29 Jul पीएम-एसईटीयू योजना: आईटीआई उन्नयन से कौशल विकास में बड़ा बदलाव


मानचित्र व माइंड-मैप: PM-SEETU Scheme: Upgraded ITIs by State
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — शासन, सामाजिक न्याय | GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
- Prelims: पीएम-सेतु योजना, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI), राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, हब एवं स्पोक मॉडल, राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) में उत्कृष्टता केंद्र
- Essay: कौशल विकास और भारत का आर्थिक भविष्य, युवा शक्ति का सदुपयोग: कौशल, रोजगार और समावेशी विकास
त्वरित पुनरावृत्ति: पीएम-सेतु योजना भारत में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) को आधुनिक उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत कर व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना के अंतर्गत हुई प्रगति की जानकारी दी है। इस योजना का उद्देश्य देश में उन्नत प्रयोगशालाओं, आधुनिक मशीनों तथा उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता एवं प्रासंगिकता को सुदृढ़ करना है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आईटीआई के उन्नयन तथा राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जो भारत के युवा कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
पृष्ठभूमि
- भारत में कौशल विकास की आवश्यकता को लंबे समय से महसूस किया गया है, विशेषकर युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु।
- औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) देश में व्यावसायिक शिक्षा के प्रमुख स्तंभ रहे हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक उद्योग की मांगों के अनुरूप उन्नयन की आवश्यकता थी।
- सरकार ने ‘कौशल भारत, कुशल भारत’ के दृष्टिकोण के साथ विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों की शुरुआत की है, जिसमें ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ (PMKVY) प्रमुख है।
- चौथी औद्योगिक क्रांति (Industry 4.0) के आगमन के साथ, उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), डेटा साइंस आदि में कौशल की मांग तेजी से बढ़ी है।
- बेरोजगारी और अल्प-रोजगार की चुनौती से निपटने के लिए, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक प्रशिक्षण आवश्यक है।
- उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना ताकि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जा सके, एक महत्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकता रही है।
पीएम-सेतु योजना क्या है?
- पीएम-सेतु योजना का पूर्ण रूप प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. है।
- इसका मुख्य उद्देश्य देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को उन्नत प्रयोगशालाओं, आधुनिक मशीनों और उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से मजबूत करना है।
- योजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) में प्रशिक्षण प्रदान करने की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।
- यह उद्योग मानकों के अनुरूप अवसंरचना एवं उपकरणों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है, विशेषकर नवोन्मेषी एवं उभरते क्षेत्रों में दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रम शुरू करने पर।
- योजना का एक महत्वपूर्ण घटक मांग-आधारित कौशल विकास तथा बेहतर रोजगार परिणाम सुनिश्चित करने के लिए उद्योगों के साथ संपर्क को मजबूत करना है।
- इसमें प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) की क्षमता में वृद्धि करना भी शामिल है।
- योजना के दो मुख्य घटक हैं: घटक-I के तहत 1,000 राजकीय आईटीआई (200 हब आईटीआई एवं 800 स्पोक आईटीआई) का हब एवं स्पोक मॉडल के अंतर्गत उन्नयन किया जाएगा; घटक-II के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर एवं लुधियाना स्थित पाँच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) की क्षमता में वृद्धि की जाएगी, जिसमें वैश्विक सहभागिता के साथ प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण हेतु क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना भी शामिल है।
- योजना के कार्यान्वयन का मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण केंद्र सरकार, राज्य सरकारों तथा उद्योग भागीदारों के प्रतिनिधियों से गठित राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) और राज्य स्तर पर राज्य संचालन समितियों (SSC) द्वारा किया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| उन्नत प्रयोगशालाएँ और आधुनिक मशीनें | व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता में सुधार, उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास। |
| उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम | नवोन्मेषी और उभरते क्षेत्रों में मांग-आधारित कौशल प्रदान करना, जिससे बेहतर रोजगार परिणाम सुनिश्चित हों। |
| हब एवं स्पोक मॉडल | 1,000 राजकीय आईटीआई (200 हब, 800 स्पोक) का उन्नयन, स्मार्ट कक्षाओं और डिजिटल शिक्षण सामग्री का समावेश। |
| राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTIs) की क्षमता वृद्धि | प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु क्षमता बढ़ाना, वैश्विक सहभागिता के साथ क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना। |
