02 Mar पश्चिम एशिया संघर्ष और भारत की बढ़ती ऊर्जा–आर्थिक संवेदनशीलता
मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के अंतर्गत
GS–2 : भारत के अन्य देशों के साथ संबंध, विदेश नीति, वैश्विक शक्ति संतुलन, भारतीय प्रवासी
GS–3 : ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय अर्थव्यवस्था, चालू खाता घाटा, अवसंरचना (नागरिक उड्डयन), आपूर्ति शृंखला व्यवधान
GS–1 : विश्व भूगोल – सामरिक जलडमरूमध्य
प्रारंभिक परीक्षा के लिये : Strait of Hormuz, OPEC, Brent Crude, Current Account Deficit (CAD), Balance of Payments (BoP), Basis Points, Aviation Turbine Fuel (ATF), Airspace Closure
चर्चा में क्यों ?
हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष — विशेषकर अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले — के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुँच गईं (लगभग $79 प्रति बैरल)। इस स्थिति ने भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देशों के लिए गंभीर आर्थिक और रणनीतिक चुनौतियाँ उत्पन्न कर दी हैं। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है और इसका लगभग आधा हिस्सा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य : वैश्विक ऊर्जा का जीवन-रेखा
यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
✔ विश्व के लगभग 20% तेल आपूर्ति का आवागमन यहीं से होता है।
✔ सऊदी अरब, इराक, यूएई और ईरान जैसे प्रमुख उत्पादक देशों के निर्यात का मुख्य मार्ग।
यदि बीमा दरें बढ़ें या सैन्य तनाव के कारण जहाज़ों की आवाजाही रुके — तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
भारत की ऊर्जा निर्भरता और आर्थिक प्रभाव
(1) चालू खाता घाटा (CAD) पर प्रभाव : हर $10 प्रति बैरल वृद्धि से भारत का CAD लगभग 0.5% तक बढ़ सकता है। वर्तमान CAD लगभग 1.2% GDP है — जो बढ़कर 1.7% तक पहुँच सकता है।
(2) GDP वृद्धि पर दबाव : विश्लेषण के अनुसार —
✔ $10 की वृद्धि से एशियाई GDP में 20–30 बेसिस पॉइंट की गिरावट संभव।
✔ भारत विशेष रूप से संवेदनशील अर्थव्यवस्थाओं में शामिल।
(3) रुपये पर दबाव : तेल आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ती है → रुपया कमजोर हो सकता है।
(4) राजकोषीय बोझ : सरकार को ईंधन पर सब्सिडी या कर समायोजन करना पड़ सकता है।
रूस से तेल खरीद का द्वंद्व
भारत पहले रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद रहा था लेकिन अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ और निगरानी के कारण स्थिति जटिल हो गई है।
संभावित परिदृश्य :
✔ यदि पश्चिम एशियाई आपूर्ति बाधित होती है, तो भारत को पुनः रूसी तेल खरीद बढ़ानी पड़ सकती है।
✔ इससे कूटनीतिक संतुलन साधना कठिन हो सकता है।
यह भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” की परीक्षा है।
उड्डयन क्षेत्र पर तात्कालिक प्रभाव
✔ पश्चिम दिशा की उड़ानें ईरान और अरब प्रायद्वीप के ऊपर से गुजरती हैं।
✔ हवाई क्षेत्र बंद होने से 3–4 घंटे अतिरिक्त उड़ान समय।
✔ ईंधन लागत में वृद्धि (ATF महँगा)।
✔ साप्ताहिक अनुमानित नुकसान: लगभग ₹875 करोड़।
कुछ उड़ानें रद्द, कुछ वैकल्पिक मार्गों से संचालित। यदि संकट लंबा चला — तो चीन के हवाई क्षेत्र के उपयोग जैसे विकल्पों पर विचार।
व्यापक रणनीतिक आयाम
(1) ऊर्जा सुरक्षा
– रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) का महत्व बढ़ेगा।
– नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़ संक्रमण की आवश्यकता।
(2) भू-राजनीतिक संतुलन : भारत को संतुलन बनाना होगा —
✔ अमेरिका
✔ रूस
✔ पश्चिम एशियाई देश
(3) आपूर्ति शृंखला विविधीकरण
– दीर्घकालिक अनुबंध
– अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से वैकल्पिक स्रोत
संभावित प्रभाव
आर्थिक
✔ महंगाई में वृद्धि
✔ विनिर्माण लागत बढ़ना
✔ चालू खाता घाटा विस्तार
सामाजिक
✔ विमान किराए महंगे
✔ ईंधन कीमतों में संभावित वृद्धि
रणनीतिक
✔ भारत की “ऊर्जा कूटनीति” की परीक्षा
✔ हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर ध्यान
संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता
एक दीर्घकालिक रणनीति में शामिल होना चाहिए –
✔ ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण
✔ घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाना
✔ नवीकरणीय ऊर्जा मिशन (सौर, हरित हाइड्रोजन)
✔ सामरिक भंडारण क्षमता विस्तार
✔ उड्डयन क्षेत्र के लिए आकस्मिक योजना
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया का वर्तमान संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती है। भारत की 85% आयात निर्भरता और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर आधी आपूर्ति की निर्भरता उसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। यह संकट भारत के लिए एक चेतावनी भी है — ऊर्जा आत्मनिर्भरता, रणनीतिक विविधीकरण, कूटनीतिक संतुलन । भविष्य की स्थिरता इसी पर निर्भर करेगी कि भारत अल्पकालिक झटकों को संभालते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा–आर्थिक सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न
निम्न कथनों पर विचार कीजिए :
1. Strait of Hormuz विश्व के लगभग 20% तेल व्यापार के लिए जिम्मेदार है।
2. भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 85% आयात करता है।
3. हर $10 प्रति बैरल वृद्धि से भारत का चालू खाता घाटा घटता है।
4. IndiGo और Air India भारतीय विमानन कंपनियाँ हैं।
सही विकल्प चुनिए:
(a) केवल 1, 2 और 4
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (a)
मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न
“पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष भारत की ऊर्जा सुरक्षा, चालू खाता संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए गंभीर चुनौती है।” वर्तमान घटनाक्रम के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
(शब्द सीमा: 250 | अंक: 15)

No Comments