19 Aug ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर टैक्स का किया विरोध
✎ BRICS देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का विरोध किया है, इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण व्यापार उपाय बताते हुए, तथा विकसित देशों से जलवायु वित्त बढ़ाने का आग्रह किया है।
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध | GS Paper III — अर्थव्यवस्था | GS Paper III — पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
- Prelims: कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM), BRICS, COP, जलवायु वित्त, सामान्य किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC)
- Essay: जलवायु परिवर्तन और विकासशील देशों की चुनौतियाँ, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और पर्यावरण नीतियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति: BRICS देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का विरोध किया है, इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण व्यापार उपाय बताते हुए, तथा विकसित देशों से जलवायु वित्त बढ़ाने का आग्रह किया है।
यह खबर चर्चा में क्यों?
हाल ही में, BRICS देशों के पर्यावरण मंत्रियों ने यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (Carbon Border Adjustment Mechanism – CBAM) का विरोध किया है। उन्होंने इसे एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपाय बताया है, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। BRICS देशों ने विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त (Climate Finance) को तत्काल बढ़ाने का भी आग्रह किया है, विशेषकर जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) के लिए।
पृष्ठभूमि
- BRICS देशों के पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
- इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, मिस्र और इथियोपिया के पर्यावरण और जलवायु मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
- BRICS देशों ने COP 30 में निर्धारित ‘नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य’ (New Collective Quantified Goal – NCQG) को पूरा करने का आह्वान किया।
- संयुक्त घोषणापत्र में ‘सामान्य किंतु विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं’ (Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities – CBDR-RC) के सिद्धांत पर जोर दिया गया।
- भारत ने 13वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक की मेजबानी चीन को सौंप दी है, जो 2027 में इसकी अध्यक्षता करेगा।
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) क्या है?
- CBAM यूरोपीय संघ द्वारा आयातित कार्बन-गहन वस्तुओं, जैसे स्टील, लोहा, उर्वरक, एल्यूमीनियम और सीमेंट पर लगाया जाने वाला एक आयात शुल्क है।
- इसका उद्देश्य आयातित वस्तुओं के कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को कम करना है।
- यह तंत्र 1 अक्टूबर, 2023 को केवल रिपोर्टिंग चरण के साथ शुरू किया गया था और 1 जनवरी, 2026 से पूरी तरह प्रभावी हो गया है।
- इस तंत्र के तहत, आयातकों को CBAM प्रमाणपत्र खरीदने और जमा करने होते हैं, जो उनके माल में सन्निहित कार्बन उत्सर्जन से जुड़े होते हैं।
- विकासशील देशों द्वारा इसे एक व्यापार बाधा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि यह उनके निर्यात को प्रभावित करेगा और उनकी आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बाधित करेगा।
- BRICS देशों ने चिंता व्यक्त की है कि CBAM जैसे उपाय जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने और अनुकूलन क्षमता व लचीलेपन को बढ़ाने के विकासशील देशों के प्रयासों को कमजोर करते हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) | यूरोपीय संघ द्वारा आयातित कार्बन-सघन वस्तुओं पर लगाया गया शुल्क, जिसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। |
| BRICS देशों का विरोध | BRICS पर्यावरण मंत्रियों ने CBAM को एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपाय बताया, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। |
| जलवायु वित्त की मांग | BRICS देशों ने विकसित राष्ट्रों से जलवायु वित्त, विशेषकर जलवायु अनुकूलन (Climate Adaptation) के लिए, बढ़ाने का आग्रह किया। |
| COP 30 का लक्ष्य | ब्राजील के बेलेम में आयोजित COP 30 में विकासशील देशों के लिए अनुकूलन वित्त को 2035 तक तीन गुना करने का नया सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (NCQG) निर्धारित किया गया। |
| साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC) | यह सिद्धांत जलवायु परिवर्तन से निपटने में विभिन्न देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारियों और क्षमताओं को मान्यता देता है। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- CBAM जैसे उपाय विकासशील देशों के निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
