13 Aug नीति आयोग ने बताए भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने वाले प्रमुख क्षेत्र

✎ नीति आयोग की रिपोर्ट भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए रसायन, वस्त्र, दूरसंचार और सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेपों और रणनीतिक विकास पर केंद्रित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | GS Paper III — अवसंरचना
- Prelims: नीति आयोग, विनिर्माण क्षेत्र, उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), वस्त्र उद्योग, सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण, रसायन उद्योग, दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण
- Essay: आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका, भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की चुनौतियाँ और अवसर
त्वरित पुनरावृत्ति: नीति आयोग की रिपोर्ट भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए रसायन, वस्त्र, दूरसंचार और सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेपों और रणनीतिक विकास पर केंद्रित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
नीति आयोग (NITI Aayog) ने हाल ही में “की सेक्टर्स टु पोज़िशन इंडिया एज ए ग्लोबल मेन्युफैक्चरिंग हब” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट उन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करती है जो भारत की वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को गति प्रदान कर सकते हैं। इस रिपोर्ट में चार क्षेत्रों – रसायन, दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण, वस्त्र तथा सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण – का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जो भारत के विनिर्माण लक्ष्यों को सुदृढ़ करने और विकास गाथा को गति देने में सहायक होंगे।
पृष्ठभूमि
- भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रही है।
- विनिर्माण क्षेत्र देश के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में भारत की भागीदारी बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन लाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
- उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजना जैसी सरकारी पहलें घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं।
- कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण की आवश्यकता ने भारत के लिए एक अवसर पैदा किया है।
नीति आयोग की रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
- यह रिपोर्ट एक संरचित और डेटा-आधारित फ्रेमवर्क के माध्यम से उन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करती है जिनमें भारत में विकास की अपार संभावनाएं हैं।
- रिपोर्ट में चार उच्च क्षमता वाले विनिर्माण क्षेत्रों – रसायन, वस्त्र, दूरसंचार और नेटवर्क उपकरण तथा सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण – पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- मूल्यांकन वैश्विक रुझानों, क्षेत्रीय विकास के अवसरों और वैश्विक मानकों के संदर्भ में भारत के विनिर्माण परिदृश्य को समझने पर केंद्रित है।
- इसमें विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करने वाले कारकों जैसे बाजार क्षमता, अवसंरचना तैयारी, नीतिगत समर्थन, कच्चे माल की उपलब्धता, प्रौद्योगिकी की तैयारी और रोजगार क्षमता का विश्लेषण किया गया है।
- परियोजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां लक्षित हस्तक्षेपों से घरेलू क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है, प्रतिस्पर्धात्मकता और मूल्यवर्धन को बढ़ाया जा सकता है तथा निर्यात-उन्मुख विनिर्माण विकास को गति दी जा सकती है।
- रिपोर्ट में चिन्हित क्षेत्रों में प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट सिफारिशें शामिल हैं।
- यह अध्ययन अग्रणी विनिर्माण देशों के अनुभवों का लाभ उठाता है और भारत के लिए प्रासंगिक रणनीतियों की पहचान करता है।
- बाद में 8 अन्य क्षेत्रों पर रिपोर्ट प्रकाशित की जाएंगी।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| नीति आयोग की रिपोर्ट | भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान |
| चार प्रमुख क्षेत्र | रसायन, दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण, वस्त्र और सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण पर केंद्रित |
| डेटा-आधारित फ्रेमवर्क | वैश्विक रुझानों, क्षेत्रीय विकास के अवसरों और भारत के विनिर्माण परिदृश्य का विश्लेषण |
| प्रतिस्पर्धात्मकता के कारक | बाजार क्षमता, अवसंरचना, नीतिगत समर्थन, कच्चे माल की उपलब्धता, प्रौद्योगिकी और रोजगार क्षमता का मूल्यांकन |
