परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में देरी: कारण, चुनौतियाँ और सरकार के प्रयास

संसद प्रश्न: परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं — concept mind map

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में देरी: कारण, चुनौतियाँ और सरकार के प्रयास

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भारत परमाणु ऊर्जा संयंत्र

✎ भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जिसके तहत निर्माणाधीन परियोजनाओं से राष्ट्रीय ग्रिड में 8000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की…

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, अवसंरचना  |  GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
  • Prelims: परमाणु ऊर्जा संयंत्र, दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR), लाइट वाटर रिएक्टर (LWR), न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL), परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), राष्ट्रीय ग्रिड, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन
  • Essay: भारत की ऊर्जा सुरक्षा में परमाणु ऊर्जा की भूमिका, भारत के आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा अवसंरचना का महत्व

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जिसके तहत निर्माणाधीन परियोजनाओं से राष्ट्रीय ग्रिड में 8000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

हाल ही में संसद में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिति पर जानकारी प्रस्तुत की गई है। इस जानकारी में निर्माणाधीन परियोजनाओं का विवरण, उनकी क्षमता, अनुमानित चालू होने की तिथियाँ, लागत और देरी के कारण शामिल हैं। यह रिपोर्ट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा के महत्व को रेखांकित करती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी, जिसका उद्देश्य देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना था।
  • भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन-चरणीय दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका लक्ष्य देश के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करना है।
  • न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
  • भारत ने ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कई नई परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को मंजूरी दी है और उन पर काम कर रहा है।
  • परमाणु ऊर्जा को जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है।
  • भारत में परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढाँचा प्रदान करता है।

भारत में परमाणु ऊर्जा और इसकी परियोजनाएँ

  • परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ और कुशल ऊर्जा स्रोत है जो परमाणु विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया से उत्पन्न होती है।
  • भारत में मुख्य रूप से दो प्रकार के रिएक्टरों का उपयोग किया जाता है: स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर (Pressurised Heavy Water Reactor – PHWR) और विदेशी सहयोग से निर्मित लाइट वाटर रिएक्टर (Light Water Reactor – LWR)।
  • वर्तमान में, कई परमाणु ऊर्जा परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जिनमें राजस्थान के रावतभाटा, हरियाणा के गोरखपुर, कर्नाटक के कैगा और तमिलनाडु के कुडनकुलम और कलपक्कम में स्थित परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • इन परियोजनाओं के चालू होने पर राष्ट्रीय ग्रिड में कुल 8000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है, जिससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • परियोजनाओं के निर्माण/चालू होने में देरी के कई कारण रहे हैं, जिनमें फुकुशिमा घटना के बाद व्यापक डिजाइन परिवर्तन, महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी, कोविड-19 महामारी, भू-राजनीतिक संघर्ष और ठेकेदारों से संबंधित मुद्दे शामिल हैं।
  • इन चुनौतियों से निपटने के लिए, सरकार और NPCIL द्वारा आवधिक परियोजना समीक्षा, निरंतर निगरानी, बाधाओं की पहचान, विक्रेताओं/ठेकेदारों के साथ नियमित बैठकें और निर्माण गतिविधियों का पुनर्क्रमण जैसे विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं।
  • लंबी अवधि में लगने वाले उपकरणों का थोक ऑर्डर दिया जा रहा है और फ्लीट मोड (Fleet Mode) में कार्यान्वित किए जा रहे विभिन्न रिएक्टरों के लिए वस्तुओं की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
  • भारत का लक्ष्य 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (Net-Zero Emissions) प्राप्त करना है, और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्य विशेषताएँ

Feature Significance
परमाणु ऊर्जा का महत्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका।
स्वदेशी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (IPHWR) भारत की आत्मनिर्भरता और परमाणु प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता को दर्शाता है, जो सुरक्षा और लागत-प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।
विदेशी सहयोग से लाइट वाटर रिएक्टर (LWR) अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों तक पहुंच सुनिश्चित करता है, जिससे क्षमता में तेजी से वृद्धि होती है।
परियोजनाओं में देरी के कारण फुकुशिमा घटना के बाद डिजाइन परिवर्तन, उपकरण आपूर्ति में देरी, कोविड-19 महामारी, भू-राजनीतिक संघर्ष और वित्तीय बाधाएं परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में जटिलताओं को दर्शाती हैं।
क्षमता वृद्धि निर्माणाधीन परियोजनाओं के चालू होने पर राष्ट्रीय ग्रिड में 8000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने से देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

