पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना: सीएजी रिपोर्ट में शिक्षकों की कमी और फंड की कमी पर चिंता

High dropouts, teacher crunch and fund gaps cripple Samagra Shiksha in West Bengal: CAG report — concept mind map

पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना: सीएजी रिपोर्ट में शिक्षकों की कमी और फंड की कमी पर चिंता

✎ CAG रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना के कार्यान्वयन में उच्च ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की कमी और धन के कुप्रबंधन जैसी गंभीर चुनौतियों को उजागर किया है, जो योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति में बाधा डाल रहे हैं।

Samagra Shiksha Scheme flawsFund gaps46-65% usedDelays in releaseTeacher crunch8% schools single-teacher520 schools no teacherDropout rates28-42% transition loss53% financial barriersPTR violations29-79% schools non-compliantHigh student load
Samagra Shiksha Scheme flaws

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — सामाजिक न्याय (शिक्षा, मानव संसाधन)  |  GS Paper II — शासन (सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप)  |  GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था (संसाधन जुटाना, सरकारी बजट)
  • Prelims: समग्र शिक्षा योजना, CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक), शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR), स्कूल ड्रॉपआउट दर, केंद्रीय प्रायोजित योजनाएँ
  • Essay: भारत में शिक्षा का अधिकार: चुनौतियाँ और समाधान, मानव पूंजी निर्माण में शिक्षा की भूमिका, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन: सुशासन की कुंजी

त्वरित पुनरावृत्ति: CAG रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना के कार्यान्वयन में उच्च ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की कमी और धन के कुप्रबंधन जैसी गंभीर चुनौतियों को उजागर किया है, जो योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति में बाधा डाल रहे हैं।

यह खबर चर्चा में क्यों?

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक प्रदर्शन लेखापरीक्षा रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Scheme) के कार्यान्वयन में गंभीर कमियों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में उच्च ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की कमी और केंद्रीय निधियों के खराब उपयोग जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति बाधित हो रही है। यह रिपोर्ट 2019-20 से 2023-24 की अवधि के लिए योजना के निष्पादन की जाँच पर आधारित है।

पृष्ठभूमि

  • CAG रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में उच्च प्राथमिक (upper primary) और उच्च माध्यमिक (higher secondary) स्तरों के बीच 28 से 42 प्रतिशत तक छात्रों का ‘संक्रमण नुकसान’ (transition loss) देखा गया है, जो उच्च ड्रॉपआउट दर को दर्शाता है।
  • सर्वेक्षण किए गए छात्रों के ड्रॉपआउट के मुख्य कारणों में वित्तीय बाधाएँ (53%), प्रारंभिक विवाह (12%), काम के लिए पलायन (13%) और छात्रों में पढ़ाई जारी रखने की अनिच्छा (14%) शामिल हैं।
  • राज्य के 8% (5,152) स्कूल केवल एक शिक्षक के साथ संचालित हो रहे हैं, जिससे 1,76,491 छात्र प्रभावित हैं, और 520 स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है, जिससे 8,596 छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।
  • रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 29% प्राथमिक स्कूलों और 30% उच्च प्राथमिक स्कूलों में न्यूनतम छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-Teacher Ratio – PTR) मानदंडों को पूरा नहीं किया गया है, जबकि उच्च माध्यमिक स्तर पर 79% स्कूलों में निर्धारित PTR सीमा से अधिक छात्र हैं।
  • योजना निधि का उपयोग राज्य में 46 से 65 प्रतिशत के बीच रहा है, जो केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा धन जारी करने में देरी और लक्षित हस्तक्षेपों के निष्पादन में देरी को दर्शाता है।

समग्र शिक्षा योजना क्या है?

  • समग्र शिक्षा योजना शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) की एक एकीकृत योजना है, जिसे स्कूली शिक्षा के लिए एक व्यापक कार्यक्रम के रूप में 2018-19 में शुरू किया गया था।
  • यह योजना पूर्व-विद्यालय से लेकर बारहवीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करती है।
  • इसका उद्देश्य स्कूली शिक्षा को एक समग्र और एकीकृत तरीके से संबोधित करना है, जिसमें शिक्षा का अधिकार (Right to Education – RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों को शामिल किया गया है।
  • यह योजना सर्व शिक्षा अभियान (Sarva Shiksha Abhiyan – SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (Rashtriya Madhyamik Shiksha Abhiyan – RMSA) और शिक्षक शिक्षा (Teacher Education – TE) की तीन पूर्ववर्ती योजनाओं को समाहित करती है।
  • योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, सामाजिक और लैंगिक अंतराल को कम करना और शिक्षा के सभी स्तरों पर समानता और समावेशन सुनिश्चित करना है।
  • यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शिक्षा के बुनियादी ढाँचे में सुधार, शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत करने में सहायता प्रदान करती है।
  • योजना के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) जैसे मानदंडों का पालन करना महत्वपूर्ण है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक हैं।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
उच्च ड्रॉपआउट दर शिक्षा तक पहुँच और समानता पर नकारात्मक प्रभाव, मानव पूंजी निर्माण में बाधा।
शिक्षकों की कमी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रावधान को बाधित करती है, छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) मानदंडों का उल्लंघन।
निधियों का कम उपयोग योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति में बाधा डालता है, राजकोषीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है।
उच्च प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक संक्रमण हानि शिक्षा के विभिन्न स्तरों के बीच छात्रों के बड़े पैमाने पर पलायन को इंगित करता है।
वित्तीय बाधाएँ और बाल विवाह ड्रॉपआउट के प्रमुख कारण, सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को उजागर करते हैं।
एकल-शिक्षक और शिक्षक-रहित विद्यालय शैक्षिक बुनियादी ढांचे और संसाधनों में गंभीर कमियों को दर्शाता है।

