पीएम फसल बीमा योजना में शामिल जोखिम और नई सुविधाएं क्या हैं?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत शामिल जोखिम और आपदाएं — concept mind map

पीएम फसल बीमा योजना में शामिल जोखिम और नई सुविधाएं क्या हैं?

✎ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के विरुद्ध व्यापक बीमा कवरेज प्रदान करती है, जिसमें अब जलभराव और कुछ शर्तों के तहत जंगली जानवरों से होने वाली क्षति भी शामिल है।

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विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper III — कृषि, आर्थिक विकास  |  GS Paper I — भूगोल (आपदाएँ)
  • Prelims: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), फसल बीमा, प्राकृतिक आपदाएँ, जलभराव, जंगली जानवरों से फसल क्षति, कृषि योजनाएँ, स्वैच्छिक योजना, राज्य सरकार की भूमिका
  • Essay: भारत में कृषि संकट और किसानों की आय दोगुनी करने की चुनौतियाँ, जलवायु परिवर्तन और कृषि पर इसके प्रभाव: भारत के लिए नीतियाँ और समाधान

त्वरित पुनरावृत्ति: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के विरुद्ध व्यापक बीमा कवरेज प्रदान करती है, जिसमें अब जलभराव और कुछ शर्तों के तहत जंगली जानवरों से होने वाली क्षति भी शामिल है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत अब जलभराव को जोखिम कवर के रूप में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्यों को व्यक्तिगत आकलन के आधार पर जंगली जानवरों द्वारा होने वाले फसल नुकसान को ऐडऑन कवर के रूप में अधिसूचित करने की अनुमति दी गई है, जिसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। यह जानकारी योजना के कवरेज में महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को वर्ष 2016-17 में देश में लागू किया गया था।
  • यह योजना राज्यों के साथ-साथ किसानों के लिए भी स्वैच्छिक है।
  • इसका उद्देश्य गैर-निवारणीय प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को होने वाले नुकसान के विरुद्ध व्यापक जोखिम बीमा प्रदान करना है।
  • यह बुआई पूर्व से लेकर फसलोपरांत तक की अवधि को कवर करती है।
  • पहले जंगली जानवरों के कारण होने वाले फसल नुकसान को इस योजना के अंतर्गत कवर नहीं किया जाता था।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के अनुरोध पर यह संशोधन किया गया है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) क्या है?

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक फसल बीमा योजना है, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के लिए किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • यह योजना किसानों को कम प्रीमियम दर पर व्यापक जोखिम कवरेज प्रदान करती है, ताकि वे फसल खराब होने की स्थिति में आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें।
  • योजना के तहत, किसानों द्वारा भुगतान किया जाने वाला प्रीमियम खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% निर्धारित है। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करती हैं।
  • यह योजना बुआई से लेकर कटाई के बाद तक की अवधि को कवर करती है, जिसमें बुआई/रोपण में विफलता, खड़ी फसल के नुकसान (गैर-निवारणीय जोखिम), और कटाई के बाद के नुकसान शामिल हैं।
  • हालिया संशोधनों के तहत, जलभराव को सभी अधिसूचित फसलों के लिए जोखिम कवर के रूप में शामिल किया गया है।
  • जंगली जानवरों द्वारा होने वाले नुकसान को अब राज्य सरकारों की लागत पर एक ऐडऑन कवर के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है, जो राज्यों को अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कवरेज को अनुकूलित करने की अनुमति देता है।
  • योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) नोडल मंत्रालय है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
स्वैच्छिक योजना राज्यों और किसानों दोनों के लिए योजना में शामिल होना वैकल्पिक है, जिससे लचीलापन बढ़ता है।
व्यापक जोखिम बीमा बुवाई पूर्व से लेकर फसल कटाई के बाद तक, गैर-निवारणीय प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान को कवर करती है।
जंगली जानवरों से नुकसान का कवरेज राज्यों को ऐड-ऑन कवर के रूप में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को अधिसूचित करने की अनुमति, जिसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। यह किसानों की एक पुरानी मांग को पूरा करता है।
जलभराव का कवरेज सभी अधिसूचित फसलों के लिए जलभराव को जोखिम कवर के रूप में शामिल किया गया है, जो विशेष रूप से हाइड्रोफिलिक फसलों (जैसे धान, पटसन) के लिए महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकारों की भूमिका राज्य सरकारें अधिसूचित फसलों/क्षेत्रों का निर्धारण करती हैं और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के ऐड-ऑन कवर का खर्च वहन करती हैं।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले वित्तीय नुकसान से सुरक्षा प्रदान कर उनकी आय स्थिरता सुनिश्चित करती है।
  • कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देती है और किसानों को जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि हो सकती है।
  • जंगली जानवरों और जलभराव जैसे नए जोखिमों को शामिल करके बीमा कवरेज का विस्तार करती है, जिससे अधिक किसानों को लाभ मिलता है।