| उद्योग-संचालित विशेष प्रयोजन साधन (SPV) | आईटीआई के उन्नयन में उद्योगों की सक्रिय भूमिका, पाठ्यक्रम पुनर्रचना और व्यावहारिक अनुभव पर जोर। |
| राज्य संचालन समितियाँ (SSC) और राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) | योजना के कार्यान्वयन का मार्गदर्शन, पर्यवेक्षण और निगरानी, केंद्र, राज्य और उद्योग भागीदारों का समन्वय। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- बेहतर कौशल से श्रमबल की उत्पादकता में वृद्धि होगी, जिससे देश की आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को गति मिलेगी।
- उद्योग-अनुरूप कौशल विकास से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बेरोजगारी दर में कमी आएगी।
- उभरते क्षेत्रों में कुशल कार्यबल की उपलब्धता से भारत वैश्विक विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
सामाजिक महत्व
- युवाओं को गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा और सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा मिलेगा।
- कौशल विकास से समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जिससे आय असमानता कम होगी।
- आधुनिक कौशल से लैस युवा उद्यमिता (Entrepreneurship) की ओर अग्रसर होंगे, जिससे स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
रणनीतिक महत्व
- यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, विशेषकर विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में।
- उन्नत कौशल प्रशिक्षण से भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।
- उद्योगों के साथ मजबूत संबंध से कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) अधिक लचीला और मांग-आधारित बनेगा।
चुनौतियाँ
1. गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षकों की कमी
- उन्नत प्रयोगशालाओं और आधुनिक मशीनों के संचालन तथा प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त संख्या में उच्च-कुशल प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
- प्रशिक्षकों को नवीनतम उद्योग मानकों और प्रौद्योगिकियों से अवगत रखने के लिए नियमित प्रशिक्षण और पुनर्कौशल (Reskilling) की आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: मानव संसाधन विकास, कौशल विकास
2. उद्योग-संस्थान समन्वय
- उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों को निरंतर अद्यतन करना और उद्योग के साथ प्रभावी जुड़ाव बनाए रखना एक सतत चुनौती है।
- छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को योजना से जोड़ना और उनकी विशिष्ट कौशल आवश्यकताओं को पूरा करना जटिल हो सकता है।
यूपीएससी लिंक: औद्योगिक नीति, कौशल विकास
3. अवसंरचना का आधुनिकीकरण और रखरखाव
- देश भर में हजारों आईटीआई में उन्नत अवसंरचना और उपकरणों की स्थापना के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों और कुशल प्रबंधन की आवश्यकता है।
- स्थापित आधुनिक उपकरणों का उचित रखरखाव और समय पर उन्नयन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी।
यूपीएससी लिंक: बुनियादी ढाँचा विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी
4. स्थानीय मांग और क्षेत्रीय असमानताएँ
- विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में स्थानीय औद्योगिक क्षमताओं और कौशल आवश्यकताओं में भिन्नता के कारण एक समान दृष्टिकोण लागू करना कठिन हो सकता है।
- ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित आईटीआई को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना और छात्रों को आकर्षित करना एक चुनौती है।
यूपीएससी लिंक: क्षेत्रीय असमानताएँ, समावेशी विकास
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वित्तीय संसाधन | योजना के व्यापक दायरे को देखते हुए, पर्याप्त और निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करना तथा निधियों का कुशल उपयोग एक चुनौती है। |
| तकनीकी उन्नयन | तेजी से बदलती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाने और आईटीआई को नवीनतम उपकरणों से लैस रखने की आवश्यकता है। |
| जागरूकता और भागीदारी | छात्रों, अभिभावकों और उद्योगों के बीच व्यावसायिक प्रशिक्षण के महत्व और योजना के लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाना। |
| प्रशासनिक दक्षता | केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करना। |
| प्रमाणीकरण और मान्यता | प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रमाणीकरण सुनिश्चित करना ताकि रोजगार योग्यता बढ़े। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana – PMKVY)
- शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (Craftsmen Training Scheme – CTS)
आगे की राह
- प्रशिक्षकों के लिए नियमित पुनर्कौशल और उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, जिसमें उद्योग विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
- उद्योगों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित की जाए, जिसमें पाठ्यक्रम डिजाइन, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट में उनकी सक्रिय भागीदारी हो।
- आईटीआई में आधुनिक उपकरणों के रखरखाव और उन्नयन के लिए एक समर्पित निधि और तकनीकी सहायता प्रणाली विकसित की जाए।