महत्व

सामाजिक महत्व

  • उच्च ड्रॉपआउट दरें समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर लड़कियों और आर्थिक रूप से वंचित छात्रों को प्रभावित करती हैं, जिससे सामाजिक असमानताएँ बढ़ती हैं।
  • शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के संवैधानिक जनादेश को कमजोर करता है।
  • बाल विवाह और प्रारंभिक कमाई के इरादे जैसे सामाजिक मुद्दे शिक्षा तक पहुँच में बाधा डालते हैं, जिससे गरीबी का दुष्चक्र बना रहता है।

आर्थिक महत्व

  • शिक्षा में निवेश की कमी और उच्च ड्रॉपआउट दरें मानव पूंजी निर्माण को बाधित करती हैं, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) प्रभावित होती है।
  • निधियों का कम उपयोग और राजकोषीय अनुशासन की कमी सरकारी संसाधनों के अक्षम प्रबंधन को दर्शाती है, जिससे विकास परियोजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • शिक्षित कार्यबल की कमी से उत्पादकता और नवाचार में कमी आती है, जो राज्य के आर्थिक विकास के लिए हानिकारक है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • CAG रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करती है।
  • समग्र शिक्षा योजना जैसे केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
  • शैक्षिक नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा तथा उनमें सुधार की आवश्यकता को दर्शाता है ताकि जमीनी स्तर पर उनकी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

चुनौतियाँ

1. उच्च ड्रॉपआउट दर

  • उच्च प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक 28-42% की भारी संक्रमण हानि।
  • वित्तीय बाधाएँ (53%), छात्रों की अनिच्छा (14%), काम के लिए प्रवासन (13%) और बाल विवाह (12%) प्रमुख कारण।

2. शिक्षकों की कमी और असमान वितरण

  • 520 विद्यालयों में कोई शिक्षक नहीं और 5,152 विद्यालय एकल-शिक्षक द्वारा संचालित।
  • प्राथमिक विद्यालयों में 31,684 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 2,058 शिक्षकों की कमी।
  • 40,530 प्रधानाध्यापक 150 से कम छात्रों वाले विद्यालयों में तैनात, PTR मानदंडों का उल्लंघन।

3. निधियों का कम उपयोग

  • योजना निधि का उपयोग 46% से 65% के बीच रहा।
  • केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निधियों के जारी होने में देरी तथा लक्षित हस्तक्षेपों के निष्पादन में देरी।

4. बुनियादी ढांचे का अभाव

  • स्वीकृत सिविल कार्यों के निष्पादन न होने के कारण ₹395 करोड़ की राशि सरेंडर की गई।
  • निष्पादन अक्षमताओं के कारण केंद्रीय निधियों में ₹2,428 करोड़ की कमी।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
उच्च ड्रॉपआउट दर शिक्षा तक पहुँच में बाधा, मानव पूंजी का नुकसान, सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ।
शिक्षकों की भारी कमी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव, छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) का उल्लंघन, शैक्षिक मानकों में गिरावट।
निधियों का अक्षम उपयोग योजना के उद्देश्यों की प्राप्ति में विफलता, राजकोषीय अनुशासन की कमी, संसाधनों की बर्बादी।
बुनियादी ढांचे का अपर्याप्त विकास सीखने के अनुकूल वातावरण की कमी, छात्रों और शिक्षकों के लिए खराब सुविधाएँ।
प्रशासनिक असंतुलन शिक्षकों की तैनाती में विसंगतियाँ, शिक्षा के अधिकार (RTE) मानदंडों का उल्लंघन।
सामाजिक-आर्थिक बाधाएँ गरीबी, बाल विवाह और काम के लिए प्रवासन जैसे कारक शिक्षा में निरंतरता को बाधित करते हैं।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • समग्र शिक्षा योजना (Samagra Shiksha Scheme)