- यह व्यापार बाधाओं को बढ़ा सकता है और वैश्विक व्यापार प्रवाह को बाधित कर सकता है, विशेष रूप से उन उद्योगों में जो कार्बन-सघन हैं।
सामरिक महत्व
- BRICS देशों का एकजुट विरोध वैश्विक जलवायु वार्ताओं में विकासशील देशों की सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति को दर्शाता है।
- यह विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु परिवर्तन के उत्तरदायित्व और समाधानों पर बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है।
पर्यावरणीय महत्व
- जलवायु वित्त की कमी विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुकूलन और शमन प्रयासों में बाधा डालती है।
- CBAM जैसे उपाय, यदि भेदभावपूर्ण माने जाते हैं, तो वैश्विक स्तर पर जलवायु कार्रवाई में सहयोग को कमजोर कर सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय संबंध
- यह घटना बहुपक्षीय मंचों पर विकसित और विकासशील देशों के बीच विश्वास और सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
- BRICS जैसे समूह वैश्विक शासन और अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चुनौतियाँ
1. जलवायु वित्त की कमी
- विकसित देश अपने जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पीछे रहे हैं, जिससे विकासशील देशों के लिए अनुकूलन और शमन परियोजनाओं को लागू करना मुश्किल हो गया है।
- अनुकूलन वित्त की विशेष रूप से कमी है, जबकि विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए इसकी तत्काल आवश्यकता है।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, अंतर्राष्ट्रीय संबंध
2. व्यापार और पर्यावरण के बीच संतुलन
- CBAM जैसे उपाय पर्यावरण संरक्षण के नाम पर व्यापार बाधाओं के रूप में देखे जा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार नियमों पर तनाव बढ़ सकता है।
- विकासशील देशों को डर है कि ऐसे उपाय उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर देंगे और उनके आर्थिक विकास को बाधित करेंगे।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
3. साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व का सिद्धांत
- विकसित और विकासशील देशों के बीच ‘साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व’ के सिद्धांत की व्याख्या और अनुप्रयोग पर मतभेद बने हुए हैं।
- विकसित देश अक्सर विकासशील देशों पर अधिक जलवायु कार्रवाई का दबाव डालते हैं, जबकि विकासशील देश ऐतिहासिक उत्सर्जन और विकास की आवश्यकताओं पर जोर देते हैं।
यूपीएससी लिंक: पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, नैतिकता
4. एकतरफा व्यापार उपाय
- BRICS देशों का मानना है कि CBAM जैसे एकतरफा उपाय अंतर्राष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।
- ऐसे उपाय वैश्विक सहयोग और आम सहमति के बजाय टकराव को बढ़ावा दे सकते हैं।
यूपीएससी लिंक: अंतर्राष्ट्रीय संबंध, अंतर्राष्ट्रीय कानून
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) | विकासशील देशों द्वारा इसे एकतरफा, दंडात्मक और संरक्षणवादी व्यापार बाधा के रूप में देखा जाना। |
| जलवायु वित्त की कमी | विकसित देशों द्वारा जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा न करना, विशेषकर अनुकूलन के लिए। |
| साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC) | इस सिद्धांत के अनुप्रयोग को लेकर विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद। |
| वैश्विक व्यापार पर प्रभाव | CBAM जैसे उपायों से कार्बन-सघन वस्तुओं के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव और विकासशील देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी। |
| अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में बाधा | एकतरफा उपायों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक वैश्विक सहयोग और विश्वास में कमी। |
आगे की राह
- विकसित देशों को अपनी जलवायु वित्त प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए, विशेष रूप से अनुकूलन वित्त को बढ़ाना चाहिए।
- CBAM जैसे व्यापार-संबंधित जलवायु उपायों को बहुपक्षीय मंचों पर व्यापक विचार-विमर्श और आम सहमति के बाद ही लागू किया जाना चाहिए।
- जलवायु कार्रवाई में ‘साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं’ के सिद्धांत का सम्मान किया जाना चाहिए।
- विकासशील देशों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों और उत्पादन प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण प्रदान किया जाना चाहिए।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों और जलवायु लक्ष्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) और UNFCCC जैसे बहुपक्षीय मंचों पर रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना चाहिए।
- भारत को अपनी ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ जैसी पहलों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज करना चाहिए ताकि कार्बन-सघन निर्यात पर निर्भरता कम हो सके।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) · BRICS पर्यावरण मंत्री · जलवायु वित्त · सामान्य लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC) · अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधाएँ · विकसित और विकासशील देश · जलवायु परिवर्तन अनुकूलन · संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP) · राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन · हरित अर्थव्यवस्था