सामाजिक महत्व

  • किसानों की आत्महत्याओं को कम करने में सहायक, क्योंकि यह फसल खराब होने के कारण होने वाले भारी वित्तीय बोझ को कम करती है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और खाद्य असुरक्षा को कम करने में योगदान करती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

शासन और नीतिगत महत्व

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोगात्मक संघवाद (Cooperative Federalism) का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां राज्य अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार योजना को अनुकूलित कर सकते हैं।
  • कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन को मजबूत करती है, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए महत्वपूर्ण है।

चुनौतियाँ

1. कम कवरेज और जागरूकता

  • अभी भी बड़ी संख्या में किसान इस योजना के दायरे से बाहर हैं, विशेषकर छोटे और सीमांत किसान।
  • योजना के लाभों और प्रक्रिया के बारे में किसानों के बीच जागरूकता की कमी है।

2. दावा निपटान में देरी

  • फसल नुकसान के दावों के आकलन और निपटान में अक्सर देरी होती है, जिससे किसानों को समय पर राहत नहीं मिल पाती।
  • दावा निपटान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और जटिलताएँ भी एक चुनौती है।

3. जोखिम आकलन और प्रीमियम निर्धारण

  • फसल-विशिष्ट और क्षेत्र-विशिष्ट जोखिमों का सटीक आकलन करना चुनौतीपूर्ण है, जिससे प्रीमियम दरें प्रभावित होती हैं।
  • कुछ क्षेत्रों में उच्च प्रीमियम दरें किसानों के लिए योजना को कम आकर्षक बना सकती हैं।

4. राज्य सरकारों की भागीदारी

  • कुछ राज्य सरकारों द्वारा योजना में भागीदारी कम है या वे अपने हिस्से का प्रीमियम भुगतान करने में देरी करती हैं।
  • जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के ऐड-ऑन कवर का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाना, राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल सकता है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कम बीमा पैठ योजना के स्वैच्छिक होने के कारण, कई किसान अभी भी बीमा सुरक्षा से वंचित हैं।
दावा निपटान की जटिलता प्रक्रियागत बाधाएँ और दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकताएँ किसानों के लिए दावा करना मुश्किल बनाती हैं।
राज्य सरकारों पर वित्तीय बोझ जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के कवर का खर्च राज्यों द्वारा वहन करना उनके वित्त पर दबाव डाल सकता है।
मौसम डेटा की सटीकता फसल नुकसान के आकलन के लिए सटीक और समय पर मौसम डेटा की उपलब्धता एक चुनौती है।
जागरूकता का अभाव विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में किसानों को योजना के प्रावधानों और लाभों की पूरी जानकारी नहीं है।

सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

आगे की राह

  • योजना के बारे में किसानों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
  • दावा निपटान प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, जिसमें डिजिटल तकनीकों का अधिक उपयोग हो।
  • फसल नुकसान के आकलन के लिए रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए।
  • राज्य सरकारों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के कवर के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के विकल्पों पर विचार किया जाए।
  • स्थानीय स्तर पर कृषि जोखिमों का बेहतर आकलन करने के लिए ग्राम पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को शामिल किया जाए।
  • योजना के तहत शामिल जोखिमों की सूची का नियमित रूप से पुनर्मूल्यांकन किया जाए ताकि उभरते खतरों को शामिल किया जा सके।
  • बैंकों और बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि प्रीमियम संग्रह और दावा निपटान सुचारू रूप से हो सके।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना · फसल बीमा · प्राकृतिक आपदाएँ · कृषि जोखिम प्रबंधन · राज्य सरकार की भूमिका · जंगली जानवरों से नुकसान · जलभराव · स्वैच्छिक योजना · किसानों का कल्याण · कृषि क्षेत्र

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘अनुच्छेद 246’: ‘केंद्र और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘सातवीं अनुसूची’: ‘संघ, राज्य और समवर्ती सूची में कृषि’}

अवधारणा प्रवाह

प्राकृतिक आपदाएँ (गैर-निवारणीय) और जंगली जानवरों से नुकसान  →  फसलों को क्षति या हानि  →  किसानों को वित्तीय नुकसान  →  प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमा दावा  →  दावा निपटान और मुआवजा  →  किसानों की आय सुरक्षा और कृषि स्थिरता

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह योजना वर्ष 2016-17 से कार्यान्वित की जा रही है और किसानों के लिए स्वैच्छिक है।
2. यह केवल बुआई के बाद होने वाले नुकसान को कवर करती है, बुआई पूर्व के जोखिमों को नहीं।
3. जंगली जानवरों के कारण होने वाले फसल नुकसान को अब ऐड-ऑन कवर के रूप में शामिल किया जा सकता है, जिसका खर्च केंद्र सरकार वहन करती है।
उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?

  1. केवल एक
  2. केवल दो
  3. केवल तीन
  4. कोई नहीं

उत्तर: केवल एक — कथन 1 सही है क्योंकि PMFBY 2016-17 से लागू है और किसानों के लिए स्वैच्छिक है। कथन 2 गलत है क्योंकि यह योजना बुआई पूर्व से लेकर फसलोपरांत तक के नुकसान को कवर करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के ऐड-ऑन कवर का खर्च राज्य सरकार वहन करती है, न कि केंद्र सरकार।

Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा जोखिम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत कवर किया जाता है?

  1. बाढ़
  2. सूखा
  3. ओलावृष्टि
  4. उपरोक्त सभी

उत्तर: उपरोक्त सभी — प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना गैर-निवारणीय प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि आदि के कारण होने वाले फसल नुकसान के विरुद्ध व्यापक जोखिम बीमा प्रदान करती है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के प्रमुख उद्देश्यों और विशेषताओं का विश्लेषण कीजिए। हाल के परिवर्तनों के आलोक में, यह योजना कृषि क्षेत्र में किसानों के सामने आने वाले जोखिमों को कम करने में कितनी सफल रही है? (15 Marks)

रूपरेखा: उत्तर में PMFBY के उद्देश्यों (जैसे किसानों को वित्तीय सहायता, कृषि क्षेत्र में स्थिरता) और प्रमुख विशेषताओं (जैसे बुआई पूर्व से फसलोपरांत तक कवरेज, गैर-निवारणीय आपदाएं, स्वैच्छिक प्रकृति, कम प्रीमियम दरें) का विस्तार से उल्लेख किया जाना चाहिए। हाल के परिवर्तनों जैसे जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को ऐड-ऑन कवर के रूप में शामिल करना और जलभराव के कवरेज पर चर्चा करें। योजना की सफलता का मूल्यांकन करते समय इसकी चुनौतियों (जैसे दावों के निपटान में देरी, जागरूकता की कमी, राज्यों की भागीदारी) और लाभों (जैसे फसल सुरक्षा, ऋण पात्रता में सुधार) दोनों पर प्रकाश डालें। सांख्यिकीय डेटा (यदि उपलब्ध हो) और सरकारी रिपोर्टों का संदर्भ दें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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