17 Oct पीएम-अजय योजना: 18,093 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ का दर्जा, जानिए कैसे मिल रहा लाभ
✎ पीएम-अजय के तीन घटक (आदर्श ग्राम, सहायता अनुदान और छात्रावास) अनुच्छेद 46 के निदेशक सिद्धांत की भावना को व्यावहारिक रूप देते हैं, जबकि मूल्यांकन के लिए कवरेज, घोषित आदर्श गांव और वास्तविक परिणामों को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — शासन व्यवस्था, संविधान, सामाजिक न्याय (अनुसूचित जातियों, कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका क्रियान्वयन) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II — संघ और राज्यों के बीच वित्तीय हस्तांतरण (केंद्रीय सहायता और अनुदान की भूमिका) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र I — भारतीय समाज (जाति आधारित असमानता और सामाजिक सशक्तिकरण) | सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र III — समावेशी विकास और रोजगार (कौशल विकास, आजीविका संवर्धन)
- Prelims: प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) — मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, आदर्श ग्राम घटक — अनुसूचित जाति बहुल गांवों का विकास, अनुच्छेद 46 — दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति (राज्य नीति का निदेशक तत्व), अनुच्छेद 341 — अनुसूचित जातियों की पहचान (राष्ट्रपति की अधिसूचना), अनुच्छेद 275 — संघ से राज्यों को सहायता अनुदान (संचित निधि से), बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना — पीएम-अजय में समाहित पूर्ववर्ती योजनाओं में से एक, ग्राम विकास योजना (VDP) — गांव स्तर पर विकास की योजना, पीएम-अजय पोर्टल और मोबाइल ऐप — एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी
- Essay: समावेशी विकास के लिए लक्षित योजनाएं: क्या केवल अवसंरचना पर्याप्त है, या सामाजिक परिवर्तन के लिए आजीविका, शिक्षा और सम्मान भी आवश्यक हैं?, आदर्श गांव की अवधारणा: अंत्योदय से सर्वोदय तक की यात्रा और वंचित समुदायों का सशक्तिकरण
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-अजय के तीन घटक (आदर्श ग्राम, सहायता अनुदान और छात्रावास) अनुच्छेद 46 के निदेशक सिद्धांत की भावना को व्यावहारिक रूप देते हैं, जबकि मूल्यांकन के लिए कवरेज, घोषित आदर्श गांव और वास्तविक परिणामों को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) की प्रगति का विवरण जारी किया है। इसके अनुसार 8 सितंबर 2026 तक 18,093 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया जा चुका है, जबकि योजना के इस घटक में लगभग 47,200 से अधिक गांवों को शामिल किया गया बताया गया है, जिससे 47.79 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ मिलने का दावा है। राज्यों और जिलों को सहायता अनुदान के रूप में वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच लगभग 1,730 करोड़ रुपये जारी किए गए। छात्रावासों के संदर्भ में 785 छात्रावास बनकर तैयार हो चुके हैं और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए दो नई छात्रावास परियोजनाओं (264 छात्र-छात्राओं की क्षमता) हेतु 61.46 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। साथ ही, योजना के क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत करने के लिए पीएम-अजय मोबाइल ऐप और पोर्टल की शुरुआत की गई है। यह समाचार इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यह लक्षित कल्याणकारी योजना के तीनों घटकों, केंद्र-राज्य वित्तीय हस्तांतरण और डिजिटल शासन, तीनों को एक साथ दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 46 राज्य को दुर्बल वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति का निर्देश देता है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है और अनुच्छेद 15(4) सामाजिक-शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष उपबंधों की अनुमति देता है।