महत्व

ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता

  • परमाणु ऊर्जा भारत की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
  • स्वदेशी रिएक्टरों का विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है, जो महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में देश की क्षमता को बढ़ाता है।

पर्यावरणीय स्थिरता

  • परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करता है, जिससे भारत के जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
  • यह भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के पूरक के रूप में कार्य करता है, ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करता है।

आर्थिक विकास और औद्योगिक प्रोत्साहन

  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में भारी निवेश से रोजगार सृजन होता है और संबद्ध उद्योगों (जैसे विनिर्माण, इंजीनियरिंग) को बढ़ावा मिलता है।
  • परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से लागत में वृद्धि से बचा जा सकता है और ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित कर आर्थिक विकास को गति मिलती है।

भू-राजनीतिक निहितार्थ

  • परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती है और उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच मिलती है।
  • परियोजनाओं में देरी पर भू-राजनीतिक संघर्षों का प्रभाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

चुनौतियाँ

1. परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी

  • फुकुशिमा घटना के बाद व्यापक डिजाइन परिवर्तनों के कारण सुरक्षा मानकों को उन्नत करने में समय लगा।
  • महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी, विशेषकर कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण।
  • ठेकेदारों द्वारा वित्तीय संकट और नकदी प्रवाह की समस्याओं के कारण साइट पर कार्यों के निष्पादन में विलंब।

2. लागत में वृद्धि

  • परियोजनाओं में देरी और संशोधित स्वीकृतियों के कारण मूल लागत अनुमानों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे बजटीय दबाव बढ़ रहा है।
  • वैश्विक मुद्रास्फीति और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से उपकरण और निर्माण सामग्री की लागत में वृद्धि हुई है।

3. तकनीकी और इंजीनियरिंग चुनौतियां

  • कठिन साइट मिट्टी की स्थिति जैसी विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियां निर्माण प्रक्रिया को जटिल बनाती हैं।
  • कुशल ठेकेदारों की कमी और विशिष्ट परमाणु प्रौद्योगिकी के लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता।

4. भू-राजनीतिक और वैश्विक कारक

  • रूस-यूक्रेन और अमेरिका/इजराइल-ईरान जैसे भू-राजनीतिक संघर्षों का उपकरण आपूर्ति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध और व्यापार बाधाएं परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक घटकों की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

Issue Concern
फुकुशिमा घटना के बाद डिजाइन परिवर्तन परियोजनाओं की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक, लेकिन निर्माण में महत्वपूर्ण देरी का कारण।
महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनाव के कारण परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में बाधा।
कोविड-19 महामारी और संबंधित मुद्दे श्रम की कमी, वित्तीय संकट और ठेकेदारों की नकदी प्रवाह समस्याओं के कारण निर्माण गतिविधियों में रुकावट।
रूसी संघ से आपूर्ति में देरी (कुडनकुलम के लिए) अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और भू-राजनीतिक संघर्षों का परमाणु ऊर्जा सहयोग पर प्रत्यक्ष प्रभाव।
कठिन साइट मिट्टी की स्थिति (गोरखपुर में) परियोजना-विशिष्ट भौगोलिक और इंजीनियरिंग चुनौतियां जो निर्माण की जटिलता और लागत को बढ़ाती हैं।
कुशल ठेकेदारों की कमी परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विशेषज्ञता और मानव संसाधन की कमी, जो परियोजनाओं के कुशल क्रियान्वयन को प्रभावित करती है।

