09 Aug पारंपरिक व्यवसायों को बचाने के लिए नीति समर्थन आवश्यक: विशेषज्ञ
✎ परंपरागत व्यवसायों का संरक्षण न केवल आर्थिक संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक है, जिसके लिए सशक्त नीतिगत समर्थन अपरिहार्य है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper I — भारतीय समाज, सामाजिक मुद्दे | GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, विकास, रोजगार
- Prelims: परंपरागत व्यवसाय, सामाजिक समावेशन, आर्थिक सशक्तिकरण, कारीगर समुदाय, नीतिगत समर्थन, आजीविका सुरक्षा, ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प
- Essay: बदलती अर्थव्यवस्था में परंपरागत व्यवसायों का महत्व और चुनौतियाँ, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए परंपरागत आजीविकाओं का संरक्षण
त्वरित पुनरावृत्ति: परंपरागत व्यवसायों का संरक्षण न केवल आर्थिक संवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक है, जिसके लिए सशक्त नीतिगत समर्थन अपरिहार्य है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
आंध्र विश्वविद्यालय में ‘बदलती अर्थव्यवस्था में परंपरागत व्यावसायिक समुदाय: सामाजिक समावेशन और समावेशी विकास की चुनौतियाँ’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने परंपरागत व्यवसायों को बनाए रखने के लिए सशक्त नीतिगत समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि मशीनीकरण, कारखानों में निर्मित उत्पादों और अनियमित आय के कारण ये समुदाय गंभीर आर्थिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
- भारत में परंपरागत व्यवसाय सदियों से अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास का अभिन्न अंग रहे हैं।
- इन व्यवसायों में कारीगर, हस्तशिल्पी, बुनकर और अन्य पारंपरिक कौशल वाले समुदाय शामिल हैं, जो अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में केंद्रित होते हैं।
- आधुनिक अर्थव्यवस्था में, वैश्वीकरण, तकनीकी प्रगति और बदलते बाजार रुझानों के कारण इन व्यवसायों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 30% कारीगरों को बदलती बाजार स्थितियों के कारण अपने पारंपरिक व्यवसायों से बाहर धकेल दिया गया है।
- अपर्याप्त बाजार पहुँच, बिचौलियों पर निर्भरता और सामाजिक भेदभाव ने इन समुदायों की आय को कम कर दिया है, जिससे उनकी आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
- विभिन्न कल्याणकारी उपायों के बावजूद, इन समुदायों को अभी भी आर्थिक तनाव और सामाजिक बहिष्करण (Social Exclusion) का सामना करना पड़ रहा है।
परंपरागत व्यवसायों का महत्व और संरक्षण की आवश्यकता
- परंपरागत व्यवसाय भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में।
- ये व्यवसाय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक परंपराओं के संरक्षक हैं, जो अद्वितीय हस्तशिल्प और उत्पादों का उत्पादन करते हैं।
- लाखों लोगों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, के लिए ये आजीविका का प्राथमिक स्रोत हैं, जो रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- इन व्यवसायों का संरक्षण सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देता है, क्योंकि ये अक्सर हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाते हैं।
- नीतिगत समर्थन के माध्यम से, इन व्यवसायों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जा सकता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो सकती है।
- सरकारी हस्तक्षेप बाजार पहुँच में सुधार, कौशल उन्नयन, वित्तीय सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करके इन समुदायों को सशक्त कर सकता है।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
पारंपरिक व्यवसाय · नीतिगत समर्थन · सामाजिक समावेशन · समावेशी विकास · आर्थिक तनाव · बाजार पहुंच · सामाजिक भेदभाव · यंत्रीकरण · आजीविका सुरक्षा · सांस्कृतिक विरासत
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारंपरिक व्यवसायों का भारतीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है।
2. यंत्रीकरण और कारखानों में बने उत्पादों ने पारंपरिक व्यवसायों को आर्थिक तनाव में डाल दिया है।
3. अपर्याप्त बाजार पहुंच और बिचौलियों पर निर्भरता ने कारीगरों की आय कम कर दी है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1 सही है क्योंकि पारंपरिक व्यवसाय भारत की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि यंत्रीकरण और कारखानों में बने उत्पादों ने पारंपरिक व्यवसायों पर गंभीर आर्थिक दबाव डाला है। कथन 3 सही है क्योंकि अपर्याप्त बाजार पहुंच और बिचौलियों पर निर्भरता के कारण कारीगरों की आय में कमी आई है।
Q2. पारंपरिक व्यवसायों के संदर्भ में, सरकार की भूमिका के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
1. सरकार को पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
2. सरकार को कारीगरों के लिए बाजार पहुंच में सुधार के लिए नीतियां बनानी चाहिए।
3. सरकार को पारंपरिक समुदायों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने के लिए कदम उठाने चाहिए।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — कथन 1, 2 और 3 सभी सही हैं। विशेषज्ञ ने पारंपरिक व्यवसायों को संरक्षित करने में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है। बाजार पहुंच में सुधार और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करना भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत क्षेत्र हैं।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में पारंपरिक व्यवसायों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। इन व्यवसायों को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में नीतिगत समर्थन की भूमिका पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** पारंपरिक व्यवसायों के महत्व और भारतीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक विकास में उनके योगदान का संक्षिप्त उल्लेख।
2. **पारंपरिक व्यवसायों के सामने चुनौतियाँ:**
* **आर्थिक तनाव:** यंत्रीकरण, कारखानों में बने उत्पादों से प्रतिस्पर्धा, अनियमित आय।
* **बाजार पहुंच का अभाव:** बिचौलियों पर निर्भरता, आधुनिक बाजार से जुड़ाव की कमी, कम आय।
* **सामाजिक भेदभाव:** कुछ समुदायों के खिलाफ जारी भेदभाव।
* **कौशल का क्षरण:** नई पीढ़ी द्वारा पारंपरिक कौशल को अपनाने में कमी।
* **वित्तीय सहायता का अभाव:** ऋण और पूंजी तक सीमित पहुंच।
3. **नीतिगत समर्थन की भूमिका:**
* **संरक्षण और संवर्धन:** पारंपरिक व्यवसायों को बचाने और बढ़ावा देने में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका।
* **बाजार पहुंच में सुधार:** ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ना, मेलों और प्रदर्शनियों का आयोजन, प्रत्यक्ष विपणन चैनलों को बढ़ावा देना।
* **कौशल विकास और प्रशिक्षण:** पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीकों के साथ एकीकृत करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।
* **वित्तीय सहायता:** आसान ऋण, सब्सिडी, और सूक्ष्म-वित्तपोषण (micro-financing) योजनाएं।
* **सामाजिक सुरक्षा:** कारीगरों और पारंपरिक श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और अन्य कल्याणकारी उपाय।
* **संवैधानिक सुरक्षा उपाय:** पारंपरिक समुदायों के सशक्तिकरण के लिए संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी कार्यान्वयन।
* **जागरूकता और प्रचार:** पारंपरिक उत्पादों और शिल्पों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
4. **निष्कर्ष:** पारंपरिक व्यवसायों के संरक्षण के लिए एक समग्र और एकीकृत नीतिगत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों को संबोधित करे।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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