| मूल्य संवर्धन | घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और निर्यात-उन्मुख विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर |
महत्व
आर्थिक महत्व
- विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान बढ़ेगा और आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
- निर्यात-उन्मुख विनिर्माण से विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी और व्यापार घाटा कम होगा।
- घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition) से आयात पर निर्भरता कम होगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
सामरिक महत्व
- भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा, जिससे भू-राजनीतिक स्थिति मजबूत होगी।
- महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे दूरसंचार और सौर फोटोवोल्टिक में घरेलू विनिर्माण क्षमता से राष्ट्रीय सुरक्षा सुदृढ़ होगी।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार (Innovation) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ेगा।
सामाजिक महत्व
- विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन (Employment Generation) होगा, विशेषकर कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए।
- क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी क्योंकि विनिर्माण इकाइयाँ विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित होंगी।
- आय में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार से गरीबी उन्मूलन (Poverty Alleviation) में सहायता मिलेगी।
चुनौतियाँ
1. अवसंरचनात्मक बाधाएँ
- अपर्याप्त परिवहन नेटवर्क, बिजली की कमी और लॉजिस्टिक्स (Logistics) लागत विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती है।
- औद्योगिक पार्कों और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (Special Economic Zones) में विश्व स्तरीय सुविधाओं का अभाव।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: अवसंरचना विकास
2. कौशल अंतर
- उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कार्यबल की कमी, विशेषकर उन्नत विनिर्माण तकनीकों में।
- शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली में उद्योग की मांगों के साथ तालमेल का अभाव।
यूपीएससी लिंक: सामाजिक मुद्दे: कौशल विकास
3. प्रौद्योगिकी और नवाचार
- अनुसंधान और विकास (Research and Development) में कम निवेश और नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने की धीमी गति।
- छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए उन्नत मशीनरी और स्वचालन (Automation) तक पहुँच का अभाव।
यूपीएससी लिंक: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: नवाचार
4. नियामक और नीतिगत चुनौतियाँ
- जटिल नियामक प्रक्रियाएँ और विभिन्न अनुमतियों को प्राप्त करने में लगने वाला समय।
- नीतिगत स्थिरता और दीर्घकालिक योजना का अभाव, जिससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित होता है।
यूपीएससी लिंक: शासन: औद्योगिक नीतियाँ
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कच्चे माल की उपलब्धता | कुछ प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों के लिए कच्चे माल पर आयात निर्भरता |
| वैश्विक प्रतिस्पर्धा | चीन जैसे देशों से कम लागत वाले उत्पादों के कारण घरेलू उद्योगों पर दबाव |
| पर्यावरणीय अनुपालन | पर्यावरण नियमों का पालन करने की लागत और जटिलता |
| वित्त तक पहुँच | छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए पर्याप्त और सस्ती वित्तपोषण की कमी |
| भूमि अधिग्रहण | औद्योगिक विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ और प्रक्रियात्मक देरी |
आगे की राह
- विनिर्माण के लिए आवश्यक अवसंरचना (Infrastructure) जैसे बिजली, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षण प्रदान करना।
- अनुसंधान और विकास में निवेश बढ़ाना तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना।
- नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) में सुधार करना।
- घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करना।
- मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements) का रणनीतिक उपयोग करके निर्यात बाजारों तक पहुँच बढ़ाना।
- पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण प्रक्रियाओं को बढ़ावा देना और हरित प्रौद्योगिकियों को अपनाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
नीति आयोग रिपोर्ट · वैश्विक विनिर्माण केंद्र · मेक इन इंडिया · उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना · आर्थिक संवृद्धि · निर्यात-उन्मुख विनिर्माण · आत्मनिर्भर भारत · विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता · मूल्य संवर्धन · रोजगार सृजन