- नीतिगत विकास: अनुसूचित जातियों के लिए विशेष घटक योजना (SCSP) जैसे दृष्टिकोण पहले से चले आ रहे थे। वित्त वर्ष 2021-22 में पीएम-अजय के अंतर्गत कई पूर्ववर्ती योजनाओं को एकीकृत कर एक ढांचे में लाया गया, ताकि कार्यक्रमों का दोहराव कम हो और लक्ष्य स्पष्ट रहें।
- सहायता अनुदान की संस्थागत व्यवस्था: संविधान का अनुच्छेद 275 संघ से राज्यों को सहायता अनुदान की व्यवस्था करता है, जबकि इस योजना के अंतर्गत सहायता अनुदान सीधे राज्यों और जिलों की परियोजनाओं के लिए जारी होता है। इससे राज्य स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाएं तैयार करने की गुंजाइश बनती है।
- सामाजिक-आर्थिक सूचक: ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति की आबादी के बीच शिक्षा, साक्षरता, स्कूल में दाखिला, आय और मूलभूत सेवाओं तक पहुंच की कमी लंबे समय से नीति-चुनौती रही है। इसी कारण से लक्षित आर्थिक और अवसंरचनात्मक हस्तक्षेप आवश्यक माने जाते हैं।
- डिजिटल शासन की पहल: सरकारी योजनाओं में प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और वास्तविक-समय निगरानी (real-time monitoring) पर बल दिया जा रहा है, ताकि लाभार्थियों तक पहुंच, वित्तीय उपयोग और परियोजना प्रगति का पारदर्शी रिकॉर्ड रहे।
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) क्या है?
- यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण करना है।
- इसके तीन मुख्य घटक हैं: (क) अनुसूचित जाति बहुल गांवों का ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में विकास, (ख) राज्य और जिला स्तर की सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए सहायता अनुदान, और (ग) अनुसूचित जाति छात्रों के लिए छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत।
- ‘आदर्श ग्राम’ की परिकल्पना ऐसे गांव के रूप में है जहां बुनियादी सेवाएं उपलब्ध हों, समाज के सभी वर्गों की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी हों और असमानताएं न्यूनतम हों।
- सहायता अनुदान के अंतर्गत व्यापक आजीविका परियोजनाएं, कौशल विकास और उससे जुड़ी अवसंरचना पर बल दिया जाता है, ताकि लक्षित आबादी की आय में वृद्धि हो।
- छात्रावास घटक का विशेष लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले छात्रों को मिलता है, क्योंकि इससे रहने की सुविधा और शिक्षा के अवसर दोनों सुनिश्चित होते हैं।
- योजना के अंतर्गत जहां आवश्यक हो, वहां आवासीय विद्यालयों के माध्यम से साक्षरता और स्कूल में दाखिले को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी रखा गया है।
- क्रियान्वयन की निगरानी के लिए पीएम-अजय मोबाइल ऐप और पीएम-अजय पोर्टल के माध्यम से एंड-टू-एंड डिजिटल प्रक्रिया अपनाई गई है, जो वास्तविक-समय आधार पर कार्य करती है।
- विश्लेषण का एक बिंदु: ‘आदर्श ग्राम’ के रूप में घोषित गांवों की संख्या (18,093) और योजना में शामिल गांवों की संख्या (47,200 से अधिक) में अंतर है। परीक्षा की दृष्टि से यह समझना उपयोगी है कि कवरेज और घोषित लक्ष्य प्राप्ति, दोनों अलग-अलग मापदंड हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| Feature | Significance |
|---|---|
| आदर्श ग्राम घटक | अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचना, आवश्यक सेवाओं और जीवन स्तर में सुधार के लिए गांव-आधारित विकास योजना। अब तक 18,093 गांव (8 सितंबर 2026 तक) घोषित किए जा चुके हैं। |
