भारत ने WTO में आठवीं व्यापार नीति समीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न की

भारत ने WTO में आठवीं व्यापार नीति समीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न की — भारत की डब्ल्यूटीओ व्यापार नीति समीक्षा

भारत ने WTO में आठवीं व्यापार नीति समीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न की

विषय प्रासंगिकता — यह टॉपिक कहाँ आता है

  • GS Paper II — अंतर्राष्ट्रीय संबंध  |  GS Paper III — अर्थव्यवस्था
  • Prelims: विश्व व्यापार संगठन (WTO), व्यापार नीति समीक्षा (TPR), मुक्त व्यापार समझौता (FTA), बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता
  • Essay: भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और वैश्विक व्यापार में उसकी भूमिका, बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का भविष्य और विकासशील देशों की चुनौतियाँ

त्वरित पुनरावृत्ति: भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा ने वैश्विक व्यापार प्रणाली में उसकी बढ़ती भूमिका और एक खुली, पारदर्शी व WTO-अनुकूल व्यापार व्यवस्था के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है, जबकि वह अपनी विकास संबंधी ज़रूरतों और घरेलू हितों की रक्षा भी करता है।

यह खबर चर्चा में क्यों?

भारत ने जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अपनी आठवीं व्यापार नीति समीक्षा (TPR) सफलतापूर्वक संपन्न की है। इस समीक्षा में 68 सदस्य देशों ने भाग लिया, जो भारत के आर्थिक बदलाव और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में उसकी भूमिका में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है। वाणिज्य सचिव ने एक खुली, पारदर्शी और WTO-अनुकूल व्यापार व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भारत की व्यापार नीतियां उसकी विकास संबंधी ज़रूरतों और लाखों छोटे किसानों की आजीविका की रक्षा करती हैं।

पृष्ठभूमि

  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतर-सरकारी संगठन है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। इसकी स्थापना 1995 में हुई थी और यह व्यापार समझौतों के लिए एक मंच प्रदान करता है, व्यापार विवादों को सुलझाता है, और सदस्य देशों की व्यापार नीतियों की समीक्षा करता है।
  • व्यापार नीति समीक्षा (Trade Policy Review – TPR) WTO की एक प्रमुख पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली है। इसके तहत सदस्य देशों की व्यापारिक और संबंधित नीतियों का समय-समय पर परीक्षण किया जाता है ताकि पारदर्शिता बढ़ाई जा सके, WTO के नियमों का पालन मजबूत किया जा सके और सदस्यों के बीच रचनात्मक संवाद को आसान बनाया जा सके।
  • भारत WTO का संस्थापक सदस्य है और वैश्विक व्यापार प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विकासशील देशों के हितों का प्रतिनिधित्व करता रहा है और बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं में सक्रिय रूप से भाग लेता है।
  • हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक एकीकृत करने के लिए कई सुधार किए हैं, जिनमें टैरिफ सुधार, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का सरलीकरण, और महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA) रणनीति शामिल है।
  • भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure), नवाचार, स्टार्टअप पहलों और MSME को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत करने जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसकी WTO सदस्यों द्वारा सराहना की गई है।
  • भारत ने मत्स्य पालन सब्सिडी पर WTO समझौते की भी पुष्टि की है, जो सतत विकास और समुद्री संसाधनों के संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) में व्यापार नीति समीक्षा (TPR)

  • व्यापार नीति समीक्षा (TPR) विश्व व्यापार संगठन (WTO) की एक अनिवार्य गतिविधि है, जिसके तहत सभी सदस्य देशों की व्यापार नीतियों और प्रथाओं की नियमित रूप से जांच की जाती है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य सदस्यों के बीच पारदर्शिता बढ़ाना, WTO समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना और व्यापार नीतियों के प्रभाव को समझना है।
  • समीक्षा प्रक्रिया में सदस्य देश द्वारा एक नीति विवरण प्रस्तुत करना, WTO सचिवालय द्वारा एक रिपोर्ट तैयार करना और फिर सदस्य देशों द्वारा प्रश्न पूछना तथा चर्चा करना शामिल है।
  • TPR की आवृत्ति सदस्य के वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी पर निर्भर करती है; सबसे बड़े व्यापारिक राष्ट्रों की समीक्षा हर दो साल में होती है, जबकि छोटे देशों की समीक्षा कम बार होती है। भारत की समीक्षा हर चार साल में होती है।
  • यह प्रणाली किसी देश की व्यापार नीतियों की प्रभावशीलता और WTO नियमों के साथ उनकी अनुरूपता का मूल्यांकन करने के लिए एक मंच प्रदान करती है, जिससे सदस्य देशों के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा मिलता है।
  • TPR का उद्देश्य सदस्य देशों को उनकी व्यापार नीतियों में सुधार करने में मदद करना है, लेकिन यह किसी भी नीति को बदलने के लिए बाध्यकारी नहीं है; यह केवल एक निगरानी और पारदर्शिता तंत्र है।
  • इस प्रक्रिया में कृषि शुल्क, औद्योगिक टैरिफ, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपाय (Sanitary and Phytosanitary – SPS measures), तकनीकी नियम और व्यापार उपाय (जैसे एंटी-डंपिंग) जैसे विभिन्न व्यापार संबंधी पहलुओं की जांच की जाती है।

