21 Sep यूपीएससी के लिए: पर्यावरण मंत्री ने जयपुर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ सम्मेलन का किया उद्घाटन
✎ भारत में वन्यजीव संरक्षण एक संवैधानिक निर्देश और नागरिक कर्तव्य है, जो स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक सहयोग पर आधारित है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — पर्यावरण और पारिस्थितिकी | GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- Prelims: वन्यजीव संरक्षण, रामसर स्थल, बाघ अभ्यारण्य, हाथी अभ्यारण्य, CITES, CMS, CBD, WWF, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, ओरान पवित्र उपवन
- Essay: भारत में पर्यावरण संरक्षण: संवैधानिक मूल्य और सतत विकास, स्थानीय समुदायों की भागीदारी के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना
त्वरित पुनरावृत्ति: भारत में वन्यजीव संरक्षण एक संवैधानिक निर्देश और नागरिक कर्तव्य है, जो स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ वैश्विक सहयोग पर आधारित है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर में विश्व प्रकृति कोष (WWF) वैश्विक संरक्षण सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भारत की संवैधानिक प्रतिबद्धता, सांस्कृतिक मूल्यों और पिछले दशक में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला, साथ ही स्थानीय समुदायों को शामिल करते हुए संरक्षण और सह-अस्तित्व पर वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया।
पृष्ठभूमि
- भारत में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या लगभग 750 से बढ़कर 1000 से अधिक हो गई है।
- बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 47 से बढ़कर 58 और हाथी अभ्यारण्यों की संख्या 30 से बढ़कर 33 हो गई है।
- रामसर स्थलों की संख्या इसी अवधि में 24 से बढ़कर 101 हो गई है।
- भारत में चीतों का सफल पुन: आगमन एक महत्वपूर्ण संरक्षण उपलब्धि है।
- भारत CITES (वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन), CMS (प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन), CBD (जैव विविधता पर कन्वेंशन) और रामसर कन्वेंशन का पक्षकार है।
- संविधान में वन्यजीवों की रक्षा को राज्य का निर्देश (अनुच्छेद 48A) और नागरिक का कर्तव्य (अनुच्छेद 51A (g)) दोनों बनाया गया है।
भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रमुख पहलू
- भारत की संरक्षण प्रतिबद्धता संवैधानिक और सांस्कृतिक दोनों है, जो आधुनिक संरक्षित क्षेत्र कानून से कहीं अधिक पुराने विश्व दृष्टिकोण में निहित है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी तंत्र जैसे अखिल भारतीय जनसंख्या अनुमान (बाघ, हाथी, डॉल्फिन, शेर, हिम तेंदुआ) संरक्षण में सफलता के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।
- पर्यावास सुधार, गलियारों की सुरक्षा और व्यापक परिदृश्य दृष्टिकोण विशालकाय जीवों के संरक्षण के लिए अपनाए जाते हैं।
- राजस्थान में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण प्रजनन और ओरान पवित्र उपवनों के सामुदायिक नेतृत्व में संरक्षण प्रयास भूमि क्षरण को रोकने में सहायक रहे हैं।
- वन, आर्द्रभूमि और घास के मैदानों के संरक्षण पर जोर दिया जाता है, जिसमें एक सींग वाले गैंडे और जंगली जल भैंस जैसे विशाल शाकाहारी जीवों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी को संरक्षण प्रयासों की सफलता के लिए आवश्यक माना जाता है, जिससे सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलता है।
- निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बाघों, हाथियों, गैंडों और एशियाई शेरों की बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| संरक्षित क्षेत्रों की संख्या में वृद्धि | वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और जैव विविधता के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण। पिछले दशक में 750 से बढ़कर 1000 से अधिक। |
| बाघ अभयारण्यों की संख्या में वृद्धि | भारत के राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण प्रयासों को दर्शाता है। 47 से बढ़कर 58। |
| हाथी अभयारण्यों की संख्या में वृद्धि | भारत की विरासत पशु हाथी के संरक्षण और उसके गलियारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक। 30 से बढ़कर 33। |
| रामसर स्थलों की संख्या में वृद्धि | आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण और उनके पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करता है। 24 से बढ़कर 101। |
| चीतों का पुन: आगमन | भारत में विलुप्त हो चुकी प्रजाति को पुनः स्थापित करने का सफल प्रयास, जैव विविधता बहाली का प्रतीक। |
| सामुदायिक भागीदारी | स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करना, जैसे ओरान पवित्र उपवनों में, जो संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाता है। |
महत्व
पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण में भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
- वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और उनके संवर्धन के लिए किए गए प्रयासों को दर्शाता है।
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के प्रभावों को कम करने में वन्यजीव और वन संरक्षण की भूमिका को उजागर करता है।
शासन और नीति
- वन्यजीव संरक्षण को राज्य का निर्देश और नागरिक का कर्तव्य बनाने वाले संवैधानिक ढांचे के महत्व पर बल देता है।
- अंतर्राष्ट्रीय संधियों (CITES, CMS, CBD, रामसर कन्वेंशन) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी तंत्रों के माध्यम से संरक्षण में सफलता प्राप्त करने की रणनीति को रेखांकित करता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक
- संरक्षण के प्रति भारत की सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों में निहित प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
- स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर देता है, जिससे सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलता है।
- ओरान पवित्र उपवनों जैसे सामुदायिक नेतृत्व वाले संरक्षण प्रयासों की सफलता को उजागर करता है।
चुनौतियाँ
1. मानव-वन्यजीव संघर्ष
- जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण के कारण वन्यजीवों के आवासों का सिकुड़ना, जिससे मानव बस्तियों में वन्यजीवों का प्रवेश बढ़ रहा है।
- फसलों को नुकसान, पशुधन पर हमले और कभी-कभी मानव जीवन को खतरा, जिससे स्थानीय समुदायों में वन्यजीवों के प्रति नकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न होती हैं।
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2. अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार
- बाघ, हाथी, गैंडे जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों के अंगों की अवैध मांग, जिससे इन प्रजातियों पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
- अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट्स द्वारा वन्यजीव उत्पादों का व्यापार, जो संरक्षण प्रयासों को कमजोर करता है।
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3. पर्यावास का विखंडन और क्षरण
- बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (सड़कें, रेलवे, बाँध) के कारण वन्यजीव गलियारों का बाधित होना और आवासों का छोटे-छोटे टुकड़ों में बटना।
- वनोन्मूलन, कृषि विस्तार और खनन गतिविधियों के कारण प्राकृतिक आवासों की गुणवत्ता में गिरावट।
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4. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
- बदलते मौसम पैटर्न, तापमान वृद्धि और चरम मौसमी घटनाओं से वन्यजीवों के व्यवहार, प्रजनन और वितरण पर नकारात्मक प्रभाव।
- समुद्र के स्तर में वृद्धि से तटीय आवासों और मैंग्रोव वनों को खतरा, जिससे कई प्रजातियाँ प्रभावित हो रही हैं।
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चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| वन्यजीव गलियारों का अभाव | प्रजातियों के मुक्त आवागमन में बाधा, जिससे आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) कम होती है और आबादी कमजोर होती है। |
| वित्तीय और तकनीकी संसाधनों की कमी | संरक्षण परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए पर्याप्त धन और विशेषज्ञता का अभाव। |
| स्थानीय समुदायों का विस्थापन | संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार के कारण स्थानीय लोगों का विस्थापन, जिससे सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं और संघर्ष बढ़ता है। |
| आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ | स्थानीय पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान पहुँचाना, देशी प्रजातियों के लिए प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करना और जैव विविधता को कम करना। |
| प्रदूषण | जल, वायु और मृदा प्रदूषण से वन्यजीवों के स्वास्थ्य और उनके आवासों पर नकारात्मक प्रभाव। |
आगे की राह
- मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी प्रबंधन रणनीतियाँ विकसित करना, जिसमें त्वरित प्रतिक्रिया दल और क्षतिपूर्ति तंत्र शामिल हों।
- वन्यजीव गलियारों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करना और उनके विखंडन को रोकने के लिए विकासात्मक परियोजनाओं की योजना बनाते समय सावधानी बरतना।
- अवैध शिकार और वन्यजीव व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए प्रवर्तन एजेंसियों को मजबूत करना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
- संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और उन्हें संरक्षण के लाभों में हिस्सेदार बनाना।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी तंत्रों को सुदृढ़ करना ताकि प्रजातियों की आबादी और उनके आवासों की स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन के लिए संरक्षण रणनीतियों को अपनाना, जैसे कि जलवायु-लचीले आवासों का निर्माण।
- पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित करना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
वन्यजीव संरक्षण · संरक्षित क्षेत्र · रामसर स्थल · जैव विविधता · स्थानीय समुदाय · पर्यावास सुधार · जलवायु परिवर्तन · सतत विकास · संवैधानिक प्रावधान · अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय
संवैधानिक व नीतिगत संबंध
- {‘अनुच्छेद 48A’: ‘राज्य पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की रक्षा करेगा।’}
- {‘अनुच्छेद 51A (g)’: ‘वन्यजीवों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।’}
अवधारणा प्रवाह
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ सम्मेलन का उद्घाटन → वन्यजीव संरक्षण में भारत की प्रगति पर चर्चा → संरक्षित क्षेत्रों और प्रजातियों की संख्या में वृद्धि → संवैधानिक और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता पर जोर → स्थानीय समुदायों की भागीदारी का आह्वान
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या पिछले एक दशक में लगभग 750 से बढ़कर 1000 से अधिक हो गई है।
2. बाघ अभयारण्यों की संख्या 47 से बढ़कर 58 हो गई है।
3. रामसर स्थलों की संख्या इसी अवधि में 24 से बढ़कर 101 हो गई है।
उपरोक्त में से कितने कथन सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: सभी तीन — कथन 1, 2 और 3 सभी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के जयपुर में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान दिए गए आंकड़ों के अनुसार सही हैं। ये आंकड़े भारत में वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय वन्यजीव संरक्षण से संबंधित है/हैं?
1. CITES
2. CMS
3. CBD
4. रामसर कन्वेंशन
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 3 और 4
- केवल 1, 2 और 3
- 1, 2, 3 और 4
उत्तर: 1, 2, 3 और 4 — CITES (वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन), CMS (प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन), CBD (जैविक विविधता पर कन्वेंशन) और रामसर कन्वेंशन (आर्द्रभूमि पर कन्वेंशन) सभी वन्यजीव और जैव विविधता संरक्षण से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय हैं, जिनके भारत पक्षकार है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भारत में वन्यजीव संरक्षण के संवैधानिक और सांस्कृतिक आधारों पर चर्चा कीजिए। साथ ही, हाल के वर्षों में भारत द्वारा इस दिशा में प्राप्त की गई प्रमुख सफलताओं का भी मूल्यांकन कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: वन्यजीव संरक्षण के महत्व और भारत की प्रतिबद्धता का संक्षिप्त उल्लेख।
2. संवैधानिक आधार: भारतीय संविधान में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करें, जैसे अनुच्छेद 48A (राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत) और अनुच्छेद 51A(g) (मौलिक कर्तव्य)।
3. सांस्कृतिक आधार: भारत की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और विश्व दृष्टिकोण का वर्णन करें जो वन्यजीवों के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देते हैं।
4. हाल की सफलताएँ (आँकड़ों सहित): केंद्रीय पर्यावरण मंत्री द्वारा उल्लिखित प्रमुख उपलब्धियों का विवरण दें:
क. संरक्षित क्षेत्रों की संख्या में वृद्धि (750 से 1000+)।
ख. बाघ अभयारण्यों (47 से 58) और हाथी अभयारण्यों (30 से 33) की संख्या में वृद्धि।
ग. रामसर स्थलों की संख्या में वृद्धि (24 से 101)।
घ. चीतों का पुन: आगमन।
ङ. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) और एक सींग वाले गैंडे जैसे प्रजातियों के संरक्षण के प्रयास।
च. वैज्ञानिक अनुसंधान और निगरानी तंत्रों की भूमिका।
5. निष्कर्ष: संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सतत राजनीतिक इच्छाशक्ति के महत्व पर बल देते हुए एक संतुलित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
Rajasthan PCS (RPSC / RAS) — राज्य PCS अभ्यास
Prelims: राजस्थान में हाल ही में आयोजित ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन’ का उद्घाटन किसके द्वारा किया गया?
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव
- राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
- डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
उत्तर: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव — केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 2024 में जयपुर में आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था।
Mains: डब्ल्यूडब्ल्यूएफ वैश्विक संरक्षण सम्मेलन के माध्यम से राजस्थान में जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का विश्लेषण कीजिए।
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।
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