11 Aug भारत जीआई: MSME और DPIIT का समझौता, वैश्विक बाजार में नई संभावनाएं
DPIIT DepartmentGI ProductsBharat GI Banner✎ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने GI उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे 'एक जिला एक उत्पाद' पहल…
विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है
- GS Paper III — भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन जुटाना, वृद्धि, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय | GS Paper III — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसके प्रभाव | GS Paper II — विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे
- Prelims: भौगोलिक संकेत (GI) टैग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999, एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना, डिजिटल वाणिज्य के लिए ओपन नेटवर्क (ONDC), सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM), बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)
- Essay: स्थानीय उत्पादों का वैश्विकरण: आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण का मार्ग, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की भूमिका
त्वरित पुनरावृत्ति: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने GI उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे ‘एक जिला एक उत्पाद’ पहल को भी मजबूती मिलेगी।
यह खबर चर्चा में क्यों?
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade – DPIIT) ने भारत के भौगोलिक संकेत (Geographical Indication – GI) उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक उनकी पहुंच को गति देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य देश की समृद्ध GI विरासत की आर्थिक क्षमता को उजागर करना और स्थानीय कारीगरों, बुनकरों तथा उत्पादकों की आजीविका में सुधार करना है।
पृष्ठभूमि
- भारत में भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999) के तहत GI टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और उनमें उस क्षेत्र के कारण विशेष गुण या प्रतिष्ठा होती है।
- DPIIT भारत में भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण और कानूनी संरक्षण के लिए नोडल विभाग है, जो बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) से संबंधित मामलों को देखता है।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय देश भर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास, वित्तीय सुदृढ़ता तथा समग्र उन्नति को बढ़ावा देने वाला नोडल मंत्रालय है।
- यह समझौता ज्ञापन GI उत्पादों के कानूनी पंजीकरण से आगे बढ़कर उनके आर्थिक मूल्य को अधिकतम करने पर केंद्रित है, जिसके लिए इन उत्पादों को स्थानीय शिल्पकला से बड़े पैमाने पर विकसित, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और निर्यात के लिए तैयार उद्यमों में परिवर्तित करने हेतु समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
- यह पहल ‘एक जिला एक उत्पाद’ (One District One Product – ODOP) पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती प्रदान करेगी, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले से एक विशिष्ट उत्पाद को बढ़ावा देना है।
- समझौता ज्ञापन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को बल देगा, जिससे GI उत्पादों को प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एकीकृत किया जा सके।
भौगोलिक संकेत (GI) टैग क्या है?
- भौगोलिक संकेत (GI) एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार है जो उन उत्पादों पर उपयोग किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और उनमें उस मूल के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है।
- यह टैग किसी उत्पाद की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताओं को प्रमाणित करता है जो मुख्य रूप से उसके भौगोलिक मूल से जुड़ी होती हैं।
- भारत में, GI टैग ‘भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत प्रदान किया जाता है।
- GI टैग कृषि उत्पादों, प्राकृतिक वस्तुओं, निर्मित वस्तुओं, हस्तशिल्प और औद्योगिक वस्तुओं के लिए दिया जा सकता है।
- एक बार GI टैग प्राप्त होने के बाद, यह 10 वर्षों की अवधि के लिए वैध होता है और इसे नवीनीकृत किया जा सकता है।
- GI टैग किसी उत्पाद के अनधिकृत उपयोग को रोकता है और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण तथा प्रामाणिक उत्पाद प्राप्त करने का आश्वासन देता है।
- यह टैग संबंधित क्षेत्र के उत्पादकों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है और उनके उत्पादों के लिए प्रीमियम मूल्य प्राप्त करने में मदद करता है।
- भारत में कुछ प्रसिद्ध GI उत्पादों में दार्जिलिंग चाय, कांचीपुरम सिल्क, तिरुपति लड्डू, नागपुर संतरा और बासमती चावल शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के बीच सहयोग का औपचारिकरण। |
| नोडल विभागों का संरेखण | DPIIT का बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) संरक्षण दायित्व और MSME मंत्रालय का उद्यम विकास दायित्व एक साथ लाना। |
| भारत जीआई (Bharat GI) बैनर का शुभारंभ | भौगोलिक संकेत (Geographical Indication – GI) उत्पादों के लिए एक समर्पित पहचान और विपणन मंच। |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच | ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर जीआई उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| एक जिला एक उत्पाद (ODOP) का एकीकरण | क्षेत्रीय विशिष्टताओं को बढ़ावा देने और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए ODOP पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना। |