मुख्य विशेषताएँ

विशेषता महत्व
पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली WTO सदस्यों की व्यापारिक नीतियों का नियमित परीक्षण, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना।
भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा वैश्विक व्यापार प्रणाली में भारत की बढ़ती भूमिका और आर्थिक बदलाव में दुनिया की गहरी रुचि को दर्शाता है।
वाणिज्य सचिव का नेतृत्व भारत की व्यापार नीतियों और WTO के प्रति प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना।
68 सदस्य देशों की भागीदारी भारत के आर्थिक महत्व और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में उसकी रचनात्मक भूमिका की वैश्विक स्वीकृति।
सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता खुली, पारदर्शी और अनुमान लगाने योग्य व्यापार तथा निवेश व्यवस्था के प्रति भारत का संकल्प।
घरेलू विकास और वैश्विक एकीकरण टैरिफ सुधारों, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का सरलीकरण और FTA रणनीति के माध्यम से संतुलन।

महत्व

आर्थिक महत्व

  • यह समीक्षा भारत के आर्थिक बदलाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसके बढ़ते एकीकरण को रेखांकित करती है।
  • टैरिफ सुधारों और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के सरलीकरण से व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में वृद्धि हुई है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित हो रहा है।
  • भारत वैश्विक मांग के एक प्रमुख इंजन के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता में योगदान देता है।

सामरिक महत्व

  • WTO में भारत की सक्रिय भागीदारी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में उसकी प्रतिबद्धता और नेतृत्व की भूमिका को दर्शाती है।
  • यह समीक्षा भारत को अपनी व्यापार नीतियों को स्पष्ट करने और अन्य सदस्य देशों के साथ रचनात्मक संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है।
  • FTA रणनीति का विस्तार भारत के भू-आर्थिक हितों को आगे बढ़ाता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उसकी स्थिति को मजबूत करता है।

शासनिक महत्व

  • यह पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली भारत को अपनी व्यापार नीतियों को WTO नियमों के अनुरूप रखने में मदद करती है।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और व्यापार सुविधा आधुनिकीकरण में भारत की उपलब्धियां सुशासन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
  • न्यायिक निगरानी और उचित प्रक्रिया के माध्यम से व्यापार उपायों की जांच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।

चुनौतियाँ

1. कृषि शुल्क और किसानों की आजीविका

  • भारत का कृषि शुल्क ढांचा लाखों छोटे, कम आय वाले किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समझौतों के तहत कृषि शुल्कों में कमी से घरेलू किसानों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

2. औद्योगिक टैरिफ और घरेलू विनिर्माण

  • औद्योगिक टैरिफ का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देना और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती सुनिश्चित करना है।
  • वैश्विक व्यापार नियमों के तहत इन टैरिफों को संतुलित करना एक चुनौती है ताकि प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।

3. गुणवत्ता नियंत्रण आदेश और व्यापार बाधाएँ

  • गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का उद्देश्य सार्वजनिक नीति के लक्ष्यों को प्राप्त करना है, लेकिन इन्हें व्यापार बाधाओं के रूप में भी देखा जा सकता है।
  • पारदर्शिता और WTO नियमों का पालन करते हुए इन आदेशों को लागू करना महत्वपूर्ण है।

4. व्यापार उपाय और ‘लेसर ड्यूटी रूल’

  • भारत एंटी-डंपिंग फ्रेमवर्क में ‘लेसर ड्यूटी रूल’ लागू करता है, जो घरेलू उद्योगों की रक्षा करता है।
  • इन उपायों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप बनाए रखना और उनका दुरुपयोग न होना सुनिश्चित करना एक चुनौती है।

चुनौतियाँ — यूपीएससी दृष्टिकोण

मुद्दा चिंता
कृषि सब्सिडी विकासशील देशों के लिए खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी की आवश्यकता बनाम WTO के कृषि समझौते के तहत प्रतिबंध।
औद्योगिक टैरिफ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन स्थापित करना।
सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) उपाय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए मानक स्थापित करना बनाम व्यापार के लिए अनावश्यक बाधाएँ पैदा करना।
तकनीकी व्यापार बाधाएँ (TBT) उत्पाद मानकों और तकनीकी नियमों को लागू करना बनाम व्यापार प्रवाह को बाधित करना।
बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) नवाचार को बढ़ावा देने और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन, विशेष रूप से स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्रों में।
मत्स्य पालन सब्सिडी मछुआरा समुदायों की आजीविका की रक्षा करना बनाम अत्यधिक मछली पकड़ने और समुद्री संसाधनों के क्षरण को रोकना।