| सहायता अनुदान | राज्यों और जिलों को आजीविका, कौशल विकास और उससे जुड़ी अवसंरचना की परियोजनाओं के लिए सीधे केंद्रीय सहायता। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच लगभग 1,730 करोड़ रुपये जारी किए गए। |
| छात्रावास निर्माण और मरम्मत | ग्रामीण और दूर-दराज़ क्षेत्रों के अनुसूचित जाति छात्रों को आवास और शिक्षा का अवसर। 785 छात्रावास पूरे हो चुके हैं; वित्त वर्ष 2026-27 में दो परियोजनाओं (264 छात्र-छात्राओं की क्षमता) के लिए 61.46 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। |
| ग्राम विकास योजना (वीडीपी) | प्रत्येक आदर्श ग्राम के लिए नियोजित विकास का आधार। 27,032 वीडीपी तैयार की गई हैं और 46,944 विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। |
| पीएम-अजय मोबाइल ऐप और पोर्टल | योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल प्रक्रिया, जो वास्तविक-समय आधार पर काम करती है। इससे कागजी प्रक्रिया घटती है और शासन में पारदर्शिता बढ़ती है। |
महत्व
सामाजिक न्याय और समावेशन
- अनुसूचित जाति बहुल गांवों को लक्षित करके यह योजना सामाजिक न्याय के संवैधानिक लक्ष्य को व्यवहार में लाती है।
- 47 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ मिलने का अनुमान है, जिससे बुनियादी सेवाओं तक पहुंच का अंतर कम होने की संभावना है।
- आदर्श ग्राम की परिकल्पना में समाज के सभी वर्गों की न्यूनतम आवश्यकताएं पूरी करना और असमानताएं न्यूनतम करना शामिल है।
आर्थिक और आजीविका विकास
- व्यापक आजीविका परियोजनाओं और कौशल विकास के माध्यम से लक्षित आबादी की आय बढ़ाने पर जोर है।
- 2.5 लाख से अधिक व्यक्तिगत और समूह लाभार्थियों को कौशल और आजीविका के अवसर मिले हैं।
- ग्रामीण अवसंरचना में निवेश से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार की संभावना बनती है।
शिक्षा और मानव संसाधन विकास
- छात्रावास सुविधा से ग्रामीण और दूर-दराज़ के छात्रों की स्कूल में नियमित उपस्थिति और उच्च शिक्षा तक पहुंच सुधरती है।
- जहां आवश्यक हो, वहां आवासीय विद्यालयों के माध्यम से साक्षरता और स्कूलों में दाखिले को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।
शासन और संघीय सहयोग
- राज्यों और जिलों को सीधे सहायता अनुदान देना केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय सहयोग का एक रूप है।
- डिजिटल ऐप और पोर्टल से योजना की निगरानी और वास्तविक-समय डेटा तक पहुंच आसान होती है, जो प्रशासनिक दक्षता में योगदान देता है।
चुनौतियाँ
1. अनुदान उपयोग और क्षमता निर्माण
- सहायता अनुदान का प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब राज्य और जिला स्तर पर परियोजना नियोजन, क्रियान्वयन और निगरानी की क्षमता मजबूत हो।
- विलंब या अधूरी परियोजनाएं केंद्रीय सहायता के उद्देश्य को कमजोर करती हैं।
यूपीएससी लिंक: शासन में प्रशासनिक सुधार और सार्वजनिक वित्त प्रबंधन
2. विभिन्न योजनाओं में अभिसरण का अभाव
- आदर्श ग्राम में सड़क, जल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषय अलग-अलग विभागों और योजनाओं से जुड़े होते हैं।
- समन्वय के बिना एक ही गांव में संसाधनों का दोहराव या कुछ आवश्यकताओं का छूट जाना संभव है।
यूपीएससी लिंक: केंद्र-राज्य समन्वय और योजनाओं का अभिसरण
3. आजीविका की स्थिरता
- कौशल प्रशिक्षण के बाद रोजगार या स्वरोजगार तक पहुंच सुनिश्चित करना और उसे बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है।
- बाजार से जुड़ाव और ऋण सुविधा के अभाव में आय वृद्धि सीमित रह सकती है।
यूपीएससी लिंक: रोजगार, कौशल विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
4. डिजिटल अंतराल
- ऑनलाइन निगरानी और डिजिटल प्रक्रिया के लिए ग्रामीण स्तर पर इंटरनेट, मोबाइल और डिजिटल साक्षरता आवश्यक है।