आगे की राह

  • परियोजना गतिविधियों की प्रगति की निरंतर निगरानी और बाधाओं की समय पर पहचान कर त्वरित सुधारात्मक उपाय करना।
  • विक्रेताओं/ठेकेदारों के साथ नियमित बैठकें आयोजित कर विभिन्न मुद्दों का समाधान करना और निर्माण गतिविधियों का यथासंभव पुनर्क्रमण करना।
  • NPCIL और DAE में विभिन्न अधिकारियों को अधिक शक्तियां सौंपना और परियोजनाओं की निगरानी के लिए बोर्ड की उप-समिति का गठन करना।
  • लंबी अवधि में लगने वाले उपकरणों का थोक ऑर्डर देना और फ्लीट मोड में कार्यान्वित किए जा रहे विभिन्न रिएक्टरों के लिए वस्तुओं की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक मजबूत और लचीली आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना, जिसमें स्वदेशीकरण पर जोर दिया जाए।
  • परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सके और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सके।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

परमाणु ऊर्जा · परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं · ऊर्जा सुरक्षा · जलवायु परिवर्तन · स्वदेशी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (IPHWR) · लाइट वाटर रिएक्टर (LWR) · परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) · न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) · मेक इन इंडिया

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ सूची में परमाणु ऊर्जा’}

अवधारणा प्रवाह

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं का निर्माण  →  विभिन्न आंतरिक और बाह्य कारकों के कारण देरी  →  परियोजना लागत में वृद्धि और समय-सीमा में बदलाव  →  राष्ट्रीय ग्रिड में क्षमता वृद्धि में विलंब  →  ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास पर प्रभाव  →  समय पर क्रियान्वयन के लिए सुधारात्मक उपायों की आवश्यकता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जाता है।
2. भारत के सभी परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्वदेशी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (IPHWR) तकनीक पर आधारित हैं।
3. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना (KKNPP) विदेशी सहयोग से लाइट वाटर रिएक्टर (LWR) तकनीक का उपयोग करती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है। NPCIL भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के डिजाइन, निर्माण, कमीशनिंग और संचालन के लिए जिम्मेदार है। कथन 2 गलत है। भारत में स्वदेशी IPHWR के साथ-साथ विदेशी सहयोग से LWR तकनीक पर आधारित परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी हैं, जैसे कुडनकुलम। कथन 3 सही है। कुडनकुलम परियोजना रूस के सहयोग से LWR तकनीक पर आधारित है। अतः, केवल दो कथन सही हैं।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण में देरी का कारण हो सकता/सकते है/हैं?
1. फुकुशिमा घटना के बाद व्यापक डिजाइन परिवर्तन
2. महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी
3. भू-राजनीतिक संघर्ष
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए समाचार के अनुसार, फुकुशिमा घटना के बाद व्यापक डिजाइन परिवर्तन, महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति में देरी और भू-राजनीतिक संघर्ष (जैसे रूस-यूक्रेन और अमेरिका/इजराइल-ईरान) परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण में देरी के प्रमुख कारण रहे हैं।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ भारत की ऊर्जा सुरक्षा में परमाणु ऊर्जा के महत्व पर चर्चा कीजिए। परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी विश्लेषण कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर की शुरुआत भारत की ऊर्जा सुरक्षा में परमाणु ऊर्जा की भूमिका का संक्षिप्त परिचय देकर करें। इसके महत्व को गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोत, जलवायु परिवर्तन शमन, बेसलोड बिजली उत्पादन और ऊर्जा मिश्रण में विविधीकरण के संदर्भ में समझाएं। इसके बाद, परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली प्रमुख चुनौतियों, जैसे कि परियोजना में देरी (फुकुशिमा घटना के बाद डिजाइन परिवर्तन, उपकरण आपूर्ति में देरी, भू-राजनीतिक संघर्ष, कोविड-19), वित्तीय बाधाएं और कुशल ठेकेदारों की कमी पर प्रकाश डालें। अंत में, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों, जैसे आवधिक परियोजना समीक्षा, निरंतर निगरानी, विक्रेताओं/ठेकेदारों के साथ नियमित बैठकें, अधिकारियों को अधिक शक्तियां सौंपना, बोर्ड उप-समिति का गठन और लंबी अवधि के उपकरणों का थोक ऑर्डर, का विश्लेषण करें। निष्कर्ष में भारत के ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में परमाणु ऊर्जा के सतत महत्व पर जोर दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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