम्मेलन के पाँचवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत वैश्विक विनिर्माण के लिए एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है और सरकार देश को सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि भारत में निर्मित चिप्स अब ग्राहकों तक पहुँचने लगे हैं, जो इस क्षेत्र में हुई प्रगति का प्रमाण है।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ने 2022 में सेमीकंडक्टर कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों, विशेषकर COVID-19 महामारी के दौरान, ने सेमीकंडक्टर के घरेलू उत्पादन के महत्व को उजागर किया है।
- सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, संचार और रक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शक्ति प्रदान करते हैं।
- भारत ने अपनी ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के तहत उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है।
- सरकार ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाएँ शुरू की हैं।
- भारत 7.8 प्रतिशत की तिमाही GDP वृद्धि और एक जापानी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा हाल ही में की गई सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड के साथ एक मजबूत आर्थिक गति का अनुभव कर रहा है।
सेमीकंडक्टर क्या हैं?
- सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता कंडक्टर (जैसे धातु) और इंसुलेटर (जैसे ग्लास) के बीच होती है।
- ये आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के मूल घटक हैं, जो कंप्यूटर, स्मार्टफोन, टेलीविजन, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग किए जाने वाले इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) या चिप्स बनाने के लिए आवश्यक हैं।
- सेमीकंडक्टर आमतौर पर सिलिकॉन या जर्मेनियम जैसे तत्वों से बने होते हैं, जिन्हें डोपिंग नामक प्रक्रिया के माध्यम से नियंत्रित तरीके से संशोधित किया जाता है ताकि उनकी विद्युत विशेषताओं को बदला जा सके।
- सेमीकंडक्टर उद्योग में चिप डिजाइन, उपकरण विनिर्माण, सामग्री उत्पादन, परीक्षण और पैकेजिंग सहित कई जटिल और पूंजी-गहन चरण शामिल हैं।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला अत्यधिक जटिल और भौगोलिक रूप से केंद्रित है, जिसमें कुछ ही देश प्रमुख विनिर्माण और डिजाइन क्षमताओं को नियंत्रित करते हैं।
- भारत का लक्ष्य इस वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनना है, जो घरेलू उत्पादन और निर्यात दोनों को बढ़ावा दे रहा है।
- सेमीकंडक्टर के विकास के लिए चिप डिजाइन, उपकरण, सामग्री, परीक्षण और पैकेजिंग सहित क्षमताओं के एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता होती है।
- भारत सरकार वैश्विक कंपनियों, स्टार्टअप्स और डिजाइन फर्मों के बीच सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए नियामक परिवर्तनों के साथ सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ा रही है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| भारत को वैश्विक विनिर्माण गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करना | वैश्विक चिप उद्योग के लिए भारत को एक विश्वसनीय और पसंदीदा विकल्प बनाना। |
| सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अनुकूल माहौल | सरकार द्वारा आवश्यक कदम उठाकर देश को सेमीकंडक्टर हब के रूप में विकसित करना। |
| भारतीय निर्मित चिप्स की आपूर्ति | भारत के संयंत्रों से निर्मित चिप्स का देश और दुनिया भर के ग्राहकों तक पहुँचना, जो उत्पादन क्षमता में वृद्धि का संकेत है। |
| आर्थिक गति और वैश्विक विश्वास | 7.8% की तिमाही GDP वृद्धि और सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड, जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और वैश्विक विश्वसनीयता को दर्शाता है। |
| सेमीकंडक्टर कार्यक्रम का विकास | 2022 में शुरू हुए कार्यक्रम का नीति निर्माण से लेकर पायलट उत्पादन और वाणिज्यिक विनिर्माण तक पहुँचना। |
| घरेलू R&D और आपूर्ति श्रृंखला पर जोर | चिप डिजाइन, उपकरण, सामग्री, परीक्षण और पैकेजिंग सहित पूरे इकोसिस्टम के विकास के लिए अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- सेमीकंडक्टर उद्योग में आत्मनिर्भरता से आयात पर निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- उच्च-तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करेगा और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।
सामरिक महत्व
- सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों का आधार हैं, इसलिए घरेलू उत्पादन से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।
- भू-राजनीतिक तनाव के समय वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधानों से निपटने के लिए भारत की क्षमता बढ़ेगी।
- यह भारत को उन्नत प्रौद्योगिकियों में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
तकनीकी महत्व
- घरेलू अनुसंधान और विकास (Research and Development – R&D) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे नवाचार और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहन मिलेगा।
- युवा प्रतिभाओं को देश में ही उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने के अवसर मिलेंगे, जिससे ‘ब्रेन ड्रेन’ (Brain Drain) कम होगा।
- सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास से संबंधित उद्योगों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी को भी लाभ होगा।
चुनौतियाँ
1. उच्च पूंजी निवेश और लंबी परिपक्वता अवधि
- सेमीकंडक्टर फैब (Fab) स्थापित करने के लिए भारी पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, जिसकी वापसी में लंबा समय लगता है।
- यह निजी निवेशकों के लिए एक बड़ी बाधा हो सकती है, जिससे सरकारी सहायता और प्रोत्साहन आवश्यक हो जाते हैं।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति
2. कुशल कार्यबल की कमी
- सेमीकंडक्टर उद्योग को अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले इंजीनियरों और तकनीशियनों की आवश्यकता होती है।
- भारत में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कार्यबल की कमी एक चुनौती है, जिसके लिए विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन, कौशल विकास
3. जटिल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण एक जटिल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर करता है, जिसमें विभिन्न देशों से उपकरण, सामग्री और विशेषज्ञता शामिल होती है।
- घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना और वैश्विक भागीदारों के साथ समन्वय स्थापित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, औद्योगिक नीति
4. तकनीकी परिवर्तन और अप्रचलन का जोखिम
- सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रौद्योगिकी तेजी से बदलती है, जिससे निवेश के अप्रचलित होने का जोखिम रहता है।
- निरंतर अनुसंधान और विकास तथा नवीनतम तकनीकों को अपनाने की क्षमता महत्वपूर्ण है।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार
5. पर्यावरणीय और नियामक चुनौतियाँ
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में पानी और ऊर्जा की खपत होती है, साथ ही खतरनाक रसायनों का उपयोग होता है।
- पर्यावरणीय नियमों का पालन करना और सतत विनिर्माण प्रथाओं को अपनाना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| उच्च पूंजीगत व्यय | सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना के लिए भारी निवेश की आवश्यकता, जो वित्तीय जोखिम उत्पन्न करता है। |
| विशेषज्ञ कार्यबल की कमी | चिप डिजाइन और विनिर्माण के लिए आवश्यक उच्च-कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की उपलब्धता। |
| वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला निर्भरता | महत्वपूर्ण उपकरणों और कच्चे माल के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता। |
| तेजी से बदलती तकनीक | उद्योग में तीव्र तकनीकी प्रगति के कारण निवेश के अप्रचलित होने का जोखिम। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | जल और ऊर्जा की उच्च खपत तथा रासायनिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियाँ। |
| अनुसंधान एवं विकास का अभाव | घरेलू स्तर पर उन्नत चिप डिजाइन और सामग्री विकास में पर्याप्त निवेश की कमी। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme)
आगे की राह
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान करना।
- सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता वाले कुशल कार्यबल को विकसित करने के लिए विशेष शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना।
- घरेलू अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करना।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना ताकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और निवेश को आकर्षित किया जा सके।
- सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना, जिसमें सामग्री, उपकरण और सहायक उद्योग शामिल हों।
- एक स्थिर और पारदर्शी नियामक ढाँचा प्रदान करना जो व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा दे और निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाए।
- जल और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए सतत विनिर्माण प्रथाओं को अपनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
सेमीकंडक्टर उद्योग · आत्मनिर्भर भारत · मेक इन इंडिया · विनिर्माण केंद्र · डिजाइन से उत्पादन · अनुसंधान एवं विकास · घरेलू आपूर्ति श्रृंखला · निवेश प्रोत्साहन · आर्थिक संवृद्धि · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
अवधारणा प्रवाह
सरकार द्वारा नीतिगत समर्थन और प्रोत्साहन → सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश आकर्षित करना → घरेलू चिप विनिर्माण क्षमता का विकास → भारतीय निर्मित चिप्स का उत्पादन और आपूर्ति → आत्मनिर्भरता और आर्थिक संवृद्धि को बढ़ावा
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण का केंद्र बनाना है।
2. भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण के लिए 1.275 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय अनुमोदित किया है।
3. भारत में निर्मित चिप्स ने अब घरेलू और वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचना शुरू कर दिया है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है, न कि सेमीकंडक्टर विनिर्माण का। सेमीकंडक्टर विनिर्माण के लिए ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम है। कथन 2 सही है। सरकार ने सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण के लिए 1.275 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय अनुमोदित किया है। कथन 3 सही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित चिप्स ने अब ग्राहकों तक पहुंचना शुरू कर दिया है।
Q2. सेमीकंडक्टर उद्योग के संदर्भ में, ‘फैबलेस’ (Fabless) कंपनी का क्या अर्थ है?
- एक कंपनी जो केवल सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण करती है, लेकिन उनका डिज़ाइन नहीं करती।
- एक कंपनी जो सेमीकंडक्टर चिप्स का डिज़ाइन करती है, लेकिन उनका निर्माण नहीं करती।
- एक कंपनी जो सेमीकंडक्टर चिप्स के परीक्षण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता रखती है।
- एक कंपनी जो सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री की आपूर्ति करती है।
उत्तर: एक कंपनी जो सेमीकंडक्टर चिप्स का डिज़ाइन करती है, लेकिन उनका निर्माण नहीं करती। — एक ‘फैबलेस’ कंपनी वह होती है जो सेमीकंडक्टर चिप्स का डिज़ाइन करती है लेकिन उनके निर्माण के लिए बाहरी फाउंड्री (विनिर्माण सुविधाओं) पर निर्भर करती है। ‘फैब’ (Fab) शब्द फैब्रिकेशन प्लांट या फाउंड्री को संदर्भित करता है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विश्लेषण कीजिए। इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने के महत्व पर भी प्रकाश डालिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग के महत्व और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का संक्षिप्त उल्लेख।
2. सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
क. सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme) का शुभारंभ और परिव्यय (1.275 लाख करोड़ रुपये)।
ख. नीति निर्माण से वाणिज्यिक उत्पादन तक की प्रगति (उदाहरण: मोहाली और सूरत में नए संयंत्र)।
ग. नियामक परिवर्तन और वैश्विक कंपनियों, स्टार्टअप्स तथा डिजाइन फर्मों के बीच सहयोग को सुगम बनाना।
घ. घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर (जैसे फैबलेस कंपनियों को बढ़ावा देना)।
ङ. निवेश प्रोत्साहन और ‘विश्वसनीय विनिर्माण गंतव्य’ के रूप में भारत की स्थिति।
3. अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देने का महत्व:
क. नवाचार और आत्मनिर्भरता: उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण।
ख. बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) का निर्माण: घरेलू आईपी के विकास की आवश्यकता।
ग. कौशल विकास और रोजगार सृजन: युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करना और प्रशिक्षित करना।
घ. वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता: अत्याधुनिक चिप डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं का विकास।
ङ. उद्योग-संस्थान सहयोग: भारतीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान साझेदारी को गहरा करना।
4. निष्कर्ष: भारत के आर्थिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: orissapost.com
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