- तकनीक से बहिष्करण की स्थिति में लाभार्थी योजना की जानकारी और सेवाओं से वंचित रह सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: ई-शासन और डिजिटल विभाजन
5. आंकड़ों की व्याख्या और लक्ष्यों में अंतर
- प्रेस विज्ञप्ति में 47,200 से अधिक गांव योजना में शामिल बताए गए हैं, जबकि 18,093 गांव आदर्श ग्राम घोषित हैं। दोनों संख्याओं का संबंध योजना के चरण से है, जिसे परीक्षा के लिए अलग से समझना चाहिए।
- लक्ष्य, घोषणा और पूर्णता के बीच का अंतर नीतिगत मूल्यांकन में ध्यान देने योग्य है।
यूपीएससी लिंक: सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन और प्रदर्शन निगरानी
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| Issue | Concern |
|---|---|
| अनुदान का उपयोग | आवंटित और जारी राशि का वास्तविक उपयोग और परियोजनाओं का समय पर पूरा होना सुनिश्चित करना। |
| योजनाओं का अभिसरण | आदर्श ग्राम में विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं के कार्यों का समन्वय न होने से दोहराव या अंतराल की आशंका। |
| आजीविका की स्थिरता | प्रशिक्षित लाभार्थियों को स्थायी रोजगार और बाजार से जोड़ने की चुनौती। |
| डिजिटल पहुंच | ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता की कमी से ऐप और पोर्टल का लाभ सीमित होना। |
| छात्रावास क्षमता | 264 छात्र-छात्राओं की नई क्षमता की तुलना में ग्रामीण छात्रों की मांग अधिक होने पर पहुंच का दबाव। |
| आंकड़ों की पारदर्शिता | योजना में शामिल गांवों, घोषित आदर्श ग्रामों और पूर्ण कार्यों के बीच स्पष्ट संबंध सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना आवश्यक। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY)
आगे की राह
- आदर्श ग्राम के लिए गांव-वार ग्राम विकास योजनाओं को स्थानीय आवश्यकता और जनभागीदारी के आधार पर अंतिम रूप देना चाहिए।
- विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं को एक ही गांव के स्तर पर जोड़कर अभिसरण की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
- सहायता अनुदान के उपयोग की समय-सीमा और प्रगति का नियमित मूल्यांकन सार्वजनिक डैशबोर्ड के माध्यम से होना चाहिए।
- कौशल प्रशिक्षण को स्थानीय बाजार की मांग और वित्तीय सेवाओं (ऋण और विपणन) से जोड़ना आवश्यक है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को पीएम-अजय पोर्टल के उपयोग के साथ जोड़ना चाहिए।
- छात्रावासों की बढ़ती मांग को देखते हुए क्षमता विस्तार और रखरखाव के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी चाहिए।
- लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन में पारदर्शिता बढ़ाकर लक्षित वर्ग तक लाभ पहुंचना सुनिश्चित करना चाहिए।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) · समावेशी विकास (Inclusive Development) · आदर्श ग्राम (Model Village) · अनुसूचित जाति उप-योजना (Scheduled Caste Sub-Plan) · अनुच्छेद 46 (Article 46) · अनुदान सहायता (Grant-in-aid) · छात्रावास अवसंरचना (Hostel Infrastructure) · ग्राम विकास योजना (Village Development Plan) · सामाजिक-आर्थिक सूचकांक (Socio-economic Indicators) · लक्षित हस्तक्षेप (Targeted Intervention) · एंड-टू-एंड डिजिटल प्रक्रिया (End-to-end Digital Processing) · राज्य-केंद्र वित्तीय साझेदारी (Centre-State Fiscal Partnership)
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की उन्नति का राज्य का दायित्व।
- अनुच्छेद 282: संघ द्वारा सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए राज्यों को अनुदान देने का आधार।
- अनुच्छेद 15(4): सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति हेतु विशेष उपबंध।
अवधारणा प्रवाह