महत्व
आर्थिक महत्व
- जीआई उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुंच में वृद्धि से कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आय में वृद्धि होगी।
- यह सहयोग स्थानीय शिल्पकला को बड़े पैमाने पर विकसित, व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य और निर्यात के लिए तैयार उद्यमों में परिवर्तित करने में सहायक होगा, जिससे आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) को बढ़ावा मिलेगा।
- जीआई उत्पादों को प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एकीकृत करने से ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को बल मिलेगा।
सामाजिक महत्व
- जीआई उत्पादों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान और कौशल का संरक्षण होगा, जिससे सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय समुदायों, विशेषकर ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे समावेशी विकास (Inclusive Development) को बढ़ावा मिलेगा।
- कारीगरों और उत्पादक समूहों के लिए क्षमता निर्माण और डिजिटल सशक्तिकरण से उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
रणनीतिक महत्व
- यह पहल भारत की बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) की सुरक्षा और संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- जीआई उत्पादों के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करके, भारत वैश्विक व्यापार में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकता है।
- विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच समन्वित प्रयास शासन (Governance) की प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं और नीतिगत उद्देश्यों की प्राप्ति में मदद करते हैं।
चुनौतियाँ
1. गुणवत्ता मानकीकरण का अभाव
- कई जीआई उत्पादों में गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण की कमी होती है, जिससे उनकी बाजार स्वीकार्यता प्रभावित होती है।
- स्थानीय कारीगरों के पास अक्सर आधुनिक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन या जानकारी नहीं होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम
2. सीमित बाजार पहुंच
- छोटे उत्पादकों के पास बड़े बाजारों तक पहुंचने के लिए आवश्यक विपणन कौशल, नेटवर्क या वित्तीय संसाधन नहीं होते हैं।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग और संचालन के लिए तकनीकी ज्ञान की कमी एक बाधा हो सकती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना
3. जागरूकता और संवर्धन की कमी
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के बीच कई भारतीय जीआई उत्पादों के बारे में जागरूकता कम है।
- प्रभावी ब्रांडिंग और संवर्धन रणनीतियों का अभाव उत्पादों की दृश्यता को सीमित करता है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: विपणन और व्यापार
4. वित्तीय सहायता तक पहुंच
- जीआई उत्पादों के उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन के लिए कारीगरों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
- लघु उद्योगों के लिए ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक पहुंच अक्सर जटिल होती है।
यूपीएससी लिंक: अर्थव्यवस्था: वित्तीय समावेशन
चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण
| मुद्दा | चिंता |
|---|---|
| नकली उत्पादों का खतरा | अनाधिकृत उत्पाद जीआई की प्रतिष्ठा और वास्तविक उत्पादकों की आय को नुकसान पहुंचाते हैं। |
| क्षमता निर्माण की आवश्यकता | कारीगरों को आधुनिक उत्पादन तकनीकों, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स के लिए प्रशिक्षण की कमी। |
| लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला | दूरदराज के क्षेत्रों से उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में कुशल लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला का अभाव। |
| बौद्धिक संपदा प्रवर्तन | जीआई अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में प्रभावी प्रवर्तन तंत्र की कमी। |
| अंतरराष्ट्रीय बाजार की चुनौतियां | विदेशी बाजारों में प्रवेश के लिए नियामक बाधाएं, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं। |
सरकारी पहल — प्रीलिम्स हेतु अवश्य याद रखें
- एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना
आगे की राह
- जीआई उत्पादों के लिए एक मजबूत गुणवत्ता प्रमाणन और मानकीकरण प्रणाली विकसित करना।
- कारीगरों और उत्पादक समूहों के लिए डिजिटल साक्षरता और ई-कॉमर्स कौशल में सुधार हेतु व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जीआई उत्पादों के लिए लक्षित विपणन अभियान और ब्रांडिंग रणनीतियाँ तैयार करना।
- जीआई उत्पादकों को आसान और किफायती ऋण तक पहुंच प्रदान करने के लिए विशेष वित्तीय योजनाएँ शुरू करना।
- ओएनडीसी और जीईएम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जीआई उत्पादों की लिस्टिंग और बिक्री प्रक्रिया को सरल बनाना।
- जीआई उत्पादों के लिए एक कुशल और लागत प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क स्थापित करना।
- जीआई अधिकारों के उल्लंघन के मामलों से निपटने के लिए कानूनी प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना और जागरूकता बढ़ाना।
यूपीएससी मूल्य-संवर्धन
मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड
भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पाद · सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) · उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) · व्यावसायीकरण · वैश्विक बाजार पहुंच · एक जिला एक उत्पाद (ODOP) · डिजिटल वाणिज्य के लिए ओपन नेटवर्क (ONDC) · सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) · बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) · आत्मनिर्भर भारत · वोकल फॉर लोकल · आर्थिक संवृद्धि
अवधारणा प्रवाह
जीआई उत्पादों का पंजीकरण और कानूनी संरक्षण (DPIIT) → जीआई उत्पादों का उद्यम विकास और संवर्धन (MSME मंत्रालय) → दोनों मंत्रालयों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर → भारत जीआई बैनर का शुभारंभ और ओएनडीसी/जीईएम पर लिस्टिंग → जीआई उत्पादों का व्यावसायीकरण और बाजार पहुंच में वृद्धि → कारीगरों की आजीविका में सुधार और आर्थिक संवृद्धि
प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न
Q1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में भौगोलिक संकेतों (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण एवं कानूनी संरक्षण के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) नोडल विभाग है।
2. ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पहल का उद्देश्य देश के सभी जिलों में निर्यात क्षमता वाले उत्पादों को बढ़ावा देना है।
3. हाल ही में, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने GI उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुंच को गति देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
- केवल एक
- केवल दो
- केवल तीन
- कोई नहीं
उत्तर: केवल दो — कथन 1 गलत है। भारत में भौगोलिक संकेतों (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अंतर्गत भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण एवं कानूनी संरक्षण के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) नोडल विभाग है। कथन 2 सही है। ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पहल का उद्देश्य जिलों में निर्यात क्षमता वाले उत्पादों की पहचान करना और उन्हें बढ़ावा देना है। कथन 3 सही है। यह समझौता ज्ञापन GI उत्पादों के व्यावसायीकरण और बाजार पहुंच को बढ़ाने के लिए किया गया है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा/से ‘भारत जीआई’ बैनर के तहत भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए की गई पहल का हिस्सा है/हैं?
1. डिजिटल वाणिज्य के लिए ओपन नेटवर्क (ONDC) पर GI समूहों को शामिल करना।
2. सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर GI उत्पादों को सूचीबद्ध करना।
3. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में समर्पित GI पवेलियन को सह-प्रायोजित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- 1, 2 और 3
उत्तर: 1, 2 और 3 — दिए गए सभी विकल्प ‘भारत जीआई’ बैनर के तहत भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए की गई पहल का हिस्सा हैं। समझौता ज्ञापन में ONDC और GeM पर GI समूहों को शामिल करने तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों में समर्पित GI पवेलियन को सह-प्रायोजित करने का उल्लेख है।
मुख्य अभ्यास प्रश्न
✍ भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों के व्यावसायीकरण और वैश्विक बाजार तक पहुंच को गति देने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के बीच हालिया समझौता ज्ञापन (MOU) के महत्व पर चर्चा कीजिए। यह समझौता ज्ञापन ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को कैसे सुदृढ़ करता है? (15 Marks)
रूपरेखा: मॉडल-उत्तर संरचना:
1. परिचय: भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों का संक्षिप्त परिचय और MSME तथा DPIIT के बीच हालिया समझौता ज्ञापन का संदर्भ दें।
2. समझौता ज्ञापन का महत्व:
क. आर्थिक क्षमता का दोहन: GI उत्पादों की समृद्ध विरासत की आर्थिक क्षमता को उजागर करना।
ख. व्यावसायीकरण और मानकीकरण: उत्पादों को स्थानीय शिल्प से व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उद्यमों में परिवर्तित करना, गुणवत्ता मानकीकरण पर जोर।
ग. बाजार पहुंच में वृद्धि: ONDC और GeM जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी।
घ. आजीविका में सुधार: कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका में सुधार।
ङ. संस्थागत समन्वय: DPIIT के IPR संबंधी दायित्वों और MSME के उद्यम विकास संबंधी दायित्वों का संरेखण।
3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना:
क. स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: स्वदेशी उत्पादों को प्रीमियम घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में एकीकृत करना।
ख. क्षमता निर्माण और डिजिटल सशक्तिकरण: कारीगरों और उत्पादक समूहों के लिए प्रशिक्षण और डिजिटल उपकरणों तक पहुंच।
ग. एक जिला एक उत्पाद (ODOP) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती: ODOP पहल के साथ तालमेल बिठाकर क्षेत्रीय विशिष्टताओं को बढ़ावा देना।
घ. निर्यात संवर्धन: वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाकर निर्यात को बढ़ावा देना और विदेशी मुद्रा अर्जित करना।
4. निष्कर्ष: भारत की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक संवृद्धि के लिए इस सहयोग के दीर्घकालिक लाभों को संक्षेप में प्रस्तुत करें।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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