अवधारणा प्रवाह
यूरोपीय संघ द्वारा कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का कार्यान्वयन → BRICS देशों द्वारा CBAM को व्यापार बाधा और भेदभावपूर्ण बताना → BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में CBAM का विरोध → विकसित देशों से जलवायु वित्त बढ़ाने की मांग → साझा किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (CBDR-RC) सिद्धांत पर जोर → वैश्विक जलवायु कार्रवाई और व्यापार नीतियों पर विकसित-विकासशील देशों के बीच मतभेद
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) यूरोपीय संघ द्वारा आयातित कार्बन-गहन वस्तुओं पर लगाया जाने वाला एक शुल्क है।
2. BRICS देशों ने CBAM को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप एक गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार उपाय बताया है।
3. CBAM का उद्देश्य आयातित वस्तुओं के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- सभी तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 सही है क्योंकि CBAM यूरोपीय संघ द्वारा इस्पात, लोहा, उर्वरक, एल्यूमीनियम और सीमेंट जैसी कार्बन-गहन वस्तुओं पर लगाया जाने वाला आयात शुल्क है। कथन 2 गलत है क्योंकि BRICS देशों ने CBAM को एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपाय बताया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। कथन 3 सही है क्योंकि CBAM का लक्ष्य आयातित वस्तुओं के कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है, हालांकि विकासशील देशों द्वारा इसे व्यापार बाधा के रूप में देखा जाता है।
Q2. कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- यह केवल विकसित देशों पर लागू होता है।
- यह 1 अक्टूबर, 2023 से पूरी तरह से प्रभावी हो गया।
- यह आयातित वस्तुओं में अंतर्निहित कार्बन उत्सर्जन से जुड़े CBAM प्रमाणपत्रों की खरीद और समर्पण की मांग करता है।
- BRICS देशों ने इसका समर्थन किया है क्योंकि यह जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करता है।
उत्तर: यह आयातित वस्तुओं में अंतर्निहित कार्बन उत्सर्जन से जुड़े CBAM प्रमाणपत्रों की खरीद और समर्पण की मांग करता है। — विकल्प C सही है। CBAM 1 जनवरी, 2026 से पूरी तरह से प्रभावी हुआ, जिसमें आयातकों को अंतर्निहित कार्बन उत्सर्जन से जुड़े CBAM प्रमाणपत्र खरीदने और जमा करने की आवश्यकता थी। 1 अक्टूबर, 2023 से केवल रिपोर्टिंग चरण शुरू हुआ था। यह केवल विकसित देशों पर लागू नहीं होता, बल्कि उन देशों से आयातित वस्तुओं पर लागू होता है जो यूरोपीय संघ में प्रवेश करती हैं। BRICS देशों ने इसका विरोध किया है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) पर BRICS देशों की आपत्तियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए। जलवायु परिवर्तन से निपटने में ‘सामान्य लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं’ (CBDR-RC) के सिद्धांत के महत्व पर भी चर्चा कीजिए। (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. **परिचय:** कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) का संक्षिप्त परिचय और BRICS देशों द्वारा इसके विरोध का संदर्भ।
2. **CBAM का विवरण:** CBAM क्या है, इसका उद्देश्य क्या है (कार्बन फुटप्रिंट कम करना), और यह कैसे कार्य करता है (आयात शुल्क, CBAM प्रमाणपत्र)।
3. **BRICS देशों की आपत्तियाँ:** BRICS देशों द्वारा CBAM को ‘एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी’ उपाय क्यों माना जा रहा है, इसका विस्तृत विश्लेषण। यह भी बताएं कि इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप क्यों नहीं माना जाता।
4. **विकासशील देशों पर प्रभाव:** CBAM विकासशील देशों के प्रयासों को कैसे कमजोर कर सकता है, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने और अनुकूलन क्षमता बढ़ाने के संदर्भ में।
5. **’सामान्य लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व और संबंधित क्षमताओं’ (CBDR-RC) का सिद्धांत:** इस सिद्धांत की व्याख्या, इसका ऐतिहासिक संदर्भ (जैसे UNFCCC), और जलवायु परिवर्तन वार्ताओं में इसकी प्रासंगिकता।
6. **CBDR-RC का महत्व:** यह सिद्धांत विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु कार्रवाई और वित्तपोषण की जिम्मेदारी को कैसे संतुलित करता है, विशेष रूप से जलवायु वित्त (Climate Finance) और अनुकूलन (Adaptation) के संदर्भ में। COP 30 में ‘न्यू कलेक्टिव क्वांटिफाइड गोल’ (NCQG) का उल्लेख करें।
7. **निष्कर्ष:** BRICS की आपत्तियों और CBDR-RC सिद्धांत के आलोक में वैश्विक जलवायु शासन की जटिलताओं और विकसित-विकासशील देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर एक संतुलित दृष्टिकोण।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

No Comments