अनुसूचित जाति बहुल गांवों की पहचान और अवसंरचना तथा सेवाओं में कमियों का आकलन → ग्राम विकास योजना (वीडीपी) तैयार करके आदर्श ग्राम के रूप में घोषणा → राज्यों और जिलों को सहायता अनुदान जारी करना और परियोजनाओं का क्रियान्वयन → कौशल विकास, आजीविका परियोजनाओं और छात्रावासों के माध्यम से लाभार्थियों तक सीधा लाभ पहुंचना → पीएम-अजय मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए डिजिटल निगरानी और वास्तविक-समय प्रबंधन → सामाजिक-आर्थिक संकेतकों, शिक्षा और दाखिले में सुधार, जिससे समावेशी विकास का लक्ष्य आगे बढ़ना
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY) का क्रियान्वयन सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
2. इस योजना के ‘आदर्श ग्राम’ घटक में अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचना और आवश्यक सेवाओं के विकास पर बल दिया जाता है।
3. यह योजना जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों के लिए चलाई जाती है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- सभी
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है: PM-AJAY सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की योजना है। कथन 2 सही है: ‘आदर्श ग्राम’ घटक का फोकस अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचना और आवश्यक सेवाओं की कमियां दूर करना है। कथन 3 गलत है, क्योंकि यह अनुसूचित जाति के लिए है, जनजाति के लिए नहीं; जनजातीय क्षेत्रों की योजनाएं जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आती हैं।
Q2. निम्नलिखित में कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए:
कथन (A): पीएम-अजय के अंतर्गत छात्रावासों का निर्माण और मरम्मत ग्रामीण तथा दूर-दराज के क्षेत्रों के अनुसूचित जाति छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में सहायक है।
कारण (R): संविधान का अनुच्छेद 46 राज्य को दुर्बल वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों, के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि करने का निर्देश देता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
- (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- (A) सही है, किंतु (R) गलत है
- (A) गलत है, किंतु (R) सही है
उत्तर: (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है — अनुच्छेद 46 राज्य नीति का निदेशक तत्व है, जो दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि का लक्ष्य देता है। छात्रावास सुविधा उसी संवैधानिक निर्देश का व्यावहारिक क्रियान्वयन है, इसलिए (R) ने (A) की सही व्याख्या दी है। ध्यान रहे कि अनुच्छेद 46 न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।
Q3. निम्नलिखित सुमेलन पर विचार कीजिए:
स्तंभ I (संवैधानिक प्रावधान)
A. अनुच्छेद 17
B. अनुच्छेद 46
C. अनुच्छेद 338
D. अनुच्छेद 341
स्तंभ II (विषय)
1. अस्पृश्यता का उन्मूलन
2. दुर्बल वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि
3. अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
4. अनुसूचित जातियों की सूची निर्दिष्ट करने की राष्ट्रपति की शक्ति
सही सुमेलन चुनिए:
- A-1, B-2, C-3, D-4
- A-2, B-1, C-4, D-3
- A-1, B-3, C-2, D-4
- A-4, B-2, C-1, D-3