आगे की राह

  • WTO के नियमों के अनुरूप अपनी व्यापार नीतियों को लगातार अनुकूलित करना और पारदर्शिता बनाए रखना।
  • घरेलू विकास उद्देश्यों और वैश्विक व्यापार एकीकरण के बीच संतुलन साधने के लिए टैरिफ सुधारों को जारी रखना।
  • मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) की रणनीति को और मजबूत करना ताकि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़े।
  • कृषि क्षेत्र में छोटे किसानों की आजीविका की रक्षा के लिए उचित नीतियों को बनाए रखना, साथ ही WTO प्रतिबद्धताओं का पालन करना।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और व्यापार सुविधा आधुनिकीकरण में निवेश जारी रखना ताकि व्यापार सुगमता में और सुधार हो।
  • गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों और व्यापार उपायों को लागू करते समय पारदर्शिता, निष्पक्षता और न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करना।
  • संवहनीय विकास, महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देने के प्रयासों को तेज करना।

यूपीएससी मूल्य-संवर्धन

मुख्य परीक्षा उत्तर-लेखन हेतु कीवर्ड

विश्व व्यापार संगठन (WTO) · व्यापार नीति समीक्षा (TPR) · बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली · टैरिफ सुधार · मुक्त व्यापार समझौता (FTA) · डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना · आर्थिक संवृद्धि · घरेलू विनिर्माण · कृषि शुल्क ढाँचा · संवहनीय विकास · व्यापार सुगमता · न्यायिक समीक्षा

संवैधानिक व नीतिगत संबंध

  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 253’, ‘note’: ‘अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करने की शक्ति’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 246’, ‘note’: ‘संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण’}
  • {‘article’: ‘अनुच्छेद 301’, ‘note’: ‘भारत के राज्यक्षेत्र में व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता’}

अवधारणा प्रवाह

भारत WTO में व्यापार नीति समीक्षा संपन्न करता है।  →  यह भारत की व्यापार नीतियों की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करता है।  →  भारत एक खुली, पारदर्शी और अनुमान लगाने योग्य व्यापार व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता दोहराता है।  →  टैरिफ सुधार, सीमा शुल्क सरलीकरण और FTA रणनीति वैश्विक एकीकरण को मजबूत करते हैं।  →  घरेलू विकास उद्देश्यों और किसानों की आजीविका की सुरक्षा पर भी जोर दिया जाता है।  →  भारत की आर्थिक सहनशक्ति और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में रचनात्मक योगदान की सराहना होती है।  →  यह वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका और महत्व को स्थापित करता है।

प्रारंभिक अभ्यास प्रश्न

Q1. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह WTO की एक प्रमुख पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली है।
2. इसके तहत केवल विकसित देशों की व्यापार नीतियों का परीक्षण किया जाता है।
3. इसका उद्देश्य WTO के नियमों का पालन मजबूत करना और सदस्यों के बीच रचनात्मक संवाद को आसान बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 2 और 3
  3. केवल 1 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 3 — कथन 1 सही है क्योंकि व्यापार नीति समीक्षा WTO की एक प्रमुख पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली है। कथन 2 गलत है क्योंकि इसके तहत सभी सदस्य देशों की व्यापार नीतियों का समय-समय पर परीक्षण किया जाता है, न कि केवल विकसित देशों का। कथन 3 सही है क्योंकि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, WTO के नियमों का पालन मजबूत करना और सदस्यों के बीच रचनात्मक संवाद को आसान बनाना है।

Q2. भारत की व्यापार नीति समीक्षा के दौरान, वाणिज्य सचिव ने भारत के कृषि शुल्क ढांचे के संबंध में निम्नलिखित में से किस उद्देश्य पर जोर दिया?

  1. वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
  2. लाखों छोटे और कम आय वाले किसानों की आजीविका की रक्षा करना
  3. कृषि उत्पादों के निर्यात को अधिकतम करना
  4. कृषि क्षेत्र में विदेशी निवेश को आकर्षित करना

उत्तर: लाखों छोटे और कम आय वाले किसानों की आजीविका की रक्षा करना — वाणिज्य सचिव ने जोर देकर कहा कि भारत का कृषि शुल्क ढाँचा लाखों छोटे, कम आय वाले और संसाधन-विहीन किसानों की आजीविका की रक्षा करने, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। यह घरेलू विकास उद्देश्यों और किसानों के हितों को प्राथमिकता देता है।

मुख्य अभ्यास प्रश्न

✍ विश्व व्यापार संगठन (WTO) की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) क्या है और यह बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने में कैसे सहायक है? भारत की हालिया आठवीं व्यापार नीति समीक्षा के आलोक में, देश की व्यापार नीतियों के प्रमुख उद्देश्यों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ इसके एकीकरण पर चर्चा कीजिए।

रूपरेखा: प्रश्न के पहले भाग में WTO की व्यापार नीति समीक्षा (TPR) की अवधारणा और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में इसकी भूमिका का वर्णन करें। दूसरे भाग में, भारत की आठवीं TPR के संदर्भ में, भारत की व्यापार नीतियों के मुख्य उद्देश्यों (जैसे किसानों की आजीविका की रक्षा, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, टैरिफ सुधार, FTA रणनीति) और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ इसके बढ़ते एकीकरण पर प्रकाश डालें। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और व्यापार सुगमता जैसे क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का भी उल्लेख करें।

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।

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