आगे की राह

  • ड्रॉपआउट के मूल कारणों, जैसे वित्तीय बाधाओं और बाल विवाह, को लक्षित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत करना।
  • शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करना और उनके समान वितरण को सुनिश्चित करना, विशेषकर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में।
  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निधियों के समय पर जारी होने और प्रभावी उपयोग के लिए समन्वय तंत्र को मजबूत करना।
  • विद्यालयों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए स्वीकृत सिविल कार्यों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करना।
  • छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) मानदंडों का पालन सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों की तैनाती नीति की समीक्षा और पुनर्गठन करना।
  • विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना।
  • समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देना ताकि माता-पिता को बच्चों को स्कूल भेजने और उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
  • ड्रॉपआउट छात्रों की पहचान करने और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने के लिए विशेष ब्रिज कोर्स और सहायता कार्यक्रम शुरू करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

समग्र शिक्षा योजना · CAG रिपोर्ट · शिक्षा का अधिकार अधिनियम · छात्र-शिक्षक अनुपात · वित्तीय कुप्रबंधन · ड्रॉपआउट दर · शैक्षिक असमानता · मानव संसाधन विकास · संघवाद · सामाजिक-आर्थिक कारक

अवधारणा प्रवाह

वित्तीय बाधाएँ/सामाजिक मुद्दे  →  उच्च ड्रॉपआउट दर  →  शिक्षकों की कमी/निधियों का कम उपयोग  →  समग्र शिक्षा योजना का कमजोर कार्यान्वयन  →  गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच का अभाव  →  मानव पूंजी निर्माण पर नकारात्मक प्रभाव  →  दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. समग्र शिक्षा योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करती है, जिसमें पूर्व-विद्यालय से लेकर बारहवीं कक्षा तक शामिल है।
2. यह योजना शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के प्रावधानों को लागू करने में राज्यों की सहायता करती है।
3. इस योजना का उद्देश्य शिक्षा में सामाजिक और लैंगिक अंतराल को कम करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. सभी तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि समग्र शिक्षा योजना पूर्व-विद्यालय से लेकर बारहवीं कक्षा तक स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों को कवर करती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह योजना RTE अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने में राज्यों की सहायता करती है। कथन 3 भी सही है क्योंकि इसका एक प्रमुख उद्देश्य शिक्षा में सामाजिक और लैंगिक अंतराल को कम करना है।

Q2. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. CAG भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है।
2. CAG अपनी रिपोर्ट सीधे संसद को प्रस्तुत करता है।
3. CAG का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1 और 2
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है। CAG भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय का लेखा-परीक्षण करता है। कथन 2 गलत है। CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जो इसे संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है। कथन 3 सही है। CAG का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ समग्र शिक्षा योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालने वाले प्रमुख कारकों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस संदर्भ में, शिक्षा के अधिकार अधिनियम के उद्देश्यों को प्राप्त करने में राज्यों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)

रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: समग्र शिक्षा योजना का संक्षिप्त परिचय और इसका उद्देश्य (स्कूल शिक्षा के सभी स्तरों का कवरेज, RTE अधिनियम का कार्यान्वयन)।
2. योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में बाधा डालने वाले कारक (CAG रिपोर्ट के संदर्भ में):
क. उच्च ड्रॉपआउट दर: वित्तीय बाधाएँ, बाल विवाह, शीघ्र आय की इच्छा जैसे सामाजिक-आर्थिक कारण।
ख. शिक्षकों की कमी: एकल-शिक्षक विद्यालय, बिना शिक्षक वाले विद्यालय, छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) मानदंडों का उल्लंघन।
ग. धन का कुप्रबंधन: केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा धन जारी करने में देरी, धन का कम उपयोग (46-65%), स्वीकृत सिविल कार्यों का निष्पादन न होना, केंद्रीय निधि की कम प्राप्ति।
घ. प्रशासनिक असंतुलन: आवश्यकता से अधिक प्रधान शिक्षकों की तैनाती, संरचनात्मक अंतराल।
3. शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के उद्देश्यों को प्राप्त करने में राज्यों के समक्ष चुनौतियाँ:
क. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव: शिक्षकों की कमी और प्रशिक्षण का अभाव।
ख. समावेशी शिक्षा का लक्ष्य: सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के कारण बच्चों का स्कूल से बाहर रहना।
ग. बुनियादी ढाँचागत कमी: धन की कमी और कुप्रबंधन के कारण स्कूल भवनों और सुविधाओं का अभाव।
घ. निगरानी और मूल्यांकन: प्रभावी निगरानी तंत्र की कमी।
ङ. संघवाद के मुद्दे: केंद्र और राज्य के बीच धन के हस्तांतरण और उपयोग में समन्वय की कमी।
4. निष्कर्ष: इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए नीतिगत सुझाव (जैसे वित्तीय प्रबंधन में सुधार, शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण, सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए लक्षित हस्तक्षेप) और शिक्षा के महत्व पर बल।

स्रोत: The Hindu


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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