उत्तर: A-1, B-2, C-3, D-4 — अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत करता है (1)। अनुच्छेद 46 राज्य नीति का निदेशक तत्व है जो दुर्बल वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों की बात करता है (2)। अनुच्छेद 338 अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग से संबंधित है (3)। अनुच्छेद 341 राष्ट्रपति को अनुसूचित जातियों की सूची निर्दिष्ट करने की शक्ति देता है (4)।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ पीएम-अजय जैसी लक्षित योजनाएं अनुसूचित जाति बहुल गांवों में अवसंरचना, आवश्यक सेवाओं और आजीविका के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देने का दावा करती हैं। इस दावे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। साथ ही उत्तर दीजिए कि क्या जाति-आधारित लक्षित हस्तक्षेप और सार्वभौमिक सेवाओं की सुलभता के बीच संतुलन बनाए रखना संभव है, और इसके लिए किन संस्थागत सुधारों की आवश्यकता है? (15 Marks)
रूपरेखा: MODEL-ANSWER SKELETON: (1) भूमिका: पीएम-अजय (PM-AJAY) का परिचय, जो वर्ष 2021-22 से लागू है और जिसमें पूर्ववर्ती तीन योजनाओं (प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत अनुदान सहायता और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना) को एकीकृत किया गया; समावेशी विकास की अवधारणा। (2) संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 15(4) (सामाजिक-शैक्षिक पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान), अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन), अनुच्छेद 46 (दुर्बल वर्गों के हितों की अभिवृद्धि), अनुच्छेद 338 (राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग)। राज्य नीति के निदेशक तत्व न्यायालय में अप्रवर्तनीय होने से कल्याण योजनाएं कार्यकारी नीति पर निर्भर हैं। (3) नीति-इतिहास: छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) के दौरान अनुसूचित जाति उप-योजना की शुरुआत; सामाजिक-आर्थिक असमानता का बहुआयामी विश्लेषण। (4) तथ्यात्मक आंकड़े: 18,093 आदर्श ग्राम घोषित (8 सितंबर 2026 तक); राज्यों को लगभग 1,730 करोड़ रुपये अनुदान (वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26); 785 छात्रावास पूरे; 2.5 लाख से अधिक लाभार्थी; 2026-27 में 61.46 करोड़ रुपये के दो छात्रावास प्रकल्प। (5) समर्थक तर्क: लक्षित संसाधन-प्रवाह से अवसंरचना की खाई भरना; बहुआयामी गरीबी और अस्पृश्यता-जनित बहिष्करण के विरुद्ध सकारात्मक कार्रवाई; आवासीय विद्यालय और छात्रावास से ग्रामीण छात्रों की शिक्षा में प्रवेश। (6) आलोचनात्मक पक्ष: लक्ष्य-गांवों की संख्या और कुल लक्षित गांवों के बीच अंतर का प्रश्न; ‘आदर्श ग्राम’ की परिभाषा को केवल भौतिक अवसंरचना तक सीमित रखने का खतरा; अमर्त्य सेन के क्षमता दृष्टिकोण (Capability Approach) के अनुसार आय के बजाय क्षमताओं का विस्तार अधिक आवश्यक; सुखदेव थोराट के शोध के अनुसार ग्रामीण बाजार और भूमि-स्वामित्व में भेदभाव जैसी संरचनात्मक बाधाएं; संसाधनों के उपयोग में राज्य-स्तरीय क्षमता और समय पर धनराशि का उपयोग। (7) सर्वोच्च न्यायालय का संदर्भ: राज्य बनाम देविंदर सिंह (State of Punjab v. Davinder Singh, 2024) में सात-न्यायाधीशीय पीठ ने अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति दी, जिससे लक्षित योजनाओं में भी आंतरिक असमानता के आधार पर वितरण की बहस उठी। (8) संतुलन और सुधार: सार्वभौमिक सेवाओं (जैसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और आयुष्मान भारत) के साथ लक्षित हस्तक्षेप का तालमेल; डिजिटल निगरानी (पीएम-अजय मोबाइल ऐप और पोर्टल) से पारदर्शिता; सामाजिक लेखा परीक्षा, केंद्र-राज्य सहयोग और क्षमता-निर्माण। (9) निष्कर्ष: लक्षित योजना का मूल्यांकन परिणाम-आधारित सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों (जैसे साक्षरता और स्कूल दाखिला दर) पर होना चाहिए, न कि केवल व्यय या घोषित गांवों की संख्ा पर। जनगणना 2011 में अनुसूचित जाति साक्षरता लगभग 66.1 प्रतिशत थी, जो आंकड़ों की तुलना के लिए आधार-रेखा हो सकती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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