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 19(1)(g)’, ‘note’: ‘व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 38’, ‘note’: ‘लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 39(b) और (c)’, ‘note’: ‘संसाधनों का समान वितरण’}
अवधारणा प्रवाह
नीति आयोग की रिपोर्ट → प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों की पहचान → लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप → घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा → निर्यात-उन्मुख विकास → वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नीति आयोग की ‘की सेक्टर्स टु पोज़िशन इंडिया एज ए ग्लोबल मेन्युफैक्चरिंग हब’ रिपोर्ट में केवल चार उच्च क्षमता वाले विनिर्माण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
2. वस्त्र उद्योग भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2% और विनिर्माण सकल मूल्य (GVAC) में 11% का योगदान देता है।
3. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के रसायन उद्योग में घरेलू मूल्यवर्धन बढ़ाने की अपार क्षमता है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 गलत है क्योंकि रिपोर्ट के इस संस्करण में चार क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन इसके बाद 8 अन्य क्षेत्रों पर रिपोर्ट प्रकाशित की जाएंगी। इसलिए, यह ‘केवल’ चार क्षेत्रों पर केंद्रित नहीं है, बल्कि यह पहला संस्करण है। कथन 2 सही है क्योंकि वस्त्र एवं परिधान उद्योग राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 2% और विनिर्माण सकल मूल्य (GVAC) में 11% का योगदान देता है। कथन 3 सही है क्योंकि रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत के रसायन उद्योग में उत्पादन बढ़ाकर और कच्चे माल का बेहतर उपयोग करके घरेलू मूल्यवर्धन को बढ़ाने की अपार क्षमता है।
Q2. नीति आयोग की रिपोर्ट ‘की सेक्टर्स टु पोज़िशन इंडिया एज ए ग्लोबल मेन्युफैक्चरिंग हब’ के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से क्षेत्र इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है/हैं?
- रसायन
- दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण
- सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण
- ऑटोमोबाइल
उत्तर: ऑटोमोबाइल — रिपोर्ट के इस संस्करण में रसायन, दूरसंचार और नेटवर्किंग उपकरण, वस्त्र और सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ऑटोमोबाइल इस सूची में शामिल नहीं है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ‘भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने वाले प्रमुख क्षेत्र’ के आलोक में, भारत के विनिर्माण क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण कीजिए। साथ ही, वैश्विक विनिर्माण शक्ति बनने की भारत की महत्वाकांक्षा को साकार करने में इस रिपोर्ट की सिफारिशों के महत्व पर चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: नीति आयोग की रिपोर्ट ‘भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने वाले प्रमुख क्षेत्र’ का संदर्भ देते हुए भारत के विनिर्माण क्षेत्र के महत्व का संक्षिप्त परिचय।
2. विनिर्माण क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण:
क. GDP और रोजगार में योगदान: वर्तमान आँकड़े (जैसे GDP में 17-18% योगदान, रोजगार सृजन)।
ख. प्रमुख उप-क्षेत्र: रसायन, वस्त्र, दूरसंचार, सौर फोटोवोल्टिक जैसे क्षेत्रों की स्थिति और क्षमता।
ग. चुनौतियाँ: अवसंरचनात्मक कमी, तकनीकी पिछड़ापन, कच्चे माल की उपलब्धता, वैश्विक मूल्य श्रृंखला में स्थिति, आयात निर्भरता।
घ. सरकारी पहल: ‘मेक इन इंडिया’, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का उल्लेख।
3. रिपोर्ट की सिफारिशों का महत्व:
क. लक्षित हस्तक्षेप: रिपोर्ट द्वारा चिन्हित उच्च क्षमता वाले क्षेत्रों (रसायन, वस्त्र, दूरसंचार, सौर PV) में विशिष्ट हस्तक्षेपों की आवश्यकता।
ख. प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि: घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी अपनाने और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर।
ग. मूल्य संवर्धन: कच्चे माल के बेहतर उपयोग और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति में सुधार।
घ. निर्यात-उन्मुख विकास: मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का रणनीतिक उपयोग और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन।
ङ. रोजगार सृजन और आर्थिक संवृद्धि: विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार से रोजगार के अवसरों में वृद्धि और समग्र आर्थिक विकास।
4. निष्कर्ष: भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में नीति आयोग की रिपोर्ट के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संतुलित निष्कर्ष।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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