- स्थानीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का गहन विश्लेषण कर क्षेत्रीय कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएँ।
- कौशल विकास को स्कूली शिक्षा के साथ एकीकृत किया जाए ताकि कम उम्र से ही छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण के प्रति आकर्षित किया जा सके।
- प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार परिणामों की नियमित तृतीय-पक्ष प्रभाव आकलन (Third-Party Impact Assessment) सुनिश्चित की जाए।
- डिजिटल शिक्षण सामग्री और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाए ताकि दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच बढ़ाई जा सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कौशल विकास · रोजगार योग्यता · औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) · राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) · उद्योग-अकादमिक सहयोग · हब एवं स्पोक मॉडल · प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण · उभरते क्षेत्र · आर्थिक संवृद्धि · मानव पूंजी
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 41’, ‘note’: ‘काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार’}
- {‘article’: ‘अनुच्छेद 46’, ‘note’: ‘कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा’}
अवधारणा प्रवाह
पीएम-सेतु योजना का शुभारंभ → आईटीआई और एनएसटीआई का उन्नयन → उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रम और आधुनिक अवसंरचना → बेहतर कौशल विकास और प्रशिक्षण → उच्च रोजगार योग्यता और उद्यमिता → आर्थिक संवृद्धि और सामाजिक समावेशन
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना का उद्देश्य देश में उन्नत प्रयोगशालाओं और आधुनिक मशीनों के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना है।
2. यह योजना केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है और इसमें राज्य सरकारों की कोई भूमिका नहीं है।
3. इसके अंतर्गत 1,000 राजकीय आईटीआई का उन्नयन हब एवं स्पोक मॉडल के तहत किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को सुदृढ़ करना है। कथन 2 गलत है क्योंकि योजना के कार्यान्वयन में राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कथन 3 सही है क्योंकि योजना के घटक-I में 1,000 राजकीय आईटीआई का हब एवं स्पोक मॉडल के अंतर्गत उन्नयन शामिल है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से पीएम-एसईटीयू योजना का/के प्रमुख उद्देश्य है/हैं?
1. औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) में प्रशिक्षण प्रदायगी की गुणवत्ता में सुधार करना।
2. उद्योग मानकों के अनुरूप अवसंरचना एवं उपकरणों का आधुनिकीकरण करना।
3. विशेष रूप से नवोन्मेषी एवं उभरते क्षेत्रों में उद्योग-अनुरूप दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रम शुरू करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए तीनों उद्देश्य पीएम-एसईटीयू योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं। यह योजना प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अवसंरचना के आधुनिकीकरण और उद्योग-अनुरूप पाठ्यक्रमों के विकास पर केंद्रित है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आई.टी.आई. (पीएम-एसईटीयू) योजना का उद्देश्य भारत में कौशल विकास परिदृश्य को कैसे नया आकार देना है? इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधानों पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: पीएम-एसईटीयू योजना का संक्षिप्त परिचय और इसका मुख्य उद्देश्य (कौशल विकास और रोजगार योग्यता में सुधार)।
2. कौशल विकास परिदृश्य को नया आकार देना: योजना के प्रमुख घटकों और उद्देश्यों का विस्तृत वर्णन, जैसे:
– आईटीआई और एनएसटीआई में प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार।
– अवसंरचना और उपकरणों का आधुनिकीकरण।
– उद्योग-अनुरूप दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक पाठ्यक्रम (विशेषकर उभरते क्षेत्रों में)।
– उद्योग के साथ मजबूत संपर्क और मांग-आधारित कौशल विकास।
– प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु एनएसटीआई की क्षमता वृद्धि (वैश्विक सहभागिता सहित)।
– हब एवं स्पोक मॉडल का महत्व।
3. प्रभावी कार्यान्वयन में संभावित चुनौतियाँ:
– उद्योग-अकादमिक अंतर को पाटना।
– आधुनिक उपकरणों और प्रयोगशालाओं का रखरखाव।
– योग्य प्रशिक्षकों की कमी।
– स्थानीय उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों का निरंतर अद्यतन।
– राज्य सरकारों और उद्योग भागीदारों के बीच समन्वय।
– वित्तीय संसाधनों का कुशल उपयोग।
4. समाधान:
– नियमित उद्योग-संस्थान संवाद और पाठ्यक्रम समीक्षा।
– प्रशिक्षकों के लिए सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम।
– सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को सुदृढ़ करना।
– स्थानीय कौशल आवश्यकताओं का नियमित सर्वेक्षण।
– डिजिटल शिक्षण सामग्री और स्मार्ट कक्षाओं का अधिकतम उपयोग।
– प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन और निगरानी तंत्र।
5. निष्कर्ष: योजना के महत्व और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश (demographic dividend) को भुनाने में इसकी भूमिका पर बल।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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